The Madhya Pradesh Lok Sewa (Anusuchit Jatiyo, Anusuchit Janjatiyo aur anya Pichhda Vargo ke liye Arakshan) Sansothan Adhiniyam 2002
Madhya Pradesh · state statute
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- डाक-व्यय़क्रीमूर्घ-ञदायगौकेविना .ं 7 =ड़ोंं 'ड़ोंंड़ोंं'ड़ोंं, ' ड़ोंं ड़ोंं ड़ोंंमँजीक्रमांकभोपालड़िंबोजम
डाकद्वाराभेजेजानेंकेलिंएअत्रुमत्त. 'ः'ॊ`'ः' 'ः'ः` एप.पौ, ग्रां8/भोपाला2002.ं
अनुपत्तिड़ोंंफ्त्रक्र. भौंपालाएमःपौ.
` बि.ंमू.भुड़ोंं/(4भौपग्ल.ं2002ड़ोंं
(ेंअंसाधाघ्ण)
प्राधिकार से प्रकाशित
क्रमांक'ः.।़] भोपाल,मंंगलवार,दिनांक7 मई 2002_वैश् ा ाखग्7,शक ग्924
राणाल्
धारा
ढ़'ॊऋ़छ़श्नड़ोंं.त्र्ड़ोंंद्धड़ोंं
ड़ोंं विधि और विधर्यी कार्य विभाग
, भोंपाल,ड़ोंंर्दित्रांक7मई'2002
र्ड्3294-220ड़ोंंइवकीस-आंंप्राड़ोंं).ड़ोंंपव्यप्रदेश् ाबिधानसाँ! का निमत्तिखित्तअघिनियम,जिसपर दिनांक30 अप्रैल,2002को
को अनुमतिग्राफही चुंकी है, एत्तदूद्बारासर्वसाधारणको जानकारोंके त्तियैप़काशित्तकियाजाताहै,
मव्यप्रदेशके रांव्यपालके नामसे बधाआदेशानुसार,
' आर.के.ं श्रीवासाव,उपसन्निवड़ोंं
ड़ोंंमधयप्रदेशअधिनियम 'ः
. क्रमांक९० सत्त्श्००२,
मआाग्देश लौक सेवा (ें अद्दुसून्त्रित्तजातियों, 'अनुसूबिल जनजातियों और
अग्र पिछड़ें वर्गों के त्नियै आरक्षण ) संशोंधन अधिनियम, २००२. '
ड़ोंं ड़ोंं बिषय-सूची `
संक्षिप्तनामअौंरप्रारंभ.
धारा२ का संशोंधन.
धारा३ का संशोधन. ड़ोंं'ः
घारा४ का संंशोघमड़ोंं
घास६ का संशोघनड़ोंं
.ं धारा८ का प्रतिस्थापन.
नईधारा१४ड़ोंंकका अंतःर्स्थापऩ.
430 .ं पव्यप़देशराजपत्र,दिनांक7मई2002'ॊ
र्संक्षिपानामऔर
पाता
धारा२कासंर्शोघम.
धारा३कासंशोधन,
थारा४कासंशोंधन.
पध्र्ड़ोंंयप्रदैशअधिनियम
र क़'पांक १० सद् २००२ड़ोंं
मध्यप्रदेश लौक सेवा (ें ड़ोंंअनुसूचिंत्तजप्र्र्त्तियोड़ोंंड़ोंं,अनुसूचित जनज़ाड़ोंंत्तिर्योंअौंर
'अन्य पिछड़े वर्गों के त्तियै आरक्षण ) संशोंधन अधिनियम, २००२.
[रदिनांक़30ड़ोंंअप्रैज्ञ,ड़ोंं2ड़ोंं002कोराञ्पपालको अनुमतिप्राप्व्ड़ोंंद्यहुई;अनुपत्तिड़ोंंड़ोंंपव्यप्रदेशंराजपत्र(असाधारण)''ॊमेंदिनांक
7 मई,2002कौ प्रथपचारप़काशिह़की गई ] ड़ोंं -
मव्यप्रदेशलोक सेवा (अ सूचित्तजातियों, अनुसूंन्त्रित्तजनजातियोंऔर अन्यपिछड़े वर्गोंके लिंए 'आरक्षण)
अधिनियम,१९९४ को संशोधित्तकरनेहेतु अधिनियमः 'ः 'ः
भांरत्तगणराज!के तिरपनवेंवर्षमेंमर्ध्यप्रदेशबिग्रान-मंडज्ञद्वार।निणत्तिर्खिवरूप में यंह ऑंघनियपित्तहों:-
१ (१) इसअधिनियमका संक्षिप्त्तनापपव्यप्रदेश'ःलोकसेवा (ेंअत्रुसूबित्तजातियों,अनुसूचित्तजनजाबियोंअौंर
अनापिछड़ेवर्गोंके लिंएआरक्षण)संशोंधनअघिनियम,२००२ है.
(ें२ः) यह ऐसौतारीखको प्रवृत्तहोगाजिसेराजासरकौर,अधिसूचनाद्वारा,नियलकों.
२. मधाप्रदैशलौकसेवा (ैअनुसूजिंत्तजातियाँ,अनुयूंंबित्तजनजातियोंऔंरअन्यपिछडेवर्गोंके लिएआरक्षण)
अघिनियम,१९९४ (क्रमांक२९ सद् १९९४) (जो इसमेंइसकेपश्चातूमूल अधिनियमके नामसे निर्दिष्टहै) कौ नुं
थारा२ पें, खंण्द्व(ख्र)के स्थानपर,हुंंनेणखिखित्तखण्डर्स्थापित्तकिय।जाप्र्अथांतून्त्र्
ऱ ड़ोंं'(ख) "स्थापन'ॊ'ॊस्रेअथिप्रेंत्तहै राजा सरकारक।या त्तत्समयप्रवृत्तराजा के किसी अघिनियमके ड़ोंं`
अघोंऩगठित्तकिसीस्थानीयप्राधिक्रंरणया कानूनीप्राधिकरणका या किसोविश्वविद्यालयका 'ःह्
या किसीऐसी कपानी,निगमया क्रिंसोसहकारीसोसाइटीका, जिसमेंसपादत्तअंशपूंज्ञीका 'ॊड़ोंं
ड़ोंंकपसे कमाँइवयावपप्रबिशत्तरांव्यसरकारद्वाराधारित्तहै याकिसीसंर्स्थाकाजों राजासरकार -'ः
से सहायताअनुदानया मक़दअनुदानप्रापाकर रही है, कोई कार्यालयअौंर उसके अननर्गब ड़ोंंड़ोंंर
ऐसास्थापनआताहै जिसमेंकार्यभारित्तया आकस्मिकतानिधिस्रेभुगतानकियाजाताहै अौंर ड़ोंं-
ऐसा स्थापनर्जिप्तर्पेआकस्मिकनियुक्तियांको जातीहैं किमु इसमेंसंविधानके अनुवौद ३० ड़ोंं -
के अधौमआनेवाले स्थापनसम्मिश्लित्त्महोंंहैं;".
३ड़ोंंमूल अधिनियमकी भाव३ में,'पद (ें२ः) त्तथा(४) का लोप कियाज ाप्र्.ं'ः
' ४.ं मूल अघिनियमकी धारा४ मँ,-=
(एक) विद्यमापपाश्र्वशीर्षके र्थाऩपर,निमत्तिखित्तपार्श्वशीघंंरथापित्तकियाजाए,अर्थात्तू:-=
'ॊ' उंदाँर्केआरक्षणके सिएप़ठिशत्तताक।नियत्तक्रियाड़ोंंजानाऔरमूल्यांकनके मानक'ः'ॊ.ं
(दी) उपधारा(ें२) केखण्ड(एक) केरथामपर,निग्मत्तिखित्तखण्डर्स्थाफ्ति'र्कियाजाप्र्अर्थात्तून्ड़ोंं
ड़ोंं'(एक) प्रथमवर्ग,द्धितीयवर्ग,तृतीयवर्गऔरचतुर्थवग्र्र्ंके पर्दोंमें राजा सारपर किसी भरनी ड़ोंं
के बाईंमें उद्भूवहोने वाली रिक्तियोंके संबंघमें निणलिंखित्तप़त्तिशत्त;ड़ोंं 'ः '
अनुसूचित्तजाति .ं ९६ प़बिशत्त
अनुसूघित्तजनजात्ति .ं २० प़त्तिशत्त
अग्रपिछड़ेवर्ग ९४ प़चिशत्त";
ड़ोंंमधयप्रदेशराजपत्र,दिनांक7मई2002 430(र)
धप्ग'ॊ
(तीन) उपधारा (३) के खड़ोंंण्ड(ख) ड़ोंंके पश्वात्त्ड़ोंंनिमकिखित्तखण्ड अन्तःर-थग्मित्तकिया '
जाए अर्थांतून्ड़ोंंड़ोंं
'ः(ें ग् ा) जव कर्मीसीसी पर्तोया पदीजत्तिके समट्टुड़ोंंज्ञमामलों में पूर्ववर्तीवर्षया वर्षोंमें अत्रुसून्नित्त
जातिया अनुसून्नित्तजमजात्तिके लिए आरक्षित्तरिबित्तयांंविनाभरोरह गईहँ त्तब़बैकलॉग
आैंर/याआानीत्तरिवित्तयापृथकत्तथासुश्चिमसमूहमानीज़ाएग् ा ा ा औरउस वर्षकी रिक्तियों
' को कुल संरव्यापर आरक्षण् ाकौ पचासप़त्तिशत्तको अघिकत्तपसीमाका अबपारण् ाकरनें - ड़ोंं
के लिंएउस बर्षको, भारशिवरिक्तियोंके साथनहींमानीजाएंगींंजिसमेंवे रिक्तियांभरी
जा रहो हैं. अथ शव्योड़ोंंर्मे,आरक्षित्तरिक्तियोंको परनेपर पचासप्रत्तिशत्तको .अथिकत्तम
सोमाकेबलउढों आरक्षित्तरिफ्तियोंपरखाड़ोंंप्र्होग्गौजोचालूवर्षमेंउद्भूत्तहों औरअनुसूचित
'ः जातिया अनुसूचित्तजनजातिके लिंए मूवंवतोंंवर्षया बर्षोंकी बैकलोंंग/आानीत्तआरक्षित्त
रिक्तियांपृथकत्तथासुधिऩ समूहमानीजाएंगीऔर पचासप्रबिशत्तकौ अधिकत्तपसीमा
के अव्यघीन'नहींढोंग्गौ:
परजु नियुक्तिप्राधिकारोंविना भरोऐसी रिक्तियोंकौ भरनेके सिएग्क्रिसीसी समयविशेष भर्तीकर
ड़ोंं शांंरड़ोंंग्केग्गाऑरयदिऐसी रिंबित्तपानिनाभरोरह जातीहैं तोउडेड़ोंंउस प़वग्र्गंज़िसकेड़ोंंसिएपद
या पदों को भारशिवकिय।ग्गयाहै स्रेघिन व्यक्तियोंद्वारापरे जानेके लिंए किसी भी
रीतिमें अनारक्षित्तनहींंक्रियाज़ाएग्ग़;
(चार) उपधारा(४) के पश्चात्त्ड़ोंंनिणतिखित्तउपधाराआॊ: रुथापिवको जाए,ञर्थाव्:_
" (४-क)र ाजांसरकार,साथारणया विशेषआदेशद्वारा,अनुसूचित्तजार्त्तियोंअौंर अनुसूचिबजनजाठियाँ
के सदस्योंके पक्षमें राणाके कार्यकलाप'स्रेसंबद्धसेवाओंया पदों पर किसी वर्णया
वर्गोंकौ पत्तोंऔर पदोजत्तिके मामलोंमॅ आरक्षणके लिए किसी परीक्षाके अहंकारी
अंकोंको शिथिलकरनेंहेतुयामूलांकनकामानकक्रमकरनेके सिएउपबंधकरसकेगी.'ॊ'ॊ;
(पांच) उपधारा(५) के पश्चातूनिणत्सिखित्तउपधाराअंतःरुथापित्तकी जाए अँर्थात्तून्ड़ोंं
ड़ोंं'ः(५-क)र ाव्यसरकार,अनुसूचित्तज्ञानियोंत्तथाअनुलूबित्तजपज़ात्तियोंड़ोंंके पक्षमें राजा को सिविल
.ं सेवाओं में पदों के किसी वर्गया वर्गोंके लिए पारिणामिक़ञ्यैपङताके साथपदोनत्तिके
मामलोंमें नियमबनासकेग्ड़ोंंगाथाकोईँ अनुदेशजारोकर सकेग्गै."
मूल अधिनियमकी घारा ६ कौ उपधारा (१) के र्स्थानपर निणत्तिखित्तउपधारा र्स्थापित्तकौ
जाए अर्थात्त् ःह्वि
"(ै १) कोई नियुक्तिप्राधिकारीजिसे धारा५ कौ उपधारा(ेंर) के अधीनउत्तरदायित्वसाँपा गवाहै,
ऐसी सेंतिमें जानबृड़ोंंझक़रकार्यकरताहै जों इसअधिनियमके प्रयोजनोंका उल्लंघनकरने या
उन्हेंंविफल करनेके सिए आशयित्तहै या पार।१४ड़ोंंक़के निबंंधर्नोंड़ोंंकेअघीममिव्याप्रमाण-
पत्रका पृष्ठोकऩकरताहै, नियुक्तिप्राधिकारीका ऐसा कुत्ताउस पर लागू'आचरणय।सेवा
नियपौंके अधीनअबचारसमझाजाएगा'ःआैंरऎसे अवचारके लिंए उवचनियपोंके, असीम
अनुशासनिककार्यवाहियोंके सापड़ोंंसाथसक्षमअधिकारितावालेकिसीव्यामात्तयद्वाराअथिपौज़ित्त.ं
किए जानेका दायी होगा और बह दीपप्तिद्धिपर कारावाससे, जो एक वर्षचक्रका हो
सकेगाया जुर्मानेसे जो दी हजाररुपये.ंत्तक्रका हो सकेगा,या दोनोंंसे दण्डनीयहोगा,'ॊ'.
430(ें2) 'ॊ पव्यप्रदेशराजपत्र,दिनांक7मई2002
'ःधाग ८ का ६. मूल अधिनियमकी धारा८ के खान पर,निमस्त्रिखिंत्तधारार्स्थाप्रित्तको जाए अथांतू ः-ड़ोंं पठिरशछाऩ. ड़ोंं
. वयन सपित्तिषेड़ोंं 'ःड़ोंं८ड़ोंं राजासरकार,आदेशद्वारा,'ःचयम/छानबीऩया पटौनबिसमितिमें,'चाहे उसै किसी मोब्ड़ोंंदृड़ोंंमप़त्तिनिधिक्ता. ।ँ जानाजाताहो, जहांऐसीसमितिलोक स्रेवाड़ोंंयापदपरनियुक्तिया पदोन्नातिके त्तिग्र्ड़ोंं-.ड़ोंं'ःड़ोंं,ड़ोंं.ं
का चयनकरनेके प्रयोजनके लिंए यातो सेवानियमोंके असीमया अन्यथागठित्तकोड़ोंंड़ोंं' ।ँ3
. है, ऐसीसीमात्तकअौंरऐसीरीतिमें, जैसीवह आवश्यकसमझे,अनुसून्नित्तज़ात्तिर्योंं,.ं'ःड़ोंंड़ोंं'ॊ
जनजातियोंऔर अग्रपिछड़े वर्गोंके अधिकारियोंका नाप-निर्देश्ग्ऩकरने के लिंए ठपबंं ऱ
कर सकेगोंं."ड़ोंं
मईूधाग१४-क्रका ७. मूल अधिनियमको धारा१४ के पश्चात्त्ड़ोंंनिभत्तिखित्तघाराअंतःर्स्थापित्तकी जाए अर्थाव् ःड़ोंंअतःर्स्थाप्पन्ग्.
ड़ोंं नियुक्तिपाधिकांगै 'ः'ॊ१४-कड़ोंंप्रर्त्यकनियुक्तिप्राधिकारी,उसके द्वाराजारीकिए जानेबाले नियुबित्तआदेशपर एक प्रमाग्ग्र्ड़ोंंड़ोंंट्रू-ड़ोंंड़ोंं'हुँद्वाराप्रमाणीकरण- पत्रइसआशयका पृर्ष्याकऩकौगाकि उसनेमध्यप्रदेशलौक सेवा (अनुसूचितजातियों,अनुसूद्धित्तट्रूड़ोंं
जनजातियोंऔर अंन्यपिछड़े वर्गोंके सिए आरक्षण)'ॊअधिनिंंयमः१९९४ (क्रमांक२ः१सच्ड़ोंं'ःड़ोंं- १९९४) के उपबंधों का और अघिनियमके उपबंंघों के प्रकाशमँ राणा सरकारद्वाराज़ारो ,ं-
क्रिएअनुदेशोंका अनुपालनक्रियाहै तथाउसै उवचअधिनियमकी धारा६ कौ उपधारा(ें९)के उपबंधोंका पूर्णसंज्ञानहै.'ॊ. ड़ोंंड़ोंं
भोपाल,दिनांक7पई 2002
(ेंअनुसून्विऩजातियों,अनुसूचित्तजनजातियोंऔरअन्यपिछड़ेवर्गोंके सिएआरक्षण)संशोघनअधिनियम,2002(क्रंपांक़।़, सत्तू2002)
का अंग्रेजीअनुवादसव्यपारवके प्राधिकारस्रेएत्तद्द्बारापकाशित्तकियाजाताहै.
पधाप्रदेशके सञ्यपाज्ञके नापस्रेड़ोंंत्तथाआदेशानुसार,
आर.कै. श्रोवारत्तव,उपसचिव.
थिंढींछार्णंआीउँथिंरैर्र्ताग़त्र्-त्र्र्चिड़ोंंहींःड़ोंंगां
भिं0.।ँ00|ेरूँ2002
ड़ोंं'ॊ'ः।ँ'ः'ॊ।ँ।ँड़ोंं ः'र्स्थाड़ोंंध्र्स्ट्टि0पिं ाँआॊथिंत्र्क्षेप्गिंहुँउेँत्रिं'ॊ.ड़ोंं0|ै(ैउेँप्त्र्ण्हींः(ेंर्र्ताश्चण्उंण्टाड़ोंंण्ग्ड़ोंं]हैंंंर्र्गाषाप्र्ग्र्भि,क्षेम्बिंण्ठेंण्ट्टुनिंंप्र्ग्ड़ोंं
, ]क्षोआंेंड़ोंंआौँड़ोंंथिं0भिंक्षेण्द्दि.श्राफीन्धिथिंट़घ्रार्क्कि-छाट्टुआंेंड़ोंंप़र्र्ंदृप्र्छार्ध्यों।ँग्र्ट़प्ड़ोंंर्र्गार्डिंआंेंरैहींःरिंआाग्र्क्स्किभिंड़ोंं
उेँठीम्पिंउँर्निछाप्रांड़ोंंप्र्स्फिर्र्गाक्षोंप्गिंड़ोंंग्र्ग्र्क्स्किथिंर्स्थाण,2002,
ड़ोंं 'ःआाआात्र्0ॉ 00साः|ः3र्र्गा5
ड़ोंं36र्शा0ण्5 ः
ष्ठाषणप्प्डॅ|ै।ँ0भर्र्ता(ेंप्र्आाग्गाटड़ोंंप्फ्ण्णग़आप्.
क्षाग़ठार्थ्यागाआप्र्0ॉ उंढआंंआा2.
आंेंग़आघंंगाणार0ॉ 36रन्|येँ0ड़ोंंप्न3दृ
छाग़ड्रिड़ोंंर्र्गाग्राआप्0ॉ ष्ठट़क्षांआा4.
क्षाग़आापंगाथ्राप्0ॉ 5०क्षां0ग्|ै6.
3र|प्35घ्रा७प् ां0प्न0ॉ'50आंं0प्न8.
.'"।ँ.ऍःड़ोंंप्र्स्फि,ड़ोंं ः'ःह्ड़ोंंड़ोंं.ड़ोंंड़ोंं.''ः 'ॊ ा|ै50 ा'ःप्र्0|ग्र्गांग़एआाष्ठटक्षांणा[4ड़ोंंहींः
क्र.3295-220*इवकौस_अ(प्रा.)ड़ोंंड़ोंं-भारलके संंचिथापके अनुजोंद़348के खण्ड(ै3)ड़ोंंके अनुसरणमें मव्यप्रदैशलौक सेवा 'ॊत्र्ण्ड़ोंं
पव्यप्रदेशराजपत्र,दिनांक7पई 2002 ड़ोंं.ं ' 430(ै3)
।आँ।े छ़।।षाड़ोंंष्र्र्शिंरै/ब्रै।।)।े3।।_।े(ेंप्र्ग्ड़ोंं'ः
र्भि0।00।न्2002
।ड़ोंंछाट्टु।भांर्र्ताप्रैउेँरिर्धिथिंत्र्/उेँछ़ध्र्स्ट्टिउंपिंग्र्.0'ॊ(ैअत्र्ण्/त्र्(ेंहींःम्पिंण्ष्ठड़ोंंण्ट़र्रित्र्ग्']।यैंज़ाप्र् ाँ0र्भिर्ंआंेंर्षांण्अप्र्टा'ग़ग्ड़ोंं
.।मःण्भैंहैंंंक्षीप्र्ग्षाध्त्र्र्भिद्गीण्रि।आॊर्नंष्/त्र्ष्टाड़ोंंअनूँम्रार्टीछात्र्षाश्चार्ट्रे00थिं]र्ंष्टहैंंं।आंंट्टुहींःप्र्श्लैड़ोंंर्रिअ'प्र्ड़ोंंमैआंें
* श्चै/आौँभैंष्ठऩदृप्रैप्रिपिंक्षांश्चक्षोछ़छ़ण्र्षीळे/प्र्ण.2002
प्रिसदे।शआंं'ः'ॊ|ै६'।।आाआआी0।'।।।०(ेंन्पापद़गाणणा।।ँ।'ः.ंआप।ड़ोंंश्चाणोँड़ोंं2002डु।।.ध्ट्टआध्।।।ट़त्त्ध्।)पांमांंड़ोंंर्धछार्थ।।।।।।०''ॊ'र्र्गाम्रर्पीण्ऱसश्विर्र्दोग्र्'आी(ैन्द्घृप्द्धग्रांगः
।।।।
('ॊन्ड़ोंंड़ोंंआा। 'ः'।।।।ँघागा")(।ँ।।०१।।ध्रीसग्घीप्रिंम्रड़ोंंप्र्2002]
।।पां ।0१प्राड़ोंंग्र्||ैर्प।।।8र्थिछ़यंस्ट्टिट्।ड़ोंंप्ड़ोंंआंध्र्श्वांप्प्र्ग्रांर88।72!(ेंग़ध्र्स्ट्टिण्थ्रीर्दि]भ्रांग्र्क्स्किआक्षो।।।।3।।0।ँ।।'ः]ड़ोंंय़पांग्र्आंेंअणाक्षीण
।े।७2 पिंर्टार्मंप्ष्ठघंंण्भ्रछ़प्र्'ट्ठाघ्रा'ॊ(ै'ःट्रे।े।र्र्गाहींःधांग्हैंंंध्रीत्र्गा)ड़ोंंड़ोंंर्र्र्पीघंंपांड़ोंंफुग्र्क्स्किण्ग़।994.
।30।।0।़।१0।0(।।।)।।।0।र्ष्याशआीर्र्ता।ड़ोंं।'ः१।'ॊ05ड़ोंं।ँ।।.6प्रु।5।ँ8।।।।0।।।[।ँ।0र्गिध्र्स्ट्टि-।।।र्र्गा)6१! 0 ड़ोंं।।।०।त्र्णाआॊक्खि0।
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' ।.(|ै) ग्।।।5में।प्रा।।।टाष्ठ्री।।।:आ।ँप्र्आंं।।।8र्स्थार्र्गाग्र्क्स्किष्ठश्चिआंंद्दड़ोंंड़ोंंथ्रीचूँड़ोंंर्घाध्र्86णा(।फ्रैड़ोंंप्नण्डुण्टांगंप्।भ्रांर्र्गाग़,'ःध्र्स्ट्टि।।।5।।0|ै।।।
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नियंत्रक,मुंंप्नणबधालेखनसामग्री,पव्यप्नदेशद्वार।श्ण्सफॉयकेन्द्रीयमुंंद्गणाह्मांग्र्क्स्किन्ड़ोंंमां र्पाड़ुंशःप्द्रूड़ोंंड़ोंंड़ोंंड़ोंंड़ोंंहुंंट्र्ज्यिड़ोंंड़ोंंड़ोंंड़ोंं *
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Lex