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The Registration ACT 1908

Bihar · state statute
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रजिस्ट्रीकरण अजिजियम, 1908 
(1908 का अजिजियम संखयांक 16)1 
[18 दिस्ट््बर, 1908] 
िस्ट्तावेिों क े  रजिस्ट्रीकरण से स्बजधित अजिजियजमजतयों का 
समेकि करिे क े  जिए 
अजिजियम 
यह समीचीि है दक िस्ट्तावेिों क े  रजिस्ट्रीकरण से संबंजित अजिजियजमजतयों का समेकि दकया िाए ; अतः एति  द्वारा 
जि् िजिजित रूप में यह अजिजियजमत दकया िाता हैः — 
भाग 1 
प्रारज्भक 
1. संजि प् त िाम, जवस्ट्तार और प्रार्भ—(1) यह अजिजियम 2*** रजिस्ट्रीकरण अजिजियम, 1908 कहा िा सक े गा । 
3[(2) इसका जवस्ट्तार 4[***] स्पूणण भारत पर है  : 
परधतु राज्य सरकार दकधहीं जििों या  िेश क े  दकधहीं भी भू-भागों को इसक े  प्रवतणि से अपवर्िणत कर सक े गी । 
(3) यह सि  1908 की ििवरी क े  प्रथम दिि को प्रवृत्त होगा । 
2. पररभाषाएं —इस अजिजियम में, िब तक दक जवषय या संिभण में कोई बात जवरुद्ध ि हो, — 
(1) “अजभवणणि ” से वर्णणत  व्यज‍ त का जिवास -स्ट्थाि और वृजद्ध, व्यापार, पंज‍ त तथा उपाजि (यदि कोई हो) और 
यदि वह 5[भारतीय ] है तो 6*** उसक े  जपता का िाम या िहां दक वह प्राजयक रूप से अपिी माता क े  पुत्र क े  रूप में वर्णणत 
दकया िाता है वहां उसकी माता का िाम, अजभप्रेत है; 
(2) “पुस्ट्तक” क े  अधतगणत पुस्ट्तक का प्रभाग आता है और दकसी भी संखया में ऐसे पन्ने भी आते हैं िो इस िृज‍ ि से 
एक साथ संस ‍ त हों दक उिसे पुस्ट्तक या पुस्ट्तक का प्रभाग बिाया िाए; 
(3) “जििा” और “उपजििा” से क्रमशः इस अजिजियम क े  अिीि बिाए गए जििा और उपजििा अजभप्रेत हैं; 
(4) “जििा धयायािय” क े  अधतगणत अपिी मामूिी प्रारज्भक जसजवि अजिकाररता में काम करता हुआ उ च् च 
धयायािय आता है; 
(5) “पृ‍ ‍ांकि” तथा “पृ‍ ‍ांदकत” क े  अधतगणत इस अजिजियम क े  अिीि रजिस्ट्रीकरण क े  जिए जिजवित्त दकसी 
िस्ट्तावेि की उपररका या आवरक-पची पर रजिस्ट्रीकताण आदिसर द्वारा की गई जिजित प्रजवज‍ ि आती है और “पृष्ठाक ं ि” तथा 
“पृ‍ ‍ांदकत” ऐसी प्रजवज‍ ि को िागू होते हैं; 
                                                 
1 यह अजिजियम 1942 क े  पज‍ चमी बंगाि अजिजियम सं ० 5 और 1950 क े  पजिमी बंगाि अजिजियम सं० 29 तथा 1951 क े  पजिमी बंगाि अजिजियम सं० 31 द्वारा 
बंगाि को; 1929 क े  मु्बई अजिजियम सं ० 5, 1930 क े  मु्बई अजिजियम सं० 17, 1933 क े  मु्बई अजिजियम सं० 18, 1938 क े  मु्बई अजिजियम सं० 24, 1939 क े  
मु्बई अजिजियम सं० 14, 1942 क े  मु्बई अजिजियम सं० 10, 1960 क े  मु् बई अजिजियम 6, 1960 क े  महाराष्ट्र अजिजियम सं० 19 और 1971 क े  महाराष्ट्र अजिजियम 
सं ० 20 द्वारा महाराष्ट्र को; 1937 क े  मध्य प्राधत अजिजियम सं० 1 और 1955 क े  मध्य प्रिेश अजिजियम सं० 8 द्वारा मध्य प्राधत को; 1936 क े  मद्रास अजिजियम सं० 3 
और 1952 क े  मद्रास अजिजियम सं० 17 द्वारा मद्रास और आंध्र प्रिेश को; 1933 क े  उडीसा अजिजियम सं० 3 द्वारा उडीसा को ; 1941 क े  पंिाब अजिजियम सं० 8 और 
1961 क े  पंिाब अजिजियम सं० 19 द्वारा पंिाब को; 1947 क े  जबहार अजिजियम सं० 14 और 1952 क े  जबहार अजिजियम सं० 24 द्वारा जबहार को; 1968 क े  क े रि 
अजिजियम सं० 7 द्वारा क े रि को; 1969 क े  जहमाचि प्रिेश अजिजियम सं० 2 द्वारा जहमाचि प्रिेश को; 1970 क े  पांजिचेरी अजिजियम सं० 17 द्वारा पांजिचेरी को; 
1971 क े  उत्तर प्रिेश अजिजियम सं० 14, 1975 क े  उत्तर प्रिेश अजिजियम सं० 48 और 1976 क े  उत्तर प्रिेश अजिजियम सं० 57 द्वारा उत्तर प्रिेश को; 1973 क े  
हररयाणा अजिजियम सं ० 36 द्वारा हररयाणा को ; 1974 क े  महाराष्ट्र अजिजियम सं० 29 और 1975 क े  महाराष्ट्र अजिजियम सं० 49 द्वारा महाराष्ट्र को; 1974 क े  
तजमििािु अजिजियम सं० 31 द्वारा तजमििािु को; 1976 क े  उडीसा अजिजियम सं ० 11 द्वारा उडीसा को और 1978 में पजिमी बंगाि अजिजियम सं ० 17 द्वारा 
पजिमी बंगाि को सं शोजित रूप में िागू दकया गया ।  
इस अजिजियम का जवस्ट्तारण जि् िजिजित पर दकया गया — 
1963 क े  जवजियम सं० 6 की िारा 2 और अिुसूची 1 द्वारा िािरा और िागर हवेिी पर; 1963 क े  जवजियम सं० 11 की िारा 3 और अिुसूची द्वारा गोवा, 
िमण और िीव पर ; 1965 क े  जवजियम सं० 8 की िारा 3 और अिुसूची द्वारा स्पूणण ििद्वीप संघ राज्यिेत्र पर; और  
1968 क े  जवजियम सं० 26 की िारा 3 और अिुसूची द्वारा पांजिचेरी पर ।   
2 1969 क े  अजिजियम सं० 45 की िारा 2 द्वारा “भारतीय ” शब्ि का िोप दकया गया । 
3 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा उपिारा (2) क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
4 2019 क े  अजिजियम सं. 34 की िारा 95 और पांचवीं अिुसूची द्वारा (31-10-2019 से) ” ि्मू-क‍मीर राज्य क े  जसवाय ” शब्िों का िोप दकया गया।  
5 जवजि अिुक ू िि आिेश, 1950 द्वारा “भारत क े  मूि जिवासी” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
6 1956 क े  अजिजियम सं० 17 की िारा 2 द्वारा “उसकी िाजत (यदि कोई हो) और ” शब्िों का िोप दकया गया ।  
 2 
(6) “स्ट्थावर स्पजत्त” क े  अधतगणत भूजम, जिमाणण, आिुवंजशक भत्ते, मागण क े , प्रकाश क े , पारघाि क े  मीििेत्र के 
अजिकार या भूजम से उद्भूत होिे वािे कोई भी अधय िायिे और भू -बद्ध वस्ट्तुएं या भू-बद्ध दकसी भी  वस्ट्तु से स्ट्थायी रूप से 
िकडी वस्ट्तुएं आती हैं दकधतु िडा का ‍ ‍, उगती िसिें और घास इसक े  अधतगणत िहीं आतीं ; 
1[(6क) “भारत ” से ि्मू -क‍मीर राज्य का अपविणि करक े  भारत का राज्यिेत्र अजभप्रेत है;] 
(7) “पट्टे” क े  अधतगणत प्रजतिेि, क ृ जष या अजिभोग करिे का वचि और पट्टे पर िेिे का करार आते हैं; 
(8) “अप्राप् तवय” से ऐसा व्य ज‍ त अजभप्रेत है, िो उस स्ट्वीय जवजि क े  अिुसार, जिसक े  वह अध्यिीि है, प्राप् तवय 
िहीं हुआ है; 
(9) “िंगम स्पजत्त” क े  अधतगणत िडा का‍ ‍, उगती िसिें और घास, पेडों क े  िि त था पेडों क े  रस और स्ट्थावर 
स्पजत्त क े  जसवाय हर अधय प्रकार की स्पजत्त आती है; तथा 
(10) “प्रजतजिजि” क े  अधतगणत अप्राप् तवय का संरिक और पागि या िड का सुपुिणिार या अधय जवजिक प्र बधिक 
आते हैं ।  
2*    *    *   * 
भाग 2 
रजिस्ट्रीकरण-स्ट्थापि क े  जवषय में 
 3. रजिस्ट्रीकरण महाजिरीिक—(1) राज्य सरकार अपिे अध्यिीि राज्यिे त्रों क े  जिए एक आदिसर को रजिस्ट्रीकरण 
महाजिरीिक जियु‍ त करेगीः  
 परधतु राज्य सरकार ऐसी जियु ज‍ त करिे क े  बिाय यह जििेश िे सक े गी दक एतजस्ट्मि  प‍ चात  महाजिरीिक को प्रित्त सब 
शज‍ तयों का और  उस पर अजिरोजपत सब कतणव्यों का या उिमें से दकधहीं का भी प्रयोग या पािि ऐसे आदिसर या आदिसरों द्वा रा ऐसी 
स्ट्थािीय सीमाओं क े  भीतर दकया िाएगा, िैसे या िैसी  राज्य सरकार इस जिजमत्त जियु‍ त करे ।  
 (2) कोई भी महाजिरीिक, साथ -साथ सरकार क े  अिीि कोई अधय पि िारण क र सक े गा ।  
 4. [ससंि का शािा महाजिरीिक  ।]—भारत सरकार (भारतीय जवजि अिुक ू िि) आिेश, 1937 द्वारा जिरजसत । 
 5. जििे और उपजििे—(1) राज्य सरकार इस अजिजियम क े  प्र योििों क े  जिए जििे और उपजििे बिाएगी और ऐसे जििों 
और उपजििों की सीमाओं को जवजहत करे गी और उिमें पररवतण ि भी कर सक े गी ।  
 (2) इस िारा क े  अिीि बिाए गए जििे और उपजििे, उिकी सीमाओं क े  सजहत, और ऐसी सीमाओं का हर पररवतणि, 
शासकीय राि पत्र में अजिसूजचत दकए िाएंगे । 
 (3) हर ऐसा पररवतणि अजिसूचिा की तारीि क े  प ‍ चात  ऐसे दिि को, िैसा उसमें वर्णणत हो, प्रभावी होगा ।  
 6. रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार—राज्य सरकार ऐसे व्य ज‍ तयों को, चाहे वे िोक आदिसर हों या िहीं, िैसे वह ‍ीक समझे,  
पूवणकजथत रूप में ब िाए गए जवजभध ि जििों क े  रजिस्ट्रार और जवजभध ि उपजििों क े  उपर जिस्ट्रार क्रमशः जियु‍ त कर सक े गी ।  
 3*   *   *   *   * 
 7. रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार क े  कायाणिय—(1) राज्य सरकार हर जििे में एक कायाणिय की स्ट्थापिा करेगी जिसका िाम 
र जिस्ट्रार का कायाणिय होगा और हर उपजििे में कायाणिय या कायाणियों की स्ट्थापिा करेगी जिसका िाम उपरजिस्ट्रार का कायाणिय या 
जििक े  िाम संयु‍ त उपरजिस्ट्रार क े  कायाणिय होंगे । 
 (2) राज्य सरकार रजिस्ट्रार क े  दकसी भी कायाणिय क े  साथ ऐसे रजिस्ट्रार क े  अिीिस्ट्थ उपरजिस्ट्रार क े  दकसी भी कायाणिय का 
समामेिि कर सक े गी और दकसी भी ऐसे उपरजिस्ट्रार को, जिसक े  कायाणिय का ऐसे समामेिि दकया गया है, अपिी श ज‍ तयों और 
कतणव्यों क े  अजतरर‍ त उस रजिस्ट्रार की, जिसक े  वह अिीिस्ट्थ है, सब शज‍ तयों और कतणव्यों का या उिमें से दकसी का  भी प्रयोग या 
पािि करिे को प्राजिक ृ त कर सक े गीः 
 परधतु ऐसा कोई भी प्राजिकरण दकसी उपरजिस्ट् रार को इस अजिजियम क े  अिीि स्ट्वयं अपिे द्वारा पाररत दकसी आिेश क े  
जवरुद्ध अपीि सुििे क े  जिए समथण िहीं करेगा । 
                                                 
1 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 
2 जवजि अिुक ू िि आिेश, 1950 द्वारा िण्ि (11) अधतःस्ट्थाजपत दकया गया जिसका 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 और अिुसूची द्वारा िोप दकया गया । 
3 1914 क े  अजिजियम सं० 4 की िारा 2 तथा अिुसूची, भाग 1 द्वारा िारा 6 में परधतुक अधतःस्ट्थाजपत दकया गया जिसका भारत शासि (भारतीय जवजि अिुक ू िि) 
 आिेश, 1937 द्वारा जिरसि दकया गया ।  
 3 
 8. रजि स्ट्रीकरण कायाणियों क े  जिरीिक—(1) राज्य सरकार ऐसे आदिसरों को भी जियु ‍ त कर सक े गी िो रजि स्ट्रीकरण 
कायाणियों क े  जिरीिक कहिाएंगे और ऐसे आदिसरों क े  कतणव्यों को जवजहत कर सक े गी ।  
 (2) हर ऐसा जिरीिक महा जिरीिक क े  अिीिस्ट्थ होगा । 
 9. [सैजिक छावजियों को उपजििों या जििों में घोजषत दकया िा सक े गा  ।]—जिरसि तथा संशोिि अजिजियम, 1927 (1927 
का 10) की िारा 3 तथा अिुसूची 2 द्वारा जिरजसत । 
 10. रजिस्ट्रार की अिुपजस्ट्थजत या पि में ररज‍ त—(1) िबदक कोई रजिस्ट्रार, िो उस जििे का रजिस्ट्रार िहीं है जिसक े  
अधतगणत कोई प्रेजसिेधसी िगर है, अपिे जििे में कतणव्यारूढ़ होिे से अधयथा अिुपजस्ट्थत हो या िबदक उसका पि अस्ट्थायी रू प से रर ‍ त 
हो, तब कोई भी व्य ज‍ त, जिसे महाजिरीिक इस जिजमत्त जियु ‍ त करे, या ऐसी जियु ज‍ त क े  अभाव में उस जििा धयाया िय का 
धयायािीश, जिसकी अजिकाररता की स्ट्थािीय सीमाओं क े  अधिर रजिस्ट्रार का कायाणिय जस्ट्थत हो, ऐसी अिुपजस्ट्थजत क े  िौराि या तब 
तक, िब तक राज्य सरकार रर ‍ त स्ट्थाि की पूर्तण िहीं कर िेती, रजिस्ट्रार होगा । 
 (2) िबदक उस जििे का रजिस्ट्रार, जिसक े  अधत गणत कोई प्रेजसिेधसी िगर है, अपिे जििे में कतणव्या रूढ़ होिे से अधयथा 
अिुपजस्ट्थत हो या िबदक उसका पि अस्ट्थायी रूप से रर ‍ त हो, तब कोई भी व्यज‍ त, जिसे महाजिरीिक इस जिजमत्त जियु‍ त करे, ऐसी 
अिुपजस्ट्थजत क े  िौराि या तब तक, िब तक दक राज्य सरकार रर‍ त स्ट्थाि की पूर्तण िहीं कर िेती, रजिस्ट्रार होगा । 
 11. अपिे जििे में कतणव्यारूढ़ होिे क े  कारण रजिस्ट्रार की अिुपजस्ट्थजत—िबदक कोई रजिस्ट्रार अपिे जििे में कतणव्यारूढ़ होिे 
क े  कारण अपिे कायाणिय से  अिुपजस्ट्थत हो तब वह अपिे जििे में क े  दकसी भी उपरजिस्ट्रार या अधय व्यज‍ त को ऐसी अिुपजस्ट्थजत क े  
िौराि रजिस्ट्रार क े  उि कतणव्यों क े  जसवाय, िो िारा 68 और िारा 72 में वर्णणत हैं, सब कतणव्यों का पािि करिे क े  जिए  जियु‍ त                 
कर सक े गा ।  
 12. उपरजिस्ट्रार की अिुपजस्ट्थजत या उसक े  पि में ररज‍ त—िबदक कोई उपरजिस्ट्रार अिुपजस्ट्थत हो या िबदक उसका पि 
अस्ट्थायी रूप से रर‍ त हो, तब कोई भी व्यज‍ त, जिसे उस जििे का रजिस्ट्रार इस जिजमत्त जियु‍ त करे, ऐसी अिुपजस्ट्थजत क े  िौराि या 
तब तक, िब तक 1[रर ‍ त स्ट्थाि की पूर्तण िहीं हो िाती,] उपरजिस्ट्रार होगा । 
 13. िारा 10, 11 और 12 क े  अिीि जियुज‍ तयों की राज्य सरकार को ररपोिण —(1) 2*** िारा 10, 11 या िारा 12 क े  अिीि 
की गई सब जियु ज‍ तयों की ररपोिण महाजिरीिक द्वारा राज्य सरकार को िी िाएगी ।  
 (2) ऐसी ररपोिण या तो जवशेष होगी या सािारण, िैसी भी राज्य सरकार जिर्िण ‍ ि करे ।  
 3*   *   *   *   * 
 14. रजिस्ट्रीकरण करिे वािे कायाणिय क े  जिए स्ट्थापि—4*    *   * 
 (2) राज्य सरकार इस अजिजियम क े  अिीि जवजभ ध ि कायाणियों क े  जिए उजचत स्ट्थापि अिुज्ञात कर सक े गी । 
 15. रजिस्ट्रीकरण करिे वािे आदिसरों की मुद्रा—जवजभध ि रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार ऐसी मुद्रा का उपयोग करेंगे जिस पर 
अंग्रेिी में और ऐसी अधय भाषा में, जिसे राज्य सरकार जिर्िण ‍ ि करे, जि ् िजिजित उत्कीणण िेि होगा —“......क े  रजिस्ट्रार की (या 
उपरजिस्ट्रार की) मुद्रा” । 
 16. रजिस्ट्रीकरण पुस्ट्तक ें  और अज‍ िसह पेिी —(1) राज्य सरकार हर रजिस्ट्रीकरण आदि सर क े  कायाणिय क े  जिए इस 
अजिजियम क े  प्रयोििों क े  जिए आव‍यक पुस्ट्तक ें  उपबजधित करेगी । 
 (2) ऐसी उपबजधित पुस्ट्तकों में वे प्ररूप अधतर्वण‍ ि होंगे िो महाजिरीिक िे राज्य सरकार की मंिूरी से समय -समय पर 
जवजहत दकए हों, और ऐसी पुस्ट्तकों क े  पृ‍ ‍ मुदद्रत रूप में  क्रम से संखयांदकत हों गे और हर एक पुस्ट्तक क े  पध िों की संखया, उस आदिसर 
द्वारा जिसिे ऐसी पुस्ट्तक ें  िी हैं, मुि पृ‍ ‍ पर प्रमाजणत की िाएंगी ।  
 (3) राज्य सरकार हर रजिस्ट्रार क े  कायाणिय को अज‍ िसह पे िी िेगी और हर एक जििे में उि अजभिेिों की सुरजित अजभरिा  
क े  जिए उपयु‍ त उपबधि करेगी िो उस जििे में िस्ट्तावेिों क े रजिस्ट्रीकरण से संस ‍ त हैं । 
 5[16क. पुस्ट्तकों का क्प्यूिर फ्िाजपयों, जिस्ट्क े िों आदि में रिा िािा—(1) िारा 16 में दकसी बात क े  होते हुए भी, उस िारा 
की उपिारा ( 1) क े  अिीि उपबंजित पुस्ट्तक ें  क्प्यूिर फ्िाजपयों या जिस्ट्क े िों या दकसी अधय इिै‍राजिक रूप में भी, उस रीजत से और 
ऐसे रिोपायों क े  अिीि रहते हुए रिी िा सक ें गी, िो राज्य सरकार की मंिूरी से महाजिरीिक द्वारा जवजहत दकए िाएं ।  
                                                 
1 1914 क े  अजिजियम सं० 4 की िारा 2 तथा अिुसू ची, भाग 1 द्वारा “स्ट्थािीय सरकार द्वारा स्ट्थाि की पूर्तण” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत ।  
2 1914 क े  अजिजियम सं० 4 की िारा 2 तथा अिुसूची, भाग 1 द्वारा “िारा 6 क े  अिीि महाजिरीिक द्वारा की गई सभी जियुजियों और” शब्ि और अंक अंतःस्ट्थाजपत 
 दकए गए जििका भारत शासि (भा रतीय जवजि अिुक ू िि) आिेश, 1937  द्वारा जिरसि दकया गया ।  
3 भारत शासि (भारतीय जवजि अिुक ू िि) आिेश, 1937  द्वारा उपिारा (3) जिरजसत ।  
4 जवजि अिुक ू िि आिेश, 1937  द्वारा उपिारा (1) जिरजसत ।  
5 2001 क े  अजिजियम सं 48 की िारा 2 द्वारा (24-9-2001 से) अंतःस्ट्थाजपत । 
 4 
(2) इस अजिजियम में या तत्समय प्रवृत्त दकसी अधय जवजि में दकसी बात क े  हो ते हुए भी, उपिारा ( 1) क े  अिीि रिी गई 
पुस्ट्तकों से रजिस्ट्रीकरण आदिसर द्वारा अपिे हस्ट्तािर से और मुद्रा क े  अिीि िी गई, प्रजत या उद्धरण, िारा 57 की उपिारा  ( 5) के 
प्रयोििों क े  जिए उस िारा क े  अिीि िी गई प्रजत समझी िाएगी ।]  
भाग 3 
र जिस्ट्रीकरणीय िस्ट्तावेिों क े  जवषय में 
17. िस्ट्तावेिें जििका रजिस्ट्रीकरण अजिवायण है—(1) जि् िजिजित िस्ट्तावेिों की रजिस्ट्री करिी होगी यदि वह स्पजत्त, 
जिससे उि का संबंि है, ऐसे जििे में जस्ट्थत है, जिसमें और यदि वे िस्ट्तावेिें उस तारीि को या क े  प‍ चात  जि‍पादित हुई हैं, जि सको, 
1864 का ऐ ‍ि संखयांक 16 या इंजियि रजिस्ट्रेशि ऐ‍ि, 1866 (1866 का 20) या इजण्ियि रजिस्ट्रेशि ऐ‍ि, 1871 (1871 का 8) या 
इंजियि रजिस्ट्रेशि ऐ‍ि, 1877 (1877 का 3) या यह अजिजियम प्रवतणि में आया था या आता है, अथाणत :— 
 (क) स्ट्थावर स्पजत्त क े  िाि की जिित, 
 (ि) अधय जिवणसीयती जिित जििसे यह तात्पर्यणत हो या जििका प्रवतणि ऐसा हो दक वे स्ट्थावर स्पजत्त पर या 
स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए या उससे अजिक क े  मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत, चाहे वह जिजहत, चाहे समाजि त 
हो, चाहे वतणमाि में, चाहे भजव‍य में  सृ ‍ ि, घोजषत, समिु िेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत करती हो,  
(ग) ऐसी जिवणसीयती जिित, िो ऐसे दकसी अजिकार, हक या जहत क े , सृिि, घोषणा, समिुिेशि , पररसीमा या 
जिवाणपि क े  िेिे दकसी प्रजतिि की प्राजप् त या संिाय अजभस्ट्वीकार करती हो, तथा 
(घ) वषाणिुवषण या एक वषण से अजिक की दकसी अवजि क े  जिए, या वार्षणक भािक को आरजित रििे वािे स्ट्थावर 
स्पजत्त क े  पट्टे, 
1[(ङ) धयायािय की दकसी जिक्री या आिेश का, या दकसी पंचाि का अधतरण या समिुिेशि करिे वािी जिवणसीयती 
जिित िबदक ऐसी जिक्री या आिेश, या पंचाि से यह तात्पर्यणत हो या उसका प्रवतणि ऐसा हो दक वह स्ट्थावर स्पजत्त पर या 
स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए या उससे अजिक मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत, चाहे वह जिजहत चाहे समाजित हो, 
चाहे वतणमाि में चाहे भजव‍य में, सृ ‍ ि, घोजषत, समिुिेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत करता होः ] 
 परधतु राज्य सरकार दकसी भी जििे  या जििे क े  भाग में जि‍पादित दकधहीं भी पट्टों को, जििक े  द्वारा अिुित्त पट्टा-अवजियां 
पांच वषण से अिजिक हैं और जििक े  द्वारा आरजित वार्षणक भािक पचास रुपए से अिजिक है शासकीय रािपत्र में प्रकाजशत आिेश द्वारा 
उपिारा क े  प्रवतणि से छ ू ि िे सक े गी ।  
 2[(1क) ऐ सी िस्ट्तावेिों की, जििमें संपजत्त अंतरण अजिजियम, 1882 (1882 का 4) की िारा 53क क े  प्रयोिि क े  जिए दकसी 
स्ट्थावर संपजत्त को प्रजतििाथण अधतररत करिे की संजविा अंतर्वण‍ ि हैं, रजिस्ट्री करिी होगी यदि वे रजिस्ट्रीकरण और अधय संबंजित 
जवजियां (संशोिि) अजिजियम, 2001 क े  प्रारंभ पर या उसक े  प‍ चात  जि‍पादित की गई हैं और यदि ऐसी िस्ट्तावेिों की ऐसे प्रारंभ पर 
या उसक े  प‍ चात  रजिस्ट्री िहीं की िाती है, तो उिका उ‍ त िारा 53क क े  प्रयोििों क े  जिए कोई प्रभाव िहीं होगा ।] 
 (2) उपिारा (1) क े  िण्ि (ि) और (ग) में की कोई भी बात जि् िजिजित को िागू िहीं होगी— 
  (i) दकसी समझौता जविेि को ; अथवा 
 (ii) संयु ‍ त स्ट्िाक क्पिी में क े  अंशों से स्बजधित दकसी भी जिित को, यद्यजप ऐसी क्पिी की आजस्ट्तयां 
स्पूणणतः या भागतः स्ट्थावर स्पजत्त क े  रूप में हों ; अथवा  
 (iii) दकसी ऐसे जिबेंचर को, िो दक सी ऐसी क्पिी द्वारा पुरोिृत और स्ट्थावर स्पजत्त पर या स्ट्थावर स्पजत्त में 
कोई अजिकार, हक या जहत वहां तक क े  जसवाय सृ ‍ ि, घोजषत, समुिेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत ि करिा हो, िहां तक  दक 
वह िारक को उस प्रजतभूजत क े  जिए हकिार करता हो िो ऐसी रजिस्ट्रीक ृ त जिित प्रिाि करती हो जिसक े  द्वारा क्पिी िे 
अपिी स्पूणण स्ट्थावर स्पजत्त को या उसक े  दकसी भाग को या उसमें क े  दकसी जहत को ऐसे जिबेंचरों क े  िारकों क े  िा यिे क े  
जिए धयाजसयों को धयास पर बधिक रिा है, हस्ट्ताधतररत दकया है या अधयथा  अध तररत  दकया है; अथवा 
 (iv) ऐसी दकसी क ्पिी द्वारा पुरोिृत दकसी भी जिबेंचर पर दकसी भी पृ ‍ ‍ांकि को या जिबेंचर क े  अधतरण                  
को; अथवा 
(v) 3[उपिारा ( 1क) में जवजिर्िण‍ ि िस्ट्तावेिों से जभध ि दकसी ऐसी िस्ट्तावेि] को, िो स्ट्वयं तो स्ट्थावर स् प जत्त पर 
या स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए या  उससे अजिक मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत सृ ‍ ि, घोजषत, समिुिेजशत, 
                                                 
1 1929 क े  अजिजियम सं० 21 की िारा 10 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 
2 2001 क े  अजिजियम सं 48 की िारा 3 द्वारा (24-9-2001 से) अंतःस्ट्थाजपत । 
3 2001 क े  अजिजियम सं 48 की िारा 3 द्वारा (24-9-2001 से) प्रजतस्ट्थाजपत । 
 5 
पररसीजमत या जिवाणजपत िहीं करती, दकधतु क े वि ऐसी िूसरी िस्ट्तावेि को अजभप्राप् त करिे का अजिकार सृ ‍ ि करती है, िो 
जि‍पादित की िािे पर कोई ऐसा अजिकार, हक या जहत सृ ‍ ि, घोजषत, समिुिेजशत, परर सीजमत या जिवाणजपत करेगी ; अथवा 
(vi) दकसी धयायािय की दकसी जिक्री या आिेश को 1[िो ऐसी जिक्री या आिेश से जभ ध ि है, जिसक े  बारे में यह 
अजभव्य‍ त है दक वह दकसी समझौते क े  आिार पर दकया गया है और िो उस स्पजत्त से, िो वाि या का यणवाही की 
जवषयवस्ट् तु है, जभध ि स्ट्थावर स्पजत्त को समाजव ‍ ि करता है ;] अथवा 
(vii) सरकार द्वारा स्ट्थावर स्पजत्त क े  दकसी भी अिुिाि को; अथवा 
(viii) दकसी रािस्ट्व आदिसर द्वारा दकए गए जवभािि की दकसी जिित को; अथवा 
(ix) िैंि इ्प्रूवमेंि ऐ‍ि, 1871 (1871 का 26) या भूजम अजभवृजद्ध उिार अजिजियम, 1883 (1883 का 19) के 
अिीि उिार अिुित्त करिे वािे दकसी आिेश को या सांपार्‍ वणक प्रजतभूजत की दकसी जिित को; अथवा 
(x) क ृ षक उिार अजिजियम, 1884 (1884 का 12) क े  अिीि उिार अिुित्त करिे वािे दकसी आिेश को या उस 
अजिजियम क े  अिीि अिुित्त उिार क े  प्रजत संिाय को प्रजतभूत करिे वािी दकसी जिित को; अथवा 
2[(xक) िैराती जवधयास अजिजिय म, 1890 (1890 का 6) क े  अिीि दकसी आिेश को, िो िैराती जवधयासों क े  दकसी 
कोषपाि में दकसी स्पजत्त को जिजहत करता है, या ऐसे दकसी कोषपाि को दकसी स्पजत्त से जिर्िणजहत करता है ; अथवा] 
(xi) बधिक-जविेि पर दकसी  पृ‍ ‍ांकि को जिससे पूरे बधि क िि या उसक े  दकसी भाग का संिाय अजभस्ट्वीक ृ त 
दकया गया हो और बधिक क े  अिीि शोध्य िि क े  संिाय क े  जिए अधय दकसी रसीि को िब दक रसीि से बंिक का जिवाणपि 
तात्पर्यणत ि हो; अथवा 
(xii) दकसी जसजवि या रािस्ट्व आदिसर द्वारा िोक िीिाम द्वारा बेची गई दकसी स्पजत्त क े  क्र े ता को अिुित्त दकसी 
जवक्रय प्रमाणपत्र को । 
3[स्ट्प‍ िीकरण —जिस िस्ट्तावेि से यह तात्पर्यणत हो या जिसका प्रवतणि ऐसा हो दक उससे स्ट्थावर स्पजत्त क े  जवक्रय की 
संजविा हो िाती है उसक े  बारे में इसी तथ्य क े  कारण दक उसमें दकसी अजग्रम िि या पू रे क्रय िि या उसक े  दकसी भाग क े  संिाय का 
कथि अधतर्वण‍ ि है यह ि समझा िाएगा दक उसका रजिस्ट्रीकरण अपेजित है या कभी भी अपेजित था । ] 
(3) पुत्र क े  ित्तकग्रहण क े  जिए िो प्राजिकार पहिी ििवरी, 1872 क े  प‍ चात  जि‍पादित हुए हैं और वसीयत द्वारा प्रित्त िहीं 
हैं उिका भी रजिस्ट्रीकरण दकया िाएगा । 
18. िस्ट्तावेिें जििका रजिस्ट्रीकरण वैकजल्पक है—जि् िजिजित िस्ट्तावेिों में से दकसी की भी इस अजिजियम क े  अिीि 
रजिस्ट्री की िा सक े गी, अथाणत :— 
(क) (िाि की जिितों और जविों से जभ ध ि) वे जिित जििसे यह तात्पर्यणत हो या जििका प्रवतणि ऐसा हो दक  वे 
स्ट्थावर स्पजत्त पर या स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए से कम मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत, चाहे वह जिजहत चाहे 
समाजित हो, चाहे वतणमाि में चाहे भजव‍य में, सृ ‍ ि, घोजषत, समिुिेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत करती हैं ; 
(ि) ऐसी जिि त, िो ऐसे दकसी भी अजिकार, हक या जहत क े  सृिि, घोषणा, समिुिेशि, पररसीमि, या जिवाणपि 
िेिे दकसी प्रजतिि की प्राजप् त या उसका संिाय अजभस्ट्वीकार करती हैं; 
 (ग) एक वषण से अिजिक की दकसी भी अवजि क े  जिए स्ट्थावर स्पजत्त क े  पट्टे और िारा 17 क े  अिीि छ ू ि-प्राप् त पट्टे; 
 4[(गग) धयायािय की दकसी भी जिक्री या आिेश का या दकसी भी पंचाि का अंतरण या समिुिेशि करिे वािी 
जिित िबदक ऐसी जिक्री या आिेश या पंचाि से यह तात्पर्यणत हो या उसका प्रवतणि ऐसा हो दक वह स्ट्थावर स्पजत्त क े  जिए 
या स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए से कम मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत, चाहे वह जिजहत चाहे  समाजित हो, चाहे 
वतणमाि में चाहे भजव‍य में, सृ ‍ ि, घोजषत, समिुिेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत करती या करता है ;] 
(घ) (जविों से जभ ध ि) वे जिितें जििसे यह तात्पर्यणत हो या जििका पररवतणि ऐसा हो दक वे िंगम स्पजत्त पर या 
िंगम स्पजत्त में कोई अजिकार, हक या जहत सृ ‍ ि, घोजषत, समिुिेजशत पररसीजमत या जिवाणजपत करती है ; 
 (ङ) जविें; तथा 
 (च) सब अधय िस्ट्तावेिें जििका रजिस्ट्रीकरण िारा 17 द्वारा अपेजित िहीं है । 
                                                 
1 1929 क े  अजिजियम सं० 21 की िारा 10 द्वारा “और दकसी पंचाि को ” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
2 1948 क े  अजिजियम सं० 39 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 
3 1927 क े  अजिजियम सं० 2 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 
4 1940 क े  अजिजियम सं० 33 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 
 6 
19. रजिस्ट्रीकताण आदिसर द्वारा ि समझी िािे वािी भाषा में िस्ट्तावेि—यदि र जिस्ट्रीकरण क े  जिए स्यक   रूप से 
उपस्ट्थाजपत की गई िस्ट्तावेि ऐसी भाषा में है, जिसे रजिस्ट्रीकताण आदिसर िहीं समझता है और िो जििे में सामाधयतः प्रयु ‍ त िहीं की 
िाती है तो िब तक दक उस जििे में समाधयतया प्रयु ‍ त की िािे वािी भाषा में उसका सही अिुवाि और उसकी सही प्रजत भी उसक े  
साथ ि हो वह उस िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण करिे से इंकार करेगा । 
20. िस्ट्तावेिें, जििमें अधतरािेिि, िािी स्ट्थाि, उि  घषणण या पररवतणि है —(1) रजिस्ट्रीकताण आदिसर दकसी भी ऐसी 
िस्ट्तावेि को जिसमें कोई अधतरािेिि, िािी स्ट्थाि, उि  घषणण  या पररवतण ि है, रजिस्ट्रीकरण क े  जिए प्रजतगृहीत करिे से स्ट्वजववेक में  
उस िशा में क े  जसवाय इधकार कर सक े गा जिसमें उस िस्ट्तावेि का जि‍पािि करिे वािे व्य ज‍ त ऐसे अधतरािेिि, िािी स्ट्थाि, 
उि  घषणण  या पररवतणि को अपिे हस्ट्तािरों से या आद्यिरों से अिुप्रमाजणत कर िेते हैं । 
(2) यदि रजिस्ट्रीकताण आदिसर दकसी ऐसी िस्ट्तावेि की रजिस्ट्री करता है तो उसक े  रजिस्ट्रीकरण क े  समय वह ऐसे 
अधतरािेिि, िािी स्ट्थाि, उि  घषणण  या पररवतणि क े  बारे में रिप्पण रजिस्ट्िर में ििण कर िेगा । 
21. स्पजत्त का वणणि और मािजचत्र या रेिांक—(1) स्ट्थावर स्पजत्त से संबंजित कोई भी जिवणसीयती िस्ट्तावेि, िब तक दक 
उसमें ऐसी स्पजत्त की पहचाि क े  जिए पयाण प् त ऐसी स्पजत्त का वणणि अधतर्वण ‍ ि ि हो, रजिस्ट्रीकरण क े  जिए प्रजतगृहीत ि                            
की िाएगी । 
(2) िगरों में क े  गृहों का वणणि उिक े  सामिे वा िे मागण या सडक क े  (िो जवजिर्िण‍ ि की िाएगी) उत्तर में या अधय दिशा में 
उिक े  जस्ट्थत होिे क े  रूप में और उिक े  वतणमाि और भूतपूवण अजिभोगों से और यदि ऐसे मागण या सडक पर क े  गृहों पर संखयां क पडे  हुए 
हों तो उिको संखयांक िेकर, दकया िाएगा ।  
(3) अधय गृहों और भूजमयों का वणणि उिक े  िाम से, यदि कोई हो, और उस प्रािेजशक िण्ि में, जिसमें वे जस्ट्थत हैं, होिे क े रूप 
में और उिकी उपरर ‍ ‍ वस्ट्तुओं से, उि सडकों और अधय स्पजत्तयों से, जििसे वे जमिी हुई हैं, और उिक े  वतणमाि अजिभोगों  से और 
िहां दक यह साध्य हो वहां सरकारी मािजचत्र या सवेिण क े  प्रजत जििेश से भी दकया िाएगा । 
(4) कोई भी जि वणसीयती िस्ट्तावेि, जिसमें उस स्पजत्त का िो उसमें समाजव ‍ ि है, मािजचत्र या रेिांक अधतर्वण‍ ि है, 
रजिस्ट्रीकरण क े  जिए तब तक प्रजतगृहीत ि की िाएगी िब तक दक उस िस्ट्तावेि क े  साथ मािजचत्र या रेिांक की सही प्रजत ि हो या 
उस िशा में िबदक ऐसी स्पजत्त कई जििों में जस्ट्थत है मािजचत्र या रेिांक की उतिी सही प्रजतयां ि हों जितिी दक ऐसे जििों  की 
संखया है ।  
22. सरकारी मािजचत्रों या सवेिण क े  जििेश द्वारा गृहों और भूजम का वणणि —(1) िहां दक राज्य सरकार की राय में यह 
साध्य है दक िो गृह िगरों में क े  गृह िहीं हैं उि गृहों का और भूजमयों का वणणि सरकारी मािजचत्र या सवेिण क े  प्रजत  जििेश से दकया िा 
सकता है, वहां राज्य सरकार इस अजिजियम क े  अिीि बिाए गए जियम द्वारा अपेिा कर सक े गी दक पूवो‍ त िैसे गृ हों और भूजम यों को 
िारा 21 क े  प्रयोििों क े  जिए ऐसे वर्णणत दकया िाए । 
(2) उपिारा ( 1) क े  अिीि बिाए गए दकसी जियम द्वारा अधयथा उपबजधित को छोडकर दकसी िस्ट्तावेि की रजिस्ट्री का हक 
िारा 21 की उपिारा ( 2) या उपिारा ( 3) क े  उपबधिों क े  अिुपािि में असििता से ि िाता रहेगा यदि उस स्पजत्त का, जिससे व ह 
स्बजधित है, वणणि, उस स्पजत्त की पहचाि क े  जिए पयाण प् त हैं । 
भाग 4 
उपस्ट्थाजपत करिे क े  समय क े  जवषय में 
23. िस्ट्तावेिों को उपस्ट्थाजपत करिे क े  जिए समय—िाराओं 24, 25 और 26 में अधतर्वण‍ ि उपबधिों क े  अध्यिीि रहते हुए 
यह है दक जवि से जभ ध ि कोई भी िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उस िशा क े  जसवाय प्रजतगृहीत ि की िाएगी जिसमें अपिे जि‍पािि 
की तारीि से चार मास क े  अधिर वह समुजचत आदिसर क े  समि इस प्रयोिि क े  जिए उपस्ट्थाजपत कर िी गई होः 
परधतु जिक्री या आिेश की प्रजत, जिक्री या आिेश क े दकए िािे क े  दिि क े  दिि से चार मास क े  अधिर या िहां दक व ह 
अपीििीय है वहां अपिे अजधतम होिे की तारीि से चार मास क े  अ धिर उपस्ट्थाजपत की िा सक े गी । 
1[23क. क ु छ िस्ट्तावेिों का पुिः रजिस्ट्रीकरण—इस अजिजियम में अधतर्वण ‍ ि दकसी प्रजतक ू ि बात क े  होते हुए भी यदि 
रजिस्ट्रीकरण क े  जिए अपेजित िस्ट्तावेि दकसी मामिे में रजिस्ट्रीकरण क े  जिए रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार द्वारा ऐसे व्यज‍ त से, िो उसे 
प्रजतस्ट्थाजपत करिे क े  जिए स्यक   रूप से सश ‍ त िहीं है, प्रजतगृहीत कर िी गई है, और रजिस्ट्रीक ृ त कर िी गई है, तो ऐसी िस्ट्तावेि से 
व्युत्पध ि अजिकार क े  अिीि िावा करिे वािा कोई भी व्यज‍ त अपिे को यह िािकारी प्रथम बार जमििे पर दक ऐसी िस्ट्तावेि का 
रजिस्ट्रीकरण अजवजिमाधय है ऐसी िस्ट्तावेि को भाग 6 क े  उपबधिों क े  अिुसार उस जििे क े  रजिस्ट्रार क े  कायाणिय में पुिः रजिस्ट्रीकरण 
क े  जिए ऐसी िािकारी से  चार मास क े  अधिर उपस्ट्थाजपत कर सक े गा, या करा सक े गा जिसमें वह िस्ट्तावेि मूितः रजिस्ट्रीक ृ त की गई 
थी और र जिस्ट्रार अपिा यह समािाि हो िािे पर दक वह िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण क े  जिए ऐसे व्यज‍ त से, िो उसक े  उपस्ट्थाजपत करिे 
क े  जिए स्यक   रूप से सश ‍ त िहीं था । ऐसे प्रजतगृहीत की गई थी, उस िस्ट्तावेि के पुिः रजिस्ट्रीकरण क े  जिए ऐसे अग्रसर होगा मािो  
                                                 
1 1917 क े  अजिजियम सं० 15 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 
 7 
वह पहिे रजिस्ट्रीक ृ त िहीं की गई थी और मािो पुिः रजिस्ट्रीकरण क े  जिए ऐसा उपस्ट्थापि रजिस्ट्रीकरण क े  जिए भाग 4 क े  अिीि 
अिुज्ञात समय क े  अधिर रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थापि है और िस्ट्तावेिों क े  रजिस्ट्रीकरण क े  बारे में इस अजिजियम क े  सब उपबधि 
ऐसे पुिः रजिस्ट्रीकरण को िागू होंगे और यदि ऐसी िस्ट्तावेि इस िारा क े  उपबधिों क े  अिुसरण में स्यक   रूप से पुिः रजिस्ट्रीक ृ त कर 
िी िाए तो सब प्रयोििों क े  जिए वह अपिे मूि रजिस्ट्रीकरण की तारीि से स्यक   रूप से रजिस्ट्रीक ृ त समझी िाएगीः 
परधतु ऐसी िस्ट्तावेि से व्युत्पध ि अजिकार क े  अिीि, जिसे यह िारा िागू है, िावा करिे वािा कोई भी व्य ज‍ त 1917 क े  
जसत्बर क े  बारहवें दिि से तीि मा स क े  अधिर उसे इस िारा क े  अिुस रण में पुिः रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत कर सक े गा, या करा 
सक े गा, चाहे वह समय कोई भी ‍यों ि रहा हो िबदक उसे इस बात की प्रथम बार िािकारी हुई थी दक िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण 
अजवजिमाधय था ।] 
24. जवजभध ि समयों पर कई व्य ज‍ तयों द्वारा जि‍पादित िस्ट्तावेि—िहां दक िस्ट्तावेि को जवजभध ि समयों पर जि‍पादि त करिे 
वािे कई व्यज‍ त हैं वहां ऐसी िस्ट्तावेि हर एक जि‍पािि की तारीि से चार मास क े  अधिर रजिस्ट्रीकरण और पुिः रजिस्ट्रीकरण क े  
जिए उपस्ट्थाजपत की िा सक े गी । 
25. जिस िशा में उपस्ट्थाजपत करिे में जवि्ब अपररविणिीय है उस िशा क े  जिए उपबधि—(1) यदि अिेंि आव‍यकता या 
अपररविणिीय िुघणििा क े  कारण 1[भारत ] में जि‍पादित कोई िस्ट्तावेि या की गई जिक्री या आिेश की प्रजत इस जिजमत्त एतजस्ट्मि  पूवण 
जवजहत समय का अवसाि हो िािे क े  प ‍ चात  तक रजिस्ट्रीकरण करिे क े  जिए उपस्ट्थाजपत िहीं की िा सक े  तो रजिस्ट्रार उि िशाओं में, 
जििमें उपस्ट्थापि में जवि्ब चार मास से अजिक ि हो, जििेश िे सक े गा दक उस िुमाणिे क े  संिाय पर, िो दक उजचत रजिस्ट्रीकरण िीस 
की रकम क े  िस गुिे से अजिक ि हो, ऐसी िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण करिे क े  जिए प्रजतगृहीत कर िी िाएगी । 
(2) ऐसे  जििेश क े  जिए कोई भी आवेिि उपरजिस्ट्रार क े पास जिजव ‍ ि दकया िा सक े गा िो उसे तत्ि ण उस रजिस्ट्रार को 
अग्रेजषत करेगा जिसक े  वह अिीिस्ट्थ है । 
26. भारत क े  बाहर जि‍पादित िस्ट्तावेि—िबदक ऐसी िस्ट्तावेि, जिसका सब पिकारों या उिमें से दकधहीं क े  द्वारा 1[भारत ] 
क े  बाहर जि‍पादित दकया गया होिा तात्पर्यणत है, इस जिजमत्त एतजस्ट्मि  पूवण जवजहत समय का अवसाि हो िािे क े  प ‍ चात  तक 
रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत ि की िाए, तब यदि रजिस्ट्रीकताण आदिसर का समािाि हो िाता है— 
 (क) दक वह जिित ऐसे जि‍पादित की गई थी, तथा  
(ि) दक 1[भारत ] में अपिे पहुंचिे क े  प‍ चात  चार मास क े  अधिर वह रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत कर िी       
गई है, 
तो वह ऐसी िस्ट्तावेि को समुजचत रजिस्ट्रीकरण िीस क े  संिाय पर रजिस्ट्रीकरण क े  जिए प्रजतगृहीत कर सक े गा ।  
27. जवि को  दकसी भी समय उपस्ट्थाजपत या जिजिप् त दकया िा सक े गा—जवि एतजस्ट्मि  प‍ चात  उपबंजित रीजत से  दकसी भी 
समय रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत या जिजिप् त की िा सक े गी । 
भाग 5 
रजिस्ट्रीकरण क े  स्ट्थाि क े  जवषय में 
28. भूजम संबंिी िस्ट्तावेिों क े  रजिस्ट्रीकरण क े  जिए स्ट्थाि—इस भाग में अधयथा उपबजधित को छोडकर, िारा 17 की 
उपिारा (1) क े  िण्ि (क), (ि), (ग), 2[(घ) और (ङ) में तथा िारा 17 की उपिारा ( 2) में वर्णणत हर िस्ट्तावेि, वहां तक, िहां तक दक 
ऐसी िस्ट्तावेि स्ट्थावर स्पजत्त पर प्रभाव िािती है] और िारा 18 क े  िण्ि (क), (ि) 3[(ग) और (गग) ] में वर्णणत हर िस्ट्तावेि उस 
उपरजिस्ट् रार क े  कायाणिय में रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत की िाएगी जिसक े  उपजििे में वह सब स्पजत्त या उसका कोई भाग 
जस्ट्थत है जिससे ऐसी िस्ट्तावेि स्बजधित है । 
29. अधय िस्ट्तावेिों क े  रजिस्ट्रीकरण क े  जिए स्ट्थाि—(1) ऐसी हर िस्ट्तावेि, 4[िो िारा 28 में जिर्िण‍ ि िस्ट्तावेि िहीं है या 
जिक्री या आिेश की प्रजत िहीं है,] या तो उस उपरजिस्ट्रार क े  कायाणिय में, जिसक े  उपजििे में िस्ट्तावेि जि‍पादित की गई थी, या राज्य 
सरकार क े  अिीि  दकसी भी अध य  उपरजिस्ट् रार क े  कायाणिय में, जिसमें उस िस्ट् तावेि को जि‍ पादित करिे वािे या उसक े  अिीि िावा 
करिे वािे सब व्यज‍ त उस की र जिस्ट्री करािा चाहते हैं, रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत की िा सक े गी ।  
  (2) जिक्री या आिेश की प्रजत उस उपरजिस्ट्रार क े  कायाणिय में, जिसक े  उपजििे में वह मूि जिक्री या आिेश दकया गया था या 
िहां दक जिक्री या आिेश स्ट्थावर स्पजत्त पर प्रभाव िहीं िािता वहां राज्य सरकार क े  अिीि दकसी भी अधय उपरजिस्ट्रार क े कायाणिय 
में, जिसमें जिक्री या आिेश क े  अिीि िावा करिे वािे सब व्य ज‍ त उस प्रजत की रजिस्ट्री करािा चाहते हैं रजिस्ट्रीकरण क े  जिए 
उपस्ट्थाजपत की िा सक े गी । 
                                                 
1 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा “राज्यों” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
2 1940 क े  अजिजियम सं० 33 की िारा 3 द्वारा “और (घ) ” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
3 1940 क े  अजिजियम सं० 33 की िारा 3 द्वारा “और (ग) ” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
4 1940 क े  अजिजियम सं ० 32 की िारा 3 तथा अिुसूची 2 द्वारा कजतपय शब्िों क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
 8 
 30. क ु छ मामिों में रजिस्ट्रारों द्वारा रजिस्ट्रीकरण—(1) कोई भी रजिस्ट्रार, अपिे अिीिस्ट्थ दकसी भी उपरजिस्ट्रार द्वारा 
रजिस्ट्रीक ृ त की िा सकिे वािी दकसी भी िस्ट्तावेि को स्ट्वजववेक में प्राप् त और रजिस्ट्रीक ृ त कर सक े गा ।  
 1*    *    *    * 
 31. प्राइवेि जिवासगृहों में रजिस्ट्रीकरण या जििेप का प्रजतग्रहण—मामूिी िशाओं में इस अजिजियम क े  अिीि िस्ट्तावेिों का 
रजिस्ट्रीकरण या जििेप उस आदिसर क े  कायाणिय में ही दकया िाएगा िो उसे रजिस्ट्रीकरण या जििेप क े  जिए प्रजतगृहीत करिे क े जिए 
प्राजिक ृ त हैः 
 परधतु ऐसा आदिसर जवशेष हेतुक िर्शणत दकए िािे पर दकसी ऐसे व्य ज‍ त क े  जिवासगृह पर उपजस्ट्थत हो सक े गा िो िस्ट्तावेि 
को रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट् थाजपत करिे की या जवि को जिजि प् त करिे की वांछा करता है और ऐसी िस्ट्तावेि या जवि  क े  
रजिस्ट्रीकरण या जििेप क े  जिए प्रजतगृहीत कर सक े गा ।  
भाग 6 
िस्ट्तावेिों को रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत करिे क े  जवषय में 
 32. िस्ट्तावेिों को रजिस्ट्रीकरण क े  जिए उपस्ट्थाजपत करिे वािे व्यज‍ त—2[िाराओं 31, 88 और 89] में वर्णणत िशाओं को 
छोडकर, इस अजिजियम क े  अिीि रजिस्ट्रीक ृ त की िािे वािी हर िस्ट्तावेि, चाहे ऐसा रजिस्ट्रीकरण अजिवायण हो चाहे वैकजल्पक हो, 
समुजचत रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में जि् िजिजित व्यज‍ तयों द्वारा उपस्ट्थाजपत की िाएगी :— 
(क) उसे जि‍पादित या उसक े  अिीि िावा करिे वािा या दकसी जिक्री या आिेश की प्रजत की िशा में उस जिक्री या 
आिेश क े  अिीि िावा करिे वािा कोई भी व्यज‍ त, अथवा 
  (ि) ऐसे व्यज‍ त का प्रजतजिजि या समिुिेजशती, अथवा 
(ग) ऐसे व्यज‍ त, प्रजतजिजि या समिुिेजशती का ऐसा अजभकताण िो एतजस्ट्मि  प‍ चात  वर्णणत रीजत से  जि‍पादित और 
अजिप्रमाणीक ृ त मुखतारिामे द्वारा स्यक   रूप से प्राजिक ृ त दकया गया है । 
 3[32क. िोिोजचत्र, आदि का अजिवायणतः िगाया िािा—िारा 32 क े  अिीि समुजचत रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में कोई 
िस्ट्तावेि उपस्ट्थाजपत करिे वािा प्रत्येक व्यज‍ त उस िस्ट्तावेि पर अपिे पासपोिण आकार का िोिोजचत्र और अंगुिी-छाप िगाएगाः 
परधतु िहां ऐसी िस्ट्तावेि स्ट्थावर संपजत्त क े  स्ट्वाजमत्व क े  अंतरण से संबंजित है वहां िस्ट्तावेि में वर्णणत ऐसी सं पजत्त के प्रत्येक 
क्र े ता और जवक्र े ता क े  पासपोिण आकार क े  िोिोजचत्र और अंगुिी-छाप भी िस्ट्तावेि पर िगाए िाएंगे ।] 
33. िारा 32 क े  प्रयोििों क े  जिए माधय दकए िािे यो‍य मुखतारिामा—(1) िारा 32 क े  प्रयोििों क े  जिए जि् िजिजित 
मुखतारिामे ही माधय दकए िाएंगे, अथाणत :— 
(क) यदि मुखतारिामे क े  जि‍पािि क े  समय माजिक 4[भारत ] क े  दकसी ऐसे भाग में जिवास करता है, जिसमें इस 
अजिजियम का तत्समय प्रवतणि है तो उस जििे या उपजििे क े , जिसमें माजिक जिवास करता है, रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार क े  
समि जि‍पादित और त ि  द्वारा अजिप्रमाणीक ृ त मुखतारिामा; 
(ि) यदि माजिक पूवो‍ त समय पर 5[भारत क े  दकसी ऐसे अधय भाग में जिवास करता है, जिसमें इस अजिजियम का 
प्रवतणि िहीं है] तो दकसी भी मजिस्ट्रेि क े  समि जि‍पादित और ति  द्वारा अजिप्रमाणीक ृ त मुखतारिामा; 
(ग) यदि माजिक पूवो ‍ त समय पर 4[भारत ] में जि वास िहीं करता है तो दकसी िोिे री  पजब्िक या दकसी 
धयायािय, धयायािीश, मजिस्ट्रेि, 6[भारतीय ] कौधसि या उपकौधसि 7*** या क े धद्रीय सरकार क े  प्रजतजिजि क े  समि 
जि‍पादित और ति  द्वारा अजिप्रमाणीक ृ त मुखतारिामाः 
परधतु इस िारा क े  िण्ि (क) और (ि) में  वर्णणत िैसे दकसी मुखतारिामे  क े  जि‍पािि क े  प्रयोिि क े  जिए दकसी रजिस्ट्रीकरण 
कायाणिय या धयायािय में हाजिर होिे की अपेिा जि् िजिजित व्यज‍ तयों से ि की िाएगी, अथाणत :— 
 (i) वे व्यज‍ त िो अंग-शैजथल्य क े  कारण िोजिम या घोर असुजविा क े  जबिा ऐसे हाजिर होिे में असमथण हैं; 
 (ii) वे व्यज‍ त िो जसजवि या िाजण्िक आिेजशका क े  अिीि िेि में हैं; तथा  
 (iii) वे व्यज‍ त िो धयायािय में स्ट्वीय उपसंिाजत से जवजि द्वारा छ ू ि प्राप् त हैं ।  
                                                 
1 2001 क े  अजिजियम सं० 48 की िारा 4 द्वारा (24-9-2001 से ) िोप दकया गया । 
2 1948 क े  अजिजियम सं० 39 की िारा 3 द्वारा “िारा 31 और िारा 89” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
3 2001 क े  अजिजियम सं० 48 की िारा 5 द्वारा (24-9-2001 से) अंतःस्ट्थाजपत । 
4 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा “राज्यों” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
5 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा “राज्यों क े  दकसी अधय भाग में जिवास करता है ” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 
6 जवजि अिुक ू िि आिेश, 1950 द्वारा “जिरिश” क े  स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत ।  
7 जवजि अिुक ू िि आिेश, 1950 द्वारा “या जहि मिस्ट्िी क े” शब्िों का िोप दकया गया ।  
 9 
1[स्ट्प‍ िीकरण —इस उपिारा में “भारत ” से सािारण िण्ि अजिजियम, 1897 (1897 का 10) की िारा 3 क े  िण्ि (28) में 
यथापररभाजषत भारत, अजभप्रेत है ।] 
(2) हर ऐसे व्य ज‍ त की िशा में, यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार या मजिस्ट्रेि का यदि यह समािाि हो िाता है दक  
मुखतारिामा उस व्यज‍ त द्वारा स्ट्वेच्छया जि‍पादित है  जिस का दक माजिक होिा तात्पर्यणत है तो वह पूवो‍ त कायाणिय या धया यािय में 
उसकी स्ट्वीय हाजिरी अपेजित दकए जबिा उसे अिुप्रमाजणत कर सक े गा । 
(3) रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार या मजिस्ट्रेि इस बाबत दक जि‍पािि स्ट्वेच्छया दकया गया है साक्ष्य अजभप्राप् त करिे क े जिए 
या तो स्ट्वयं उस व्यज‍ त क े  गृह को िा सक े गा, जिसका माजिक होिा तात्पर्यणत है, या उस िेि में िा सक े गा, जिसमें वह व्यज‍ त परररुद्ध 
है, और उसकी परीिा कर सक े गा या उसकी परीिा करिे क े  जिए कमीशि जिकाि सक े गा ।  
(4) इस िारा में वर्णणत दकसी भी मुखतारिामे को उस सूरत में अजतरर ‍ त सबूत क े  जबिा उसक े  पेश दक ए िािे से ही सा जबत 
दकया िा सक े गा जिसमें सक ृ त िशणिे यह तात्पर्यणत है दक वह इस जिजमत्त एतजस्ट्मि  वर्णणत व्यज‍ त या धयायािय क े  समि जि‍पादित और 
उसक े  द्वारा अजिप्रमाणीक ृ त दकया गया है । 
34. रजिस्ट्रीकताण आदिसर द्वारा रजिस्ट्रीकरण क े  पूवण िांच—(1) इस भाग में  और िाराओं 41, 43, 45, 69, 75, 77, 88 और 
89 में अधतर्वण‍ ि उपबधिों क े  अध्यिीि रहते हुए कोई भी िस्ट्तावेि इस अजिजियम क े  अिीि तब तक रजिस्ट्रीक ृ त ि की िाएगी िब तक 
दक उसको जि ‍ पादित करिे वािे व्यज‍ त या उिक े  प्रजतजिजि, समिुिेजशती या पूवो‍ त िैसे रूप में  प्राजिक ृ त अजभकताण िाराओं 23, 24, 
25 और 26 क े  अिीि उसे उपस्ट्थाजपत करिे क े  जिए अिुज्ञात समय क े  अंिर रजिस्ट्रीकताण आदिसर क े  समि उपसंिात ि हों : 
परधतु यदि सब ऐसे व्य ज‍ त अिेधि आव‍यकता या अपररविणिीय घििा क े  कारण ऐसे उपसंिात िहीं होते हैं तो र जिस्ट्रार 
उि िशाओं में, जििमें दक उपसंिाजत होिे में जवि्ब चार मास से अजिक िहीं है यह जििेश िे सक े गा दक समुजचत रजिस्ट्रीकरण  िीस 
की रकम क े  िस गुिे से अिजिक िुमाणिे क े  उस िुमाणिे क े  अजतरर ‍ त यदि कोई हो, िो िारा 25 क े  अिीि संिेय है, संिाय प र उस 
िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण दकया िा सक े गा ।  
(2) उपिारा ( 1) क े  अिीि उपसंिाजतयां एक ही समय पर या जवजभ ध ि समयों पर हो सक ें गी ।  
(3) रजिस्ट्रीकताण आदिसर तिुपरर— 
(क) यह िांच करेगा दक ऐसी िस्ट्तावेि उि व्यज‍ तयों द्वारा जि‍पादित की गई थी या िहीं जििक े  द्वारा उसका 
जि‍पादित दकया िािा तात्पर्यणत है, 
(ि) अपिे समि उपसंिात होिे वािे और यह अजभकथि करिे वािे दक वह िस्ट्तावेि उधहोंिे जि‍पादित की है, 
व्यज‍ तयों की अिधयता क े  बारे में अपिा समािाि करेगा, तथा  
(ग) िबदक कोई व्यज‍ त, प्रजतजिजि क े , समिुिेजशती क े  या अजभकताण क े  रूप में उपसंिात हो रहा है, तब ऐ से व्यज‍ त 
क े  ऐसे उपसंिात होिे क े  अजिकार क े  बारे में अपिा समािाि करेगा ।  
(4) उपिारा ( 1) क े  परधतुक क े  अिीि जििेश क े  जिए कोई भी आवेिि उपरजिस्ट्रार क े  पास जिजव‍ ि दकया िा सक े गा िो  
तत्िण उसे उस रजि स्ट्रार क े  पास भेिेगा जिसक े  वह अिीिस्ट्थ है । 
(5) इस िारा की कोई भी बात जिदक्रयों या आिेशों की प्रजतयों को िागू िहीं है । 
35. जि‍पािि की क्रमशः स्ट्वीक ृ जत और प्रत्याखयाि पर प्रदक्रया—(1) (क) यदि िस्ट्तावेि को जि‍पादित करिे वािे सब व्यज‍ त 
रजिस्ट्रीकताण आदिसर क े  समि स्ट्वयं उपसंिात होते हैं और वह उधहें स्ट्वयं िािता है या यदि उसका अधयथा समािाि हो िाता है दक  वे 
वही व्यज‍ त हैं, िो व्यज‍ त होिे का वे अपिी बाबत व्यपिेश करते हैं, और यदि िस्ट्तावेि क े  जि‍पािि को वे सब स्ट्वीक ृ त कर िेते हैं, 
अथवा 
(ि) िबदक कोई व्यज‍ त प्रजतजिजि, समिुिेजशती या अजभकताण द्वारा उपसंिात होता है, ऐसा प्रजतजिजि, समिुिेजश ती या 
अजभकताण जि‍पािि को स्ट्वीकार कर िेता है, अथवा 
(ग) यदि िस्ट्तावेि को जि‍पादित करिे वािा व्यज‍ त मर  गया है और उसका प्रजतजिजि या समुिेजशती रजिस्ट्रीकताण आदिसर 
क े  समि उसंिात होता है और जि‍पािि को स्ट्वीकार कर िेता है, 
तो रजिस्ट्रीकताण आदिसर िस्ट्तावेि का, िारा 58 से िेकर िारा 61 तक की िाराओं में, जििक े  अधतगणत ये िोिों िाराएं भी 
हैं, जिर्िण‍ ि तौर पर रजिस्ट्रीकरण करेगा ।  
(2) रजिस्ट्रीकताण आदिसर इस उद्दे‍य से दक वह अपिा समािाि कर िे दक उसक े  समि उसंिात होिे वािे व्यज‍ त वही 
व्यज‍ त हैं िो व्यज‍ त होिे का वे अपिी बाबत व्यपिेश करते हैं या इस अजिजियम द्वारा अिुध्यात दकसी भी अधय प्रयोिि क े  जिए अपिे 
कायाणिय में उपजस्ट्थत दकसी भी व्यज‍ त की परीिा कर सक े गा ।  
                                                 
1 1951 क े  अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा अधतःस्ट्थाजपत । 
 10 
(3) (क) यदि कोई व्यज‍ त, जिसक े  द्वारा िस्ट्तावेि का जि‍पादित होिा तात्पर्यणत है उसक े  जि‍पािि का प्रत्याखयाि करे , 
अथवा 
(ि) यदि कोई ऐसा व्यज‍ त रजिस्ट्रीकताण आदिसर को अप्राप् तवय, िड या पागि प्रतीत होता है, अथवा 
(ग) यदि कोई व्यज‍ त, जिसक े  द्वारा िस्ट्तावेि का जि‍पादित होिा तात्पर्यणत है, मर गया है और उसका प्रजतजिजि या 
समिुिेजशती उसक े  जि‍पािि का प्रत्याखयाि करे,  
तो रजिस्ट्रीकताण आदिसर ऐसे प्रत्याखयाि करिे वािे, प्रतीत होिे वािे या मृत व्यज‍ त का िहां तक स्बधि है वहां  तक िस्ट्तावेि को 
रजिस्ट्रीक ृ त करिे से इंकार कर िेगाः 
 परधतु िहां दक ऐसा आदिसर रजिस्ट्रार है वहां वह भाग 12 में जवजहत प्रदक्रया का अिुसरण करेगाः  
 1[परधतु यह और भी दक राज्य सरकार शासकीय रािपत्र में अजिसूचिा द्वारा यह घोजषत कर सक े गी दक ऐसी िस्ट्तावेिों क े  
बारे में जििक े  जि‍पािि का प्रत्याखयाि दकया गया है, उस अजिसूचिा में िाजमत कोई भी उपरजिस्ट्रार इस उपिारा और भाग 12 क े  
प्रयोििों क े  जिए रजिस्ट्रार समझा िाएगा ।] 
भाग 7 
जि‍पािी और साजियों की उपसंिाजत प्रवर्तणत करािे क े  जवषय में 
 36. िहां दक जि‍पािी या सािी की उपसंिाजत  वांजछत है वहां प्रदक्रया—यदि रजिस्ट्रीकरण क े  जिए दकसी िस्ट्तावेि को 
उपस्ट्थाजपत करिे वािा या िो िस्ट्तावेि ऐसे उपस्ट्थाजपत दकए िािे यो‍य है उसक े  अिीि िावा करिे वािा कोई भी व्यज‍ त दकसी ऐसे 
व्यज‍ त की उपसंिाजत की वांछा करता है जिसकी उपजस्ट्थजत या पररसाक्ष्य ऐसी िस्ट्तावेि क े  रजिस्ट्रीकरण क े  जिए आव‍यक है तो ऐसे 
आदिसर या धयायािय से, िैसा रा ज्य सरकार इस जिजमत्त जिदि‍ ि करे, रजिस्ट्रीक ृ त आदिसर स्ट्वजववेक में जिवेिि कर सक े गा दक वह 
यह अपेिा करिे वािा समि जिकािे दक वह व्यज‍ त रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में या तो स्ट्वयं या स्यक   रूप से प्राजिक ृ त ऐसे अजभक ताण 
द्वारा, िैसा समि में वर्णणत हो, और उसमें अं दकत समय पर, उपसंिात हो ।  
 37. आदिसर या धयायािय समि जिकािेगा और उसकी तामीि कराएगा —आदिसर या धयायािय ऐसे मामिों में संिेय 
चपरासी की िीस पर तद्िुसार समि जिकािेगा और उसकी तामीि उस व्य ज‍ त पर कराएगा जिसकी उपसंिाजत ऐसे अपेजित है ।  
 38. रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में उपसंिाजत से छ ू ि -प्राप् त व्यज‍ त—(1) (क) वह व्यज‍ त, िो अंग-शैजथल्य क े  कारण िोजिम या 
घोर असुजविा क े  जबिा रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में उपसंिात होिे क े  अयो‍य है, अथवा  
 (ि) वह व्यज‍ त, िो जसजवि या िाजण्िक आिेजशका क े  अिीि िेि में है, अथवा 
 (ग) वे व्यज‍ त, िो धयायािय में स्ट्वीय उपसंिाजत से जवजि द्वारा छ ू ि-प्राप् त हैं और िो एतजस्ट्मि  प‍ चात  अधतर्वण‍ ि जिकितम 
आगामी उपबधि क े  अभाव में रजिस्ट्रीकरण कायाणिय में स्ट्वयं उपसंिात होिे क े  जिए अपेजित होते,  
 ऐसे उपसंिात होिे क े  जिए अपेजित ि दकए िाएंगे । 
 (2) हर ऐसे व्यज‍ त की िशा में रजिस्ट्रीकताण आदिसर या तो ऐसे व्य ज‍ त क े  गृह या उस िेि में, जिसमें वह परररुद्ध है, स्ट्वयं 
िाएगा और उसकी परीिा करेगा या उसकी परीिा क े  जिए कमीशि जिकािेगा ।  
 39. समिों, कमीशिों और साजियों क े  बारे में जवजि—जसजवि धयायाियों क े  समि वािों में, समिों और कमीशिों क े  बारे में 
और साजियों की हाजिरी प्रवर्तणत करािे और उिक े  पाररिजमक क े  बारे में तत्समय -प्रवृत्त-जवजि यथापूवो ‍ त को छोडकर और 
यथाव‍यक पररवतणि सजहत इस अजिजियम क े  उपबधिों क े  अिीि जिकािे गए दकसी भी समि या कमीशि को और उपसंिात होिे क े  
जिए समजित दकसी भी व्यज‍ त को िागू होगी ।  
भाग 8 
जविों की और ित्तकग्रहण प्राजिकारों को उपस्ट् थाजपत करिे क े  जवषय में 
 40. जविों को और ित्तकग्रहण प्राजिकारों को उपस्ट्थाजपत करिे क े  हकिार व्यज‍ त—(1) वसीयतकताण या उसकी मृत्यु क े  
प‍ चात  जवि क े  अिीि जि‍पािक क े  रूप में या अधयथा िावा करिे वािा कोई भी व्यज‍ त उसे रजिस्ट्रीकरण क े  जिए दकसी  भी रजिस्ट्रार 
या उपरजिस्ट्रार क े  समि उपस्ट्थाजपत कर सक े गा । 
 (2) दकसी भी ित्तक प्राजिकार का िाता या उसकी मृत्यु क े  प‍ चात  उस प्राजिकार का आिाता या ित्तक पुत्र उसे रजिस्ट्रीकरण 
क े  जिए दकसी भी रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार क े  समि उपस्ट्थाजपत कर सक े गा । 
                                                 
1 1926 क े  अजिजियम सं० 13 की िारा 2 द्वारा अधतःस्ट्थाजपत । 
 11 
 41. जविों का और ित्तकग्रहण प्राजिकारों का रजिस्ट्रीकरण—(1) वसीयतकताण या िाता द्वारा रजिस्ट्रीकरण करिे क े  जिए 
उपस्ट्थाजपत की गई जवि या ित्तकग्रहण प्राजिकार, दकसी भी अधय िस्ट्तावेि क े  रजिस्ट्रीकरण की रीजत, को वैसी ही रीजत से रजिस्ट्रीक ृ त 
दकया िाएगा । 
 (2) उस जवि या ित्तकग्रहण प्राजिकार का, िो उसे उपस्ट्थाजपत करिे क े  हकिार दकसी अधय व्यज‍ त द्वारा रजिस्ट्रीकरण क े  
जिए उपस्ट्थाजपत दकया िाए उस िशा में रजिस्ट्रीकरण दकया िा सक े गा जिसमें रजिस्ट्रीकताण आदिसर का समािाि हो िाए दक— 
  (क) जवि या प्राजिकार, यथाजस्ट्थजत, वसीयतकताण या िाता द्वारा जि‍पादित दकया गया था; 
  (ि) वसीयतकताण या िाता मर गया है ; तथा   
(ग) जवि या प्राजिकार को उपस्ट्थाजपत करिे वािा व्यज‍ त उसे उपस्ट्थाजपत करिे का िारा 40 क े  अिीि                  
हकिार है । 
भाग 9 
जविों क े  जििेप क े  जवषय में 
 42. जविों का जििेप—कोई भी वसीयकताण अपिी जवि को मुद्राबि जििाि े  पर अपिा और अपिे अजभकताण का (यदि कोई 
हो) िाम और िस्ट्तावेि की प्रक ृ जत का कथि जििकर दकसी भी रजिस्ट्रार क े  पास या तो स्ट्वयं या स्यक   रूप से प्राजिक ृ त अजभक ताण 
द्वारा जिजिप् त कर सक े गा ।  
 43. जविों क े  जििेप पर प्रदक्रया—(1) ऐसा जििािा प्राप् त होिे पर यदि रजिस्ट्रार का समािाि हो िाता है दक जििेप क े  
जिए उसे उपस्ट्थाजपत करिे वािा व्यज‍ त वसीयतकताण या उसका अजभकताण है तो वह  संखयांक 5 वािी अपिी रजिस्ट्रीकरण पुस्ट्तक में 
पूवो‍ त उपररिेिि को चढ़ा िेगा और उसी पुस्ट्तक में और उ‍ त जििाि े  पर उसे ऐसे उपस्ट्थाजपत करिे और प्राजप् त क े  वषण, मास, दिि 
और समय को और ऐसे व्य ज‍ तयों क े  िामों को, िो वसीयतकताण या उसक े  अजभकताण की अिधयता को  प्रमाजणत करे, और ऐसी दकसी  
मुद्रा पर क े , िो जििाि े  पर िगी हो, दकसी सुपाठ्य अधतरािेिि का रिप्पण कर िेगा । 
 (2) रजिस्ट्रार तब अपिी अज‍ िसह पेिी में उस मुद्राबधि जििाि े  को रि िेगा और रिे रहेगा ।  
 44. िारा 42 क े  अिीि जिजिप् त मुद्राबधि जििाि े  का प्रत्याहरण —यदि वसीयत कताण, जिसिे ऐसा जििािा जिजि प् त दकया 
है, उसका प्रत्याहरण करिा चाहता है तो वह उस रजिस्ट्रार से, िो उसे जििेप में िारण दकए हुए है, या तो स्ट्वयं या स्य क   रूप  से 
प्राजिक ृ त अजभकताण द्वारा आवेिि कर सक े गा और यदि ऐसे रजिस्ट्रार का समािाि हो िाए दक आवेिक वास्ट्तव में वसीयतकताण या 
उसका अजभकताण है तो वह तद्िुसार उस जििाि े  को पररित्त कर िेगा । 
 45. जििेपक की मृ त्यु पर प्रदक्रया—(1) जिस वसीयतकताण िे मुद्राबधि जििािा िारा 42 क े  अिीि जिजिप् त दकया है, यदि 
उसकी मृत्यु हो िािे पर उस रजिस्ट्रार से, िो  उसे जििेप क े  रूप में िारण दकए हुए है, यह आवेिि दकया िाए  दक उसे िोिा  िाए और 
यदि ऐसे रजिस्ट्रार का समािाि हो िाए दक वसीयतकताण मर गया है तो वह आवेिक की उपजस्ट्थजत में जििाि े  को िोिेगा और उसकी 
अधतवणस्ट्तुओं की िकि आवेिक क े  व्यय पर अपिी संखयांक 3 वािी पुस्ट्तक में कराएगा ।  
 (2) िब ऐसी िकि कर िी गई हो तब रजिस्ट्रार मूि जवि को पुिः जिजिप् त करेगा ।  
 46. क ु छ अजिजियजमजतयों और धयायाियों की श ज‍ तयों की व्यावृजत्त—(1) एतजस्ट्मि  पूवण अधतर्वण‍ ि कोई भी बात इंजियि 
स‍सेशि ऐ‍ि, 1865 (1865 का 10)1 की िारा 259 या प्राबेि एधि एिजमजिस्ट्रेशि ऐ‍ि, 1881 (1881 का 5) की िारा 81 क े  उपबंिों 
को या दकसी जवि को आिेश द्वारा पेश करािे की दकसी धयायािय की श ज‍ त पर प्रभाव ि िािेगी । 
 (2) िबदक कोई ऐसा आिेश दकया िाए िब तक दक जवि की िकि िारा 45 क े  अिीि पहिे ही ि कर िी गई हो, रजिस्ट्रार 
जििाि े  को िोिेगा और संखयांक 3 वािी अपिी पुस्ट्तक में जवि की िकि कराएगा और ऐसी प्रजत पर यह रिप्पण कराएगा दक मूि 
पूवो‍ त आिेश क े  अिुसरण में धयायािय को भेि िी गई है ।  
भाग 10 
रजिस्ट्रीकरण और रजिस्ट्रीकरण क े  पररणामों क े  जवषय में 
 47. वह समय, जिससे दक रजि स्ट्रीकरण िस्ट्तावेि प्रवर्तणत होती है—रजिस्ट्र

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