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Madhya Pradesh · state statute
Open in Lexace · Ask the AI about this actमध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981
[क्रमाांक 36 सि् 1981]
विषय-सूची
अध्याय -एक
प्रारम्भभक
1. सांक्षक्षप्त िाम तथा विस्तार
2. पररभाषाएां
अध्याय- दो
डकैती और व्यपहरण क्षेत्र की घोषणा
3. डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र की घोषणा
4. पुलिस की सहायता करिे िािा व्यम्तत िोक सेिक होगा ।
4. क. उस दशा में प्रक्रक्रया जब अन्िेषण चौबीस घण्टों के अन्दर पूरा ि क्रकया जा सकता हो ।
5. जमाित मन्जूर क्रकये जािे का विनियमि ।
6. विशेष न्यायाियों का गठि
7. विशेष न्यायाियों की अधिकाररता
8. विशेष न्यायाियों की प्रक्रक्रया और शम्ततयााँ
अध्याय-तीि
अपराि और शाम्स्तयाां
9. िोक सेिक के विरुद्ि अपरािों के लिये दण्ड
10. मृत्यु दण्ड ि देिे के लिए कारण अलभ लिखित क्रकये जायेंगे
11. विनिर्दिष्ट अपरािों के लिये सािारणत: दण् ड
12. ऐसी सभपवि को म्जसके बारे में समािाि कारक रूप में िेिा-जोिा ि र्दया जा सकता हो,
कब्जे में रििे के लिए दण्ड
13. कारािास की न्यूितम कािािधि
13 क. प्रनतवषद्धि आयुिों तथा प्रनतवषद्ि गोिा- बारूद को आयुि अधिनियम, 1959 के
उल्िांघि में कब्जे आर्द में रििे आर्द की दशा में उपिारणा
अध्याय-चार
सभपम्प्त की कुकी
14. सभपवि की कुकी 1
15. सभपनत की निमुिम्तत
16. सभपवि के अजिि के स्िरूप के बारे में विशेष न्यायाियों व्दारा जााँच
17. विशेष न्यायािय का विनिश्चय और पररणाम
18. अपीि
19. अधिकाररता का िजिि
अध्याय-पाांच
प्रकीणि
20. सद् भािपूणि की गई कायििाही का सांरक्षण
21. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाि
22. नियम बिािे की शम्तत
23. निरसि
• अिुसूची
मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981
[र्दिाांक 6 अतटूबर, 1981 को राष्रपनत की अिुमनत प्राप्त हुई; अिुमनत ''मध्य प्रदेश
राजपत्र'' (असािारण) में र्दिाांक 7 अतटूबर 1981 को प्रथम बार प्रकालशत की गई । ]
[मध्य प्रदेश के डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्रों में कनतपय अपरािों को विनिर्दिष्ट करिे
और ऐसे विानिर्दिष्ट अपरािों के क्रकये जािे को कारगर ढांग से दबािे कै हेतु उि अपरािों के सभबन्ि
में दण्डों तथा उिके शीघ्र विचारण का उपबन्ि करिे एि उि सभपवियों की जो विनिर्दिष्ट करके
अम्जित की गई है, कुकी के लिये तथा उिसे सांसतत या आिुषधगक विषयों के लिये उपबन्ि करिे हेतु
अधिनियम ।]
गत डाकुओां के सांगर्ठत और असांगर्ठि धगरोहों से उत्पन्ि ितरे पर कारगर ढांग से काबू पािे
के लिये यह आिश्यक है क्रक ऐसे निर्हत स्िाथों की जो ऐसे धगरोहों की सहायता करते हैं या जो
उिसे सहयुतत हैं, कड़ी को समाप्त क्रकया जाय, और उन्हें कारगर ढांग से दबाया जाय तथा उि पर
प्रभािी रूप से नियन्त्रण क्रकया जाय ;
और अत: यह आिश्यक है क्रक डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्रों में कनतपय विनिर्दिष्ट
अपरािी के लिए अधिक कड़े दण्ड का उपबन्ि क्रकया जाय ;
और अत: यह आिश्यक है क्रक विनिर्दिष्ट अपराि करके अम्जित की गई उि विपुि सभपवियों
की, जो डाकुओां के सभबम्न्ियों, साधथयों तथा विश्िासपात्र व्यम्ततयों के िाम पर िाररत की जा रही
है, कुकी तथा अधिहरण के लिये उपबन्ि क्रकया जाय;
अतएि भारत गणराज्य के बिीसिें िषि में मध्य प्रदेश वििाि मण्डि व्दारा निभिलिखित
रूप में यह अधिनियलमत हो-
अध्याय 1 --प्रारम्भभक
1. सक्षक्षप्त िाम और विस्तार (1) इम अधिनियम का सक्षक्षस िाम मध्य प्रदेश
डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत अधिनियय, 1981 है ।
(2) इसका विस्तार सभपूणि मध्य प्रदेश पर है ।
सामान्य - यह अधिनियम इसकी उद् देलशका में िखणित विषयों के नियन्त्रण के लिये अधिनियलमत
क्रकया गया था । इसी विषय पर इसके पूिि एक अध्यादेश जारी क्रकया गया था, जो इस अधिनियम
व्दारा निरलसत कर र्दया गया है ।
यह अधिनियम म. प्र. राजपत्र (असािारण) में र्दिाांक 7 अतटूबर, 1981 को पृष्ठ 731-36 पर
प्रकालशत हुआ था 1 बाद में इसमें अधिनियम क्र० 29 सि् 1982 व्दारा सांशोिि क्रकये गये । यहााँ
प्रस्तुत अधिनियम अद्यति सांशोलशत रूप में र्दया जा रहा है ।
2. पररभाषाएाँ - इस अधिनियम में, जब तक सन्दभि से अन्यथा अपेक्षक्षत ि हो—
(क) “सांर्हता'' से अलभप्रेत है दण्ड प्रक्रकया सांर्हता, 1973 (1974 का स० 2);
(ि) क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र के सभबन्ि में ''डाकू'' से अलभप्रेत है कोई ऐसा
व्यम्तत जो कोई ऐसा अपराि, जो भारतीय दण्ड सांर्हता, 1860 (1860 का सां० 45) की िारा 395
के अिीि दण्डिीय है, या कोई विनिर्दिष्ट
अपराि करता है या म्जसिे कोई ऐसा अपराि क्रकया है या यथाम्स्थनत कोई ऐसा व्यम्तत
म्जस पर क्रकसी ऐसे अपराि के क्रकये जािे का अलभयोग िगाया गया है; ‘‘डकैती और व्यपहरण
प्रभावित क्षेत्ि’‘ से अलभप्रेत है कोई ऐसा क्षेत्र म्जसे िारा 3 के अिीि डकैती और व्यपहरण प्रभावित
क्षेत्र घोवषत क्रकया गया है;
[ (ग-ग) “व्यपहरण” के अन्तगित अपहरण आता है,; ]
(घ) ‘‘विशेष न्यायािय” से अलभप्रेत है िारा 6 के अिीि गर्ठत विशेष न्यायािय;
(ड.) ''विशेष न्यायािीश” से अलभप्रेत है क्रकसी विशेष न्यायािय की अध्यक्षता करिे क लिये िारा 6
की उपिारा (2) के अिीि नियुतत क्रकया गया कोई न्यायािीश;
(च) “विनिर्दिष्ट अपराि” से अलभप्रेत है--
(एक) अिुसूची में विनिर्दिष्ट कोई अपराि जो िारा 3 के अिीि घोवषत क्षेब क सभबन्ि में
क्रकया गया हो जो डकैती या व्यपहरण क्रकये जािे का भागरूप हो या उससे उद् भूत होता
हो या उससे सांसतत हो;
(दो) कोई ऐसा अपराि म्जसके लिये इस अधिनियम की िारा 9, 11 और 12 के अिीि दण्ड
का उपबन्ि क्रकया गया है;
[(तीि) भारतीय दण्ड सांर्हता, 1860 (180 का सां. 45) की िारा 212, 216 21 क, 311 347
392 393 394,395,396,397,398,399,402 तथा 412 के अिीि दण्डिीय कोई अपराि
जो िारा 3 अिीि घोवषत क्रकये गये क्रकसी क्षेत्र के सभबन्ि में सन्दभि में क्रकया गया हो ;
और उसके अन्तगित उपिण्ड (एक ), (दो) और (तीि) में विनिर्दिष्ट अपरािों में से क्रकसी
अपराि का दुष्प्रेरण या ऐसे क्रकसी अपराि के क्रकये जािे का प्रयत्ि आता है;
(छ) उि शब्दों तथा अलभव्यम्ततयों के, जो इस अधिनियम में प्रयोग में िाई गई है क्रकन्तु पररभावषत
िहीां की गई है और जो सांर्हता में पररभावषत की गई है, िही अथि होंगे जो उिके लिए सांर्हता
में या यथाम्स्थनत भारतीय दण्ड सांर्हता, 1860 (1860 का सां० 45) में र्दये गये हैं ।
अध्याय – दो
डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र को घोषणा
3 डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षें त्र की घोषणा - यर्द, क्रकसी म्जिे या म्जिों में या उसके क्रकसी
भागों में विनिर्दिष्ट अपरािों की घटिाओां को ध्याि में रिते हुये, या उिके सभबन्ि में पुलिस
अधिकारी की ररपोटि या कोई अन्य जािकारी प्राप्त होिे पर, राज्य सरकार यह समझती है क्रक ऐसी
पररम्स्थनत उत्पन्ि हो गई है क्रक म्जसमें उस क्षेत्र की , जो ऐसे म्जिे या म्जिों या उिके क्रकसी भाग
या भागों के अन्तगित आता है इस अधिनियम के प्रयोजिों के लिये डकैती और व्यपहरण प्रभावित
क्षेज्ञ घोवषत क्रकया जाय, तो राज्य सरकार, अधिसूचिा व्दारा, उस म्जिे या उि म्जिों को या उसके
क्रकसी भाग या भागों को , जो उस अरर सूचिा में विनिर्दिष्ट क्रकये गये हों ' डकैती और व्यपहरण
प्रभावित क्षेत्र'' घोवषत कर सकेगी ।
1. म. प्र. अधिनियम क० 29 सि् 1982 व्दारा अन्त-स्थावपत जो म० प्र० राजपत्र असािारण.
र्दिाांक 31-10-82 के पृष्ठ 2373-2378 पर प्रकालशत
4.पुलिस की सहायता करिे िािा व्यम्तत िोक सेिक होगा- (1) क्रकसी ऐसे व्यम्तत को , जो क्रकसी
विनिर्दिष्ट अपराि के क्रकये जािे के बारे में जािकारी देकर पुलिस की सहायता करता है या जो क्रकसी
विनिर्दिष्ट अपराि के क्रकये जािे के बारे में जािकारी देिे या उसके अन्बेषण में पुलिस की सहायता
करिे के लिये िगाया जाता है, इस अधिनियम के प्रयोजिों के लिये, भारतीय दण्ड सांर्हता ( 180 का
सां० 45) की िारा 2 के अथि के अन्तगित िोक सेिक समझा जायेगा ।
(2) पुलिस अिीक्षक का इस प्रभाि का प्रमाण -पत्र क्रक उसमें िखणित व्यम्तत ऐसा व्यम्तत है जो
उपिारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रयोजिों के लिये पुलिस की सहायता करता है, या पुलिस से सहायता
करिे के लिये िगाया गया है, उि तथ्यों का निश्चायक साक्ष्य होगा जो उसमें कधथत क्रकये गये है ।
4-क. उस दशा में प्रक्रक्रया जब अन्िेषण चौबीस घण्टे के अन्दर पूरा ि क्रकया जा सकता
हो- (1) जब कभी क्रकसी ऐसे व्यम्तत को, जो क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि से सभबद्ि रहा है, या म्जसके
विरुद्ि यह पररिाद क्रकया गया है क्रक िह उससे सभबद्ि रहा है, या म्जसके विरुद्ि यह विश्िसिीय
जािकारी प्राप्त हुई हो क्रक िह उससे सभबद्ि रहा है या म्जसके विरुद्ि युम्ततयुतत सांदेह है क्रक िह
उससे सभबद्ि रहा है, धगरफ्तार क्रकया जाता है और अलभरक्षा में निरुद्ि क्रकया जाता और यह प्रतीत
होता है क्रक अन्िेषण सांर्हता की िारा 57 व्दारा नियत चौबीस घण्टे की कािािधि के भीतर पूरा िहीां
क्रकया जा सकता, और यह विश्िास करिे के लिये आिार हैं क्रक अलभयोग या जािकारी दृढ़ आिार
पर है, तो पुलिस थािे का भारसािक अधिकारी अथिा अन्िेषण करिे िािा पुलिस अधिकारी, यर्द
िह उपनिरीक्षक की पद श्रेणी से निभि पद श्रेणी का िहीां हैं, मामिे से सभबम्न्ित डायरी, जौ सांर्हता
में विर्हत है, की प्रविम्ष्टयों की एक प्रनत निकटतम न्यानयक मम्जस्रेट को तुरन्त भेजेगा और उसके
साथ ही अलभयुतत को भी ऐसे मम्जस्रेट के पास भेजेगा ।
(2) िह मम्जस्टेरट, म्जसके पास अलभयुतत को उपिारा (1) के अिीि भेजा जाता है, चाहे
उसे अधिकाररता हो या िहीां, अलभयुतत का ऐसी अलभरक्षा में, जैसी क्रक ऐसा मम्जस्टेरट ठीक समझे,
इतिी अिधि के लिये जो कुि लमिाकर पन्रह र्दि से अधिक की िहीां होगी, निरुद्ि रिा जािा
समय-समय पर प्राधिकृत कर सकेगा ।
(3) उस दशा में जबक्रक मम्जस्रेट अलभयुतत को निरुद्ि रििा क्रकसी भी समय अिा-
िश्यक समझे, या उपिारा (2) के अिीि पन्रह र्दि की विरोिािधि का अिसाि हो जािे के पश्चात्,
इिमें से जो भी पूिितर हो, िह अलभयुतत को समस्त कागज-पत्रो के साथ उस विशेष न्यायािीश के
पास भेजेगा जो उस मामिे में अधिकाररता रिता हो ।]
(4) पुलिस के कागज-पत्रों के साथ अलभयुतत के इस प्रकार भेजे जािे पर, विशेप न्यायािीश
कागज पत्रों को िारा 8 के अिीि पुलिस ररपोटि मािकर उस मामिे का सांज्ञाि कर सकेगा या
प्रनतप्रेषण के विषय में ऐसे आदेश पाररत कर सकेगा जैसे क्रक अधिकाररता रििे िािे क्रकसी मम्जस्रेट
व्दारा सांर्हता के उपबन्िों के अिीि के अिीि पाररत क्रकये जा सकते हों ।
5. जमाित के मन्जूर क्रकये जािे का विनियमि - (1) सांर्हता में अन्तवििष्ट क्रकसी के होते
हुए भी कोई भी न्यायािय क्रकसी डाकू के बारे में धगरपतारी पूिि जमाित (एन्टीलसपेटरी) लिये कोई
आिेदि ग्रहण िहीां करेगा ।
(2) सांर्हता में अन्तवििष्ट क्रकसी बात के होते हुए भी, क्रकसी डाक की जमाित के लिये कोई
आिेदि उस दशा में मांजूर िहीां क्रकया जायेगा जबक्रक! [.....] उसका विरोि क्रकया गया हैं:
परन्तु कोई भी न्यायािय या मम्जस्रेट, क्रकसी ऐसे व्यम्तत का, म्जस पर विनिर्दिष्ट अपराि
का अलभयोग िगाया गया है , अन्िेषण के दौराि अलभरक्षा में निरोि एक सौ बीस र्दिों से अधिक
की कािािधि के लिये प्राधिकृत िहीां करेगा और ऐसी कािािधि की समाम्प्त पर, उस दशा में जबक्रक
सांर्हता की िारा 173 की उपिारा (3 ) के अिीि पुलिस ररपोटि फाइि ि की गई हो अलभयुतत को,
यर्द िह जमाित देिे के लिये तैयार है और जमाित दे देता है; तत्काि छोड़ र्दया जायेगा ।
6. विशेष न्यायाियों का गठि - (1) क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में क्रकये गये
विनिर्दिष्ट अपरािों के शीघ्र विचारण के लिये उपबन्ि करिे के प्रयोजिों के लिये, राज्य सरकार उच्च
न्यायािय से परामशि करके, इतिे विशेष न्यायाियों का गठि कर सकेगी म्जतिे क्रक ऐसे डकैती और
व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र या क्षेत्रों में या उसके/उिके सभबन्ि में आिश्यक हो और जो अधिसूचिा में
विनिर्दिष्ट क्रकये जायें ।
[(1- क) जहााँ क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र या क्षेत्रों के लिये दो या अधिक विशेष
न्यायािय गर्ठत क्रकये गये हों, िहााँ राज्य सरकार, उच्च न्यायािय से परामशि करके, सािारण या
विशेष आदेश व्दारा, उिके बीच कायि वितरण का, म्जसके अन्तगित प्रनत- प्रेषण की शम्तत आती है
विनियमि कर सकेगा ।]
(2) विशेष न्यायािय एकि न्यायािीश से गर्ठत होगा जो, राज्य सरकार व्दारा अिुरोि क्रकया
जािे पर, उच्च न्यायाियों व्दारा नियुतत क्रकया जायेगा ।
स्पष्टीकरण - इस उपिारा में, शब्द 'नियुतत' का िही अथि होगा जो क्रक उसे सांर्हता की िारा
9 के स्पष्टीकरण में र्दया गया है ।
(3) कोई व्यम्तत विशेष न्यायािय के न्यायािीश के रूप में नियुतत क्रकये जािे के लिये तक
अर्हत िहीां होगा जब तक क्रक िह सांर्हता के अिीि सेिारत सेशि न्यायािीश या अपर सेशि
न्यायािीश ि हो।
(4) क्रकसी विशेष न्यायािीश के छुट टी पर होिे के कारण उसके अिुपम्स्थत रहिे अथिा
रूगणता के कारण या अन्य कारण से अपिे कििव्यों का अिुपािि करिे से नििाररत हो जािे की
दशा में, सेशि िण्ड में के अपर सेशि न्यायािीशों में से कोई भी एक अपर सेशि न्यायािीश, म्जसे
सेशि न्यायािीश व्दारा इस निलमित निर्दिष्ट क्रकया जाय, उस समय तक जब तक क्रक ऐसा विशेष
न्यायािीश व्दारा इस निलमित निर्दिष्ट क्रकया जाय , उस समय तक जब तक क्रक ऐसा विशेष
न्यायािीश अपिे कििव्यों को पूिग्रिहीत ि कर िे, उस आपवि मामिों को निपटायेगा जो विशेष
न्यायािीश के समक्ष आएाँ और इस प्रयोजि के लिये , इस प्रकार निर्दिष्ट क्रकये गये अपर सेशि
न्यायािीश को, इस अधिनियम में अन्तवििष्ट क्रकसी ज्ञात के ही, विशेष न्यायािीश समझा जािेगा ।
र्टप्पणी
विशेष न्यायाियों की स्थापिा - राज्य सरकार िे अपिी निभिलिखित अधिसूचिा व्दारा विशेष
न्यायाियों की स्थापिा की है । यह अधिसूचिा म० प्र० राजपत्र ( असािारण) में र्दिाांक 19-5-81
को पृष्ठ 1000 पर प्रकालशत हुई थी । अधिसूचिा निभि प्रकार हैं-
अधिसूचिा क्र० एफ० 1-7-81 बी-इतकीस र्दिाांक 19 मई, 1981- म. प्र. डकैती प्रभावित क्षेत्र
अध्यादेश, 1981 ( 1981 का सां० 5) की िारा 6 की उपिारा (1) व्दारा प्रदि शम्ततयों के प्रयोग में,
राज्य सरकार, म ० प्र ० के उच्च न्यायािय की सिाह के एतत्व्दारा िीचे दी गई अिुसूची के कॉिम
( 2) में विनिर्दिष्ट र्दशेष न्यायाियो की उतत अिुसूची के कािम (3) में तत्सांबांिी प्रविम्ष्टयों में
विनिर्दिष्ट डकैती प्रभावित क्षेत्रों के सभबन्ि में, स्थापिा करता है
अिुसूची
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क्रम सांखयाांक विशेष न्यायािय क्षेत्र
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(1) (2) (3)
1. विशेष न्यायािय, मुरैिा राजस्ि म्जिा, मुरैिा
2. विशेष न्यायािय, लभण्ड राजस्ि म्जिा, लभांड
3. विशेष न्यायािय, ग्िालियर राजस्ि म्जिा, ग्िालियर
4. विशेष न्यायािय, दनतया राजस्ि म्जिा, दनतया
5. विशेष न्यायािय, लशिपुरी राजस्ि म्जिा, लशिपुरी
6. विशेष न्यायािय, गुिा राजस्ि म्जिा, गुिा
7. विशेष न्यायािय, सागर राजस्ि म्जिा, सागर
8. विशेष न्यायािय, दमोह राजस्ि म्जिा, दमोह
9. विशेष न्यायािय, टीकमगढ़ राजस्ि म्जिा, टीकमगढ़
10. विशेष न्यायािय, छतरपुर राजस्ि म्जिा, छतरपुर
11. विशेष न्यायािय, पन्िा राजस्ि म्जिा, पन्िा
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7. विशेष न्यायाियों की अधिकाररता - (1) सांर्हता या तत्समय प्रिृि अन्य विधि में
अन्तवििष्ट क्रकसी बात के होते हुए भी कोई विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण केिि विशेष न्याया- िय
व्दारा विचारणीय होगा ।
(2) क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण करिे में, कोई विशेष न्यायािय विनिर्दिष्ट अपराि
से लभन्ि क्रकसी ऐसे अपराि का भी विचारण कर सकेगा म्जस अपराि से उस डाकू को उसी विचारण
में, सर्हता के अिीि अरोवपत क्रकया जाये, बशते िह अपराि विनिर्दिष्ट अपराि से सभबम्न्ित हो ।
8. विशेष न्यायाियों की प्रक्रक्रया और शम्ततयाां-- (1) बबशेष न्यायािय क्रकसी विनिर्दष्ट
अपराि का सांज्ञाि,--
(क) क्रकसी ऐसे पररिाद के, म्जससे ऐसा अपराि बिता हो, प्राप्त होिे पर; या
(ि) ऐसे तथ्यों की बाबत पुलिस ररपोटि पर; या
(ग) पुलिस अधिकारी से लभन्ि क्रकसी व्यम्तत से प्राप्त ऐसे इवििा पर या अपिी स्ियां की ऐसी
जािकारी पर की ऐसा अपराि क्रकया गया है;
कर सकेगा ।
(2) विशेष न्यायािय, क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण करिे में , उसी प्रक्रक्रया का
अिुसरण करेगा जो सेशि मामिों के विचारण के लिये सांर्हता व्दारा उपबम्न्ित की गई है :
परन्तु विशेष न्यायािय, जहााँ कहीां भी आिश्यक हो , सांर्हता की िारा 207 के अिीि
मम्जस्रेट के कृत्यों का पािि करेगा, और मामिे का विचारण करिे के लिये इम प्रकार अग्रसर होगा
मािो क्रक िह मामिा सांर्हता के उपबन्िों के अिीि सेशि न्यायािय को विचारण के लिये सुपुदि
क्रकया गया हो ।
(3) इस अधिनियम में अलभव्यतत रूप से जैसा उपबम्न्ित है, उसके लसिाय, साक्ष्य अधिनियम
1872 (1872 का सां. 1) और सांर्हता के उपबन्ि, जहााँ तक क्रक िे इस अधि नियम के उपबन्िों से
असांगत ि हों , विशेष न्यायािय के समक्ष कई कायििार्हयों को िागू होंगे, और सांर्हता के उतत
उपबन्िों के प्रयोजिों के लिये विशेष न्यायािय को सेशि न्यायािय समझा जायगा और विशेष
न्यायिय के समक्ष अलभयोजि का सांचािि करेिे िािे व्यम्तत को िोक अलभयोजक समझा जायेगा ।
(4) विशेष न्यायािय, क्रकसी ऐसे व्यम्तत का , म्जसके सभबन्ि में यह सांदेह हो क्रक िह क्रकसी
विनिर्दिष्ट अपराि से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: सभबम्न्ित रहा है या उसमें सांसधगित रहा है , साक्ष्य
आलभप्राप्त करिे की दृम्ष्ट से, ऐसे व्यम्तत को इस शति पर क्षमा प्रदाि कर सकेगा क्रक िह उस
अपराि के तथा प्रत्येक ऐसे अन्य व्यम्तत के, जो उस अपराि के क्रकये जािे में चाहे कताि के रूप में
या दुष्प्रेरक के रूप मे सभपृतत हो, सभबन्ि में उि समस्त पररम्स्थनतयों का, जो उसकी जािकार में
हों, पूणि और सत्य प्रकट ि कर दे, और इस. प्रकार प्रदाि की गई क्रकसी क्षमा के सभबन्ि में, सर्हता
की िारा 308 के प्रयोजिों के लिये, यह समझा जायगा क्रक बह उसकी िारा 307 के अिीि प्रदाि
की गई है ।
(5) विशेष न्यायािय, उसके व्दारा लसद्िदोष ठहराये गये क्रकसी अलभयुतत व्यम्तत पर कोई ऐसा
दण्डादेश पाररत कर सकेगा जो उस अपराि के, म्जसके लिये ऐसे व्यम्तत को लसद्िदोष ठहराया गया
है, दण्ड के लिये विधि व्दारा प्राधिकृत है ।
अध्याय 3 — अपराि और शाम्स्तयाां
9. िोक सेिक के विरुद्ि अपरािों के लिए दण्ड-- कोई डाकू, जो एक से अधिक व्यम्ततयो की
हत्या करता है, या क्रकसी िोक सेिक के शरीर [या सभपवि] के विरुद्ि या उसके कुटुभब के क्रकसी
सदस्य के शरीर सर सभपवि के विरुद्ि कोई विनिर्दिष्ट अपराि करता है, िह;
(क) यर्द ऐसा अपराि भारतीय दण्ड सांर्हता (1860 का सां. 45) के अिीि मृत्यु दण् ड या
आजीिि कारािास से दण्डिीय है, उसी दण्ड से दांडडत क्रकया जायगा जो उस अपराि के लिये
भारतीय दण्ड सांर्हता (1860 का 45) में उपबम्न्िि है;
(ि) अन्य मामिों में कारािास से, जो दस िषि तक का हो सकेगा, और जुमाििे से दम्ण्डत क्रकया
जायेगा।
स्पष्टीकरण - इस िारा और िारा 10 के प्रयोजिों के लिये, क्रकसी िोक सेिक के कुटुभब के
सदस्य से अलभप्रेत है, उसके माता-वपता, उसकी पत्िी या उसका पनत, उसके पुत्र तथा पुबत्रया,पौत्र
तथा पौबत्रया और प्रपौत्र तथा प्रपौबत्रया और उिके पनत या उिकी पम्त्ियों और उसके अन्तगित कोई
ऐसा व्यम्तत भी आयेगा जो उस पर आधश्रत हो और उसके साथ नििास करता हो ।
10 . म्रत्यु दण्ड ि देिे के लिये कारण अलभलिखित क्रकये जायेंगे - सांर्हता की िारा 354 की
उपिारा (3) में अन्तवििष्ट क्रकसी बात के होते हुये भी, जब दोषलसद्धि एक से अधिक व्यम्ततयों की
हत्या या क्रकसी िोक सेिक की या उसके कुटुभब के क्रकसी सदस्य की हत्या के लिये हो और जहाां
मृत्यु का दांडादेश िहीां र्दया जाता है, िहााँ निणिय में िे विशेष कारण कधथत क्रकये जायेंगे म्जिके
आिार पर मृत्यु का दांडादेश िहीां र्दया गया है ।
11 विनिर्दिष्ट अपरािों के लिये सािारणत: दण्ड - कोई डाकू, जो कोई विनिर्दिष्ट अपराि
करेगा िह, यर्द उस कायि के लिये भारतीय दांड सांर्हता ( 1860 का 45) में कोई विनिर्दिष्ट दांड
उपबम्न्ित िहीां है और यर्द िह कायि िारा 9 के अिीि भी दांडिीय िहीां है, कारािास से, जो दस िषि
तक का हो सकेगा, और जुमाििे से दम्ण्डत क्रकया जायेगा ।
12. ऐसी सभपवि को, म्जसके बारे में समािािकारक रूप में िेिा-जोिा ि र्दया जा सकता
हो, कब्जे में रििे के लिए दण्ड - कोई ऐसा व्यम्तत, जो क्रकसी डकैती और व्यपहरण प्रभा वित क्षेत्र
में रहता है और उस क्षेत्र में या अन्यत्र ऐसी सभपवि अपिे कब्जे में रिता है म्जसके लिए िह
समािािकारक रूप में िेिा-जोिा िहीां दे सकता है अपराि का दोषी होगा और कारािास से, जो सात
िषि का हो सकेगा, और जुमाििे से दम्ण्डत क्रकया जायेगा :
परन्तु यर्द और जब विशेष न्यायािय व्दारा िारा 17 के अिीि निमुिम्तत का आदेश पाररत
क्रकया जाता है, तो अलभयुतत को, चाहे विचारण का प्रक्रम कुछ भी हो, उन्मोधचत कर र्दया जायगा
और यर्द िह अलभरक्षा में है तो उसे तत्काि छोड़ र्दया जायगा और उसकी दोष- लसद्ि यर्र कोई
हो, के सभबन्ि में यह समझा जायगा क्रक िह अम्स्तत्ि में िहीां है ।
13 कारािास की न्यूितम कािािधि- िारा 11 और 12 में या तत्समय प्रिृि क्रकमी अन्य
विधि में अन्तवििष्ट क्रकसी बात के होते हुये भी, क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि के लिये जो न्यूितम दण्ड
र्दया जायगा िह तीि िषि का कारािास होगा ।
13 क. प्रनतवषद्ि आयुिों तथा प्रनतवषद्ि गोिा-बारूद को आयुि अधिनियम, 1959 के
उल्िांघि में कब्जे में रििे आर्द की दशा में उपिारणा- यर्द कोई व्यम्तत प्रनतवषद्ि आयुिों या
प्रनतवषद्ि गोिा बारूद का, आयुि अधिनियम, 1959(1959 का सां० 54) के उपबन्िों के उल्िांघि में
विनिमािण प्रसांस्करण, क्रय, विक्रय करता है या उन्हें कब्जे में रिता है, तो यह उपिारणा की जायेगी
क्रक िह कोई विनिर्दिष्ट अपराि क्रकये जािे के लिये उिका विनिमािण, प्रसांस्करण, क्रय, विक्रय करता
है या उन्हें कब्जे में रिता है ।
स्पष्टीकरण- इस िारा में अलभव्यम्तत ''प्रनतवषद्ि आयुिों'' तथा अलभव्यम्तत ''प्रनतवषद्ि गोिा बारूद''
के िही अथि होंगे जो आयुि अधिनियम, 1959(1959 का सां ० 54) में उिके लिए र्दये गये हैं ।
अध्याय 4 -सभपवि की कुकी
14. सभपवि की कुकी-- (1) यर्द म्जिा मम्जस्रेट के पास िह समझिे का कारण हो क्रक क्रकसी
डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में रहिे िािा कोई व्यम्तत उस क्षेत्र में -या अन्यत्र ऐसी सभपवि
िारण करता है या यह क्रक डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र के बाहर रहिे िािा कोई व्यम्तत
डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र में ऐसी सभपवि िारण करता है , म्जसके बारे में िह समािािकर
रूप में िेिा-जोिा िहीां दे सकता है, तो िह उस प्रभाि की घोषणा कर सकेगा और उतत सभपवि की
कुकी का आदेश दे सकेगा ।
(2) उपिारा (1) के अिीि सभपवि की कुकी कर िी जािे पर सांर्हता के उपबन्ि उसे िागू होंगे ।
(3) सांर्हता के उपबन्िों के होते हुये भी, म्जिा मम्जस्रेट, प्रनतभू के बदिे, एक प्रशासक नियुतत कर
सकेगा म्जसे उस सभपवि का प्रशासि करिे के लिये ऐसी समस्त शम्ततयाां होगी म्जन्हें िह सभपवि
के सिोिम र्हत में उधचत समझे ।
(4) म्जिा मम्जस् रेट, सभपवि के उधचत और प्रभािी प्रशासि के हेतु, प्रशासक के लिये पुलिस सहायता
की व्यिस्था कर सकेगा ।
(5) सभपवि के प्रशासि पर उपगत व्यय, म्जिके अन्तगित पुलिस सहायता पर उपगत व्यय भी आते
हैं. सभपवि पर भार होंगे ।
15. सभपवि की नियुम्तत- (1) सभपवि के िारा 14 के अिीि कुकि कर लिए जािे पर, उसका
स्िामी, कुकी की जािकारी की तारीि से तीि मास के भीतर, म्जिा मम्जस् रेट को अभ्यािेदि कर
सकेगा म्जसमें िे पररम्स्थनियाां तथा सािि, म्जिमें म्जिके व्दारा िह सभपवि उसके व्दारा अम्जित की
गई थी, दलशित क्रकए जायेंगे ।
(2) यर्द म्जिा मम्जस्रेट का अभ्यािेदि से समािाि हो जाता है, तो िह उस सभपवि को कुकी से
तत्काि निमुतत कर सकेगा, और तदुपरर िह सभपवि तथा अन्त: कािीि िाभ उस सभपवि पर
भाररत समस्त व्ययों की कटौती कर िी जािे के पश्चात् उस सभपवि के स्िामी में निर्हत हो जायेंगे
।
16 सभपलस के अजिि के स्िरूप के बारे में विशेष न्यायाियों व्दारा जाांच—(1) यर्द म्जिा
मम्जस्रेट की िारा 15 की उपिारा (1) के अिीि क्रकये गए अभ्यािेदि से समािाि िहीां होता तो िह
उस मामिे को, अपिी ररपोटि के साथ उस विशेष न्यायािय के पास, जो आधिकाररता रिता हो, यह
विनिश्चय करिे के लिये भेजेगा क्रक तया िह सभपवि या उसका कोई भाग कोई विनिर्दिष्ट अपराि
करके अम्जित क्रकया गया था या िहीां ।
(2) विशेष न्यायािय को, उपिारा (1) के अिीि उसे निर्दिष्ट क्रकये गये क्रकसी मामिे का विनिश्चय
करते समय, लसविि न्यायािय की िे समस्त शम्तत यााँ होंगी जो लसविि प्रक्रक्रया सांर्हता , 1908
(1908 का सां० 5) के अिीि क्रकसी िाद का विचारण करते समस लसविि न्यायािय को होती है ।
४०। 9111 -3
(3) इस िारा के अिीि क्रकन्हीां कायििार्हयों में, यह साबबत करिे का भार क्रक अभ्या- बेदि में िखणित
सभपवि या उसका कोई भाग कोई विनिर्दिष्ट अपराि करके अम्जित िहीां क्रकया गया था, उस व्यम्तत
पर होगा जो उस सभपवि का दािा करता हो, भिे ही साक्ष्य अधिनियम, 1872(1872 का सां० 1) में
कोई भी बात अन्तवििष्ट तयों ि हो ।
17. विशेष न्यायािय का विनिश्चय पररणाम और उसके - यर्द विशेष न्यायािय , इस
निष्कषि पर पहुाँचता है क्रक सभपवि का अजिि विनिर्दिष्ट अपराि '[करके] क्रकया गया था, तो िह उतत
सभपवि के अधिहरण का आदेश करेगा और अलभिेिों को , अपिे आदेश के निष्पा- दि के लिये ,
म्जिा मम्जस्रेट के पास भेजेगा, और क्रकसी अन्य दशा में, उस सांपवि को तत्काि निमुतत कर र्दये
जािे का आदेश क्रकया जायेगा ।
18 अपीि'--- विशेष न्यायािय के प्रत्येक ऐसे विनिश्चय के, जो िारा 17 के अिीि क्रकया
गया हो, विरुद्ि अपीि उच्च न्यायािय को होगी ।
19 अधिकाररता का िजिि-- इस अधिनियम के अिीि पाररत कोई आदेश या क्रकया गया कोई
विनिश्चय, उसमें यथा उप-बम्स्ित के लसिाय, अपीििीय िहीां होगा, और क्रकसी भी लसविि न्यायािय
को क्रकसी भी ऐसे मामिे के सभबन्घ में कोई अधिकाररता िहीां होगी म्जसे अििाररत करिे के लिये
विशेष न्यायािय इस अधिनियम व्दारा या उसके अिीि सशतत है , और क्रकसी न्यायािय या अन्य
प्राधिकारी व्दारा, सभपवि की कुकी या अधिहरण में हस्तक्षेप करिे िािा कोई आदेश या अन्तििती
आदेश, इस अध्याय व्दारा या उसके अिीि प्रदि क्रकसी शम्तत के अिुसरण में की गई या की जािे
िािी क्रकसी कायििाई के सभबन्ि में िहीां र्दया जयेगा ।
अध्याय 5 - प्रकीणि
20. सदभािपूििक की गई कायििाई का सांरक्षण -- (1) राज्य सरकार या राज्य सरकार के
क्रकसी अधिकारी के विरुद्ि, क्रकसी भी ऐसी बात के सभबन्ि में जो इस अधिनियम या उसके अिीि
बिाये गये नियमों के अिुसरण में सद् भाि पूििक की गई हो या म्जसका उसके अिीि सदभािपूििक
क्रकया जािा आशनयत रहा हो, कोई िाद अलभयोजि या अन्य विधिक कायििाही िहीां होगी ।
(2) िारा 14 की उपिारा (3) के अिीि नियुतत क्रकए गए क्रकसी प्रशासक के विरुद्ि कोई िाद
या अलभयोजि तब तक सांम्स्थत िहीां क्रकया जायेगा जब तक क्रक उसके लिये म्जिा मम्जस्रेट की पूिि
मांजूरी अलभप्रास ि कर िी गई हो ।
21. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाि — इस अधिनियम के उपबन्ि प्रभािी होंगे , भिे ही
तत्समय प्रिृि क्रकसी विधि में उिसे असांगत कोई बात अन्तवििष्ट तयों ि हो ।
22. नियम बिािे की शम्तत- (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबन्िों को कायािम्न्ित
करिे के लिए नियम, अधिसूचिा व्दारा बिा सकेगी ।
(2) इस िारा के अिीि बिाये गये समस्त नियम वििाि सभा के पटि पर रिे जायेंगे ।
23. निरसि-- मध्य प्रदेश डकैती-प्रभावित क्षेत्र आध्यादेश, 1981 (क्रमाांक 5 सि् 1981)
एतदव्दारा निरस्त क्रकया जाता है ।
अिुसूची
[िारा 2 (च) देखिये]
(एक)-- भारतीय दण्ड सांर्हता (1860 का सां० 45) की िारा ' [......] 302, 303,304,307,
308,325,326,327,329,331,333,363,364,365,368,386,387,'[........]’ 100 तथा 2[5111] के
अिीि दण्डिीय अपराि;
(दो)-- क्रफरौती के लिये क्रकसी व्यपहरण या अपहरण;
(तीि)-- क्रफरौती के लिये व्यम्तत के व्यपहरण -या अपहरण के लिये जमाि, तैयारी, प्रयत्ि;
(चार)-- '[........] आयुि या गोिा-बारूद या विस्फोट पदाथि बिािा, प्रसांस्कृत करिा या उिके
बिाये जािे या प्रसांस्कृत क्रकये जािे की प्रक्रक्रया का कोई भाग पूरा करिा, उिका क्रय करिा, विक्रय
करिा, व्ययि करिा या उन्हें िे जािा या कब्जे में रििा ।
(पाांच)-- डकैती करिे के पूिि या पश्_चात् एकबत्रत हुए या डकैती करिे की तैयारी करिे िािे
व्यम्ततयों को िाद्य सामग्री, िस्त्र, सांचार के सािि, पररिहि के सािि या अन्य िस्तुओां का प्रदाय
करिा;
(छह)-- क्रकसी अपहरणकताि या व्यपहरणकताि को दी जािे के लिये क्रफरौती की रकम तय करिे में
मध्यस्थता करिा या उन्हें क्रफरौती की रकम का भुगताि क्रकया जािे के लिये प्रनतभू होिा;
(सात)-- डकैती करिे के पूिि या पश्चात् एकवित हुए या डकैती करिे की तैयारी करिे की तैयारी
करिे िािे व्यम्ततयों के लिये गुप्तचरी करिा ।
(आठ)--ऊपर िखणित अपरािों में से समस्त या उिमें से कोई अपराि करिे िािे व्यम्ततयों से
फायदे प्राप्त करिा । '
Lex