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The Workmen Compensation Act, 1923

Chhattisgarh · state statute
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कमर्चारी पर्ितकर अिधिनयम, 1923 
(1923 का अिधिनयम संख्यांक 8)1 
[5 माचर्, 1923] 
िनयोजन के  कितपय वगᲄ ᳇ारा अपने 2[कमर्चािरयᲂ] को दुघर्टना ᳇ारा हुई  
क्षित के  िनिमᱫ पर्ितकर का संदाय िकए जाने  
का उपबंध करने के  िलए  
अिधिनयम 
अतः यह समीचीन है िक िनयोजकᲂ के  कितपय वगᲄ ᳇ारा अपने 3[कमर्चािरयᲂ] को दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित के िनिमᱫ पर्ितकर 
का संदाय िकए जाने का उपबंध िकया जाए;  
अतः एत् द᳇ारा िनम् निलिखत रूप से यह अिधिनयिमत िकया जाता हैः— 
अध्याय 1 
पर्ारिम्भक 
1. संिक्षप् त नाम, िवस्तार और पर्ारम्भ—(1) यह अिधिनयम 4[कमर्चारी] पर्ितकर अिधिनयम, 1923 कहा जा सकेगा । 
5[(2) इसका िवस्तार 6*** सम्पूणर् भारत पर है ।] 
(3) यह 1924 की जुलाई के पर्थम िदन को पर्वृᱫ होगा । 
2. पिरभाषाएं—(1) इस अिधिनयम मᱶ, जब तक िक िवषय या संदभर् मᱶ कोई बात िवरु᳍ न हो,— 
 7*     *     *    *  
 (ख) “आयुक् त” से धारा 20 के अधीन िनयुक् त कमर्कार पर्ितकर आयुक् त अिभपर्ेत है; 
 (ग) “पर्ितकर” से इस अिधिनयम ᳇ारा यथा उपबंिधत पर्ितकर अिभपर्ेत है; 
 8[(घ) “आिशर्त” से मृत कमर्कार के िनम् निलिखत नातेदारᲂ मᱶ से कोई अिभपर्ेत है, अथार्त्:— 
(i) िवधवा, अपर्ाप् तवय 9[धमर्ज या दᱫक ] पुतर्, और अिववािहता 9[धमर्ज या दᱫक ] पुतर्ी, या िवधवा                 
माता; तथा  
(ii) पुतर् या प ुतर्ी िजसने 18 वषर् की आय ु पर्ाप् त कर ली ह ै और जो िशिथला ंग है, यिद वह कम र्कार की 
मृत्यु के समय उसके उपाजर्नᲂ पर पूणर्तः आिशर्त था या थी; 
(iii) (क) िवधुर; 
(ख) माता-िपता िजसके अन्तगर्त िवधवा माता नहᱭ आती है; 
(ग) अपर्ाप् तवय अधमर्ज पुतर्, अिववािहता अधमर्ज पुतर्ी, या यिद िववािहता है और अपर्ाप् तवय है या यिद 
िवधवा है और अपर्ाप् तवय है तो पुतर्ी चाहे वह 10[धमर्ज हो या अधमर्ज या दᱫक;] 
(घ) अपर्ाप् तवय भाई, या अिववािहता बहन, या िवधवा बहन यिद वह अपर्ाप् तवय है; 
                                                 
1 इस अिधिनयम का गोवा, दमण और दीव पर 1962 के  िविनयम सं० 12 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा; दादरा और नागर हवेली पर 1963 के  िविनयम सं० 6 की धारा 
 2  और अनुसूची 1 ᳇ारा तथा  पांिडचेरी मᱶ 1963 के  िविनयम स ं० 7 की धारा 3 और अन ुसूची 1 ᳇ारा तथा लक्कादीव, िमिनकोय और अमीनदीवी ᳇ीप पर 1965 के  
 ि व ि न य म  सं० 8 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा, िवस्तार िकया गया है । 
  ि श क्ष ु अिधिनयम, 1961 (1961 का 52) के  अधीन िशक्ष ुᲐ को लाग ू होने के  संबंध मᱶ इस अिधिनयम को उस अिधिनयम की धारा 16 और अन ुसूची ᳇ारा 
 उपान्तिरत िकया गया ह ै ।  
2 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 2 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
3 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
4 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
5 िविध अनुक ूलन आदेश, 1950 ᳇ारा उपधारा (2) के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
6 1970 के  अिधिनयम सं० 51 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (1-9-1971 से) “जम्मू-कश्मीर राज्य के  िसवाय” शब्दᲂ का लोप िकया गया ।  
7 1959 के  अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) खंड (क) का लोप िकया गया ।  
8 1959 के  अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) पूवर्वतᱮ खंड के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
9 1995 के  अिधिनयम सं० 30 की धारा 2 ᳇ारा (15-9-1995 से) “धमर्ज” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
10 1995 के  अिधिनयम सं० 30 की धारा 2 ᳇ारा (15-9-1995 से) “धमर्ज या अधमर्ज” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
 2
(ङ) िवधवा पुतर्-वधु; 
(च) पूवर्मृत पुतर् की अपर्ाप् तवय संतान; 
(छ) पूवर्मृत पुतर्ी की अपर्ाप् तवय संतान, यिद उस संतान के माता-िपता मᱶ से कोई भी जीिवत नहᱭ है; 
(ज) जहां 1[कमर्चारी] के माता-िपता मᱶ से कोई भी जीिवत नहᱭ है वहां िपतामह और िपतामही; 
यिद वह 1[कमर्चारी] की मृत्यु के समय उसके उपाजर्नᲂ पर पूणर्तः या भागतः आिशर्त था या थी;] 
 2[स्पष् टीकरण—उपखंड (ii) और उपखंड ( iii) की मद (च) और मद (छ) क े पर्योजनᲂ के िलए, प ुतर्, पुतर्ी या स ंतान के पर्ित 
िनदᱷशᲂ के अंतगर्त कर्मशः दᱫक पुतर्, पुतर्ी या संतान है ;] 
   3[(घघ) “कमर्चारी” से ऐसा कोई ᳞िक् त अिभपर्ेत है, जो— 
(i) रेल अिधिनयम, 1989 (1989 का 24) की धारा 2 के खंड (34) मᱶ यथापिरभािषत ऐसा रेल कमर्चारी 
है, जो िकसी र ेल के िकसी पर्शासिनक िजला या उपख ंड कायार्लय म ᱶ स्थायी रूप स े िनयोिजत नहᱭ ह ै और िकसी 
ऐसी हैिसयत मᱶ िनयोिजत नहᱭ है, जो अनुसूची 2 मᱶ िविनिदष् ट है; अथवा  
(ii) (क) िकसी पोत का मास्टर, नािवक या कमᱮदल का अन्य सदस्य है; 
(ख) िकसी वायुयान का केप्टन या कमᱮदल का अन्य सदस्य है; 
(ग) िकसी मोटर यान के संबंध मᱶ डर्ाईवर, हेल्पर, मैकिनक, क्लीनर के रूप मᱶ या िकसी अन्य ह ैिसयत मᱶ 
भतᱮ िकया गया ᳞िक् त है; 
(घ) ऐसा कोई ᳞िक् त है जो िकसी कंपनी ᳇ारा िवदेश मᱶ काम करने के िल ए भतᱮ िकया जाता है, 
और जो भारत के बाहर िकसी ऐसी ह ैिसयत मᱶ जो अन ुसूची 2 मᱶ िविनिदष् ट है िनयोिजत है , और, यथािस्थित, ऐसा पोत, 
वायुयान या मोटर यान अथवा कंपनी भारत मᱶ रिजस्टर्ीकृत है, अथवा 
(iii) िकसी ऐसी ह ैिसयत मᱶ िनयोिजत है, जो अनुसूची 2 मᱶ िविनिदष् ट है, चाहे िनयोजन की संिवदा इस 
अिधिनयम के पािरत िकए जान े स े प ह ले य ा  उ स के प श्  चात् क ी  ग ई  थ ी  औ र  च ा हे ऐ स ी  संिवदा अिभ᳞क् त या 
िवविक्षत हो, मौिखक या िलिखत मᱶ हो; िकतु इसमᱶ ऐसा कोई ᳞िक् त सिम्मिलत नहᱭ है, जो संघ के सशस् तर् बलᲂ के  
सदस्य की हैिसयत मᱶ कायर् कर रहा है और िकसी कमर्चारी के पर्ित िनदᱷश मᱶ, जो आहत हो गया हो, जहां कमर्चारी 
की मृत्यु हो गई ह ै, उसके आिशर्तᲂ या उनमᱶ से िकसी के पर्ित िनदᱷश सिम्मिलत है;] 
(ङ) “िनयोजक” के अन्तगर्त कोई ᳞िक् त-िनकाय, चाहे वह िनगिमत हो या नहᱭ, और िनयोजक का कोई 
पर्बंध अिभकतार् और म ृत िनयोजक का िविधक पर्ितिनिध आता ह ै, और जब िक कम र्कार की स ेवाएं उस ᳞िक् त 
᳇ारा, िजसके साथ 1[कमर्चारी] ने सेवा या िशक्षुता की कोई संिवदा की है, अन् य व् यिक् त को अस्थायी तौर पर उधार 
दे दी गई ह ᱹ या भाड़े पर दी गई ह ᱹ वहां “िनयोजक” से जब तक वह 1[कमर्चारी] उसके िलए काम करता रहता ह ै, 
वह अन्य ᳞िक् त अिभपर्ेत है; 
(च) “पर्बंध अिभकतार्” से कोई ऐसा ᳞िक् त अिभपर्ेत है जो िकसी अन्य ᳞िक् त का ᳞वसाय या कारबार 
चलाने के पर्योजन के िलए ऐस े अन्य ᳞िक् त के पर्ितिनिध के रूप म ᱶ िनयुक् त है या काय र् कर रहा ह ै, िकन्तु इसके  
अन्तगर्त िनयोजक4 के अधीनस्थ ᳞िष् टक पर्बंधक नहᱭ आता; 
5[(चच) “अपर्ाप् तवय” से वह ᳞िक् त अिभपर्ेत है िजसने अᲶारह वषर् की आयु पर्ाप् त नहᱭ की है;] 
(छ) “आंिशक िनःशक् तता” से जहां वह, िनःशक् तता अस्थायी पर्कार की है वहां ऐसी िनःशक् तता अिभपर्ेत 
है िजससे कमर्कार की उस िनयोजन म ᱶ उपाजर्न सामथ्यर् कम हो जाती ह ै, िजसमᱶ वह उस द ुघर्टना के समय िजसके 
पिरणामस्वरूप िनःशक् तता हुई, लगा हुआ था, और जहां िक िनःशक् तता स्थायी पर्कार की है वहां ऐसी िनःशक् तता 
अिभपर्ेत है, िजससे हर ऐसे िनयोजन मᱶ उसकी उपाजर्न-सामथ्यर् कम हो जाती ह ै िजसे गर्हण करने के िलए वह उस 
समय समथ र् थ ा ः  प र न् तु 6[अनुसूची 1 भ ा ग  2 म ᱶ] ि व ि न ि द ष्  ट हर क्षित क े ब ा रे म ᱶ य ह  स म झ ा  ज ा ए ग ा  ि क  उ स के 
पिरणामस्वरूप स्थायी आंिशक िनःशक् तता होती है; 
(ज) “िविहत” से इस अिधिनयम के अधीन बनाए गए िनयमᲂ ᳇ारा िविहत अिभपर्ेत है; 
                                                 
1 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 5 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
2 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 2 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत ।  
3 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 6 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 
4 1959 क े  अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) अंतःस्थािपत ।  
5 इस अिधिनयम का बंगाल को लागू होने के  िलए कमर्कार पर्ितकर (बंगाल संशोधन) अिधिनयम, 1942 (1942 का 6) की धारा 3 ᳇ारा नया खंड (चच) अंतःस्थािपत ।  
6 1962 के  अिधिनयम सं० 64 की धारा 2 ᳇ारा (1-2-1963 से) “अनुसूची 1 मᱶ” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
 3
(झ) “अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी” से अिभपर्ेत है िकसी 1[ऐसे केन्दर्ीय अिधिनयम, पर्ान्तीय अिधिनयम या 
िकसी 2[राज्य] के िवधान-मंडल के अिधिनयम] के अधीन, जो िचिकत्सा-᳞वसािययᲂ का रिजस्टर रखे जाने के िलए 
उपबंध करता ह ै, 3*** र ि ज स् टर् ी कृत कोई ᳞िक् त ,  य ा  ि क स ी  ऐ से क्ष ेतर् म ᱶ, जहा ं ऐ स ा  अ ि न् त म  व ि ण त  क ो ई  भ ी  
अिधिनयम पर्वृᱫ नहᱭ है, कोई ऐसा ᳞िक् त, िजसके बारे मᱶ राज्य सरकार ने शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा 
घोिषत िकया है िक वह इस अिधिनयम के पर्योजनᲂ के िलए अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी है; 
4*    *     *    *  
(ट) “नािवक” से िकसी 5*** 6[पोत] के कमᱮदल का कोई ᳞िक् त अिभपर्ेत है, िकन्तु इसके अन्तगर्त 5*** 
6[पोत] का मास्टर नहᱭ आता; 
(ठ) “पूणर् िनःशक् तता” से ऐसी िनःशक् तता अिभपर्ेत है, चाहे वह अस्थायी पर्कार की हो या स्थायी पर्कार 
की, जो िकसी कम र्कार को ऐस े सब काम क े िल ए असमथर् कर द ेती ह ै, िजसे वह उस द ुघर्टना के समय, िजसके  
पिरणामस्वरूप ऐसी िनःशक् तता हुई थी, करने मᱶ समथर् थाः 
7[परन्तु अ नुसूची 1 के भ ा ग  1 म ᱶ ि व ि न ि द ष्  ट हर क्षित क े य ा  उ स के भ ा ग  2 म ᱶ ि व ि न ि द ष्  ट क्षितयᲂ क े  
समुच् चय के बारे मᱶ वहां जहां उपाजर्न-सामथ्यर् की हािन का संकिलत पर्ितशत, जैसा उक् त भाग 2 मᱶ उन क्षितयᲂ के  
सामने ि व ि न ि द ष्  ट ह ै, सौ या उसक े अ ि ध क  ह ो त ा  है, यह समझा जाएगा, िक उसक े पिरणामस्वरूप स्थायी प ूणर् 
िनःशक् तता हुई है;] 
(ड) “मजदूरी” के अ न् त गर्त ,  ि क स ी  य ा तर् ा भ ᱫे से या िकसी यातर्ा सम्बन्धी क े मूल्य से, या कम र्कार के  
िनयोजक ᳇ारा िकसी पᱶशन या भिवष्य-िनिध मᱶ िदए गए अिभदाय से, या कमर्कार के िनयोजन की पर्कृित के कारण 
उस पर हुए िकन्हᱭ िवश ेष ᳞यᲂ को प ूरा करने के  िलए उस े दी गई िकसी रािश स े िभन् न ऐसा िवश ेषािधकार या 
फायदा आता है, जो धन के रूप मᱶ पर्ाक्किलत िकया जा सकता है; 
 8*    *    *    *    *  
(2) िकसी स्थानीय पर्ािधकारी की या 9[सरकार की ओर से] कायर् करने वाले िकसी िवभाग की शिक् तयᲂ और कतर्᳞ᲂ के पर्योग 
और पालन के बारे मᱶ, जब तक िक पर्ितकूल आशय पर्तीत न होता हो, इस अिधिनयम क े पर्योजनᲂ के िलए यह समझा जाएगा िक वह 
ऐसे पर्ािधकारी या िवभाग का ᳞वसाय या कारबार है । 
10[(3) केन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार ऐसा करन े के अ प ने आ श य  क ी  क म  से कम तीन मास की स ूचना, राजपतर् म ᱶ 
अिधसूचना ᳇ारा, देने के  पश् चात्, िकसी ऐसी उपजीिवका म ᱶ िनयोिजत ᳞िक् तयᲂ के िकसी वगर् को, िजसके बारे मᱶ उसका समाधान हो 
गया ह ै ि क  व ह  प ि र संकटमय उपजीिवका ह ै, वैसी ही अिधस ूचना ᳇ारा, अन ुसूची 2 मᱶ ज ो ड़ स केगी और तद ुपिर इस अिधिनयम क े  
उपबंध, केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, उन राज्यक्षेतर्ᲂ के भीतर िजन पर इस अिधिनयम का िवस्तार है, या राज्य सरकार 
᳇ारा िकसी अिधसूचना की दशा मᱶ, ᳞िक् तयᲂ के ऐसे वगᲄ को राज्य के भीतर, लागू हᲂगेः 
परन्तु ऐ से ज ो ड़ ते समय, यथािस्थित, क ेन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार िनद ेश द े स केग ी  ि क  इ स  अ ि ध ि न य म  के उ प बंध 
᳞िक् तयᲂ के ऐसे वगᲄ को केवल िविनिदष् ट क्षितयᲂ के बारे मᱶ ही ल ाग ू हᲂगे ।] 
अध्याय 2 
11[कमर्चािरयᲂ] के  िलए पर्ितकर 
 3. पर्ितकर के िलए िनयोजक का दाियत्व—(1) यिद 12[कमर्चारी] को अपने िनयोजन से और उनके अनुकर्म मᱶ उद्भूत दुघर्टना 
᳇ारा वैयिक् तक क्षित कािरत होती है तो उसका िनयोजक इस अध्याय के उपबन्धᲂ के अनुसार पर्ितकर का देनदार होगाः 
 प र न् त ु िनयोजक— 
(क) िकसी ऐसी क्षित के बारे मᱶ िजसके पिरणामस्वरूप कमर्कार को 13[तीन] िदन से अिधक की कालाविध के िलए 
पूणर् या आंिशक िनःशक् तता नहᱭ रहती; 
                                                 
1 िविध अनुक ूलन आदेश, 1950 ᳇ारा “क ेन्दर्ीय िवधान-मंडल के या भारत के िकसी पर्ान्त मᱶ िकसी िवधान-मंडल के अिधिनयम” शब्दᲂ के स् थान पर पर्ितस्थािपत । 
2 िविध अनुक ूलन (सं० 3) आदेश, 1956 ᳇ारा “भाग क या भाग ख राज्य” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
3 1959 क े अिधिनयम स ं० 8 क ी  ध ा र ा  2 ᳇ारा ( 1-6-1959 से) िचिकत्सा अिधिनयम, 1858 के अधीन या इस े स ंशोधन करन े व ा ल ा  क ो ई  अ ि ध ि न य म ,  य ा” शब्दᲂ का लोप 
 िकया गया ।   
4 1933 क े अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा खंड (ञ) का लोप िकया गया ।  
5 1933 क े अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा “रिजस्टर्ीकृ त” शब्द का लोप िकया गया ।  
6 1933 क े अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा “िकसी ऐसे पोत” शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
7 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 2 ᳇ारा (1-2-1963 से) परन्तुक के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
8 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 6 ᳇ारा लोप िकया गया ।  
9 भारत शासन (भारतीय िविध अनुक ूलन) आदेश, 1937 ᳇ारा “सरकार” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
10 1995 क े अिधिनयम सं० 30 की धारा 2 ᳇ारा (15-9-1995 से) उपधारा (3) के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
11 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
12 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
13 1959 क े अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) “सात” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
 4
(ख) दुघर्टना 1[᳇ारा हुई िकसी क्षित के बारे मᱶ, िजसके पिरणामस्वरूप मृत्यु 2[या स्थायी पूणर् िनःशक् तता] नहᱭ हुई 
है], और जो पर्त्यक्षतः इस कारण से हुई मानी जा सकती है िक— 
   ( i) उसके होने के समय 3[कमर्चारी] पर मिदरा या औषिधयᲂ का असर था, अथवा 
  ( ii) 3[कमर्चारी] का क्ष ेम सुिनिश् चत करने के  पर्योजन के िलए अिभ᳞क् त रूप से िदए गए िकसी आद ेश 
या अिभ᳞क् त रूप से बनाए गए िकसी िनयम की अवज्ञा 3[कमर्चारी] ᳇ारा जान-बूझकर की गई थी, अथवा  
 (iii) कोई ऐसा रक्षोपाय या अन्य य ुिक् त, िजसके बारे मᱶ वह जानता था िक वह 3[कमर्चारी] का क्ष ेम 
सुिनिश् चत करने के पर्योजन के  िलए उपबिन्धत की गई ह ै, 3[कमर्चारी] ᳇ारा जानबूझकर हटाई गई थी या उसकी 
अवहेलना की गई थी, 4*** 
5*     *     *    *  
इस पर्कार देनदार नहᱭ होगा । 
6[(2) यिद अनुसूची 3 के भाग क मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िनयोिजत 3[कमर्चारी] को कोई ऐसा रोग लग जाता ह ै जो 
उस िनयोजन म ᱶ ि व ि श ष्  टतः होन े व ा ले उपजीिवकाजन्य रोग क े  रू प  मᱶ उस भाग म ᱶ ि व ि न ि द ष्  ट ह ै,  य ा  ि ज स  ि न य ो ज क  क ी  सेवा म ᱶ 
3[कमर्चारी] अनुसूची 3 के भाग ख मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ छह मास से अन्यून की िनरन्तर कालाविध के िलए (िजस कालाविध 
मᱶ िकसी अन्य िनयोजक के अधीन उसी ढंग के िनयोजन मᱶ सेवा की कालाविध सिम्मिलत नहᱭ होगी) िनयोिजत रहा है उस िनयोजक की 
सेवा मᱶ रहने के समय यिद उस े कोई ऐसा रोग लग जाता ह ै जो उस िनयोजन म ᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ 
उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है, या अनुसूची 3 के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ 3[कमर्चारी] को एक या अिधक िनयोजनᲂ की स ेवा 
मᱶ ऐसी िनरन्तर कालाविध के िलए जैसी ऐसे हर एक िनयोजन के बारे मᱶ केन्दर्ीय सरकार िविनिदष् ट करे, रहने के समय यिद कोई ऐसा 
रोग लग जाता ह ै जो उस िनयोजन म ᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग म ᱶ िविनिदष् ट है तो उस रोग के  
लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा क े अथर् के  अन्दर द ुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित ह ै और ज़ब तक िक तत्पर्ितक ूल सािबत 
नहᱭ कर िदया जाता तब तक दुघर्टना के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह उस िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत हुई हैः 
7[परन्तु यिद यह सािबत हो जाता है िक— 
(क) िकसी 3[कमर्चारी] को अन ुसूची 3 के भाग ग म ᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन म ᱶ एक या अिधक िनयोजकᲂ की 
सेवा मᱶ रहने के  समय कोई ऐसा रोग, जो उस िनयोजन म ᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के  रूप मᱶ उस भाग मᱶ 
िविनिदष् ट है, ऐसी िनरन्तर कालाविध क े दौरान लग गया ह ै जो उस िनयोजन क े िलए इस उपधारा क े अधीन िविनिदष् ट 
कालाविध से कम है, तथा  
(ख) वह रोग उस िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत हुआ है,  
तो ऐसे रोग के लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित हैः 
परन्तु य ह  भ ी  िक  य ि द  य ह  स ा िब त  ह ो  ज ा त ा  है िक कोई 3[कमर्चारी], िजसने अ नुसूची 3 के भा ग  ख  मᱶ ि व ि न ि द ष्  ट िकसी 
िनयोजन मᱶ िकसी िनयोजक के अधीन या उस अनुसूची के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ एक या अिधक िनयोजकᲂ के अधीन, 
उस िनयोजन के िलए इस उपधारा क े अधीन िविनिदष् ट िनरन्तर कालाविध क े िलए स ेवा की ह ै और उस े ऐसी स ेवा की समािप् त के  
पश् चात् कोई ऐसा रोग लग गया है जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ, यथािस्थित, उक् त भाग ख 
या उक् त भाग ग मᱶ िविनिदष् ट है और यह िक ऐसा रोग उस िनयोजन स े उद्भूत हुआ था तो उस रोग क े लगने के बारे मᱶ यह समझा 
जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित है ।] 
8[(2क )  य ि द  अ नुसूची 3 के भ ा ग  ग  मᱶ ि व ि न ि द ष्  ट िकसी िनयोजन म ᱶ िनयोिजत िकसी 3[कमर्चारी] को उस िनयोजन म ᱶ 
िविशष् टतः होने वाला कोई ऐसा उपजीिवकाजन्य रोग लग जाता ह ै, िजसके लगने के बारे मᱶ यह समझा जाता ह ै िक वह इस धारा क े  
अथर् के अन्दर द ुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित ह ै और ऐसा िनयोजन एक स े अिधक िनयोजकᲂ के अधीन था तो, ऐस े सब िनयोजक पर्ितकर का 
ऐसे अनुपात मᱶ संदाय करने के दायी हᲂगे जैसा आयुक् त उन पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे ।] 
(3) 9[क ेन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार ] िकसी भी वण र्न के िनयोजन को, ऐसा करन े के अपने आशय की कम स े कम तीन 
मास की सूचना, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, देने के पश् चात् अनुसूची 3 मᱶ िविनिदष् ट िनयोजनᲂ मᱶ वैसी ही अिधसूचना ᳇ारा, 
                                                 
1 1933 क े  अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा “से होने वाली िकसी कमर्कार को क्षित” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
2 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत ।  
3 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
4 1929 क े  अिधिनयम सं० 5 की धारा 2 ᳇ारा “अथवा” शब्द का लोप िकया गया । 
5 1929 क े  अिधिनयम सं० 5 की धारा 2 ᳇ारा खंड (ग) का लोप िकया गया । 
6 1959 क े  अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) उपधारा (2) और (3) के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
7 1962 क े  अिधिनयम सं० 64 की धारा 3 ᳇ारा (1-2-1963 से) अन्तःस्थािपत । 
8 1962 क े  अिधिनयम सं० 64 की धारा 3 ᳇ारा (1-2-1963 से) उपधारा (2क) के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
9 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
 5
जोड़ सकेगी और इस पर्कार जोड़े गए िनयोजनᲂ के  बारे मᱶ उन रोगᲂ को िविनिदष् ट करेगी, िजनके बारे मᱶ इस धारा के  पर्योजनᲂ के िलए 
समझा जाएगा िक व े कर्मशः उन िनयोजनᲂ म ᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग ह ᱹ और तद ुपिर उपधारा ( 2) के उपबन्ध, 
1[क ेन्दर्ीय सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, उन राज्यक्षेतर्ᲂ के भीतर िजन पर इस अिधिनयम का िवस्तार है, या राज्य सरकार ᳇ारा 
अिधसूचना की दशा म ᱶ, राज्य के भीतर] 2*** ऐसे लागू हᲂगे मानो इस अिधिनयम ᳇ारा यह घोिषत िकया गया था िक व े रोग उन 
िनयोजनᲂ मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग हᱹ ।] 
(4) उपधाराᲐ 3[(2), (2क)] और (3) ᳇ारा यथा उपबिन्धत के िसवाय िकसी रोग के  िलए कोई भी पर्ितकर 4[कमर्चारी] को 
तब तक स ंदेय न होगा जब तक िक रोग उसक े िनयोजन स े और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत दुघर्टना ᳇ारा हुई िकसी िविनिदष् ट क्षित के 
कारण से 5*** पर्त्यक्षतः हुआ नहᱭ माना जा सकता । 
(5) यिद 4[कमर्चारी] ने िनयोजक या िकसी अन्य ᳞िक् त के िवरु᳍ िकसी िसिवल न्यायालय म ᱶ िकसी क्षित के िलए नुकसानी 
का कोई वाद संिस्थत कर िदया है तो इसमᱶ की िकसी भी बात के  बारे मᱶ यह न समझा जाएगा िक वह 4[कमर्चारी] को उस क्षित के  िलए 
पर्ितकर पाने का कोई अिधकार पर्दान करती ह ै, और िकसी क्षित के िलए 4[कमर्चारी] ᳇ारा िकसी िविध-न्यायालय मᱶ नुकसानी के िलए 
कोई भी वाद न चल सकेगा,— 
 (क) यिद उसन े उस क्षित के बारे मᱶ पर्ितकर का कोई दावा आयुक् त के समक्ष संिस्थत कर िदया है, अथवा 
 (ख) यिद उस क्षित क े िलए पर्ितकर के संदाय का उपबन्ध करने वाला कोई करार  4[कमर्चारी] और उसके िनयोजन 
क े बीच इस अिधिनयम के उपबन्ध के अनुसार हो चुका है । 
6[4. पर्ितकर की रकम —(1) इस अिधिनयम क े उ प बंधᲂ के अ ध् य ध ी न  य ह  है ि क  पर् ि त क र  क ी  र क म  ि न म्  निलिखत होगी, 
अथार्त्:— 
 
  ( क )  ज ह ा ं िक क्षित के पिरणामस्वरूप मृत्यु हो 
 जाती ह ै 
मृत 4[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी को सुसंगत गुणक से गुणा 
करके पर्ाप् त रकम से 7[पचास पर्ितशत] के बराबर रकम; या  
 8[एक लाख बीस हजार] की रकम, इनमᱶ से जो भी अिधक हो; 
  ( ख )  ज ह ा ं िक क्षित के पिरणामस्वरूप स्थायी मतृ 4[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी को सुसंगत गुणक से गुणा 
 भी 
10[परंतु केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् म ᱶ अ ि ध सूचना ᳇ य पर, खंड (क) और ख ंड (ख) म ᱶ उ ि ल् ल ि ख त  
पर्ितकर क
 खंड (ख) के पर्योजनᲂ के िलए, िकसी 4[कमर्चारी] के संबंध मᱶ, “सुसंगत गुणक” से 
अनुसूची 
* * *   * 
   जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप स्थायी (i) ऐसी क्ष  की दशा मᱶ, जो अनुसूच  ाग 2  िविनिद
 है, 
                                                
 प ूणर् िनःशक् तता हो जाती है ।  करके पर्ाप् त रकम के  9[साठ पर्ितशत] के बराबर रकम; या  
8[एक लाख चालीस हजार रुपए ] की रकम, इनम ᱶ से जो 
अिधक हो :  
 ारा, समय-सम
ी रकम मᱶ वृि᳍ कर सकेगी ।] 
स्पष् टीकरण 1—खंड (क) और
4 के प
हले स्तंभ मᱶ की पर्िवष् ट के सामने उस अनुसूची के दूसरे स्तंभ मᱶ िविनिदष् ट गुणक अिभपर्ेत है, जो वषᲄ की उस 
संख्या को िविनिदष् ट करता है, जो 4[कमर्चारी] के, पर्ितकर देय होने की तारीख के ठीक पूवर्वतᱮ, अंितम जन्म िदवस को प ूणर् 
हुए वषᲄ की संख्या के बराबर है ।  
11* 
(ग) ित ी 1 के भ म ᱶ ष् ट 
 आंिशक िनःशक् तता हो जाती है है, उस पर्ितकर का, जो स्थायी प ूणर् िनःशक् तता की दशा म ᱶ संदेय 
होता, ऐसा पर्ितशत, जो उस क्षित ᳇ारा कािरत उपाज र्न-सामथ्यर् 
की हािन के पर्ितशत के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है, तथा 
(ii) ऐसी क्षित की दशा म ᱶ, जो अन ुसूची 1 मᱶ िविनिदष् ट नहᱭ
 
1 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत । 
2 1970 क े  अिधिनयम सं० 51 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (1-9-1971 से) कितपय शब्दᲂ का लोप िकया गया । 
3 1959 क े  अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) “उपधारा (2)” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
4 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
5 1933 क े  अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा “पूणर्तः और” शब्दᲂ का लोप िकया गया । 
6 1984 क े  अिधिनयम सं० 22 की धारा 3 ᳇ारा (1-7-1984 से) धारा 4 के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
7 1995 के  अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से) “चालीस पर्ितशत” के  स् थान पर पर्ितस् थािपत  
8 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
9 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से) “पचास पर्ितशत” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
10 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 
11 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा लोप िकया गया । 
 6
उ स  पर् ि त क र  क ा ,  ज ो  स्  थायी प ूणर् ि न ः श क्  तता की दशा म ᱶ स ंदेय 
होता, ऐसा पर्ितशत, जो उस क्षित ᳇ारा स्थायी रूप स े क ा ि र त  
उपाजर्न-सामथ्यर् क ी  ( जैसे अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी ᳇ारा 
िनधार्िरत िकया जाए) हािन का आनुपाितक हो ।  
से अिधक क्षितयां होती हᱹ, वहां इस शीषर्क के अधीनस्पष् टीकरण 1—जहां िक एक ही दुघर्टना से हक  संदेय पर्ितकर 
की रकम 
र्न-सामथ्यर् का िनधार्रण करन े म ᱶ, अिहत िचिकत्सा 
᳞वसायी
 (घ) जहां िक क्षित के प िरणामस्वरूप, चाहे 
 र् चाहे 
1[कमर्चारी] की मािसक मजद ूरी के प च्च ी स  पर् ि त श त  के स म तुल्य 
2[(1क) उपधारा (1) मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, आयुक् त  हुई िकसी दुघर्टना के संबंध मᱶ िकसी 1[कमर्चारी] 
को संदेय 
 धारा (1) के पर्योजनᲂ के िलए िकसी कम र्चारी के संबंध मᱶ ऐसी 
मािसक म
य, जो उस दशा मᱶ,— 
तता की तारीख से; अथवा 
ी पर्तीक्षा 
(क) िकसी ऐसी एकमुश्त रकम या अधर्-मािसक संदायᲂ मᱶ से, िजनका 1[कमर्चारी] हकदार है, िकसी संदाय या भᱫे 
की वह र 
क नहᱭ होगा, िजतनी स े 
घर्टना क 
 भᱫा, जो [कमर्चारी] ने ि चिकत्सा लेखे िनयोजक से पर्ाप् त िकया है, परन्तुक के  खंड (क) क े  
अथर् के अ
 के ᳇ारा उपगत वास्तिवक िचिकत्सा ᳞य की 
पर्ितपूित क
ख से पहले, िजसको कोई अध र्-मािसक संदाय शोध्य होता ह ै, िनःशक् तता के दूर हो जाने पर, उस अध र्-मास के  
िलए ऐसी
 क, उपधारा (1) के अधीन पर्ितकर 
क े अितिर
ᱶ वृि᳍ कर सकेगी ।] 
                                                
संकिलत कर ली जाएगी िकन्तु िकसी भी दशा मᱶ ऐसी नहᱭ होगी िक वह उस रकम स े बढ़ जाए, जो उन क्षितयᲂ के  
पिरणामस्वरूप स्थायी पूणर् िनःशक् तता होने की दशा मᱶ संदेय होती । 
स्पष् टीकरण 2—उपखंड ( ii) के पर् य ो ज न ᲂ  के ि ल ए  उ प ा ज
, अनुसूची 1 िविनिदष् ट िविभन् न क्षितयᲂ के संबंध मᱶ उपाजर्न-सामथ्यर् की हािन के पर्ितशत का सम्यक् ध्यान रखेगा; 
 
 
पूण आंिशक, अस्थायी 
िनःशक् तता हो जाती है । रकम 
का अधर्-मािसक संदाय उपधारा (2) के उपबन्धᲂ के अनुसार 
िकया जाएगा ।  
, भारत के बाहर 
पर्ितकर की रकम िनयत करत े समय उस द ेश की िविध के  अनुसार, िजसमᱶ दुघर्टना हुई थी, ऐसे 1[कमर्चारी] को अिधिनणᱮत 
की गई पर्ितकर की रकम को, यिद कोई हो, ध्यान म ᱶ रखेगा और अपने ᳇ारा िनयत की गई रकम म ᱶ से उस द ेश की िविध के अनुसार 
1[कमर्चारी] को अिधिनणᱮत की गई पर्ितकर की रकम को घटा देगा;] 
3[(1ख) केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् म ᱶ अिधसूचना ᳇ारा, उप
जदूरी िविनिदष् ट कर सकेगी, जो वह आवश्यक समझे ।] 
(2) उपधारा (1) के खंड (घ) मᱶ िनिदष् ट अधर्-मािसक संदा
 ( i) िजसमᱶ िक ऐसी िनःशक् तता अᲶाईस िदन या उससे अिधक रहती है, िनःशक् 
 ( ii) िजसमᱶ िक ऐसी िनःशक् तता अᲶाईस िदन से  कम रहती ह ै, िनःशक् तता की तारीख स े तीन िदन क
कालाविध के अवसान के पश् चात् सौलहवᱶ िदन को और तत्पश् चात् िनःशक् तता के दौरान या पांच वषर् की कालाविध के दौरान 
इनसे से जो भी कालाविध लघुतर हो, आधे-आधे मास पर संदेय होगाः 
परन्तु— 
कम काट ली जाएगी, जो 1[कमर्चारी] ने, यथािस्थित, ऐसी एकम ुश्त रकम की या पर्थम अध र्-मािसक संदाय की 
पर्ािप् त से पूवर्, िनःशक् तता की कालाविध के दौरान पर्ितकर के रूप मᱶ िनयोजक से पर्ाप् त की है; तथा 
 (ख) कोई भी अध र्-मािसक संदाय िकसी भी दशा म ᱶ इतनी रकम स े, यिद कोई हो, अिध
दु े  पहले 1[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी की आधी रकम उस मजद ूरी की आधी रकम से अिधक है, िजसे वह दुघर्टना 
क े पश् चात् उपािजत कर रहा है । 
स्पष् टीकरण—ऐसा कोई संदाय या 1
न्दर पर्ितकर के रूप मᱶ उसके ᳇ारा पर्ाप् त संदाय या भᱫा न
हᱭ समझा जाएगा ।  
3[(2क) कमर्चारी को िनयोजन के दौरान कािरत क्षितयᲂ के उपचार के िलए उस
ी जाएगी ।] 
(3) उस तारी
 रािश संदेय होगी जो उस अधर्-मास मᱶ िनःशक् तता की अिस्तत्वाविध की आनुपाितक हो । 
2[(4) यिद 1[कमर्चारी] को हुई क्षित के पिरणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो जाती है, तो िनयोज
क् त, आयुक् त के पास ऐस े 1[कमर्चारी] की अ ंत्येिष् ट के ᳞य के िलए 1[कमर्चारी] के सबसे बड़े उᱫरजीवी आिशर्त को, अथवा 
जहां 1[कमर्चारी] का कोई आिशर्त नहᱭ ह ै या वह अपनी म ृत्यु के समय अपन े आिशर्तᲂ के साथ नहᱭ रह रहा था वहा ं उस ᳞िक् त को, 
िजसने वास्तव मᱶ ऐसा ᳞य उपगत िकया है, संदाय के िलए 4[पांच हजार रुपए से अन्यून] की रािश जमा करेगा ।] 
5[परन्तु केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, समय-समय पर इस उपधारा मᱶ िविनिदष् ट रकम म
 
1 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
) अंतः स्थािपत । 2 1995 क े अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से
3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 
4 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
5 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 
 7
1[4क. शोध्य हो जाने पर पर्ितकर का िदया जाना और ᳞ितकर्म क े िलए शािस् त—(1) धारा 4 के अधीन पर्ितकर शोध्य होत े 
ही दे िदया जाएगा । 
ितगृहीत करता है उस पर आधृत अनिन्तम संदाय करने के िलए वह आब᳍ होगा और ऐसा संदाय, कोई अितिरक् त 
दावा कर
ी  अ ि ध क त म  द र ᲂ  से अ न ि ध क  ऐ स ी  उ च्  चतर दर से, जो क ेन्दर्ीय सरकार ᳇ारा, राजपतर् म ᱶ 
अिधसूचन
श का शािस्त के रूप मᱶ संदाय 
करेगाः  
िदए िबना पािरत नहᱭ िकया जाए
गा िक उसे क्यᲂ न पािरत िकया जाए । 
 मजदूरी” पद से इस अिधिनयम मᱶ और इसके पर्योजनᲂ के  िलए 
एक मास ध 
क े िहसाब
 वां भाग 
होगी, जो
  मजदूरी वह औसत 
मािसक र
रना सम्भव नहᱭ ह ै)] मािसक मजदूरी उस िनयोजक स े, जो पर्ितकर का द ेनदार 
है, द ुघर्टन
ुपिस्थित
-कालाविध के िलए िवच्छेद 
नहᱭ हुआ है, 12[इस 
                                                
(2) 
िजन दशाᲐ मᱶ िनयोजक पर्ितकर क े िलए दाियत्व दावाकृत िवस्तार तक पर्ितगृहीत नहᱭ करता उनमᱶ िजस पर्कार िवस्तार 
तक का दाियत्व वह पर्
ने के सम्बन्ध म ᱶ 2[कमर्चारी] के अिधकार पर पर्ितक ूल पर्भाव डाल े िबना, यथािस्थित, आय ुक् त के पास िनिक्षप् त कर िदया 
जाएगा या 3[कमर्चारी] को दे िदया जाएगा ।] 
3[(3) जहां कोई िनयोजक इस अिधिनयम के अधीन शोध्य पर्ितकर को उसके शोध्य हो जाने की तारीख से एक मास के भीतर 
देने मᱶ ᳞ितकर्म करता है, वहां आयुक् त— 
(क) यह िनदेश देगा िक िनयोजक, बकाया रकम के अितिरक् त, उस पर बारह पर्ितशत पर्ितवष र् की दर से या िकसी 
अनुसूिचत बᱹक की उधार द ेने क
ा ᳇ारा, ऐसी शोध्य रकम पर िविनिदष् ट की जाए, साधारण ब्याज का संदाय करेगा; 
(ख) यिद उसकी यह राय है िक िवलम्ब के िलए कोई न्यायोिचत्य नहᱭ है तो, यह िनदेश देगा िक िनयोजक, बकाया 
रकम और उस पर ब्याज के अितिरक् त ऐसी रकम क े पचास पर्ितशत से अनिधक अितिरक् त राि
परन्तु शािस्त के संदाय के  िलए कोई आद ेश, खंड (ख) के अधीन िनयोजक को यह ह ेतुक दिशत करने का युिक् तयुक् त अवसर 
स्पष् टीकरण—इस उपधारा के पर्योजनᲂ के िलए, “अनुसूिचत बᱹक” से ऐसा बᱹक अिभपर्ेत है जो तत्समय भारतीय िरजव र् बᱹक 
अिधिनयम, 1934 (1934 का 2) की ि᳇तीय अनुसूची मᱶ सिम्मिलत हᱹ । 
4[(3क) उपधारा (3) के अधीन संदेय ब्याज और शािस्त, यथािस्थित, 3[कमर्चारी] या उसके आिशर्त को संदᱫ की जाएगी ।] 
 [5. मजदूरी का िहसाब करने की प᳍ित—5*** 6[“मािसक 
की सेवा के िलए संदेय समझी जाने वाली मजदूरी की रकम (चाहे वह मजदूरी मास के िहसाब से या िकसी भी अन्य कालावि
 से या मातर्ानुपाती दरᲂ से संदेय हो) अिभपर्ेत है, और िजसका िहसाब िनम् निलिखत रूप मᱶ िकया जाएगा], अथार्त्— 
(क) जहां िक 3[कमर्चारी] उस िनयोजक की, जो पर्ितकर का देनदार है, सेवा मᱶ दुघर्टना से ठीक पहले के बाहर मास 
से अन्यून की िनरन्तर कालाविध के दौरान रहा ह ै, वहां 3[कमर्चारी] की मािसक मजद ूरी उस कुल मजदूरी का बारह
 उस कालाविध के अिन्तम बारह मासᲂ मᱶ िनयोजक ᳇ारा उसे संदाय के िलए शोध्य हो गई है; 
7[(ख) जहां िक दुघर्टना से ठीक पहले की उस सेवा की सम्पूणर् िनरन्तर कालाविध, िजसके दौरान 3[कमर्चारी] उस 
िनयोजक की सेवा मᱶ था, जो पर्ितकर का द ेनदार है, एक मास स े कम थी वहा ं, 3[कमर्चारी] की मािसक
कम 8*** होगी िजसे उसी िनयोजक ᳇ारा उसी काम मᱶ िनयोिजत कोई 3[कमर्चारी], या यिद कोई 3[कमर्चारी] इस 
पर्कार िनयोिजत नहᱭ था, तो उसी पिरक्ष ेतर् मᱶ िकसी व ैसे ही काम म ᱶ िनयोिजत कोई 3[कमर्चारी] दुघर्टना से ठीक पहल े के  
बारह मास के दौरान उपािजत कर रहा था;] 
9[(ग)] 10[अन्य दशाᲐ म ᱶ (िजनके अन्तगर्त वे दशाए ं आती ह ᱹ, िजनमᱶ िक आवश्यक जानकारी क े अभाव म ᱶ खण्ड 
(ख) के अधीन मािसक मजद ूरी का िहसाब क
ा स े ठ ी क  प ह ले क ी  सेवा की अिन्तम िनरन्तर कालाविध क े ि ल ए  उ प ा ि ज त  कुल मजद ूरी को ऐसी कालाविध म ᱶ 
समािवष् ट िदनᲂ की संख्या से िवभािजत करने पर पर्ाप् त भजनफल की तीस गुनी होगी । 
11*     *     *    *  
स्पष् टीकरण—सेवा की ऐसी कालाविध, िजसमᱶ काम पर से चौदह िदन से अिधक की अन
1[धारा]] के पर्योजनᲂ के िलए िनरन्तर कालाविध समझी जाएगी । 
 
ंतःस्था िपत । 
) “उप धारा (3)” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
 ारा ( 1) के रू प  मᱶ प ुनःसंख्यांिकत िकया गया और 1938 के अिधिनयम स ं० 9 क ी  ध ा र ा  4 ᳇ारा 
 ा ( 30-6-1934 से) “इस अिधिनयम  के पर् य ो ज न  के ि ल ए  क मर्कार की मािसक मजद ूर ी  क ी  ग ण न ा  क ी  ज ा ए ग ी” के स् थ ा न  प र  
“समझी जाएगी” शब्दᲂ का लोप िकया गया ।  
 ािपत । 
1 1959 क े अिधिनयम सं० 8 की धारा 5 ᳇ारा (1-6-1959 से) अ
2 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
3 1995 क े अिधिनयम सं० 30 की धारा 5 ᳇ारा (15-9-1995 से
4 2000 के अिधिनयम सं० 46 की धारा 4 ᳇ारा (8-12-2000 से) पर्ितस्थािपत । 
5 1929  के अिधिनयम स ं० 5 क ी  ध ा र ा  3 ᳇ ा र ा  मूल धारा 5 को उसकी उपध
 “ (1)” कोष् ठकᲂ और अंक का लोप िकया गया । 
6 1939  के अिधिनयम स ं० 1 3 क ी  ध ा र ा  2 ᳇ार
 पर्ितस्थािपत । मोटे अक्षरᲂ मᱶ शब्द 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा “धारा 4” के स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
7 1933 क े अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।  
8 1939 क े अिधिनयम सं० 13 की धारा 2 ᳇ारा (30-6-1934 से) 
9 1933 क े अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा मूल खण्ड (ख) को (ग) के रूप मᱶ पुनः अक्षरांिकत िकया गया ।  
10 1959 क े अिधिनयम सं० 8 की धारा 6 ᳇ारा (1-6-1959 से) “अन्य दशाᲐ मᱶ” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
11 1933 क े अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा परन्तुक का लोप िकया गया ।  
12 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा “इस धारा” के  स्थान पर पर्ितस्थ
 8
2*     *     *     *  
6. पुनिवलोकन—(1) पक्षकारᲂ की बीच हुए िकसी करार क े अधीन के या आय ुक् त के आदेश के अधीन के ऐसे अधर्मािसक 
संदाय का 
साथ 
अिह 
 प ा य ा  ज ा ए  ि क  दुघर्टना के  
प ि र ण ा म स् 
 मᱶ से 
िकसी के ᳇
ता के अधीन ᳞िक् त को पर्ितकर के रूप म ᱶ एकमुश्त रािश का कोई भी स ंदाय 
आयुक् त क
र उतनी रकम], िजतनी उस आिशर्त को संदेय पर्ितकर से अिधक न हो, ऐसे पर्ितकर मᱶ से 
आयुक् त ᳇
 री] के बारे मᱶ पर्ितकर के रूप मᱶ] उपधारा (1) के अधीन िकसी धन के िनक्षेप पर, 8*** यिद 
वह आवश् नयत करे, अपने समक्ष 
उपसंजात 
  कर िदया जाएगा या आयुक् त 
क े स्विवव
ै स् तर्ी या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन ᳞िक् त नहᱭ ह ै, देगा और 
अन्य दशा
े या ऐसे ᳞िक् त की िनयᲃग्यता के दौरान उस ᳞िक् त के फायदे के िलए ऐसी रीित स े, जैसी आयुक् त ᳇ारा 
िनिदष् ट क
                                                                             
पुनिवलोकन, जो इस अिधिनयम क े अधीन संदेय है, आयुक् त ᳇ारा, या तो िनयोजक के या 3[कमर्चारी] के आवेदन पर, िजसके  
त िचिकत्सा-᳞वसायी का यह पर्माणपतर् होगा िक 4[कमर्चारी] की दशा म ᱶ तब्दीली हो गई ह ै, या इस अिधिनयम के अधीन 
बनाए गए िनयमᲂ के अध्यधीन रहते हुए, ऐसे पर्माणपतर् के िबना िकए गए आवेदन पर िकया जा सके गा । 
(2) कोई भी अधर्मािसक संदाय इस धारा के अधीन पुनिवलोकन पर, इस अिधिनयम के उपबन्धᲂ के अध्यधीन रहते हुए, चालू 
रखा जा सक ेगा, बढ़ाया जा सक ेगा, घटाया जा सक ेगा या समाप् त िकया जा सक ेग ा ,  य ा  य ि द  य ह
व रू प  स् थ ा य ी  ि न ः श क्  तता हो गई ह ै त ो ,  उ से ऐ स ी  ए क मुश् त  र ा ि श  मᱶ स ंपिरवितत िकया जा सक ेग ा  ।  ि ज स क ा  4[कमर्चारी] 
हकदार है, िकन्तु उस रािश मᱶ से ऐसी रकम कम कर दी जाएगी जो उसे अधर्मािसक संदायᲂ के रूप मᱶ पहले ही पर्ाप् त हो चुकी है । 
7. अधर्मािसक संदायᲂ का स ंराशीकरण—अधर्मािसक संदाय पर्ाप् त करने के िकसी अिधकार का मोचन, पक्षकारᲂ क े  बीच के  
करार ᳇ारा, या यिद पक्षकारᲂ म ᱶ करार नहᱭ हो पाता और स ंदाय कम से कम छह मास तक िकए जात े रहे हᱹ तो दोनᲂ पक्षकारᲂ
ारा आयुक् त को िकए गए आवेदन पर, ऐसी एकमुश्त रकम के संदाय ᳇ारा िकया जा सकेगा, जो, यथािस्थित, पक्षकारᲂ ᳇ारा 
करार पाई जाए या आयुक् त ᳇ारा अवधािरत की जाए । 
8. पर्ितकर का िवतरण—4[(1) िकसी ऐसे 4[कमर्चारी] के बारे मᱶ, िजसकी मृत्यु क्षित के पिरणामस्वरूप हो गई है, पर्ितकर का 
कोई भी संदाय और िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्य
े पास िनक्षेप करने से अन्यथा नहᱭ िकया जाएगा, और सीध े िनयोजक ᳇ारा कर िदए गए िकसी ऐस े संदाय के बारे मᱶ यह न 
समझा जाएगा िक वह पर्ितकर का संदाय हैः 
5[परन्तु मृत 4[कमर्चारी] की दशा मᱶ िनयोजक िकसी भी आिशर्त को 6[ऐसे 4[कमर्चारी] की तीन मास की मजद ूरी के  बराबर 
रकम का अिभदाय पर्ितकर म᳍े कर सकेगा औ
ारा काट ली जाएगी और िनयोजक को पर्ितसंदᱫ कर दी जाएगी ।] 
(2) दस रुपए स े अन्यून कोई अन्य ऐसी रािश, जो पर्ितकर क े  रूप मᱶ संदेय है, उस ᳞िक् त के िनिमᱫ, जो उसका हकदार ह ै, 
आयुक् त के पास िनिक्षप् त की जा सकेगी । 
(3) आयुक् त के पास िनिक्षप् त िकसी पर्ितकर के सम्बन्ध मᱶ आयुक् त की रसीद पयार्प् त उन्मोचन होगी । 
(4) आयुक् त 7[िकसी मृत 4[कमर्चा 
यक समझे तो आिशर्तᲂ को ऐसी तारीख को, िजस े वह पर्ितकर का िवतरण अवधािरत करन े के िलए ि
होने के िलए अपेिक्षत करने वाली सूचना का पर्काशन या हर एक आिशर्त पर उसकी तामील ऐसी रीित स े कराएगा जैसी वह 
उिचत समझे । यिद आय ुक् त का समाधान िकसी ऐसी जा ंच के पश् चात्, िजसे वह आवश्यक समझ े हो जाता ह ै िक कोई भी आिशर्त 
िव᳒मान नहᱭ है तो वह उस धन का अितश ेष उस िनयोजक को, िजसके ᳇ारा वह स ंदᱫ िकया गया था, पर्ितस ंदᱫ कर देगा । आयुक् त 
िकए गए सभी संिवतरणᲂ को िवस्तारपू्वर्क दिशत करते हुए एक िववरण िनयोजक के आवेदन पर देगा । 
9[(5) िकसी मृत 4[कमर्चारी] के बारे मᱶ िनिक्षप् त पर्ितकर, उपधारा (4) के अधीन की गई िकसी कटौती के अध्यधीन रहते हुए, 
मृत 4[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ मᱶ या उनमᱶ से िकन्हᱭ मᱶ ऐसे अनुपात मᱶ, िजसे आयुक् त ठीक समझे, पर्भािजत
ेकानुसार िकसी एक आिशर्त को आबंिटत िकया जा सकेगा । 
(6) जहां िक आय ुक् त के पास िनिक्षप् त िकया गया कोई पर्ितकर िकसी ᳞िक् त संदेय है वहां आयुक् त वह धन उसक े हकदार 
᳞िक् त को उस दशा म ᱶ िजसमᱶ िक वह ᳞िक् त िजससे पर्ितकर संदेय ह
Ა मᱶ दे सकेगा । 
(7) जहां िक आय ुक् त के  पास िनिक्षप् त कोई एकम ुश्त रािश िकसी स् तर्ी या िविधक िनयᲃग्यता क े  अधीन ᳞िक् त को संदेय है 
वहां, ऐसी रािश उस स् तर्ी क 
ी जाए, िविनिहत की जा सकेगी, उपयोिजत की जा सकेगी या अन्यथा बरती जा सकेगी, और जहां िक िविधक िनयᲃग्यता के  
अधीन ᳞िक् त को कोई अधर्मािसक संदाय संदेय है वहां, आयुक् त स्वपर्ेरणा से या इस िनिमᱫ अपने को िकए गए िकसी आवेदन पर, यह 
                                                                                   
1 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 4 ᳇ारा “उपधारा” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
2 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा जोड़ी गई उपधारा (2) का 1933 के  अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा लोप िकया गया । 
3 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
4 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा मूल उपधारा (1) से (3) तक के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
5 1933 क े  अिधिनयम सं० 15 की धारा 6 ᳇ारा परन्तुक के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
6 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 6 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
7 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 
8 1995 क े  अिधिनयम सं० 30 की धारा 6 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ का लोप िकया गया । 
9 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा मूल उपधारा (5) के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
 9
आदेश दे सकेगा िक स ंदाय उस िनयᲃग्यता के दौरान 1[कमर्चारी] के िकसी आिशर्त को या िकसी अन्य ऐस े ᳞िक् त को, िजस े आयुक् त 
1[कमर्चारी] के कल्याणाथर् उपबन्ध करने के िलए सबसे अिधक उपयुक् त समझे, िकया जाए ।] 
2[(8)] जहां िक इस िनिमᱫ अपने को िकए गए िकसी आवेदन पर या अन्यथा आयुक् त का समाधान हो जाता है िक पर्ितकर के  
प म ᱶ दी गई िकसी रािश क े ि व त र ण  के सम्बन्ध म ᱶ,  य ा  उ स  र ी ि त  के सम्बन्ध म ᱶ, िजसम ᱶरू  ऐ से ि क स ी  आ ि शर् त  क ो  संदेय कोई रािश 
िविनिहत 
का हेतुक दिशत करन े के िलए अवसर न दे िदया गया हो िक ऐसा आदेश क्यᲂ न िकया जाए, और न वह िकसी ऐसी दशा मᱶ 
िकया जा
 या अन्य अनुिचत साधनᲂ ᳇ारा अिभपर्ाप् त िकया गया ह ै, वहां ऐसे ᳞िक् त को या उसके िनिमᱫ इस पर्कार दी 
गई कोई र
ी पर्कार समनुिदष् ट या भािरत िकए जाने के योग्य या कु क᳹ 
क े दाियत्व
 के प
श् चात् यथासाध्य शीघर् उस रीित स े, जो इसमᱶ पश् चात् उपबिन्धत की गई ह ै, न दे दी गई हो 
और जब 
 जाएगा िक वह उन िदनᲂ म ᱶ से पहले िदन को हुई थी, िजनके दौरान 1[कमर्चारी] उस रोग ᳇ारा कािरत 
िनःशक् तत
णना उस िदन से की जाएगी िजसको 1[कमर्चारी] िनःशक् तता 
की सूचना
ए िनयोिजत िकए जा च ुकने पर, इस पर्कार िनयोिजत नहᱭ रह जाता और उस िनयोजन म ᱶ 
िविशष् टत
वा [कमर्चारी] की ऐसी द ुघर्टना के पिरणामस्वरूप हुई मृत्यु के बारे मᱶ 8[िकया] गया है जो िनयोजन के  
प े स्थान मᱶ हुई थी, जहां 1[कमर्चारी] दुघर्टना के समय िनयोजक या उसके ᳇ारा िनयोिजत िकसी ᳞िक् त 
क े िनयंतर्ण
                                                
की जानी, उपयोिजत की जानी या अन्यथा बरती जानी ह ै, आयुक् त के  आदेश मᱶ फे रफार, िकसी ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा, जो माता 
या िपता है संतान की उपेक्षा के कारण, या िकसी आिशर्त की पिरिस्थितयᲂ म ᱶ फे रफार के कारण, या िकसी अन्य पया र्प् त हेतुक से िकया 
जाना चािहए वहां, आयुक् त पूवर्वतᱮ आदेश मᱶ फे रफार के िलए ऐसे आदेश कर सकेगा, जैसे वह मामले की पिरिस्थितयᲂ म ᱶ न्यायसंगत 
समझे : 
परन्तु िकसी ᳞िक् त पर पर्ितकूल पर्भाव डालने वाला ऐसा कोई भी आद ेश तब तक न िकया जाएगा जब तक िक उस ᳞िक् त 
को इस बात 
एगा, िजसमᱶ िक उस आदेश मᱶ आिशर्त ᳇ारा िकसी ऐसी रािश का पर्ितस ंदाय अन्तवर्िलत होता हो जो उस आिशर्त को पहले ही 
संदᱫ की जा चुकी हᱹ । 
3[(9) जहां िक आयुक् त िकसी आदेश मᱶ उपधारा (8) के अधीन इस तथ्य के कारण फे रफार करता है िक ᳞िक् त को पर्ितकर का 
संदाय कपट, पर्ितरूपण
कम आगे धारा 31 मᱶ उपबिन्धत रीित से वसूल की जा सकेगी ।] 
9. पर्ितकर का समन ुिदष् ट, कु क र् या भािरत न िकया जाना —इस अिधिनयम क े अ ध ी न  संदेय कोई भी एकम ुश्त रािश या 
अधर्मािसक संदाय, इस अिधिनयम ᳇ारा तथा उपबिन्धत के िसवाय, िकसी भ
 के अधीन नहᱭ होगा, और न 1[कमर्चारी] से िभन् न िकसी ᳞िक् त को िविध की िकर्या ᳇ारा स ंकर्ान्त होगा और न कोई दावा 
उसके िवरु᳍ मुजरा िकया जाएगा । 
10. सूचना और दावा—( 1) 4[पर्ितकर के िलए कोई भी दावा तब तक आय ुक् त ᳇ारा गर्हण नहᱭ िकया जाएगा जब तक िक 
दुघर्टना की सूचना उसके घिटत होने
तक िक दावा दुघर्टना होने के  5[दो वषर्] के  भीतर, या मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ, मृत्यु की तारीख से 5[दो वषर्] के भीतर, उसके  
समक्ष कर न िदया गया होः] 
परन्तु जहां िक द ुघर्टना ऐसे रोग का लगना ह ै, िजसके सम्बन्ध म ᱶ धारा 3 की उपधारा ( 2) के उपबन्ध लाग ू होते हᱹ वहां, 
दुघर्टना के बारे मᱶ यह समझा
ा के पिरणामस्वरूप काम पर से िनरन्तर अनुपिस्थत रहा 
थाः 
6[परन्तु यह भी िक ऐसा कोई रोग लगन े के कारण हुई ऐसी आ ंिशक िनःशक् तता की दशा म ᱶ, जो 1[कमर्चारी] को काम स े 
अनुपिस्थत रहने के िलए मजबूर नहᱭ करती, दो वष र् की कालाविध की ग
 अपने िनयोजक को देता हैः 
परन्तु य
ह भी िक यिद कोई 1[कमर्चारी], जो िकसी िनयोजन मᱶ, धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन उस िनयोजन के सम्बन्ध 
मᱶ िविनिदष् ट िनरन्तर कालाविध क े िल
ः होने व ा ले िकसी उपजीिवकाजन्य रोग क े ल क्ष ण  ि न य ो ज न  क ी  स म ा ि प्  त के द ो  व षर् के  भ ी त र  उ स मᱶ ि व क ि स त  ह ो  ज ा ते ह ᱹ, 
दुघर्टना उस िदन हुई समझी जाएगी िजस िदन उन लक्षणᲂ का पता पहले पहल चला थाः]  
7[परन्तु यह भी िक— 
1(क) यिद दा
िरसर मᱶ या िक
सी ऐस
 
के अधीन काम कर रहा था और 1[कमर्चारी] ऐसे पिरसर मᱶ, या ऐसे स्थान मᱶ, या िनयोजक के िकसी पिरसर म ᱶ 
मरा था, या उस पिरसर या स्थान का, जहां दुघर्टना हुई थी, सामीप्य छोड़े िबना मरा था, अथवा 
 
1 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
2 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा उपधारा (6) को उपधारा (8) के  रूप मᱶ पुनः संख्यांिकत िकया गया ।  
3 1929 के  अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 
4 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा मूल शब्दᲂ के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
5 1959 के  अिधिनयम सं० 8 की धारा 8 ᳇ारा (1-6-1959 से) “एक वषर्” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत । 
6 1962 के  अिधिनयम सं० 64 की धारा 5 ᳇ारा (1-2-1963 से) अन्तःस्थािपत ।  
7 1933 क े  अिधिनयम सं० 15 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।  
8 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा पर्ितस्थािपत ।  
 10
(ख) यिद िनयोजक को 1[या कई िनयोजकᲂ म ᱶ से िकसी एक को, ᳞वसाय या कारबार की िकसी ऐसी शाखा क े  
पर्बन्ध क े िलए िजसमᱶ क्षत 2[कमर्चारी] िनयोिजत था, िनयोजक के  पर्ित उᱫरदायी िकसी ᳞िक् त को] दुघर्टना का ज्ञान िकसी 
अन्य ᳫोत से, उस समय या उस समय के आसपास हो गया था, जब वह दुघर्टना हुई थी, 
तो सूचना का अभाव या उसमᱶ कोई तर्ुिट या अिनयिमतता 3[दावे के गर्हण] िकए जाने के िलए वजर्न न होगीः] 
 प र न् त ु यह भी िक इस बात के होते हुए भी िक इस उपधारा मᱶ यथाउपबिन्धत सम्यक् समय के भीतर सूचना नहᱭ दी गई है या 
दावा नहᱭ 4[िकया] गया है, आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के  िकसी भी दावे को उस दशा मᱶ 5[गर्हण] और िविनिश् चत कर सकेगा, 
िजसमᱶ उसका समाधान हो जाए िक, यथािस्थित, वैसे सूचना देने या दावा 6[करने] मᱶ असफलता पयार्प् त हेतुक से हुई थी । 
 ( 2) ऐसी हर सूचना मᱶ क्षत ᳞िक् त का नाम और पता िदया होगा और सरल भाषा मᱶ क्षित का कारण और वह तारीख िजसको 
दुघर्टना हुई, किथत होगी और उसकी तामील िनयोजक पर या कई िनयोजकᲂ म ᱶ से 7[िकसी एक] पर, या ᳞वसाय या कारबार की 
िकसी ऐसी शाखा के, िजसमᱶ क्षत 2[कमर्चारी] िनयोिजत था, पर्बन्ध क े िलए िनयोजक के पर्ित 8*** उᱫरदायी िकसी ᳞िक् त पर की 
जाएगी । 
 9[(3) राज्य सरकार यह अप ेक्षा कर सके गी िक िविहत वगर् के िनयोजक अपन े पिरसर म ᱶ, िजसमᱶ 2[कमर्चारी] िनयोिजत हᱹ , 
िविहत पर्रूप मᱶ एक सूचना-पुस् तक रखᱶगे िजस तक पिरसर म ᱶ िनयोिजत िकसी भी क्षत 2[कमर्चारी] की या स᳊ावपूवर्क उसकी ओर स े 
कायर् करने वाले िकसी भी ᳞िक् त की सभी युिक् तयुक् त समयᲂ पर आसानी से पहुंच हो सकेगी । 
(4) इस धारा क े  अधीन स ूचना की तामील, उस ᳞िक् त के, िजस पर उसकी तामील की जानी ह ै, िनवास-स्थान या िकसी 
कायार्लय या कारबार के स्थान मᱶ पिरदᱫ करके या उस पत े पर रिजस्टर्ीकृत डाक से भेजकर, या जहां िक सूचना-पुस्तक रखी जाती ह ै 
वहां सूचना-पुस्तक मᱶ पर्िविष् ट करके, की जा सकेगी ।] 
10[10क. पर्ाणान्तक द ुघर्टनाᲐ के सम्बन्ध म ᱶ िववरणᲂ की िनयोजकᲂ स े अपेक्षा करने की शिक् त—(1) जहां िक आय ुक् त को 
िकसी ᳫोत स े य ह  इ ि ᱫ ल ा  पर् ा प्  त होती ह ै िक कोई 2[कमर्चारी] अ प ने िनयोजन स े औ र  उ स के अ नुकर्म म ᱶ उ द् भूत द ुघर्टना के  
पिरणामस्वरूप मर गया है वहां वह उस 2[कमर्चारी] के िनयोजक को उससे यह अपेक्षा करने वाली सूचना रिजस्टर्ीकृत डाक ᳇ारा भेज 
सकेगा िक वह िविहत पर्रूप म ᱶ ऐसा िववरण, िजसमᱶ वे पिरिस्थितयां िजनमᱶ 2[कमर्चारी] की मृत्यु हुई बताई गई हो और यह उपदिशत 
िकया गया हो िक िनयोजक की राय म ᱶ वह उस म ृत्यु के कारण पर्ितकर िनिक्षप् त करने का दायी ह ै या नहᱭ, उस स ूचना की तामील स े 
तीस िदन के भीतर िनवेिदत करे । 
(2) यिद िनयोजक की राय हो िक वह पर्ितकर िनिक्षप् त करने का दायी ह ै तो वह स ूचना की तामील स े तीस िदन के भीतर 
ऐसा िनक्षेप करेगा । 
(3) यिद िनयोजक की राय हो िक वह पर्ितकर िनिक्षप् त करने का दायी नहᱭ ह ै, तो वह अपन े िववरण म ᱶ उन आधारᲂ को 
उपदिशत करेगा िजन पर वह दाियत्व से इन्कार करता है । 
(4) जहां िक िनयोजक ने दाियत्व से इस पर्कार इन्कार िकया है, वहां आयुक् त ऐसी जांच के पश् चात् जैसी वह ठीक समझे मृत 
2[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ मᱶ से िकसी को भी, इिᱫला द े सकेगा िक आिशर्त पर्ितकर का दावा करन े के  िलए स्वतंतर् है और उन्हᱶ ऐसी अन्य 
अितिरक् त इिᱫला, जैसी वह ठीक समझे, दे सकेगा । 
10ख. पर्ाणान्तक द ुघर्टनाᲐ और गम्भीर शारीिरक क्षितयᲂ की िरपोट ᱸ—(1) जहां िक िकसी तत्समय पर्व ृᱫ िविध ᳇ारा यह 
अपेिक्षत है िक िनयोजक के पिरसर मᱶ घिटत िकसी ऐसी दुघर्टना की, िजसके पिरणामस्वरूप मृत्यु 11[या गम्भीर शारीिरक क्षित] हो गई 
हो, सूचना िकसी पर्ािधकारी को िनयोजक ᳇ारा या उसकी ओर स े दी जाए, वहां, वह ᳞िक् त, जो सूचना देने के िलए अपेिक्षत है, मृत्यु 
11[या गम्भीर शारीिरक क्षित] के सात िदन के भीतर आयुक् त को एक िरपोटर् भेजेगा िजसमᱶ वे पिरिस्थितयां बताई जाएंगी िजनमᱶ मृत्यु 
11[या गम्भीर शारीिरक क्षित] हुई है : 
परन्तु जहां िक राज्य सरकार ने ऐसा िविहत िकया हो वहां सूचना देने के िलए अपेिक्षत ᳞िक् त ऐसी िरपोटर् आयुक् त को भेजने 
क े बजाय उस पर्ािधकारी को भेज सकेगा िजसे सूचना देने के िलए वह ᳞िक् त अपेिक्षत है । 
11[स्पष् टीकरण—“गंभीर शारीिरक क्षित ” से ऐसी क्षित अिभपर् ेत है िजसमᱶ िकसी अ ंग क े उपयोग की स्थायी हािन या िकसी 
अंग की स्थायी क्षित अथवा द ृिष् ट या शर्वण शिक् त की स्थायी हािन या उस े स्थायी क्षित अथवा िकसी अ ंग मᱶ अिस्थभ ंग अथवा क्षत 
                                                 
1 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।  
2 2009 के  अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 
3 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा “कायर्वािहयᲂ का िकया जाना” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
4 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा “संिस्थत िकया” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
5 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा “स्वीकार” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
6 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा “संिस्थत करने” के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
7 1924 के  अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 ᳇ारा और अनुसूची 1 ᳇ारा “िकसी एक या” के  स् थान पर पर्ितस् थािपत ।  
8 1938 के  अिधिनयम सं० 9 की धारा 5 ᳇ारा “पर्त्यक्षतः” शब्द का लोप िकया गया ।  
9 1933 क े  अिधिनयम सं० 15 की धारा 7 ᳇ारा उपधारा (3) के  स्थान पर पर्ितस्थािपत ।  
10 1933 क े  अिधिनयम सं० 15 की धारा 8 ᳇ारा अंतःस्थािपत ।  
11 1959 के  अिधिनयम सं० 8 की धारा 9 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत ।  
 11
᳞िक् त की अपने काम से बीस िदन से अिधक की कालाविध के िलए मजबूरी के कारण अनुपिस्थित अन्तवर्िलत है या अन्तवर्िलत होना 
पूणर्तः अिधसंभा᳞ है ।] 
(2) राज्य सरकार, शासकीय राजपतर् म ᱶ अिधसूचना ᳇ारा, उपधारा (1) के उपबन्धᲂ का िवस्तार, उस उपधारा की पिरिध म ᱶ 
आने वाले पिरसरᲂ से िभन् न पिरसरᲂ के िकसी वगर् पर कर सकेगी, और ऐसी अिधसूचना ᳇ारा उन ᳞िक् तयᲂ को िविनिदष् ट कर सकेगी 
जो आयुक् त को िरपोटर् भेजᱶगे । 
1[(3) इस धारा मᱶ की कोई भी बात उन कारखानᲂ को लाग ू न होगी िजनको 2[कमर्चारी] राज्य बीमा अिधिनयम, 1948 
(1948 का 34) लागू होता है ।] 
11. िचिकत्सीय परीक्षा—(1) जहां िक 2[कमर्चारी] ने दुघर्टना की सूचना दी है वहां, यिद िनयोजक उस समय स े, जब सूचना 
की तामील हुई थी, तीन िदन का अवसान होने के पहले उससे यह पर्स्थापना करता है िक िकसी अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा उसकी 
परीक्षा मुफ्त कराई जाएगी, तो, वह अपन े को ऐसी परीक्षा क े िलए पर्स्त ुत करेगा और कोई भी 2[कमर्चारी], जो इस अिधिनयम क े  
अधीन अधर्मािसक संदाय पाता है, यिद उससे ऐसी अपेक्षा की जाए, तो समय-समय पर अपने को ऐसी परीक्षा के  िलए पर्स्तुत करेगाः 
परन्तु 2[कमर्चारी] इस अिधिनयम के  अधीन बनाए गए िनयमᲂ के अनुसार से अन्यथा, या उन अन्तरालᲂ स े, जो िविहत िकए 
जाएं, लघ ुतर अन्तरालᲂ पर िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा परीक्षा करान े क े ि ल ए  अ प ने क ो  पर् स् तुत करन े क े ि ल ए  अ पेिक्षत नहᱭ                 
िकया जाएगा । 
(2) यिद 2[कमर्चारी] िनयोजक ᳇ारा उपधारा (1 ) के अधीन या आय ुक् त ᳇ारा िकसी भी समय ऐसा करन े के िलए अप ेिक्षत 
िकए जाने पर, अिहत िचिकत्सा-᳞वसायी ᳇ारा अपनी परीक्षा कराने के िलए अपने को पर्स्तुत करने से इन्कार करता है या उसमᱶ िकसी 
पर्कार स े बाधा डालता ह ै त ो  ऐ से इन्कार या ऐसी बाधा क े ब ने र ह ने के द ौ र ा न  उ स क ा  पर् ि त क र  क ा  अ ि ध क ा र  उ स  द श ा  के ि स व ा य  
िनलिम्बत रहेगा िजसमᱶ इन्कार की दशा मᱶ वह इस पर्कार अपने को पर्स्तुत करने से िकसी पयार्प् त कारण ᳇ारा िनवािरत हुआ था । 
(3) यिद 2[कमर्चारी] उस कालाविध के अवसान से पूवर्, िजसके भीतर वह िचिकत्सीय परीक्षा के िलए अपने को पर्स्तुत करने 
क े िलए अप ेिक्षत िकए जान े के िलए उपधारा ( 1) के अधीन दाियत्वाधीन ह ै, इस पर्कार परीिक्षत हुए िबना उस स्थान क े, िजसमᱶ वह 
िनयोिजत था, सामीप्य स े स्वेच्छापूवर्क चला जाता ह ै तो उसका पर्ितकर का अिधकार तब तक क े िलए िनलिम्बत रह ेगा जब तक वह 
लौट नहᱭ आता और ऐसी परीक्षा कराने के िलए अपने को पेश नहᱭ कर देता । 
(4) जहां िक ऐसा 2[कमर्चारी], िजसका पर्ितकर का अिधकार उपधारा ( 2) या उपधारा ( 3) के अधीन िनलिम्बत हो गया ह ै, 
िचिकत्सीय परीक्षा के िलए अपने को वैसे पर्स्तुत िकए िबना, ज ैसा उन उपधाराᲐ म ᱶ से िकसी के  ᳇ारा अपेिक्षत है, मर जाता ह ै वहां, 
यिद आयुक् त ठीक समझे तो वह मृत 2[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ को पर्ितकर का संदाय िनिदष् ट कर सकेगा

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