The Birth and Death Registration Act, 1969
Chhattisgarh · state statute
Open in Lexace · Ask the AI about this actजन् म और मृत् यु रिजस् टर्ीकरण अिधिनयम, 1969
(1969 का अिधिनयम संख् यांक 18)
[31 मई, 1969]
जन् म और मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के िविनयमन और तत् संब िवषयᲂ का
उपबन् ध करने के िलए
अिधिनयम
भारत गणराज् य के बीसवᱶ वषर् मᱶ संसद् ᳇ारा िनम् निलिखत रूप मᱶ यह अिधिनयिमत हो :—
अध् याय 1
पर्ारिम्भक
1. संिक्षप् त नाम, िवस् तार और पर्ारम् भ—(1) यह अिधिनयम जन् म और मृत् यु रिजस् टर्ीकरण अिधिनयम, 1969 कहा जा सकेगा ।
(2) इसका िवस् तार सम् पूणर् भारत पर है ।
( 3) यह िकसी राज् य मᱶ उस तारीख1 को पर्वृᱫ होगा िजसे केन् दर्ीय सरकार, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा िनयत करे :
प र न् तु िकसी राज् य के िविभन् न भागᲂ के िलए िविभन् न तारीखᱶ िनयत की जा सकᱶगी ।
2. पिरभाषाएं और िनवर्चन—(1) इस अिधिनयम मᱶ, जब तक िक संदभर् से अन् यथा अपेिक्षत न हो,—
(क) “जन् म” से जीिवत-जन् म या मृत-जन् म अिभपर्ेत है ;
(ख) “मृत् यु” से जीिवत-जन् म हो जाने के पश् चात् िकसी भी समय जीवन के सब लक्षणᲂ का स् थायी तौर पर िवलोपन
अिभपर्ेत है ;
(ग) “भर्ूण-मृत् यु” स े ग भ ार्धान के उ त् पाद का , ग भर् च ा हे ि ज त ने स म य क ा ह ो, अ प न ी म ा त ा से पूणर् ि न ष् कासन या
िनष् कषर्ण से पूवर् जीवन के सब लक्षणᲂ का अभाव हो जाना अिभपर्ेत है ;
(घ) “जीिवत-जन् म” से गभार्धान के ऐसे उत् पाद का, गभर् चाहे िजतने समय का हो , अपनी माता स े पूणर् िनष् कासन
या िनष् कषर्ण अिभपर्ेत है, जो ऐस े िनष् कासन या िनष् कषर्ण के पश् चात् श् वास लेता है या जीवन का कोई अन् य लक्षण दिशत
करता है और ऐसे जन् म वाला पर्त् येक उत् पाद जीिवत-जात समझा जाता है ;
1 अिधिनयम िनम् निलिखत क्षेतर्ᲂ मᱶ पर्वृᱫ होगा :—
1-5-1974 से संपूणर् िमजोरम संघ राज् यक्षेतर् मᱶ : देिखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 379, तारीख 22-3-1974 ।
िजला उधमपुर के रामनगर पुिलस स् टेशन की अिधकािरता की सीमाᲐ मᱶ समािवष् ट क्षेतर् ।
िजला बारामुला के कु पवाड़ा पुिलस स् टेशन की अिधकािरता की सीमाᲐ मᱶ समािवष् ट क्षेतर् ।
जम् मू और शर्ीनगर की नगरपािलका सीमाᲐ मᱶ समािवष् ट क्षेतर् ।
अनंतनाग, कठुआ और लेह की शहरी क्षेतर् सिमितयᲂ की सीमाᲐ मᱶ समािवष् ट क्षेतर् ।
1-1-1971 स े स ंपूणर् ग ो व ा, द म ण औ र द ी व संघ राज् यक्षेतर् म ᱶ : देिखए अिधस ूचना स ं० सा०का०िन० 1927, तारीख 21-11-1970, भ ा र त क ा र ा ज प तर्, भ ा ग 2,
अनुभाग 3 (i), पृ० 4276 ।
1-1-1971 स े स ंपूणर् म ि ण पुर स ंघ राज् यक्षेतर् म ᱶ : देिखए अिधस ूचना स ं० सा०का०िन० 2027, तारीख 24-11-1970, भ ा र त क ा र ा ज प तर्, भ ा ग 2 , अ नुभाग 3(i),
पृ० 4623 ।
1-4-1971 से संपूणर् अंडमान और िनकोबार ᳇ीप समूह संघ राज् यक्षेतर् मᱶ : देिखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 106, तारीख 16-1-1971, भारत का राजपतर्, भ ाग 2,
अनुभाग 3 (i), पृ० 284 ।
1-10-1971 स े स ंपूणर् नागाल ैण् ड राज् य म ᱶ : देिखए अिधसू चना स ं० सा०का०िन० 1324, तारीख 30-8-1971, भ ा र त क ा र ा ज प तर्, भ ा ग 2, अ नुभाग 3 (i),
तारीख 11-9-1971, पृ० 3662 ।
1-7-1972 स े अ रु ण ा च ल पर् देश संघ राज् यक्षेतर् म ᱶ : देिखए अिधसूचना स ं० सा०का०िन० 552, त ा र ी ख 11-4-1972, भ ा र त क ा र ा ज प तर्, भ ा ग 2 , अ नुभाग 3 (i),
पृ० 129
4 ।
1-4-1972 से संपूणर् ितर्पुरा राज् य मᱶ : देिखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 202 (अ०), तारीख 17-3-1972, भारत का राजपतर् , असाधारण, भाग 2, अनुभाग 3 (i),
पृ० 505 ।
1-12-1972 से पिश् चमी बंगाल राज् य की बराकप ुर, लाबंग और जलपहाड़ छाविनयᲂ की सीमाᲐ म ᱶ समािवष् ट क्षेतर् मᱶ : द ेिखए अिधसूचना सं० सा०का०िन० 463
(अ०), तारीख 21-11-1972, भारत का राजपतर्, असाधारण, भाग 2, अनुभाग 3 (i), पृ० 21-27 ।
2
(ङ) “िविहत” से इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ ᳇ारा िविहत अिभपर्ेत है ;
(च) िकसी संघ राज् यक्षेतर् के संबंध मᱶ “राज् य सरकार” से उसका पर्शासक अिभपर्ेत है ;
(छ) “मृत-जन् म” से ऐसी भर् ूण-मृत् यु अिभपर्ेत है जहां गभार्धान का उत् पाद कम से कम िविहत गभा र्विध पर्ाप् त कर
चुका है ।
( 2) इस अिधिनयम म ᱶ िकसी ऐसी िविध क े पर्ित, जो िकसी क्ष ेतर् मᱶ पर्वृᱫ नहᱭ ह ै, िनदᱷश का उस क्षेतर् क े संबंध मᱶ यह अथ र्
लगाया जाएगा िक वह उस क्षेतर् मᱶ पर्वृᱫ तत् स् थानी िविध के पर्ित, यिद कोई हो, िनदᱷश है ।
अध् याय 2
रिजस् टर्ीकरण स् थापन
3. भ ा र त क ा म ह ा र ि ज स् टर्ार—(1) केन् दर्ीय सरकार , श ा स क ी य र ा ज प तर् मᱶ अ ि ध सूचना ᳇ारा , ि क स ी व् यिक् त को भारत क े
महारिजस् टर्ार के रूप मᱶ िनयुक् त कर सकेगी ।
(2) केन् दर्ीय सरकार , ऐ से अ न् य अिधकारी भी , ऐ से पदनामᲂ स े, जैसे वह ठीक समझ े, म ह ा र ि ज स् टर्ार के इस अिधिनयम क े
अधीन ऐसे कृत् यᲂ के , िजनका िनवर्हन करने के िलए वह उन् हᱶ समय-समय पर पर्ािधक ृत करे, महारिजस् टर्ार के अधीक्षण और िनद ेशन क े
अधीन िनवर्हन करने के पर्योजन के िलए िनयुक् त कर सकेगी ।
( 3) महारिजस् टर्ार उन राज् यक्षतर्ᲂ मᱶ, ि जन पर इस अिधिनयम का िवस् तार ह ै, जन् म और म ृत् यु के र ि ज स् टर्ीकरण के ब ा रे मᱶ
साधारण िनदेश जारी कर सकेगा और जन् म और म ृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के िवषय के मुख् य रिजस् टर्ारᲂ के िकर्याकलाप के समन् वय और
एकीकरण के िलए कदम उठाएगा और उक् त राज् यक्षेतर्ᲂ मᱶ इस अिधिनयम की काया र्न् वयन िवषयक वािषक िरपोट र् के न् दर्ीय सरकार को
पर्स् तुत करेगा ।
4. म ुख् य रिजस् टर्ार—(1) राज् य सरकार, श ा स क ी य र ा ज प तर् मᱶ अ ि ध सूचना ᳇ारा, ि क स ी र ा ज् य के ि ल ए ए क मुख् य रिजस् टर्ार
िनयुक् त कर सकेगी ।
( 2) राज् य सरकार, ऐसे अन् य अिधकारी भी, ऐ स े पदनामᲂ से, जैसे वह ठीक समझ े, मुख् य रिजस् टर्ार के ऐसे कृत् यᲂ का िजनका
िनवर्हन करने के िलए वह उन् हᱶ समय-समय पर पर्ािधक ृत करे, मुख् य रिजस् टर्ार के अधीक्षण और िनद ेशन क े अधीन िनव र्हन करने के
पर्योजन के िलए, िनयुक् त कर सकेगी ।
( 3) राज् य सरकार ᳇ारा िदए गए िनदेशᲂ के , यिद कोई हᲂ, अध् यधीन रहते हुए मुख् य रिजस् टर्ार िकसी राज् य मᱶ इस अिधिनयम
क े उपबन् धᲂ और तद् धीन बनाए गए िनयमᲂ और िकए गए आदेशᲂ के िनष् पादन के िलए मुख् य कायर्पालक पर्ािधकारी होगा ।
( 4) मुख् य रिजस् टर्ार राज् य मᱶ रिजस् टर्ीकरण के कायर् के समन् वय, एकीकरण और पयर्वेक्षण के िलए समुिचत अनुदेश िनकाल कर
या अन् यथा रिजस् टर्ीकरण की दक्ष पित स ुिनिश् चत करने के िलए कदम उठाएगा तथा उस राज् य मᱶ इस अिधिनयम के कायार्न् वयन के
बारे मᱶ एक िरपोटर्, ऐसी रीित स े और ऐसे अन् तरालᲂ पर, िजन् हᱶ िविहत िकया जाए , धारा 19 की उपधारा ( 2) मᱶ िनिदष् ट सांिख् यकीय
िरपोटर् के साथ तैयार करेगा और राज् य सरकार को पर्स् तुत करेगा ।
5. र ि ज स् टर्ीकरण ख ंड—राज् य सरकार , श ा स क ी य र ा ज प तर् मᱶ अ ि ध सूचना ᳇ारा , र ा ज् य क े भ ी त र के र ा ज् यक्षेतर् को ऐस े
रिजस् टर्ीकरण खण् डᲂ मᱶ, िजन् हᱶ वह ठीक समझ े, िवभक् त कर सकेगी और िविभन् न रिजस् टर्ीकरण खण् डᲂ के िलए िविभन् न िनयम िविहत
कर सकेगी ।
6. िजला रिजस् टर्ार—(1) राज् य सरकार , पर् त् येक राजस् व िजल े के ि ल ए ए क ि ज ल ा र ि ज स् टर्ार और उतन े अितिरक् त िजला
रिजस् टर्ार िनयुक् त कर सकेगी िजतने वह ठीक समझे और जो िजला रिजस् टर्ार के साधारण िनयंतर्ण और िनदेशन क े अध् यधीन रहते हुए,
िजला रिजस् टर्ार के ऐसे कृत् यᲂ का िनवर्हन करᱶगे िजनका िनवर्हन करने के िलए िजला रिजस् टर्ार उन् हᱶ समय-समय पर पर्ािधकृत करे ।
( 2) म ुख् य रिजस् टर्ार के ि न देशन क े अ ध् यधीन रहत े हु ए, िजला रिजस् टर्ार िजल े म ᱶ के ज न् म और म ृत् यु के र ि ज स् टर्ीकरण का
अधीक्षण करेगा तथा इस अिधिनयम के उपबन् धᲂ और मुख् य रिजस् टर्ार ᳇ारा इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ के िलए समय-समय पर िनकाले
गए आदेशᲂ का िनष् पादन िजले मᱶ करने के िलए उᱫरदायी होगा ।
7. र ि ज स् टर्ार—(1) राज् य सरकार नगरपािलका , पंचायत या अन् य स् थानीय पर्ािधकारी की अिधकािरता क े भ ी त र क ा क्षेतर्
समािवष् ट करने वाले पर्त् येक स् थानीय क्षेतर् के िलए या िकसी अन् य क्षेतर् के िलए या उनम ᱶ से दो या अिधक क े समुच् चय के िलए एक
रिजस् टर्ार िनयुक् त कर सकेगी :
प र न् तु राज् य सरकार िकसी नगरपािलका , पंचायत या अन् य स् थानीय पर्ािधकारी की दशा म ᱶ उसके िकसी अिधकारी या , अन् य
कमर्चारी को रिजस् टर्ार के रूप मᱶ ि
नयुक् त कर सकेगी ।
( 2) पर्त् येक रिजस् टर्ार इस पर्योजन के िलए रख े गए रिजस् टर मᱶ धारा 8 या धारा 9 के अधीन उस े दी गई इिᱫला , फीस या
ईनाम के िबना दजर् करेगा तथा अपनी अिधकािरता के भीतर होने वाले पर्त् येक जन् म और पर्त् येक मृत् यु के िवषय मᱶ स् वयं जानकारी पर्ाप् त
3
करने के िलए पूरी सावधानी से कदम उठाएगा तथा रिजस् टर्ीकरण के िलए अपेिक्षत िविशिष् टयᲂ के अिभिनश् चयन और रिजस् टर्ीकरण के
िलए भी कदम उठाएगा ।
( 3) पर्त् येक रिजस् टर्ार का कायार्लय उस स् थानीय क्षेतर् मᱶ होगा िजसके िलए वह िनयुक् त िकया गया हो ।
( 4) पर्त् येक रिजस् टर्ार जन् म और म ृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के पर्योजन के िलए अपन े कायार्लय मᱶ ऐस े िदनᲂ और ऐस े समयᲂ पर ,
िजनका मुख् य रिजस् टर्ार िनदेश दे, हािजर रहेगा और रिजस् टर्ार के कायार्लय के बाहरी ᳇ार पर या उसके पास के िकसी सहजदृश् य स् थान
पर एक बोडर् लगवाएगा िजस पर उसका नाम तथा िजस स् थानीय क्षेतर् के िलए वह िनयुक् त हो उसका जन् म और मृत् यु का रिजस् टर्ार तथा
उसकी हािजरी के िदन और घंटे स् थानीय भाष ा मᱶ िलखे हᲂगे ।
( 5) मुख् य रिजस् टर्ार के पूवर् अनुमोदन से रिजस् टर्ार अपनी अिधकािरता के िविनिदष् ट क्षेतर्ᲂ के सम् बन् ध मᱶ उप-रिजस् टर्ार िनयुक् त
कर सकेगा और उन् हᱶ अपनी कोई या सभी शिक् तयां और कतर्व् य सᲅप सकेगा ।
अध् याय 3
जन् म और मृत् यु का रिजस् टर्ीकरण
8. जन् म और मृत् यु का रिजस् टर्ीकरण कराने के िलए अपेिक्षत व् यिक् त—(1) नीचे िविनिदष् ट व् यिक् तयᲂ का यह कतर्व् य होगा िक
वे धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन राज् य सरकार ᳇ारा िविहत पर्रूपᲂ मᱶ पर्िवष् ट िकए जाने के िलए अपेिक्षत िविभन् न िविशिष् टयᲂ की
इिᱫला अपने सवᲃᱫम ज्ञान और िवश् वास के अनुसार, ऐसे समय के भीतर, जो िविहत िकया जाए, मौिखक या िलिखत रूप मᱶ रिजस् टर्ार
को दᱶ या िदलवाएं,—
(क) खण् ड (ख) से (ङ) तक मᱶ िनिदष् ट स् थान से िभन् न िकसी घर मᱶ, चाहे वह िनवासीय हो या अिनवासीय, हुए जन् म
और मृत् यु की बाबत, उस घर का ऐसा मुिखया, या यिद उस घर मᱶ एक से अिधक गृहिस् थयां िनवास करती हᲂ तो उस गृहस् थी
का ऐसा मुिखया, जो उस घर या ग ृहस् थी ᳇ारा मान् य मुिखया हो और यिद िकसी ऐसी कालाविध के दौरान, िजसमᱶ जन् म या
मृत् यु की िरपोटर् की जानी हो, िकसी समय ऐसा व् यिक् त घर मᱶ उपिस् थत न हो तो मुिखया का वह िनकटतम संबंधी जो घर मᱶ
उपिस् थत हो और ऐसे िकसी व् यिक् त की अनुपिस् थित मᱶ उक् त कालाविध के दौरान उसमᱶ उपिस् थत सबसे बड़ा वयस् थ पुरुष ;
(ख) िकसी अस् पताल, स् वास् थ् य के न् दर्, पर्सूित या पिरचयार् गृह या वैसी ही िकसी स ंस् था मᱶ जन् म या मृत् यु की बाबत,
वहां का भारसाधक िचिकत् सक अिधकारी या उसके ᳇ारा इस िनिमᱫ पर्ािधकृत कोई व् यिक् त ;
(ग) जेल मᱶ जन् म या मृत् यु की बाबत, जेल का भारसाधक जेलर ;
(घ) िकसी चावड़ी , छ तर्, ह ो स् टल, ध म र्शाला, भ ो ज न ा ल य, व ा स ा, प ांथशाला बैरक, ताड़ीखाना या लोक अिभगम
स् थान मᱶ जन् म या मृत् यु की बाबत, वहां का भारसाधक व् यिक् त ;
(ङ) लोक स् थान मᱶ अिभत् यक् त पाए गए िकसी नवजात िशश ु या शव की बाबत , गर्ाम की दशा म ᱶ गर्ामणी या गर्ाम
का अन् य तत् स् थानी अिधकारी और अन् यतर् स् थानीय पुिलस थाने का भारसाधक आिफसर :
परन् तु कोई व् यिक् त जो ऐसे िशशु या शव को पाता है या िजसके भारसाधन मᱶ ऐसा िशशु या शव रखा जाए, वह उस
तथ् य को उस गर्ामणी या पूवᲃक् त अिधकािरयᲂ को सूिचत करेगा ;
(च) िकसी अन् य स् थान मᱶ, ऐसा व् यिक् त जो िविहत िकया जाए ।
( 2) उपधारा ( 1) मᱶ िकसी बात क े होते हुए भी , राज् य सरकार िकसी रिजस् टर्ीकरण खण् ड मᱶ िव᳒मान दशाᲐ को ध् यान मᱶ
रखते हुए, आदेश ᳇ारा, यह अपेिक्षत कर सकेगी िक ऐसी कालाविध के िलए, जो आद ेश मᱶ िविनिदष् ट की जाए, उपधारा ( 1) के खण् ड
(क) मᱶ िनिदष् ट घर म ᱶ जन् म और म ृत् यु के सम् बन् ध मᱶ इिᱫला उस खण् ड मᱶ िविनिदष् ट व् यिक् तयᲂ के बजाय वह व् यिक् त देगा जो राज् य
सरकार ᳇ारा पदनाम से इस िनिमᱫ िविनिदष् ट िकया गया हो ।
9. बागान म ᱶ जन् म और म ृत् यु के सम् बन् ध मᱶ िवशेष उपबन् ध—िकसी बागान म ᱶ जन् म और म ृत् यु की दशा म ᱶ इस बागान का
अधीक्षक धारा 8 मᱶ िनिदष् ट इिᱫला रिजस् टर्ार को देगा या िदलवाएगा :
प र न् तु धारा 8 क ी उ प ध ा र ा (1) के ख ण् ड (क) से ( च ) त क मᱶ ि न ि द ष् ट व् यिक् त उस बागान क े अ ध ी क्ष क क ो आ व श् यक
िविशिष् टयां दᱶगे ।
स् पष् टीकरण—इस धारा मᱶ “बागान” पद से चार हैक् टर से अन् यून िवस् तार की ऐसी भ ूिम अिभपर्ेत है जो चाय, काफी, काली
िमचर्, रबड़, इलायची, िसनकोना या ऐस े अन् य उत् पादᲂ को, जो राज् य सरकार, शासकीय राजपतर् म ᱶ अिधसूचना ᳇ारा िविनिदष् ट करे,
उपजाने के िलए तैयार की जा रही ह ै या िजसमᱶ ऐसी उपज वस् तुत: होती है तथा “बागान का अधीक्षक” पद से वह व् यिक् त अिभपर्ेत है
जो बागान के शर्िमकᲂ या बागान क े कायर् का भार या अधीक्षण रखता हो , चाहे वह पर्बन् धक, अधीक्षक या िकसी अन् य नाम से प ुकार
जाता हो ।
10
. जन् म और म ृत् यु की स ूचना देने और म ृत् यु के कारण को पर्मािणत करन े का कुछ व् यिक् तयᲂ का कत र्व् य—(1) (i) जन् म या
मृत् यु के समय उपिस् थत दाई या िकसी अन् य िचिकत् सीय या स् वास् थ् य पिरचारक का,
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(ii) शवᲂ के व् ययन के िलए अलग कर िदए गए िकसी स् थान के पर्बन् धक या स् वामी या ऐसे स् थान पर उपिस् थत रहने के िलए
स् थानीय पर्ािधकारी ᳇ारा अपेिक्षत िकसी व् यिक् त का, अथवा
(iii) िकसी अन् य व् यिक् त का, िजसे राज् य सरकार उसके पदनाम से इस िनिमᱫ िविनिदष् ट करे,
यह कतर्व् य होगा िक वह पर्त् येक ऐसे जन् म या मृत् यु या दोनᲂ की, िजसमᱶ उसने पिरचयार् की हो या वह उपिस् थत था, या जो ऐसे क्षेतर् मᱶ,
जैसा िविहत िकया जाए, हुई है, सूचना रिजस् टर्ार को इतने समय के भीतर और ऐसी रीित से दे िजसे िविहत िकया जाए ।
( 2) िकसी क्षेतर् मᱶ इस िनिमᱫ पर्ाप् य सुिवधाᲐ को ध् यान मᱶ रखते हुए, राज् य सरकार यह अप ेक्षा कर सकेगी िक मृत् यु के कारण
का पर्माणपतर्, ऐसे व् यिक् त से और ऐसे पर्रूप से, जो िविहत िकया जाए, रिजस् टर्ार ᳇ारा अिभपर्ाप् त िकया जाएगा ।
( 3) जहां राज् य सरकार ने उपधारा (2) के अधीन यह अप ेक्षा की हो िक म ृत् यु के कारण का पर्माणपतर् अिभपर्ाप् त िकया जाए
वहां उस व् यिक् त की मृत् यु की दशा मᱶ, जो अपनी अिन् तम बीमारी के दौरान िकसी िचिकत् सा-व् यवसायी की पिरचयार् मᱶ था, उस व् यिक् त
की मृत् यु के पश् चात् तत् काल वह िचिकत् सा-व् यवसायी कोई फीस िलए िबना ऐसे व् यिक् त को, जो इस अिधिनयम के अधीन िकसी मृत् यु से
संब इ ि ᱫ ल ा देने के ि ल ए अ पेिक्षत हो , म ृत् यु के क ा र ण के ब ा रे म ᱶ, अ प ने स व ᲃ ᱫ म ज्ञ ा न औ र ि व श् वास के अ नुसार कथन करते हु ए,
पर्माणपतर् देगा, और ऐसा व् यिक् त वह पर्माणपतर् पर्ाप् त करेगा और इस अिधिनयम की अप ेक्षानुसार मृत् यु से संब इिᱫला द ेते समय
रिजस्टर्ार को पिरदᱫ करेगा ।
11. इ ि ᱫ ल ा देने व ा ले क ा र ि ज स् टर पर हस् ताक्षर करना —पर्त् येक व् यिक् त, ि ज स ने र ि ज स् टर्ार को इस अिधिनयम क े अ ध ी न
अपेिक्षत कोई इिᱫला मौिखक रूप म ᱶ दी हो, इस िनिमᱫ रखे गए रिजस् टर मᱶ अपना नाम, वणर्न और िनवास-स् थान िलखेगा तथा यिद
वह िलख नहᱭ सकता है तो रिजस् टर मᱶ अपने नाम, वणर्न और िनवास-स् थान के सामने अपना अंगुष् ठ-िचह्न लगाएगा और ऐसी दशा मᱶ
वे िविशिष् टयां रि जस् टर्ार ᳇ारा िलखी जाएंगी ।
12. इिᱫला देने वाले को रिजस् टर्ीकरण की पर्िविष् टयᲂ के उरणᲂ का िदया जाना —जन् म या मृत् यु का रिजस् टर्ीकरण पूणर् होते
ही, रिजस् टर्ार रिजस् टर मᱶ से उस जन् म या मृत् यु से सम् ब िविहत िविशिष् टयᲂ का अपन े हस् ताक्षर सिहत उरण उस व् यिक् त को म ुफ्त
देगा िजसने धारा 8 या धारा 9 क े अधीन इिᱫला दी ।
13. ज न् म और म ृत् यु का िवलिम् बत रिजस् टर्ीकरण—(1) िजस जन् म या मृत् यु की इिᱫला तदथर् ि व ि न ि द ष् ट कालाविध क े अ व स ा न के
पश् चात्, िकन् तु उसके होने के तीस िदन के भीतर, रिजस् टर्ार को दी जाए , वह ऐसी िवलम् ब-फीस, जो िविहत की जाए, िदए जान े पर
रिजस् टर्ीकृत की जाएगी ।
( 2) िजस जन् म या मृत् यु की िवलिम् बत इिᱫला उसके होने के तीस िदन के पश् चात् िकन् तु एक वषर् के भीतर, रिजस् टर्ार को दी
जाए वह िविहत पर्ािधकारी की िलिखत अन ुज्ञा से और िविहत फीस िदए जान े तथा नोटरी पिब् लक या राज् य सरकार ᳇ारा इस िनिमᱫ
पर्ािधकृत िकसी अन् य अिधकारी के समक्ष शपिथत शपथ-पतर् के पेश िकए जाने पर ही रिजस् टर्ीकृत की जाएगी ।
( 3) जो जन् म या मृत् यु होने के एक वषर् के भीतर रिजस् टर्ीकृत नहᱭ की गई हो , वह उस जन् म या मृत् यु की शुता का सत् यापन
करने के पश् चात् पर्थम वगर् मिजस् टर्ेट या पर्ेिसडेन् सी मिजस् टर्ेट ᳇ारा िकए गए आद ेश पर और िविहत फीस िदए जाने पर ही रिजस् टर्ीकृ त
की जाएगी ।
( 4) इस धारा के उपबंध ऐसी िकसी कार र्वाई पर कोई पर्ितकूल पर्भाव न डाल ᱶगे जो िकसी जन् म या मृत् यु का रिजस् टर्ीकरण
उसके िलए, िविनिदष् ट समय के भीतर कराने मᱶ िकसी व् यिक् त के असफल रहने पर उसके िवरु की जा सकती हो और ऐस े िकसी जन् म
या मृत् यु को ऐसी िकसी कारर्वाई के लिम् बत रहने के दौरान रिजस् टर्ीकृत िकया जा सकेगा ।
14. बालक के नाम का रिजस् टर्ीकरण—जहां िकसी बालक का जन् म नाम के िबना रिजस् टर्ीकृत िकया गया हो वहां ऐसे बालक
की माता या िपता या संरक्षक बालक के नाम के सम् बन् ध मᱶ इिᱫला, या तो मौिखक या िलिखत रूप म ᱶ, रिजस् टर्ार को िविहत कालाविध
क े भीतर देगा और तब रिजस् टर्ार ऐसे नाम को रिजस् टर मᱶ दजर् करेगा और पर्िविष् ट को आ᳒क्षिरत करेगा और उस पर तारीख डालेगा ।
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. जन् म और मृत् यु के रिजस् टर मᱶ पर्िविष् ट को ठीक या र करना —यिद रिजस् टर को समाधान पर्दान करन े वाले रूप मᱶ यह
सािबत कर िदया जाए िक इस अिधिनयम के अधीन उसके ᳇ारा रखे गए रिजस् टर मᱶ जन् म या मृत् यु की कोई पर्िविष् ट पर्रूपत: या सारत:
गलत है अथवा कपटपूवर्क या अनुिचत तौर पर की गई है तो वह ऐसे िनयमᲂ के अध् यधीन रहते हुए, जो राज् य सरकार ᳇ारा, ऐसी शतᲄ
की बाबत िजन पर और ऐसी पिरिस् थितयᲂ की बाबत िजनम ᱶ ऐ सी पर्िविष् टयᲂ को ठीक या र िकया जा सक े गा, बनाए जाए ं, मूल
पर्िविष् ट मᱶ कोई पिरवतर्न िकए िबना पाश् वर् मᱶ यथोिचत पर्िविष् ट करके उस पर्िविष् ट की गलती को ठीक कर सकेगा या उस पर्िविष् ट को
र कर सकेगा तथा पाश् वर्-पर्िविष् ट पर अपने हस् ताक्षर करेगा और उसमᱶ ठीक या र करने की तारीख जोड़ देगा ।
अध्
याय 4
अिभलेखᲂ और सांिख् यिकयᲂ को रखना
16. िविहत पर्रूप मᱶ रिजस् टरᲂ का रिजस् टर्ारᲂ ᳇ारा रखा जाना—(1) पर्त् येक रिजस् टर्ार, रिजस् टर्ीकरण क्षेतर् या उसके िकसी भाग
क े िलए, िजसके सम् बन् ध मᱶ वह अिधकािरता का पर्योग करता हो, िविहत पर्रूप मᱶ जन् म और मृत् यु का रिजस् टर रखेगा ।
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( 2) मुख् य रिजस् टर्ार ऐसे पर्रूपᲂ और अनुदेशᲂ के अनुसार, जो समय-समय पर िविहत िकए जाएं, जन् म और मृत् यु की पर्िविष् टयां
करने के िलए पया र्प् त संख् या मᱶ रिजस् टर छपपवाएगा और पर्दाय कराएगा ; तथा ऐस े पर्रूपᲂ की स् थानीय भाषा म ᱶ एक पर्ित पर्त् येक
रिजस् टर्ार के कायार्लय के बा᳭ ᳇ार पर या उसके िनकट िकसी सहजदृश् य स् थान पर लगाई जाएगी ।
17. जन् म और मृत् यु के रिजस् टर की तलाशी—(1) राज् य सरकार ᳇ारा इस िनिमᱫ बनाए गए िकन् हᱭ िनयमᲂ के अध् यधीन रहते
हुए, िजनके अन् तगर्त फीस और डाक-महसूल के संदाय से संब िनयम भी हᱹ, कोई व् यिक् त—
(क) जन् म और मृत् यु के रिजस् टर क ी िकसी पर्िविष् ट की रिजस् टर्ार ᳇ारा तलाश करवा सकेगा ; तथा
(ख) ऐसे रिजस् टर मᱶ से िकसी जन् म या मृत् यु से सम् ब कोई उरण अिभपर्ाप् त कर सकेगा :
प र न् तु िकसी व् यिक् त को िदया गया मृत् यु सम् बन् धी कोई उरण, मृत् यु का रिजस् टर मᱶ यथा पर्िवष् ट मृत् यु के कारणᲂ से संबंिधत
िविशिष् टयᲂ को पर्कट नहᱭ करेगा ।
( 2) इस धारा के अधीन िदए गए सभी उरण भारतीय सा᭯ य अिधिनयम, 1872 (1872 का 1) की धारा 76 के उपबन् धᲂ के
अनुसार, र ि ज स् टर्ार ᳇ारा या िकसी अन् य ऐस े अ ि ध क ा र ी ᳇ ा र ा, ि ज से ऐ से उ र ण देने के ि ल ए र ा ज् य सरकार न े पर्ािधकृत िकया हो ,
पर्मािणत िकए जाएंगे और उस जन् म या मृत् यु को ि जससे वह पर्िविष् ट संब हो, सािबत करने के पर्योजन के िलए सा᭯ य मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे ।
18. रिजस् टर्ीकरण कायार्लयᲂ का िनरीक्षण— रिजस् टर्ीकरण कायार्लयᲂ का िनरीक्षण और उनम ᱶ रखे गए रिजस् टरᲂ की परीक्षा
ऐसी रीित से, और ऐसे पर्ािधकारी ᳇ारा िजसे िजला रिजस् टर्ार िविनिदष् ट करे, िकया जाएगा ।
19. कािलक िववरिणयᲂ का रिजस् टर्ारᲂ ᳇ारा म ुख् य रिजस् टर्ार को स ंकलन के िलए भ ेजा जाना—(1) पर्त् येक रिजस् टर्ार मुख् य
रिजस् टर्ार को या उसक े ᳇ारा िविनिदष् ट िकसी अन् य अिधकारी को ऐस े अन् तरालᲂ पर और ऐस े पर्रूप म ᱶ, जो िविहत िकए जाएं , उस
रिजस् टर्ार ᳇ारा रखे गए रिजस् टर की जन् म और मृत् यु की पर्िविष् टयᲂ के बारे मᱶ एक िववरणी भेजेगा ।
( 2) मृत् यु र िजस् टर्ार, रिजस् टर्ारᲂ ᳇ारा िववरिणयᲂ मᱶ दी गई इिᱫला का स ंकलन कराएगा और वषर् के दौरान रिजस् टर्ीकृत जन् म
और म ृत् यु क ी स ांिख् यकीय िरपोटर् ऐ से अ न् तरालᲂ पर और ऐस े पर् रू प मᱶ, जो िविहत िकए जाए ं, स वर्साधारण की जानकारी क े ि ल ए
पर्कािशत करेगा ।
अध् याय 5
पर्कीणर्
20. भारत स े बाहर नागिरकᲂ के जन् म और म ृत् यु के रिजस् टर्ीकरण के बारे मᱶ िवशेष उपबन् ध—(1) उन िनयमᲂ के अध् यधीन
रहते हु ए, ज ो के न् दर्ीय सरकार ᳇ारा इस िनिमᱫ बनाए जाए ं, म ह ा र ि ज स् टर्ार भारत के नागिरकᲂ के भ ा र त से ब ा ह र ज न् म और म ृत् यु
िवषयक ऐसी इिᱫला रिजस् टर्ीकृत कराएगा जो उस े नागिरकता अिधिनयम, 1955 (1955 का 57) के अधीन बनाए गए और भारतीय
कᲅसल कायार्लयᲂ मᱶ ऐसे नागिरकᲂ के रिजस् टर्ीकरण संबंधी िनयमᲂ के अधीन पर्ाप् त हᲂ और पर्त् येक ऐसा रिजस् टर्ीकरण भी इस अिधिनयम
क े अधीन सम् यक् रूप मᱶ िकया गया समझा जाएगा ।
( 2) भारत से बाहर जन् मे ऐसे बालक की दशा म ᱶ िजसकी बाबत उपधारा ( 1) मᱶ यथा उपिन् ध त इिᱫला पर्ाप् त न हुई हो , यिद
बालक के माता-िपता भारत म ᱶ बसने की द ृिष् ट से भारत वापस आए ं तो व े बालक के भारत पंहुचने की तारीख स े साठ िदन के भीतर
िकसी भी समय बालक का जन् म इस अिधिनयम के अधीन उसी रीित से रिजस् टर्ीकृत करा सकᱶ गे मानो बालक का जन् म भारत मᱶ हुआ था
और धारा 13 के उपबन् ध ऐसे बालक के जन् म को पूवᲃक् त साठ िदन की कालाविध के अवसान के पश् चात् लागू हᲂगे ।
21. जन् म या मृत् यु के सम् बन् ध मᱶ इिᱫला अिभपर्ाप् त करने की रिजस् टर्ार की शिक् त—रिजस् टर्ार िकसी व् यिक् त से, या तो मौिखक
या िलिखत रूप से, यह अपेक्षा कर सकेगा िक िजस पिरक्षेतर् मᱶ वह व् यिक् त िनवास करता है उसमᱶ हुए जन् म या मृत् यु संबंध ी कोई इिᱫला
जो उसे है, वह उसे दे और वह व् यिक् त ऐसी अपेक्षा का अनुपालन करने के िलए आब होगा ।
22. िनदेश देने की शिक् त—क ेन् दर्ीय सरकार िकसी राज् य सरकार को ऐस े िनदेश दे सकेगी जो इस अिधिनयम के या तद ् धीन
ब न ा ए ग ए ि क स ी ि न य म य ा ि क ए ग ए ि क स ी आ देश के उ प ब न् धᲂ म ᱶ स े िकसी का उस राज् य म ᱶ ि न ष् पादन करन े के ि ल ए आ व श् यक
पर्तीत हᲂ ।
23. शािस् तयां—(1) कोई व् यिक् त जो—
(क) धारा 8 और 9 के िकन् हᱭ उपबन् धᲂ के अधीन ऐसी इिᱫला, िजसे देना उसका कतर्व् य है, देने मᱶ युिक् तयुक् त कारण
क े िबना असफल रहेगा ; अथवा
(ख) जन् म और मृत् यु के िकसी रिजस् टर मᱶ िलखे जाने के पर्योजन से कोई ऐसी इिᱫला देगा या िदलवाएगा िजसे वह
जानता है य ा ि व श् वास करता ह ै िक वह उन िविशिष् टयᲂ म ᱶ स े ि क स ी के ब ा रे म ᱶ ि म थ् या ह ै ि ज न् हᱶ जानना और िजनका
रिजस् टर्ीकृत िकया जाना अपेिक्षत है ; अथवा
(ग) धारा 11 ᳇ारा अप ेिक्षत रूप स े रिजस् टर मᱶ अपना नाम , वणर्न और िनवास-स् थान िलखने या अपना अ ंगुष् ठ-
िचह्न लगाने से इन् कार करेगा,
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वह जुमार्ने से, जो पचास हजार रुपए तक का हो सके गा, दण् डनीय होगा ।
( 2) कोई रिजस् टर्ार या उपरिजस् टर्ार जो अपनी अिधकािरता मᱶ होने वाले िकसी जन् म या मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण मᱶ या धारा 19
की उपधारा (1) ᳇ारा अपेिक्षत िववरिणयां भेजने मᱶ उपेक्षा या उससे इन् कार युिक् तयुक् त कारण के िबना करेगा वह जुमार्ने से जो पचास
रुपए तक का हो सके गा, दण् डनीय होगा ।
( 3) कोई िचिकत् सास-व् यवसायी, जो धारा 10 की उपधारा (3) क े अधीन पर्माणपतर् देने मᱶ उपेक्षा या उससे इन् कार करेगा और
कोई व् यिक् त जो ऐसा पर्माणपतर् पिरदᱫ करन े मᱶ उपेक्षा या उसस े इन् कार करेगा वह ज ुमार्ने से, ज ो पचास रुपए तक का हो सक े गा,
दण् डनीय होगा ।
( 4) कोई व् यिक् त, जो इस अिधिनयम के िकसी ऐसे उपबन् ध का, युिक् तयुक् त कारण के िबना, उल् लंघन करेगा, िजसके उल् लंघन
क े िलए इस धारा मᱶ िकसी शािस् त का उपबन् ध नहᱭ है, वह जुमार्ने से, जो दस रुपए तक का हो सके गा, दण् डनीय होगा ।
( 5) दण् ड पर्िकर्या स ंिहता, 1898 (1898 का 5) म ᱶ ि क स ी ब ा त के ह ो ते हु ए भ ी, इस ध ा र ा के अधीन अपराध का िवचारण
मिजस् टर्ेट ᳇ारा संक्षेपत: िकया जाएगा ।
24. अ प र ा ध ᲂ के पर् श म न क ी श ि क् त—(1) ऐसी शतᲄ क े अ ध् यधीन रहत े हु ए, जो िविहत की जाए ं म ुख् य रिजस् टर्ार ᳇ारा,
साधारण या िवश ेष आद ेश ᳇ारा , इस िनिमᱫ पर्ािधक ृ त कोई अिधकारी इस अिधिनयम क े अ ध ी न ि क न् हᱭ दािण् डक काय र्वािहयᲂ के
संिस् थत िकए जाने के पूवर् या पश् चात्, िकसी व् यिक् त से, िजसने इस अिधिनयम के अधीन कोई अपराध िकया हो या िजस पर अपराध
करने का युिक् तयुक् त संदेह हो, उस अपराध के पर्शमन के तौर पर पचास रुपए से अनिधक धनरािश पर्ितगृहीत कर सकेगा ।
( 2) ऐसी धनरािश द े देने पर वह व् यिक् त उन् मोिचत कर िदया जाएगा और ऐस े अपराध की बाबत उसक े िवरु कोई आग े
कायर्वाही नहᱭ की जाएगी ।
25. अिभयोजन के िलए मंजूरी—इस अिधिनयम के अधीन दण् डनीय िकसी अपराध के िलए कोई अिभयोजन, मुख् य रिजस् टर्ार
᳇ारा, साधारण या िवशेष आदेश ᳇ारा, इस िनिमᱫ पर्ािधकृत अिधकारी ᳇ारा ही संिस् थत िकया जाएगा, अन् यथा नहᱭ ।
26. रिजस् टर्ारᲂ और उप-रिजस् टर्ारᲂ का लोक-सेवक समझा जाना—सभी रिजस् टर्ार और उप-रिजस् टर्ार, जब वे इस अिधिनयम
या तद् धीन बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए िकसी आद ेश के उपबंधᲂ के अनुसरण मᱶ कायर् कर रहे हᲂ या कायर् करते तात् पियत हᲂ,
भारतीय दण् ड संिहता (1860 का 45) की धारा 21 के अथर् मᱶ लोक सेवक समझे जाएंगे ।
27. शिक् तयᲂ का पर्त् यायोजन—राज् य सरकार, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, यह िनदेश दे सके गी िक इस अिधिनयम
या तद् धीन बनाए गए िनयमᲂ क े अधीन उसके ᳇ारा पर्योक् तव् य कोई शिक् त (जो धारा 30 के अधीन िनयम बनान े की शिक् त से िभन् न
हो) ऐसी शतᲄ के , यिद कोई हᲂ , जो िनद ेश मᱶ िविनिदष् ट की जाएं, अध् यधीन रहते हुए, राज् य सरकार के अधीनस् थ ऐसे अिधकारी या
पर्ािधकारी ᳇ारा भी, जो िनदेश मᱶ िविनिदष् ट िकया जाए, पर्योक् तव् य हᲂगी ।
28. सद् भावपूवर्क की गई कारर्वाई के िलए पिरतर्ाण—(1) इस अिधिनयम या तद ् धीन बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए
िकस आदेश के अनुसरण मᱶ सद् भावपूवर्क की गई या की जान े के िलए आशियत िकसी बात के िलए कोई भी वाद , अिभयोजन या अन् य
िविधक कायर्वाही सरकार के , महारिजस् टर्ार के , िकसी रिजस् टर्ार के , या िकसी अन् य व् यिक् त के , जो इस अिधिनयम क े अधीन िकसी
व् यिक् त का पर्योग या िकसी कतर्व् य का पालन कर रहा हो, िवरु न होगी ।
( 2) कोई भी वाद या अन् य िविधक कायर्वाही इस अिधिनयम या तद् धीन बनाए गए िकसी िनयम या िकए गए िकसी आदेश के
अनुसरण म ᱶ सद् भावपूवर्क की गई या की जान े के िलए आशियत िकसी बात क े होते हुए या होन े से संभाव् य िकसी नुकसान के िलए
सरकार के िवरु नहᱭ होगी ।
29. इस अिधिनयम का 1886 के अिधिनयम संख् यांक 6 के अल् पीकरण मᱶ न होना—इस अिधिनयम की िकसी बात का यह अथर्
नहᱭ लगाया जाएगा िक वह जन् म, मृत् यु और िववाह रिजस् टर्ीकरण अिधिनयम, 1886 के उपबन् धᲂ के अल् पीकरण मᱶ है ।
30. िनयम बनाने की शिक् त—(1) केन् दर्ीय सरकार क े अनुमोदन से राज् य सरकार इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ को कायार्िन् वत
करने के िलए िनयम शासकीय राजपतर् मᱶ, अिधसूचना ᳇ारा, बना सकेगी ।
( 2) िविशष् टत: और पूवर्गामी उपबन् ध की व् यापकता पर पर्ितकूल पर्भाव डाले िबना, ऐसे िनयम िनम् निलिखत क े िलए उपबन् ध
कर सकᱶ गे—
(क) इस अिधिनयम के अधीन रखे जाने के िलए अपेिक्षत जन् म और मृत् यु के रिजस् टरᲂ के पर्रूप ;
(ख) वह कालाविध िजसक े भीतर तथा वह पर्रूप और रीित िजसम ᱶ रिजस् टर्ार को धारा 8 के अधीन इिᱫला दी
जानी चािहए ;
(ग) वह कालाविध िजसके भीतर और वह रीित िजसस े धारा 10 की उपधारा ( 1) के अधीन जन् म और म ृत् यु की
सूचना दी जाएगी ;
(घ) वह व् यिक् त िजससे और वह पर्रूप िजसमᱶ मृत् यु के कारण का पर्म ाणपतर् अिभपर्ाप् त िकया जाएगा ;
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(ङ) वे िविशिष् टयां िजनका उरण धारा 12 के अधीन िदया जा सकेगा ;
(च) वह पर्ािधकारी जो धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन जन् म या मृत् यु के रिजस् टर्ीकरण की अनुज्ञा दे सकेगा ;
(छ) धारा 13 के अधीन िकए गए रिजस् टर्ीकरण के िलए संदेय फीसᱶ ;
(ज) धारा 4 की उपधारा (4) के अधीन मुख् य रिजस् टर्ार ᳇ारा िरपोटᲄ का पर्स् तुत िकया जाना ;
(झ) जन् म और मृत् यु के रिजस् टरᲂ की तलाशी और ऐसी तलाशी क े िलए तथा रिजस् टरᲂ मᱶ से उरण िदए जान े के
िलए फीसᱶ ;
(ञ) वे पर्रूप िजनम ᱶ और व े अन् तराल िजन पर िववरिणया ं और सा ंिख् यकीय िरपोटर् धारा 19 के अधीन दी और
पर्कािशत की जा
एगी ;
(ट) रिजस् टर्ारᲂ ᳇ारा रख े ज ा ने व ा ले र ि ज स् टरᲂ और अन् य अिभल ेखᲂ की अिभरक्षा , उ न क ा पेश िकया जाना और
अन् तरण ;
(ठ) जन् म और मृत् यु के रिजस् टर मᱶ गलितयᲂ को ठीक करना और उनकी पर्िविष् टयᲂ को र करना ;
(ड) कोई अन् य िवषय जो िविहत िकया जाना है या िकया जाए ।
1[(3) इस अिधिनयम के अधीन बनाया गया पर्त् येक िनयम, बनाए जाने के पश् चात् यथाशीघर्, राज् य िवधान-मण् डल के समक्ष
रखा जाएगा ।]
3 1 . िनरसन और व् यावृिᱫ—(1) धारा 29 क े उपबन् धᲂ के अध् यधीन रहते हुए यह ह ै िक िकसी राज् य या उसके भाग मᱶ पर्वृᱫ
िविध का उतना अंश, िजतने का संबंध इस अिधिनयम के अन् तगर्त िवषयᲂ से है, उस राज् य या भाग मᱶ इस अिधिनयम के पर्वृᱫ होने के
समय से, यथािस् थित, उस राज् य या भाग मᱶ िनरिसत हो जाएगा ।
( 2) ऐसे िनरसन के होते हुए भी , ऐसी िकसी िविध के अधीन की गई कोई बात या कार र्वाई (िजसके अन् तगर्त िनकाला गया
कोई
अनुदेश या िनदेश, बनाया गया कोई िविनयम या िनयम या िकया गया कोई आद ेश भी है), जहां तक ऐसी बात या कार र्वाई इस
अिधिनयम के उपबन् धᲂ से असंगत न हो , पूवᲃक् त उपबन् धᲂ के अधीन ऐसे की गई समझी जाएगी मानो व े उस समय पर्व ृᱫ थे जब वह
बात या कारर्वाई की गई थी और तद्न ुसार तब तक पर्व ृᱫ बनी रह ेगी जब तक वह इस अिधिनयम क े अधीन की गई िकसी बात या
कारर्वाई ᳇ारा अितिष् ठत न कर दी जाए ।
32. किठनाई द ूर करने की शिक् त—यिद इस अिधिनयम के उपबन् धᲂ को िकसी राज् य मᱶ पर्भावशील करने मᱶ कोई किठनाई ,
उनके िकसी क्ष ेतर् मᱶ लागू करने मᱶ उद्भूत होती ह ै तो केन् दर्ीय सरकार के अनुमोदन से, आदेश ᳇ारा, राज् य सरकार ऐस े उपबन् ध कर
सकेगी या ऐस े िनदेश दे स क े गी जो इस अिधिनयम क े उपबन् धᲂ से असंगत न हᲂ और जो उस किठनाई को द ूर करने के िलए, राज् य
सरकार को आवश् यक या समीचीन पर्तीत हᲂ :
प र न् तु इस धारा के अधीन कोई आदेश िकसी राज् य के िकसी क्षेतर् के सम् बन् ध मᱶ उस तारीख को, जब यह अिधिनयम उस क्षेतर् मᱶ
पर्वृᱫ हो, दो वषर् के अवसान के पश् चात् नहᱭ िकया जाएगा ।
______
1 1986 क े अिधिनयम सं० 4 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (15-5-1986 से) अंत:स् थािपत ।
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