LexaceLexace Ask the AI ›
⚖️ Ask the AI about your situation:🚗 Car Accident💼 Work / Job🏠 Housing / Eviction👪 Family / Divorce📋 Contract Dispute💰 Money Owed

The Chhattisgarh Panchayat Raj Avam Gram Swaraj Adhiniyam, 1993

Chhattisgarh · state statute
Open in Lexace · Ask the AI about this act
 
1 
 
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 
(क्रम ांक 1 सन् 1994) 
 
अध्याय 1 
प्रारम्भिक 
1. सांक्षिप्त न म, विस्त र और प्र रम्भ 
2. पररभ ष एां 
अध्याय 2  
ग्राम सिा 
3. ग्र म के सम् बन् ध म  अधधसूचन  
4. ग्र म की मतद त  सूची 
5. ग्र म के मतद त ओां क  रजिस्रीकरण 
5-क. ग्र म सभ  क  गठन और ननगमन 
6. ग्र म सभ  क  सजम्मलन 
6-क. ग्र म सभ  क  विशेष सजम्मलन 
6-ख. ग्र म सभ  क  सधचि 
6-ग. ग्र म सभ  क  विननश्चय 
7. ग्र म सभ  की शजततय ां और कृत्य तथ  उसक  ि वषिक सजम्मलन 
7-क. ग्र म सभ  की स्थ यी सममनत तथ  तदथि सममनत 
7-ख. स्थ यी सममनतयों क  गठन और उनके कृत्य 
7-ग. [***] 
7-घ. सममनत की शजततय ां, कृत् य तथ  कत्ति्य 
7-ड. सदस्य क  हट य  ि न  
7-च. ग्र म ननम िण सममनत तथ  ग्र म विक स सममनत की शजततय ां तथ  कत्ति्य 
7-छ. स्थ यी सममनत क  सधचि 
7-छक. ग्र म सभ  की दीघिक मलक विक स योिन  क  तैय र ककय  ि न  
7-छख. ग्र म ननम िण सममनत तथ  ग्र म विक स सममनत के अध्यि और सदस्यों के बबरुद्ध 
अनुश सननक क रिि ई 
7-ि. ग्र म सभ  के विननश् चय के विश्ि सममनत को अपील  
7-झ. बिट 
7-ञ. ग्र म कोष 
7-ट. लेख  तथ  सांपरीि  
 
2 
 
7-ठ. सरक री कमिच ररयों पर ननयांत्रण 
7-ड. ग्र म सभ  के कृत् यो के सांबांध म  र य य सरक र की शजतत 
अध्याय 3  
पंचायतों की स्थापिा 
8. पांच यतों क  गठन 
9. पांच यत की अिधध 
10.  ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल  पांच यत की स्थ पन  
11.  पांच यतों क  ननगमन 
12.  ग्र म पांच यतों क  ब डी म  विभ िन 
13.  ग्र म पांच यत क  गठन 
14.  मत देने तथ  अभ्यथी होने के मलये अहित  
15.  एक स थ सदस्यत  क  प्रनतषेध 
16.  [***] 
17.  सरपांच और उप-सरपांच क  ननि िचन 
18.  बहहग िमी सरपांच य  ग्र म ननम िण सममनत क  अध्यि द्ि र  क यिभ र क  सौंप  ि न  
19.  ननि िचन की अधधसूचन  
20.  प्रथम सम्मेलन और पद िधध 
21.  सरपांच और उप-सरपांच के विरुद्ध अविश्ि स क  प्रस्त ि 
21-क. ग्र म पांच यत के पद धधक ररयों क  ि पस बुल य  ि न  
22.  िनपद पांच यत की सांरचन  
23.  खण्ड क  ननि िचन िेत्रों म  विभ िन 
24. [***] 
25. िनपद पांच यत के अध्यि और उप ध्यि क  ननि िचन 
26. सदस्यों अध्यि और उप ध्यि के न मों क  प्रक शन 
27. प्रथम सजम्मलन और पद िधध 
28. अध्यि य  उप ध्यि के विरुद्ध अविश्ि स क  प्रस्त ि 
29. जिल  पांच यत क  गठन 
30. जिले क  ननि िचन िेत्रों म  विभ िन 
31. [***] 
32. अध्यि और उप ध्यि क  ननि िचन 
33. सदस्यों, अध्यि और उप ध्यि के न मों क  प्रक शन 
33-क. मलवपकीय गलनतयों य  लोप क  ठीक ककय  ि न  
34. प्रथम सजम्मलन और पद िधध 
35. अध्यि और उप ध्यि के विरूद्ध अविश्ि स प्रस्त ि 
36. पांच यत क  पदध री होने के मलये ननरहित एां 
37. पांच यत के पद धधक ररयों द्ि र  त्य गपत्र 
 
3 
 
38. ररजततयों क  भर  ि न  
39. पांच यत के पदध री क  ननलम् बन   
40. पांच यत के पदध ररयों क  हट य  ि न  
41. एक से अधधक पद ध रण करने क  िििन 
अध्याय 4  
निवााचि का संचालि 
42. र य य ननि िचन आयोग की शजततय ां 
42-क. अधधक ररयों और कमिच रीिृन्द को ननयुतत करने और उनके कत्ति्य और कृत्यों को समनुदेमशत 
करने की शजतत 
43. ननयम बन ने की शजतत   
अध्याय 5  
पंचायतों के कामकाज का संचालि तथा पंचायत के सम्भमलि की प्रक्रिया 
 
44. सजम्मलन की प्रकक्र य   
45. पांच यत द्ि र  अांनतम रूप से ननपट ये गये विषयों पर पुनवििच र 
अिीिस्थ अभिकरण 
46. ग्र म पांच यत की स्थ यी सममनतय ां 
47. िनपद पांच यत और जिल  पांच यत की स्थ यी सममनतय ां 
47-क. त्य गपत्र 
47-ख. सदस्य य  सभ पनत के ननि िचन की विधधम न्यत  के सम्बन्ध म  विि द 
48. सरपांच, उपसरपांच, अध्यि और उप ध्यि की शजततय ां और कत्ति्य 
अध्याय 6  
पंचायतों के कृत्य 
49. ग्र म पांच यत के कृत् य 
49-क. ग्र म पांच यत के अन्य कृत् य 
50. िनपद पांच यत के कृत्य 
51. र य य सरक र के कनतपय कृत्यों क  िनपद पांच यत य  जिल  पांच यत को सौंप  ब न  
52. जिल  पांच यत के कृत् य 
53. पांच यतों के कृत्यों के सम्बन्ध म  र य य सरक र की शजतत 
पंचायतों की शम्ततयां 
54. स िििननक स्ि स््य, सुविध एां और सुरि  की ब बत् ग्र म पांच यत की शजततयों 
55. भिनों के पररननम िण पर ननयांत्रण 
56. स िििननक म गों तथ  खुले स्थलों पर रुक िट , ब ध  दबत  अधधक्रमण 
 
4 
 
56-क. ध र  55 तथ  56 के अधीन ग्र म पांच यत की शजततयों क  प्रत्य योिन 
57. म गो क  न मकरण करने तथ  भिनों पर क्रम ांक ड लने की शीजत त  
58. ब ि रों य  मेलों क  विननयमन 
59. सड़कों को घुम ि देने, मोड़ने, च लू न रखने य  बांद करने की िनपद पांच यत की शजतत 
60. िनपद पांच यत म  ननहहत सड़कों और भूममयों पर अधधक्रमण 
61. समझौत  करने की शजतत 
अध्याय 6  क  
 कॉलोिी निमााण 
 
61-क. पररभ ष  
61-ख. कॉलोनी ननम िण करने ि ले क  रजिस्रीकरण 
61-ग. क लोनन यों क  विक स 
61-घ अिैध कॉलोनी ननम िण के मलये दण् ड  
61-ड. अिैध सननम िण के अपर ध क  दुष्‍प प्रेरण करने के मलये दण् ड  
61-च. अिैध ् यपितिन के य  अिैध क लोनी ननम िण के ककसी िेत्र म  के भू-खण् डों के अन्तरण क  शून् य 
होन  
61-छ. अिैध कॉलोनी म  अन्तग्रिस्त भूमम क  समपहरण 
अध्याय 7  
 पंचायत की निधि और उसकी सभपम्त्त 
 
62. र य य सरक र कनतपय सम्पजत्त पांच यत म  ननहहत कर सकेगी 
63. पांच यत से विधधयों म समनुदेशन 
64. पांच यत को सह यत  अनुद न 
65. स्थ िर सम्पजत्त क  अांतरण 
66. पांच यत ननधध 
67. सांविद  ननष्‍प प हदत करने क  ढांग 
68. सह यत  अनुद न देने की शजतत  
अध्याय 8  
 पंचायतों की स्थापिा, बजट तथा लेखे 
 
69.  सधच ि तथ  मुख् य क यिप लक अधधक री की ननयुजतत 
70.  पांच यत के अन्य अधधक री और सेिक 
71.  श सकीय सेिकों की प्रनतननयुजतत 
72.  मुख् य क यिप लक अधधक री तथ  सधच ि के कृत् य 
73.  बिट तथ  ि वषिक लेखे   
 
 
5 
 
अध्याय 9  
करािाि और दावों की वसूली 
 
74.  भूमम पर उपकर उद्ग्रहण करने की शजतत   
75.  खण्ड के भीतर सम्पजत्त के अन्तरण पर शुल्क 
76.  जिल  पांच यत र ि ननधध 
76-क. रकम क  पांच यतों के बीच सांवितरण 
77.  अन्य कर 
77-क. कर अधधरोवपत करने की शजतत  
78.  करों क  विननयमन करने की र य य सरक र की शजतत 
79.  कर ध न के विरूद्ध अपील 
80.  ब ि र फीस आहद क  ठेके पर हदय  ि न  
81.  बक य  की िसूली 
82.  अपिांचन के मलए श जस्त 
83.  करों म  र हत देने के ब रे म  र य य सरक र की शजतत 
अध्याय 10  
नियंत्रण 
84.  पांच यतों के क यि क  ननरीिण   
85.  आदेशों आहद क  ननष्‍प प दन, ननलांबबत करने की शजतत   
86.  कनतपय म मलों म  पांच यतों को सांकमों क  ननष्‍प प दन क ने के मलए आदेश देने की र य  य सरक र 
की शजतत  
87.  ्यनतक्रम, शजततयों के दुरुपयोग आहद के मलये पांच यतों को विघहटत करने की र य य सरक र की 
शजतत 
88.  पांच यत के क यिकल पों की ि ांच 
89.  ह नन, दुरुपयोिन के मलये पांचों आहद क  द नयत्ि 
90.  पांच यतों और अन्य स्थ नीय प्र धधक ररयों के बीच विि द 
91.  अपील और पुनरीिण 
92.  अमभलेख और िस्तुएां ि पस कर ने तथ  धन िसूल करने की शजतत 
93.  शजततयों क  प्रत्य योिन 
94.  ननयांत्रण की स ध रण शजतत 
अध्याय 11  
नियम और उपववधियां 
 
95.  ननयम बन ने की शजतत 
96.  उपविधधय ाँ 
97.  आदशि (मॉडल) उपविधधय ां 
 
6 
 
अध्याय 12  
शाम्तत 
 
98.  ननरहहित हो ि ने पर पांच, सदस्य, सरपांच, उप-सरपांच, अध्यि, उप ध्यि की हैमसयत म  क यि करने 
के मलये श जस्त 
99. हहतबद्ध सदस्यों द्ि र  मत हदये ि ने के मलये श जस्तयों 
100. ककसी सदस्य, पदध री य  सेिक द्ि र  सांविद  म  हहत अजिित करने के मलये श जस्त 
101. अधधक ररयों आहद क  सदोष अिरोध 
102. पांच यतों के सदस्य आहद को ब ध  पहुांच ने क  प्रनतषेध 
103. सूचन  को हट ने य  ममट ने क  प्रनतषेध 
104. ि नक री न देने य  मम्य  ि नक री देने के मलये श जस्त 
105. बोली लग ने क  प्रनतषेध 
106. ककसी भी पांच यत को नुकस न की प्रनतपूनति ककये ि ने की प्रकक्रय  
अध्याय 13  
प्रकीणा 
 
107. सदभ िपूििक ककये गये क यो क  पररत्र ण 
108. सूचन  के अभ ि म  ि द क  िििन 
109. सदस्यों, अधधक ररयों आहद के विरुद्ध कनतपय ि दों म  प्रनति द पांच यत य  ग्र म सभ  के खचि पर 
ककय  ि एग  
110. कर आहद के सम्बन्ध म  अन्य क यिि ही क  िििन 
111. पांच यत के सदस्य य  सेिक लोक सेिक होंगे 
112. ररजतत य  गठन की प्रकक्रय  आहद म  त्रुहट होने के क रण पांच यत के क यि अविधधम न्य नहीां होगे 
113. भूमम क  अििन 
114. केन्रीय सरक र य  र य य सरक र अनुज्ञजप्त य  अनुज्ञ  अमभप्र प्त नहीां करेगी करेगी। 
115. पांच यत की धन उध र लेने की शजतत 
116. िसूल न की ि  सकने ि ली धनर मशयों तथ  अनुपयोगी स मग्री क  बट टे ख ते म  ड ल  ि न  
117. सदस्यों आहद को प ररश्रममक क  प्रनतषेध 
118. पांच यत य  ग्र म सभ  के अमभलेख आहद क  ननरीिण ककय  ि  सकेग  
119. दस्त िेि आहद त मील करने की पद्धनत 
120. अधधननयम के प्रयोिनों के मलये प्रिेश आहद  
121. ननि िचन म मलों म  न्य य लयों द्ि र  हस्तिेप क  िििन 
122. ननि िचन य धचक  
123. ऐसे ्यजततयों को ननष्‍पक मसत करने की शजतत िो फीस क  सांद य करने से इांक र कर  
124. स्ि मी य  अधधभोगी द्ि र  ्यनतक्रम ककये ि ने पर पांच यत य  ग्र म सभ  सांकमो क  ननष्‍पप दन कर 
सकेगी और ्यय िसूल कर सकेगी 
125. ग्र म पांच यत के मुख्य लय क  बदल  ि न , ग्र म सभ  क  विभ िन, सम मेलन तथ  पररितिन 
126. ग्र म क  विस्थ पन (डडसइस्टैजललशम ट) 
 
7 
 
127. खण्ड तथ  जिल  पांच यत की सीम ओां म  पररितिन 
128. सरक री भूममयों क  प्रबांध 
अध्याय 14  
संपरीक्षा 
 
129. पांच यतों की सांपरीि  
अध्याय 14 - क  
अिुसूधचत क्षेत्रों में पंचायतों के भलये ववभशष्ट उपबंि 
 
129-क. पररभ ष एाँ 
129-ख. ग्र म तथ  ग्र म सभ  क  गठन 
129-ग. ग्र म सभ  की शजततय ां और कृत्य 
129-घ. ग्र म पांच यत के कृत्य 
129-ड. स्थ नों क  आरिण 
129-च. िनपद तथ  जिल  पांच यत की शजततय ाँ 
अध्याय 15  
निरसि 
 
130. ननरसन तथ  ्य िृजत्त 
131. विद्यम न स्थ यी कमिच ररयों के सम्बन्ध म  ्य िृजत्तय ां 
132. कहठन इय ां दूर करने की शजतत 
 अनुसूची - 1 
 अनुसूची - 2 
 अनुसूची – 3 
 अनुसूची - 4 
 
  
 
8 
 
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 
(क्रम ांक 1 सन् 1994) 
   
अध्याय 1 
प्रारम्भि क 
 
1. संक्षक्षप्त िाम, ववस्तार और प्रारभि -- (1) इस अधधननयम क  सांक्षिप्त न म मध्यप्रदेश (पांच यत र ि एिां 
ग्र म स्िर ि) अधधननयम, 1993 (क्रम ांक 1 सन् 1994) है। 
    (2) इसक  विस्त र सम्पूणि मध्यप्रदेश पर है: 
परन्तु इसक  विस्त र उन अपि दों तथ  उप न्तरणों के अध्यधीन रहते हुए िो कक अध्य य 14-क म  
उपबजन्धत ककये गये हैं, अनुसूधचत िेत्रों पर होग । 
(3) यह तत्क ल प्रिृत्त3 होग ।   
2. पररिाषाएं –– इस अधधननयम म , िब तक सांदभि से अन्यथ  अपेक्षित न हो - 
(एक) “खांड” से अमभप्रेत है ककसी जिले क  ऐस  िेत्र जिसे र य य सरक र ध र  10 की उपध र  (2) के अधीन 
खांड घोवषत करे; 
(एक-क) ''ग्राम सिा का सभमनत'' से अमभ प्रेत है, ग्र म सभ  के सदस्यों की स्थ यी स ममनत, तदथि सममनत य  
कोई अन्य सममनत 
(दो) ''सहकारी सोसायटी'' क  िही अथि होग  िो उसे मध्यप्रदेश सहक री सोस यटी अधधननयम, 1960 (क्रम ांक 
17 सन् 1961) म  हदय  गय  है; 
(दो-क) ''ववकास आयुतत'' क  िही अथि होग  िो स्पेशल इक न ममक िोन्स एतट, 2005 (2005 क  सां. 28) 
की ध र  2 के खण्ड (छ) म  उसके मलए समनुदेमशत है;)   
(तीन) ''म्जला'' से अमभप्रेत है र य य सरक र द्ि र  इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलए जिले के रूप म  अधधसूधचत 
कोई जिल , और इसके अन्तगित इस प्रक र अधधसूधचत एक य  अधधक र िस्ि जिले आते हैं;)   
 (च र) ''निवााचि'' से अमभप्रेत है पांच यत के स्थ न य  स्थ नो को भरने के मलए ननि िचन और उसके अन्तगित 
है ग्र म पांच यत के सरपांच क  ननि िचन; 
(प ांच) ''निवााचि कायावाहहयां'' से अमभप्रेत है ननि िचन के मलए सूचन  ि री होने से प्र रभ होने ि ली और ऐसे 
ननि िचन क  पररण म घोवषत ककये ि ने के स थ सम प्त होने ि ली क यिि हहय ां;) 
(छ:) ''कारखािा'' क  िही अथि होग  िो उसे क रख न  अधधननयम, 1948 (1948 क  सां. 63) म  हदय  गय  
है; 
(स त) ''ग्राम पंचायत'' से अमभप्रेत है ध र  10 की उपध र  (1) के अधीन स्थ वपत कोई ग्र म पांच यत; 
 
9 
 
(आठ) ''ग्राम सिा'' से अमभप्रेत है ग्र म पांच यत िेत्र के भीतर सम विष्‍पट ककसी र िस्ि ग्र म य  िन ग्र म से 
सांबांधधत ननि िचक न म िमलयों म  रजिस्रीतय ्यजततयों से ममलकर बनने ि ल  कोई ननक य;) 
(नौ) ''जिपद पंचायत'' से अमभप्रेत है ध र  10 की उपध र  (2) के अधीन स्थ वपत िनपद पांच यत; 
(दस) ''स्थािीय प्राधिकारी'' क  िही अथि होग  िो उसे मध्यप्रदेश स ध रण खांड अधधननयम, 1957 (क्रम ांक 
3 सन् 1958) मे हदय  गय  है; 
(ग् य रह) ''सदस्य'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत क  कोई पांच, ककसी िनपद पांच यत क  कोई 
सदस्य य  ककसी जिल  पांच यत क  कोई सदस्य; 
(ब रह) ''घृणोत् प’दक पदाथा'' के अन्तगित है पशुओां के शि, गोबर, कचर , मलमूत्र हद य  सड़े हुए पद थि य  
ककसी भी प्रक र की गांदगी; 
(तेरह) ''पदिारी'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत क  कोई पांच, सरपांच य  उपसरपांच, ककसी 
िनपद पांच यत क  कोई सदस्य, अध्यि य  उप ध्यि य  ककसी जिल  पांच यत क  कोई सदस्य, अध्यि 
य  उप ध्यि; 
(चौदह) ''अन्य वपछड़ा वर्ा'' से अमभप्रेत है र य य सरक र द्ि र  यथ  अधधसूधचत वपछड़  िगि के ्यजततयों क  
प्रिगि; 
(पन् रह) ''स्वामी'' िब उसक  प्रयोग ककसी भूमम य  भिन के प्रनत ननदेश से ककय  गय  है, के अन्तगित िह 
्यजतत है िो उस भूमम, य  भिन क  य  उस भूमम य  भिन के ककसी भ ग क  भ ड़  च हे अपने 
स्ियां के लेखे य  ककसी ्यजतत य  सोस यटी के अधधक  य  न्य सी के रूप म  अथि  प्र पक के रूप 
म  प्र प्त कल  है; 
(सोलह) ''पंच'' से अमभप्रेत है ग्र म पांच यत क  कोई पांच; 
(सत्रह) ''पंचायत'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत कोई ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य  जिल  पांच यत; 
(अट्ठ रह) ''पंचायत क्षेत्र'' से अमभप्रेत है इस अधधननयम के अधीन स्थ वपत ककसी पांच यत क  प्र देमशक िेत्र; 
(उन् नीस) ''जिसंख् या’’' से अमभप्रेत है अांनतम पूिििती िनगणन  मे अमभननजश्चत की गई िनसांख्य  जिसके 
सुसांगत आतके प्रक मशत ककये ि  चुके हैं; 
(बीस) ''अध्यक्ष'' और ''उपाध् यक्ष” से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी 3(ग्र म ननम िण सममनत य  ग्र म विक स 
सममनत य  िनपद पांच यत) य  जिल  पांच यत क  क्रमांश: अध्यि और उप ध्यि; 
(इत कीस) इस अधधननयम के ककसी उपबांध म  “ववहहत प्राधिकरी’’ से अमभप्रेत है ऐस  अधधक री य  प्र धधकरी 
जिसे र य य सरक र, अधधसूचन  द्ि र , द्ि र , उस उपबांध के अधीन विहहत प्र धधक री के कृत् यों क  
ननििहन करने क  ननदेश दे; 
(ब ईस) ''सावाजनिक बाजार'' य  ''सावाजनिक मेला'' से अमभप्रेत है ध र  58 के परन्तुक के अधीन अधधसूधचत 
यथ जस्थनत कोई ब ि र य  मेल ; 
 
10 
 
(तेईस) ''सावाजनिक स्थाि'' से अमभप्रेत है कोई ऐस  स्थ न, भिन य  सांरचन  िो नन िी सांपजत्त नहीां है और 
िो िनत  के उपयोग के मलये खुली है च हे ऐसे सांस्थ न, भिन य  सरचन  पांच यत मे ननहहत है अथि  
नहीां है; 
(चौबीस) ''सावाजनिक सड़क'' से अमभप्रेत है कोई ऐसी सड़क, पगडांडी, म गि, चौक, पटरी य  र स्त  िो 
िनत -द्ि र , च हे स्थ यी रूप से य  अस्थ यी रूप से उपयोग मे ल य  ि त  है; 
(पच्चीस) ''सरपंच'' और ''उपसरपंच'' सेअमभप्रेत है ककसी ग्र म पांच यत क  यथ  जस्थनत क्रमश: सरपांच और 
उपसरपांच; 
(पच्चीस-क) ''अिुसूधचत क्षेत्र'' से अमभप्रेत है भ रत के सांविध न के अनुच्छेद 244 के खांड (1) म  ननहदिष्‍पट 
अनुसूधचत िेत्र;) 
(पच्चीस-ख) ''स्पेशल इकािाभमक जोि'' क  िही अथि होग  िो स्पेशल इक न ममक िोन्स एतट 2005 (2005 
क  सां. 28) की ध र  2 के खण्ड (य-क) म  उसके मलए समनुदेमशत है; 
(छलबीस) ''स्थायी सभमनत'' से अमभप्रेत है इस अधधननयम के उपबांधों के अधीन गहठत यथ जस्थनत ककसी ग्र म 
पांच यत, िनपद पांच यत य  जिल  पांच यत की स्थ यी सममनत; 
(सत्त ईस) ''राज्य निवााचि आयोर्'' से अमभप्रेत है र य यप ल द्ि र  सांविध न के अनुच्छेद 243-ट (1) के अधीन 
गहठत र य य ननि िचन आयोग; 
(अट ठ ईस) ''कर'' के अन्तगित है इस अधधननयम के अधीन उद्ग्रहणीय कोई कर उपकर रेट य  फीस। 
(उन्तीस) ''ग्राम'' से अमभप्रेत है कोई ऐस  ग्र म जिसे र य यप ल द्ि र  लोक अधधसूचन  द्ि र  इस अधधननयम 
के प्रयोिनों के मलये ग्र म के रूप म  विननहदिष्‍पट कक य  गय  है और उसके अन्तगित इस प्रक र विननहदिष्‍पट 
कक य  गये ग्र मों क  समूह; 
स्पष्‍पटीकरण - शलद ''ग्राम'' म  सजम्ममलत है र िस्ि ग्र म तथ  िन ग्र म। 
(तीस) ''म्जला पंचायत'' से अमभप्रेत है ध र  10 की उपध र  (3) के भधीन स्थ वपत जिल  पांच यत।  
अध् याय 2  
ग्राम सिा  
 
3. ग्राम के सभ बन् ि में अधिसूचिा –– र य  यप ल लोक अधधसूचन  द्ि र  ककसी ग्र म य  ग्र मों के समूह को 
इस अधधननयम के प्रयोिन के मलए ग्र म के रूप म  विननहदिष्‍प ट करेग । 
 
4. ग्राम की मतदाता सूची – ध र  3 अधीन विननहदिष्‍प ट प्रत् येक ग्र म के मलए एक मतद त  सूची होगी िो इस 
अधधननयम और उसके अधीन बन ए गय ननयमों के उपबांध के अनुस र तैय र की ि एगी। 
 
 
11 
 
5. ग्राम के मतदाताओं का रम्जस् रीकरण –– (1) ऐस  प्रत् येक ् यजतत ि  उस ग्र म से सम् बजन्धत विध न सभ  
ननि चक न म िली म  रजिस् रीकृत ककये ि ने के मलए अहहित है य  जिसक  न म उसम  प्रविष्‍प ट है और 
िो उस ग्र म क  म मूली तै र से ननि सी है, उस ग्र म की मतद त  सूची म  रजिस् रीकृत ककये ि ने क  
हकद र होग : 
परन् तु :–– 
क) कोई ् यजतत एक से अधधक ग्र म की मतद त  सूची म  रजिस् रीकृत ककये ि ने क  हकद र नहीां होगो;  
ख) कोई ् यजतत मतद त  सूची म  रजिस् रकृत ककये ि ने क  हकद र नहीां होग  यहद िह ककसी अन् य 
स् थ नीय प्र धधकरी से सम् बजन्धत ननि िचन न म िली म  रजिस् रीकृत है। 
स् पष् टीकरण –– (1) अमभ् यजतत “म मूली तौर से ननि सी क  अथि िही होग  िे उसके मलये लोक प्रनतननधधत् ि 
अधधननयम, 1950 (1950 क  सां. 43) की ध र  20 म  हदय  गय  है, ककन् तु इस उप न् तरण के 
अध् यधीन रहते हुऐ कक उसम  ककय  गय  “ननि िचन िेत्र’’ के प्रनतननदेश क  इस प्रक र अथि लग य  
ि एग  कक िह ‘ग्र म’’ के प्रनत ननदेश है।  
(2) कोई ् यजतत ककसी ग्र म की मतद त  सूची म  रजिस् रीकृत ककये ि ने के मलये ननरहहित होग , यहद 
िह विध न सभ  ननि िचन न म िली म  रजिस् रीकृत ककये ि ने क मलए ननरहहित है। 
5-क. ग्राम सिा का र् ि और निर्मि -- प्रत्येक ग्र म के मलए एक ग्र म सभ  होगी । ग्र म सभ  उसके मलए 
विननहदिष्‍पट न म से एक ननगममत ननक य होगी उसक  श श्ित उत्तर धधक र होग  और उसकी एक स म न्य 
मुर  होगी और िह उतत न म से ि द चल एगी और उतत न म से उसके विरुद्ध ब द चल य  ि एग  और 
इस अधधननयम और उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहते हुए उसे ककसी िांगम 
य  स्थ िर सांपजत्त अजिित करने, ध रण करने और ्ययन करने, सांविद  करने और इस अधधननयम के 
प्रयोिन के मलए आिश्यक अन्य समस्त ब त  करने की शजतत होगी।) 
6. ग्राम सिा का सम्भमलि – (1) ग्र म सभ  क  सजम्मलन कम से कम िनिरी, अप्रैल, िुल ई तथ  अतटूबर 
म  होग  तथ  इसके अनतररतत ग्र म सभ , यहद अपेक्षित हो, अनतररतत सजम्मलन बुल  सकेगी और जिले 
क  कलतटर, ऐसे सजम्मलनों के समुधचत इांति म के मलये एक श सकीय अधधक री य  कमिच री को 
न मननदेमशत करेग  िो सजम्मलन की क यिसूची (एिण् ड ) क  पररच लन तथ  त रीख समय तथ  स् थन 
की सूचन  समय पर त मील ककय  ि न  सुननजश्चत करेग  और सजम्मलन की क यिि हहयों क  सम्यक 
सांच लन भी सुननजश्चत करेग )   
(2) ग्र म सभ  के प्रत्येक सजम्मलन के मलए, ग्र म सभ  के सदस्यों की कुल सांख्य  के एक दशम ांश से 
अन् यून सदस्यों य  ग्र म सभ  के कम से कम प ांच सौ सदस्यों, इनम  से िो भी कम हो, से गणपूनति 
होग । 
(3) ग्र म सभ  के सममल की अध्यित  सरपांच द्ि र  य  सरपांच की अनुपजस्थनत म  उपसरपांच द्ि र  
की ि एगी। उस दश  म  िबकक सरपांच और उपसरपांच दोनो ही अनुपजस्थत हों िह ां ग्र म सभ  के 
सजम्मलन की अध्यित  ग्र म सभ  के ऐसे पांच द्ि र  की ि एगी िो सजम्मलन मे उपजस्थत सदस्यों 
द्ि र  उस प्रयोिन के मलये ननि िधचत ककय  ि ए। 
 
12 
 
(4) यहद इस सम्बन्ध मे कोई विि द उद् भूत होत  है कक तय  कोई ्यजतत ग्र म सभ  के सजम्मलन मे 
उपजस्थत होने क  हकद र है, तो ऐसे विि द क  विननश्चय अध्यित  करने ि ले ्यजतत द्ि र  ग्र म 
सभ  िेत्र की मतद त  सूची मे प्रविजष्‍पट को ध्य न म  रखते हुए ककय  ि एग  और उसक  विननश्चय 
अजन्तम होग । 
(5) ग्र म सभ ओां के बीच उद्ण्ड कोई विि द य  ग्र म पांच यत िेत्र के सम विष्‍पट एक से अधधक ग्र म सभ ओां 
से सम्बद्ध कोई म मले और ध र  7 की उपध र  (2) म  अन्तवििष्‍पट समस्त म मले उस ग्र म पांच यत 
की समस्त ग्र म सभ ओां के सांयुतत  सजम्मलन के समि ल ए ि एांगे। 
(6) उपध र  (5) के अधीन सांयुतत सजम्मलन मे ककय  गय  विननश्चय प्रत्येक ग्र म सभ  द्ि र  ककय  
गय  विननश्चय समझ  ि एग ।   
6-क. ग्राम सिा का ववशेष सम्भमलि - यहद सरपांच य  ग्र म सभ  के दस प्रनतशत से अधधक सदस्य य  पच स 
सदस्य, िो भी कम हो, ग्र म सभ  के विशेष सजम्मलन के मलए मलखखत मे अध्यपेि  करते है तो सधचि 
ऐसी अध्यपेि  की प्र जप्त की त रीख से स त हदन के भीतर ऐस  सजम्मलन बुल एग । 
6-ख. ग्राम सिा का सधचव - ग्र म पांच यत क  सधचि ग्र म सभ  क  भी सधचि होग , सधचि ग्र म सभ  के 
ननयांत्रण धीन होग  और ऐसे कति्यों क  प लन करेग  िो उसे ग्र म सभ  द्ि र  समनुदेमशत ककए ि ए। 
6-र्. ग्राम सिा का ववनिश्चय - (1) ग्र म सभ  के ककसी सजम्मलन के समि ल ए गए समस्त म मले यथ सांभि 
एक मत से विननजश्चत ककए ि एगे जिसम  असफल रहने पर उपजस्थत सदस्यों की स म न्य सहमनत 
(िनरल कॉन् सेन् सश) विननश्चय से ककय  ि एग ।   
परन् तु िह ां ककसी ऐसे म मले पर मत विमभननत  है िह ां ऐस  म मल  अग मी सजम्मलन के समि ल य  ि एग , 
यहद लग त र दो स् थधगत सजम्मलनों म  एकमत य  स म न् य सहमनत (िनरल कॉन् सेन् सश) से विननश् यच 
नही ककय  ि त  है तो ऐस  म मल  उपजस्थत सदस् यों के बहुतम द्ि र , गुप् त मतद न से विनन जश्चत ककय  
ि एग । तम बर बर होने के दश  म  सजम्मलन की अध् यित  करने ि ले ् यजतत क  द्वितीय य  ननण ियक 
तम होग ।   
(2) यहद इस सांबांध म  कोई विि द उद्भूत होत  है कक तय  कोई ्यजतत मत देने क  हकद र है तो ऐसे विि द 
क  विननश्चय अध्यित  करने ि ले ्यजतत द्ि र  ग्र म सभ  िेत्र की मतद त  सूची म  प्रविजष्‍पट को ध्य न 
म  रखते हुए ककय  ि एग  और उसक  विननश्चय अांनतम होग । 
7. ग्राम सिा की शम्ततयां और कृत्य तथा उसका वावषाक सम्भमलि - (1) उन ननयमो के अधीन िो र य य 
सरक र इस ननममत्त बन ए और ऐसे स ध रण य  विशेष आदेशों के, िो र य य सरक र द्ि र  समय-समय 
पर ि री ककये ि एां, अधीन रहते हुए ग्र म सभ  की ननम्नमलखखत शजततय ाँ तथ  कृत्य होंगे, अथ ित्:–– 
(क) ग्र म के आधथिक विक स तथ  ऐसी स्कीमों की पहच न तथ  उनकी प्र थमम कत  के मलए मसद्ध ांतों को 
अधधकधथत करन ;  
(ख) स म जिक तथ  आधथिक विक स के मलये ऐसी योिन एाँ जिनम  समस्त ि वषिक योिन एां सजम्ममलत 
हैं, क यिक्रमों तथ  पररयोिन ओां को ग्र म पांच यत द्ि र  ऐसी योिन ओां, क यिक्रमों तथ  पररयोिन ओां 
 
13 
 
क  कक्रय न्ियन आरम्भ करने से पूिि अनुमोहदत करन ; 
(ग) ग्र म पांच यत के ि वषिक बिट पर विच र करन  और उस पर मसफ ररश  करन ; 
(घ) ग्र म पांच यत की सांपरीि  ररपोटि तथ  ि वषिक लेख ओां पर विच र करन ; 
(ड.) ग्र म पांच यत द्ि र  खण्ड (ख) म  ननहदिष्‍पट योिन ओां, क यिक्रमों तथ  पररयोिन ओां के मलये ननधधयों 
के समुधचत उपयोग को अमभननजश्चत करन  तथ  प्रम खणत करन ; 
(च) गरीबी अन्मूलन तथ  अन्य क यिक्रमों के अधीन हहत धधक ररयों के रूप म  ्यजततयों की पहच न करन  
तथ  चयन करन ; 
(छ) हहत धधक ररयों को ननधधयों य  आजस्तयों के समुधचत उपयोग तथ  वितरण को सुननजश्चत करन ; 
(ि) स मुद नयक कल्य ण क यिक्रमों के मलये लोगों को गनतशील करन ; 
(झ) ग्र म म  विक स स्कीमों की प्रसुविध ओां के कक्रय न्ियन, उन्ह  बन ए रखने तथ  उनके स म्य पूणि 
वितरण के मलये ्यजततयों के सकक्रय योगद न को सुननजश्चत करन ; 
(ञ) िनस ध रण के बीच स म न्य चेतन  म  अमभिृवद्ध करन ;  
(ञ-एक) स म जिक सेतटरों म  ऐसी सांस्थ ओां तथ  ऐसे कृत्यक ररयों पर, िो ग्र म पांच यत को अांतररत 
य  ग्र म पांच यत के द्ि र  ननयुतत ककये गये हैं उस पांच यत के म ध्यम से ननयांत्रण करन ;  
(ञ-दो) ग्र म के िेत्र के भीतर के प्र कृनतक स्त्रोतों क  जिनके अन्तगित भूमम, िल, िन आते हैं, सांविध न 
के उपबांधों और तत्समय प्रिृत्त अन्य सुसांगत विधधयों के अनुस र प्रबन्ध करन ; 
(ञ-तीन) ग्र म पांच यत को लघु िल शयों के विननयमन तथ  उपयोग मे सल ह देन ; 
(ञ-च र) स्थ नीय योिन  पर तथ  ऐसी योिन ओ के स्त्रोतों और ्ययो पर ननयत्रण रखन ;) और स्िच्छत , 
सफ ई और उसेन क  ननि रण और उसक  उपशमन; 
(ट) स िििननक कुओां, तड़ गों और त ल बों क  ननम िण, मरम्मत और अनुरिण तथ  धरेलू उपभोग के 
मलए िल प्रद य; 
(ड.) नह ने तथ  धोने और प लतू पशुओां को पीने के मलए िल प्रद य हेतु बल के स्त्रोतो क  सजन्नम िण 
और अनुरिण; 
(ढ) ग्र मीण सड़को, पुमलयो, पुलो, ब धो तथ  स िििननक उपयोधगत  के अन्य सकमो तथ  भिनों क  
सजन्नम िण और अनुरिण; 
(ण) स िििननक सड़को, सांड सो, न मलयो, त ल बो, क्ष्यो तथ  अन्य स िििननक स्थ नो क  सजन्नम िण, 
अनुरिण और उनकी सफ ई; 
(त) उपयोग म  न ल ये ि ने ि ले कुओां, अस्िच्छ तड़ गों, ख ईयों तथ  गड ढों को भरन  और सीढ़ीद र 
 
14 
 
कुओां (ब िडड़यों) को स्िच्छ कुओ मे पररिनतित करन ; 
(थ) ग्र म म गो और अन्य स िििननक स्थ नो पर प्रक श की ्यिस्थ  करन , 
(द) स िििननक म गो तथ  स्थ नों और उन स्थलों म  िो ननिी सम्पजत्त न हों य  िो स िििननक उपयोग 
के मलए खुले हों, च हे ऐझे स्थल पांच यत म  ननहहत हो य  र य य सरक र के हो, ब ध ओां तथ  आगे 
ननकले हुए भ ग को हट न ; 
(ध) मनोरांिनों, खेल-तम शों, दुक नों, भोिनगृहों और पेय पद थो, ममठ इयो, फलों, दूध तथ  इसी प्रक र 
की अन्य िस्तुओां के विक्रेत ओां क  विननयमन और उस पर ननयांत्रण; 
(न) मक नों, सांड सों, छ लयों, न मलयों तथ  तकश शौच लयी के सजन्नम िण क  विननयमन; 
(प) स िििननक भूमम क  प्रबांध और ग्र म स्थल क  प्रबांध, विस्त र और विक स; 
(फ) (एक) शिों, पशु-शिों और अन्य घृणोत्प दक पद थो के ्ययन के मलए स्थ नों क  विननयमन; 
(दो) ल ि ररस शिों और पशु शिों क  ्ययन; 
(ब) कचर  इकदठ  करने के मलए स्थ नों क  पृथकृ रिण; 
(भ) म ांस के विक्रय तथ  परीिण क  विननयमन; 
(म) ग्र म सभ  की सम्पजत्त क  अनुरिण; 
(य) क िी ह ऊस की स्थ पन  और प्रबांध और पशुओ से सांबांधधत अमभलेखों क  रख  ि न ; 
(कक) सांसद द्ि र  बन ई गई विधध द्ि र  य  उसके अधीन र ष्‍परीय महत्ि के धोवषत ककये गए प्र चीन 
तथ  ऐनतह मसक स्म रको को छोडकर अन्य ऐसे प्र चीन तथ  ऐनतह मसक स्म रको क  अनुरिण 
और च र ग हों तथ  अन्य भूममयों क  बन य  रख  ि न  िो ग्र म सभ  म  ननहहत य  उसके 
ननयत्रण धीन हैं; 
(खख) िन्म, मृत्यु और विि हों के अमभलेखो क  रख  ि न ; 
(गग) िनगणन  क यि म  और र य य सरक र य  केन्रीय सरक र य  विधधपूििक गहठत ककसी अन्य 
स्थ नीय प्र धधकांरण द्ि र  सच मलत सिेिणों म  सह यत  करन ; 
(घघ) स ांसधगिक रोगों की रोकथ म मे सह यत  करन ; 
(डड.) इनोन्क्रेशन और टीक  लग ने म  सह यत  करन  तथ  मनुष्‍पयों एिां पशुओां की सुरि  के मलये ऐसे 
अन्य ननि रक उप यो को िो सबांधधत सरक री विभ गों द्ि र  विहहत ककये ि एां, प्रिनतित करने 
म  सह यत  करन ;   
(चच) ननिःशतत तथ  ननर धश्रतों की सह यत  करन ; 
(छछ) युि  कल्य ण, पररि र कल्य ण तथ  खेलकूद क  अमभिधिन तयन ; 
 
15 
 
(िि) (क) िीिन तथ  सम्पजत्त की सुरि  के मलए; 
(ख) आग की रोकथ म, आग बुझ ने और ऐसे आग लग  ि ने पर सम्पजत्त की सुरि  करने के 
मलए रि  सममनत की स्थ पन  करन ; 
(झझ) िृि रोपण तथ  ग्र मिनों क  सांरिण; 
(ञञ) दहेि िैसी स म जिक बुर ईयों को दूर करन ; 
(टट) (एक) गांभीर तथ  आप ती म मलों म  ननधिन ्यजततयों के मलये धचककत्सीय सह यत  की ्यिस्थ  
करने के प्रयोिन के मलए; य  
(दो) ककसी ननधिन ्यजतत य  उसके कुटुम्ब के ककसी सदस्य की अय येजष्‍पट करने के प्रयोिन के 
मलए; य  
(तीन) ककसी ननधिन ्यजतत के फ यदे हेतु ककसी अन्य ऐसे प्रयोिन के मलये िैस  कक र य य 
सरक र द्ि र  समय-समय पर अधधसूधचत ककय  ि ए, ऐसे ननबिन्धनों तथ  शतो के अध्यधीन 
रहते हुए, िो विहहत की ि एां, उध र मांिूर करन ; 
(ठठ) (एक) र य य सरक र, कलेतटर य  इस सांबांध म  र य य सरक र द्ि र  प्र धधकृत ककसी अन्य अधधक री 
द्ि र  अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों तथ  अन्य वपछड़े िगो की दश  सुध रने के मलए 
उप यों के सांबांध म  और विशेषत: अस्पृश्यत  ननि रण के सांबांध म  हदये गए, य  ि री ककये गए ननदेशों 
य  आदेशों क  क य िन्ियन; 
परन्तु िह ां ऐसे कोई कृत् य ग्र म सभ  को सौंपे गए हैं िह ां िह यथ जस्थनत र य य सरक र जिल  पांच यत 
य  िनपद पांच यत के अधधक  के रूप म  क यि करेगी और उस प्रयोिन के मलए उसे आिश्यक ननधधय ां 
और अन्य सह यत  की ्यिस्थ  यथ जस्थनत र य य सरक र जिल  पांच यत य  िनपद पांच यत द्ि र  
की ि एगी; 
(डड) बुननय दी सुविध ओां की योिन  बन न  और उसक  प्रबांध करन ; 
(ढढ) विमभन्न क यिक्रमों के अधीन हहत धधक ररयों क  चयन करन ; 
(णण) ग्र म सभ  िेत्र के भीतर विक स स्कीमों और ननम िण क यि को कक्रय जन्ित करन  ननष्‍पप हदत करन  
और उनक  पयििेिण कलन , 
(तत) हहतग्र हहत  मूलक स्कीमों और क यिक्रमों क  ननयांत्रण तयन  और उन्ह  मॉनीटर करन ; 
(थथ) ्य पक रूप म  िन स ध रण म  स म न्य ि गरुकत  को प्रोन्नत करन ; 
(दद) स मुद नयक क यि के मलए स्िैजच्छक श्रम और सह यत  की ्यिस्थ  करन  तथ  स मुद नयक स्ि ममत्ि 
की ध रण  को प्रोन्नत बन , 
(धध) अपनी िेत्रीय अधधक ररत  के भीतर जस्थत विननहदिष्‍पट बल िेत्र तक लघु िल ननक यों की योिन  
 
16 
 
बन न , स्ि ममत्ि रखन  और प्रबन्ध करन ;  
(नन) मछली पकड़ने और अन्य ि खणजय यक प्रयोिनों के मलए ककसी विननहदिष्‍पट िेत्र तथ  लघु िल ननक य 
को पदटे पर देन ; 
(पप) मसांच ई प्रयोिन के मलए नहदयो, िलध र , लघु िल ननक यो के उपयोग को विननयममत करन ; 
(फफ) ग्र म सभ  को अांतररत य  उसके द्ि र  ननयत ककये गए समस्त स म जिक िेत्रों म  सांस्थ ओां और 
कृत् यक ररयों पर ननयांत्रण रखन ।) 
(2) ग्र म सभ  क  ि वषिक सजम्मलन, आग मी वित्तीय िषि के प्र रम्भ होने के कम से कम तीन म ह 
पूिि ककय  ि एग  और ग्र म पांच यत ऐसे सजम्मलन के समि ननम्नमलखखत ब ते रखेगी: - 
(क) लेख ओां क  ि वषिक वििरण; 
(ख) पूिििती वित्तीय बषि के प्रश सन की ररपोटि; 
(ग) आग मी वित्तीय िषि के मलये प्रस्त वित विक स तथ  अन्य क यि सम्बन्धी क यिक्रम; 
(घ) अांनतम सांपरीि  हटप्पण और उसके सम्बन्ध म  हदये गये उत्तर, यहद कोई हों; 
(ड.) ग्र म पांच यत क  ि वषिक बिट तथ  अगले वित्तीय िषि के मलये ि वषिक योिन  ।  
(2-क) ग्र म पांच यत ऐसे म मलो को ग्र म सभ  के समि रखेगी जिन्ह  कक िनपद पांच यत, जिल  पांच यत, 
कलतटर य  इस ननममत्त प्र धधकृत कोई अधधक री ऐसे सजम्मलन के समि रखे ि ने की अपेि  
करे।) 
(3) ग्र म पांच यत इस ध र  के अधीन अपने समय के म मलों के सम्बन्ध मे ग्र म सभ  द्ि र  दी गई 
मसफ ररशों को, यहद कोई हो, क य िजन्ित करेगी।  
7-क. ग्राम सिा की स्थायी सभमनत तथा तदथा सभमनत - (1) ग्र म पांच यत अपने कृत्यों तथ  कत्ति्यों 
क  ननििहन करने के मलए ग्र म सभ  की ननम्नमलखखत स्थ यी सममनतयों क  गठन करेगी, अथ ित्:- 
(1) ग्र म ननम िण सममनत; और 
(2) ग्र म विक स सममनत।) 
(2) उपध र  (1) म  उजल्लखखत स्थ यी सममनतयों के अनतररतत, ग्र म सभ , ककसी समयबद्ध क यि के 
कक्रय न्ियन के मलए एक य  अधधक ऐसी तदथि सममनतयो क  गठन कर सकेगी िैसी कक िह 
आिश्यक समझे। सममनत मे ऐसे सदस्य सम विष्‍पट होगे िो सममनत को सौंपे गए क यि म  हहत 
रखते हैं टेक होल्डर सममनत ग्र म सभ  द्ि र  क यि के सम पन ररपोटि प्रस्तुत करने तथ  क यि 
के मूल्य ांकन करने के पश्च त् अजस्तत्ि म  नहीां रहेगी । 
(3) ऐसी सममनतयों िो ग्र म सभ  की अधधक ररत  के भीतर पहले से ही क यि कर रही हो, ग्र म सभ  
के अनुमोदन से क यि करती रह गी। 
 
17 
 
(4) सदस् यों की सांख् य , स् थ नों क  आरिण, पद िधध, त् य गपत्र तथ  हट ए ि ने के मलए प्रकक्रय , क यि 
सांच लन, सदस् य होने के मलए प त्रत , सजम्मलन, ररजतत को भरे ि ने क  ढांग तथ  स् थ यी 
सममनतयों और तदथि सममनतयों की प्रकक्रय  ऐसी होगी िो कक विहहत की ि ए। 
7-ख. स् थायी सभमनतयों का र् ि और उिके कृत् य –– (1) ग्र म ननम िण सममनत, ग्र म पांच यत के एक अमभकरण 
(एिेन् सी) के रूप म  क यि करेगी और प ांच ल ख रूपये तक के समस् त ननम िण क यि तथ  ग्र म पांच यत, 
ग्र म सभ  द्ि र  सौप  गए अन् य क यों क  ननष्‍प प दन करेगी। 
(2) ग्र म पांच यत क  सरपांच, ग्र म ननम िण सममनत तथ  ग्र म विक स सममनत, क  पदेन अध् यि होग । 
(***) 
(4) ग्र म विक स सममनत क  गठन तथ  उसके कृत् य ऐसे होंगे िैसे कक विहहत ककए ि एां। 
(5) ग्र म ननम णि सममनत के सदस् य, ग्र म विक स सममककत म  ऐसी रीनत म  सजम्ममलत ककए ि एांगे 
िैसी कक विहहत ि ए। 
(6) सममनत के गठन तथ  ननि िचन से सांबांधधत समस्त विि द ध र  122 तथ  उसके अधीन बन ए गए 
ननयमों के उपबांधों द्ि र  ननपट ये ि एांगे। 
(7-ग. ***)  
(7-घ. सभमनत की शम्ततयां कृत्य तथा कत्ताव्य - सममनत की शजततय ां, कृत्य तथ  कत्ति्य ऐसे होंगे िो ग्र म 
सभ  द्ि र  समय-समय पर उसे सौंपे ि एां। प्रत्येक सममनत, ग्र म सभ  के प्रनत उत्तरद यी तथ  िि बद र 
होगी और उसके ननयांत्रण तथ  पयििेिण के अधीन क यि करेगी। 
(7-ड. सदस्य का हटाया जािा - ग्र म सभ  को, अमभमलखखत ककए ि ने ब ले क रणों से ककसी भी समय सममनत 
के ककसी भी सदस्य को हट ने की शजतत होगी।) 
(7-च ग्राम निमााण सभमनत तथा ग्राम ववकास सभमनत की शम्ततयां तथा कत्ताव्य – ग्र म ननम िण सममनत तथ  
ग्र म विक स सममनत सांयुतत रूप से ग्र म के सांपूणि विक स के मलए एक योिन  तैय र करेगी तथ  इसे 
ग्र म सभ  के अनुमोदन के मलए प्रस्तुत करेगी।) 
(7-छ. स्थायी सभमनत का सधचव - ग्र म पांच यत क  सधचि, ग्र म सममनत तथ  ग्र म विक स सममनत, क  भी 
पदेन सधचि होग । 
(7-छक. ग्राम सिा की दीघाकाभलक ववकास योजिा का तैयार क्रकया जािा - (1) ग्र म सभ  आग मी दस िषो 
म  प्र प्त होने ि ली अनुम ननत ननधध क  मूल्य ांकन करेगी और विशेषज्ञों की सह यत  से ग्र म विक स 
के मलए दस िषीय दीघिक मलक योिन  तैय र करेगी और उसे अनुमोहदत करेगी। 
(2) उपध र  (1) के अधीन योिन , ग्र म सभ  की भूमम उपयोग योिन  तथ  बुननय दी सुख-सुविध ओां 
की आिश्यकत ओां को ध्य न म  रखते हुए, प्रनतिषि ग्र म सभ  के ग्र म कोष को प्र प्त होने ि ले 
वित्तीय सांस धनों पर आध ररत ि वषिक योिन  के म ध् यम से दीघिक मलक योिन  प्र थममकत  
 
18 
 
के आध र पर तैय री की ि एगी। 
7 -छख. ग्राम निमााण सभमनत तथा ग्राम ववकास सभमनत के अध् यक्ष और सदस्यों के ववरुद्ध अिुशासनिक कारावाई 
- ग्र म ननम िण सममनत तथ  ग्र म विक स सममनत क  अध्यि और प्रत्येक सदस्य उनके विरुद्ध कोई 
अनुश सननक क रिि ई की ि ने के मलए भ रतीय दण्ड सांहहत , 1860 (1860 क  45) की ध र  21 के 
अथि के अांतगित लोकसेिक समझे ि एगे।) 
(7-ज. ग्राम सिा के ववनिश्चय के ववरुद्ध सभमनत को अपील - ग्र म सभ  के विननश्चय के विरुद्ध अपील, िनपद 
पांच यत के अध्यि, उस िेत्र की िनपद पांच यत के सदस्य तथ  उपखण्ड अधधक री (र िस्ि) से ममलकर 
बनने ब ली सममनत की अपील सममनत को ऐसी रीनत मे होगी, िो कक विहहत की ि ए।) 
(7-झ. बजट - प्रत्येक ग्र म सभ , प्रनतिषि ऐसे प्ररूप मे तथ  ऐसी रीनत म  तथ  ऐसी त रीख तक िो विहहत 
की ि ए, आग मी वित्तीय िषि के मलए अपनी प्र जप्तयों तथ  ्यय क  बिट प्र रूप तैय र करेगी।) 
(7-ञ. ग्राम कोष - (1) प्रत्येक ग्र म सभ  एक ननधध स्थ वपत करेगी िो ननम्नमलखखत च र भ गो से ममलकर 
ग्र म कोष कहल एग  : - 
(एक) अन्न कोष;     (दो) श्रम कोष;   (तीन) िस्तु कोष;     (च र) नगद कोष; 
तथ  उसमे ननम्नमलखखत िम  होगी : - 
(क) द न; 
(ख) अन्य स्रोतों से आय; 
(ग) जिल  पांच यत र ि ननधध से य  बत्रस्तरीय पांच यतों की ननधध से प्र प्त कोई र मश भू-र िस्ि के 
आगम, भू-र िस्ि पर उपकर, गौण खननि पर प्र प्त रॉयल्टी, मछली पकड़ने के अधधक र के 
पट्टे, चर ई फीस तथ  श ल  भिन उपकर से प्र प्त आय िो कक र य य सरक र द्ि र  विहहत य  
ननयत की ि ए; 
(ध) अनुसूची 1-क तथ  अनुसूची 2-क म  यथ  उजल्लखखत अधधरोवपत कर, शुल्क, पथकर और फीस 
तथ  ग्र म सभ  की अन्य आय; और 
(ड.) केन्रीय सरक र य  र य य सरक र द्ि र  प्र योजित विमभन्न स् कीमों के अधीन ग्र म पांच यत द्ि र  
प्र प्त कोई र मश िो केन्रीय सरक र य  र य य सरक र द्ि र  विहहत म नदण्डो के अनुस र ग्र म 
सभ  को आिांहटत की ि नी हो। 
(2) इस अधधननयम तथ  उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपनधो के अध्यधीन रहते हुए, ग्र म सभ  
म  ननहहत समस्त सांपजत्त और ग्र म कोष इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलए य  ग्र म के विक स 
सांबांधी कक्रय कल पों से सांबांधधत अन्य प्रयोिनों के मलए य  ऐसे अन्य ्ययों के मलए उपयोजित 
ककय  ि एग  िो ग्र म सभ  अनुमोहदत कर ; 
परन्तु ककसी स्कीम के अधीन प्र प्त की गई ननधधयों क  उपयोग यथ जस्थनत, केन्रीय सरक र 
 
19 
 
य  र य य सरक र द्ि र  ि री ककए गए म गिदशिक मसद्ध ांतों के अनुस र ककय  ि एग  । 
(3) ग्र म कोष ऐसी रीनत म  तथ  ऐसे प्ररूप म  रख  ि एग  और सांध ररत ककय  ि एग  िैस  कक विहहत 
ककय  ि ए।   
(4) ग्र म कोष क  प्रितिन ग्र म विक स सममनत द्ि र  ककय  ि एग  तथ  ग्र म कोष म  से समस् त रकम  
ग्र म सभ  के अनुमोदन से ग्र म विक स सममनत क  अध् यि तथ  ग्र म पांच यत के सधचि के सांयुत त 
हस् त िर से आहररत की ि एांगी तथ  आहरण क  लेख  ग्र म विक स सममनत के सधचि द्ि र  
सांध ररत ककय  ि एग । ग्र म कोष म  हुई समस् त प्र जप्तय ां तथ  उससे ककए गए समस् त आहरणों 
के सांबांध म  ि नक री ग्र म सभ  के समि उसके आग मी सजम्मलन म  रखी ि एगी।  
7-ट. लेखा तथा संपरीक्षा—ग्र म सभ  समुधचत रूप से लेख  पुस् तक   सांध ररत करि एगी तथ  लेख ओां क  
ि वषिक  वििरण तैय  करेगी। ग्र म सभ  के लेख ओां की सांपरीि  समय-समय पर ऐसी रीनत म  
तथ  ऐसे प्र जध्स क री द्ि र  की ि एगी िो कक विहहत ककय  ि ए तथ  प्रस् तुत सांपरीि  ररपोटि 
ग्र म सभ  के समि आग मी सजम्मलन म  रखी ि एगी। 
7- . सरकरी कमाचाररयों पर नियंत्रण – (1) ककसी ग्र म सभ  को ककसी ऐसे सरक री कमिच री जिसक  
ग्र मसभ  िेत्र की सीम ओां के भीतर अधधक ररत  िेत्र आत  है, क  िेतन रोकने, छुट्टी मांिूर करने, 
क यि क  ननरीिण तथ  पयििेिण करने की शजतत होगी। 
(2) ग्र म सभ  को उपध र  (1) म  ननहदिष्‍पट सरक री कमिच री के अिच र तथ  कत्ति्य की उपेि  
के मलए श जस्तयों के अधधरोपण के सांबांध म  मसफ ररश सिम प्र धधक री को करने की शजतत 
होगी।) 
7-ड. ग्राम सिा के कृत्यों के संबंि में राज्य सरकार की शम्तत - र य य सरक र, स ध रण य  विशेष 
आदेश द्ि र  ग्र म सभ  को सौंपी गये कृत्यों तथ  कत्ति्यों म  िृवद्ध कर सकेगी य  उन्ह  ि वपस 
ले सकेगी िह ां र य य सरक र ग्र म सभ  को सौपे गए ककन्हीां कृत्यों के ननष्‍पप दन को अपने ह थ 
म  ले लेती है।) 
अध्याय 3 
पंचायतों की स्थापिा 
 
8. पंचायतों का र् ि - इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये - 
(क) ग्र म के मलये ग्र म पांच यत; 
(ख) खण्ड के मलये िनपद पांच यत; और 
(ग) जिल  के मलये जिल  पांच यत; 
क  गठन ककय  ि एग । 
 9. पंचायत की अवधि - (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत अपने प्रथम सजम्मलन के मलये ननयत त रीख से प ांच 
 
20 
 
िषि तक के मलये बनी रहेगी और इससे अधधक नहीां, िब तक कक इस अधधननयम के अधीन समय से 
पहले विघहटत नहीां कर दी ि ए। 
(2) ककसी पांच यत क  गठन करने के मलये ननि िचन - - 
(क) उपध र  (1) म  विननहदिष्‍पट उसकी अिधध की सम जप्त के पूिि, 
(ख) उसके विघटन की त रीख से छह म स की क ल िधध की सम जप्त के पूिि, 
पूर  कर मलय  ि एग  : 
परन्तु िह ां ऐसी शेष क ल िधध, जिसके मलये कोई विघहटत पांच यत बनी रहती, छह म स से कम है, 
िह ां ऐसी क ल िधध के मलये उस पांच यत क  गठन करने हेतु इस खण्ड के अधीन कोई ननि िचन 
कर न  आिश्यक नहीां होग । 
(3) ककसी पांच यत की अिधध की सम जप्त के पूिि उस पांच यत के विघटन पर गहठत की गई कोई पांच यत 
उस क ल िधध के केिल उतने शेष भ ग के मलये बनी रहेगी, जिसके मलये विघहटत पांच यत, यहद 
िह इस प्रक र वि घहटत नहीां की ि ती तो िह उपध र  (1) के अधीन बनी रहती। 
10. ग्राम पंचायत, जिपद पंचायत और म्जला पंचायत की स्थापिा - (1) प्रत्येक ऐसे ग्र म के मलये िो ध र  
3 के अधीन इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये ग्र म के रूप म  विननहदिष्‍पट ककय  गय  है एक ग्र म पांच यत 
होगी। 
(2) र य यप ल, अधधसूचन  द्ि र , ककसी जिले को खण्डों म  विभ जित कर सकेग । अधधसूचन  म  प्रत्येक 
ऐसे खण्ड क  न म, उसक  मुख्य लय और सम विष्‍पट िेत्र विननहदिष्‍पट ककय  ि एग । प्रत्येक खण्ड 
के मलये एक िनपद पांच यत होगी िो उस खण्ड के न म से ि नी ि एगी। 
(3) प्रत्येक जिले के मलये एक जिल  पांच यत होगी : 
परन् तु तत् समय प्रिृत् त सुसांगत विधध के अधीन गहठत प्रत् येक नगर प मलक ननगम, नगर 
प मलक  पररषद य  नगर पांच यत अपनी अधधक ररत  के भीतर के िेत्र के मलए एक पृथक प्रश सननक 
इक ई बनेगी। 
11. पंचायतों का निर्मि - प्रत्येक ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल  पांच यत उस न म से, िो 
यथ जस्थनत, ग्र म के मलये ध र  3 के अधीन आदेश म  य  िनपद पांच यत और जिल  पांच यत के मलये 
ध र  10 के अधीन अधधसूचन  म  उनके मलये विननहदिष्‍पट ककय  गय  है, एक ननगममत ननक य होगी, उनक  
श श्ित उत्तर धधक र होग  और उनकी एक स म न्य मुर  होगी और िे उतत न म से ब द चल एगी तथ  
उतत न म से उसके विरुद्ध ब द चल ए ि एांगे और इस अधधननयम तथ  उसके अधीन बन ये गये ननयमों 
के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, उन्ह  िांगम य  स्थ िर सांपजत्त अजिित करने, ध रण करने य  अन्तररत 
करने, सांविद  करने और इस अधधननयम के प्रयोिन के मलये आिश्यक अन्य समस्त ब त  करने की शजतत 
होगी। 
12. ग्राम पंचायतों का वाडों में वविाजि - प्रत्येक ग्र म पांच यत िेत्र को दस से अन् यून ि डों म , िैस  कलेतटर 
 
21 
 
अिध ररत करे, विभ जित ककय  ि एग  तथ  प्रत्येक ि डि एक सदस्यीय ि डि होग  : 
परन्तु िह ाँ ग्र म पांच यत िेत्र की िनसांख्य  एक हि र से अधधक हो, िह ाँ उसे ऐसी रीनत 
म  ि डों म  विभ जित ककय  ि एग  जिससे कक ि डों की कुल सांख्य  बीस से अधधक न हो और प्रत्येक 
ब डि की िनसांख्य  यथ स ध्य एक िैसी ही होगी : 
परन्तु यह और भी कक ग्र म पांच यत िेत्र की िनसांख्य  क  और ऐसी पांच यत म  ि डों की 
सांख्य  के बीच क  अनुप त, ऐसे समूणि खण्ड के मलये जिसके भीतर पांच यत िेत्र आत  है, यथ स ध्य 
एक िैस  ही होग । 
13. ग्राम पंचायत का र् ि – (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत ननि िधचत पांचों तथ  सरपांच से ममलकर बनेगी।)  
(2) यहद कोई ग्र म य  ि डि, यथ जस्थनत, ककसी सरपांच य  पांच को ननि िधचत नहीां करत  है तो उस स्थ न 
को भरने के मलये यथ जस्थनत, ऐसे ग्र म य  ि डि म  नई ननि िचन की क यिि हहय ां छ: म स के भीतर 
प्र रम्भ की ि एांगी : 
परन्तु इस उपध र  के अधीन सरपांच क  ननि िचन लांबबत होने के क रण ननि िधचत पांच ध र  17 की उपध र  
(2), (3) तथ  (4) के उपबांधों के अध्यधीन रहते हुए ध र  20 के अधीन प्रथम सजम्मलन म  अपने म  
से एक सरपांच क  ननि िचन कर गे िो इस उपध र  के अधीन ननि िधचत सरपांच के पदभ र ग्रहण करने 
तक इस अधधननयम के अधीन सरपांच के समस्त कृत्यों क  ननििहन तलेग  : 
परन्तु यह और भी कक ग्र म पांच यत के गठन के मलये आगे की और क यिि हहय ां, इस उपध र  के अनुस र 
पांच क  ननि िचन लजम्बत होने के क रण रोकी नहीां ि एांगी : 
परन्तु यह और भी कक यहद कोई ग्र म य  ि डि पुन: यथ जस्थनत ककसी सरपांच य  ककसी पांच को ननि िधचत 
नहीां करत  है तो यथ जस्थनत ऐसे ग्र म म  य  ऐसे ि डि म  पांच के ननि िचन की नई क यिि हहय ां तब तक 
प्र रम्भ नहीां की ि एगी िब तक कक र य य ननि िचन आयोग क  यह सम ध न न हो ि ए कक यथ जस्थनत 
ऐसे ग्र म से य  ऐसे ि डि से सरपांच य  पांच क  ननि िचन ककये ि ने की सांभ ्यत  है और यहद आयोग 
यह विननश्चय करत  है कक सरपांच क  नय  ननि िचन नहीां ककय  ि ए, तो प्रथम परन्तुक के अधीन 
ननि िधचत सरपांच इस अधधननयम के अधीन सरपांच के समस्त कृत्यों क  ननििहन करत  रहेग ।) 
(***) 
(4) (एक) प्रत्येक ग्र म पांच यत म  -– 
(क) अनुसूधचत ि नतयों, और 
(ख) अनुसूधच त िनि नतयों, 
के मलये स्थ न आरक्षित रखे ि एगे और इस प्रक र आरक्षित स्थ नों की सांख्य  क  अनुप त उस ग्र म 
पांच यत म  प्रत्यि ननि िचन द्ि र  भरे ि ने ि ले स्थ नो की कुल सांख्य  के स थ यथ स ध्य िही होग  
िो उस ग्र म पांच यत िेत्र म  अनुसूधचत ि नतयों की य  अनुसूधचत िनि नतयों की िनसांख्य  क  उस 
ग्र म पांच यत िेत्र की कुल िनसांख्य  के स थ है, ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र  उस पांच यत म  
 
22 
 
मभन्न-मभन्न ि डों के मलये विहहत रीनत से (***) आिांहटत ककये ि  सक  गे। 
(दो) ककसी ग्र म पांच यत म  िह ाँ अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों दोनो के मलये पच स 
प्रनतशत य  पच्चीस प्रनतशत से कम स्थ न आरक्षित ककये गये है िह ां स्क स्थ नो की सांख्य  के 25% 
के स्थ न अन्य वपछड़े िगो के मलये आरक्षित ककये ि एगे और ऐसे स्थ न उस ग्र म पांच यत के मभन् न 
ि डों को विहहत रीनत म  चक्र नुक्रम म  कलेत टर द्ि र  आिांहटत ककये ि एांगे। 
(5) उपध र  (4) के अधीन आरक्षित ककये गये स्थ नो की कुल सांख्य  के कम से कम आधे स्थ न  
यथ जस्थनत, अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों य  अन्य वपछड़े िगो की महहल ओ के मलये 
आरक्षित रखे ि य गे। 
(6) प्रत्येक ग्र म पांच यत म  प्रत्यि ननि िचन द्ि र  भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य  के कम से कम 
आधे स्थ न जिनके अन्तगित अनुसूधच त ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों और अन्य वपछड़े िगि की 
महहल ओां के मलये आरक्षित स्थ नों की सांख्य  भी है, महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि एांगे और ऐसे 
स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र  विहहत रीनत म  ग्र म पांच यत म  मभन्न- मभन्न ि डों के मलये लौट ननक ल 
कर और चक्र नुक्रम से आिांहटत ककये ि  सक  गे। 
(7) ऐसे ि डों को जिनमे अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों य  अन्य वपछड़े िगो की कोई  
िनसांख्य  नहीां है, उन्ह  यथ जस्थनत, अनुसूधचत ि नतयों य  अनुसूधचत िनि नतयों य  अन्य वपछड़े 
िगो के मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय  ि एग ।   
14. मत देिे तथा अभ्यथी होिे के भलये अहाता - (1) ऐस  प्रत्येक ्यजतत, जिसक  न म ककसी ग्र म के 
मतद त ओां की सूची म  सजम्ममलत है, उस पांच यत के जिसके िेत्र म  िह ग्र म सम विष्‍पट है पदध री के 
ननि िचन म  मत देने के मलये अहहित होग । 
(2) ऐस  प्रत्येक ्यजतत िब तक कक िह इस अधधननयम य  तत्समय प्रिृत्त ककसी अन्य विधध के अधीन 
ननरहहित न हो ककसी (***) पांच यत के पदध री के रूप म  (ननि िधचत) ककये ि ने के मलये अहहत होग । 
यहद ककसी न मननदेशन-पत्र म  चुन ि धचन् ह न भर  गय  हो तो इस आध र पर न मननदेशन-पत्र ननरस्त 
नहीां ककय  ि  सकत । ऐसी जस्थनत म  उधचत यह होग  कक ननि िचन अधधक री अभ् य थी को स्िेच्छ  से कोई 
धचह आिांहटत कर दे। 
15. एक साथ सदस्यता का प्रनतषेि - कोई ्यजतत ककसी पांच यत के पदध री के रूप म  ननि िचन के मलये 
यथ जस्थनत एक से अधधक ि डों य  ननि िधचत िेत्रों से खड़  होने के मलये प त्र नहीां होग । 
16. सहयोजि के भलए सम्भमलि -- (***)  
17. सरपंच और उप-सरपंच का निवााचि - (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत म  एक सरपांच तथ  एक उप-सरपांच होग । 
कोई ्यजतत िो -– 
(एक) पांच के रूप म  ननि िधचत ककये ि ने के मलये अहहत है; 
(दो) सांसद के ककसी भी सदन क  सदस्य य  र य य विध न सभ  क  सदस्य नहीां है; और 
 
23 
 
(तीन) ककसी सहक री सोस इटी क  सभ पनत य  उप-सभ पनत नहीां है, 
उपध र  (2), (3) और (4) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, सरपांच के रूप म  उन ्यजततयों द्ि र , 
जिनके न म ग्र म पांच यत िेत्र की मतद त  सूची म  सजम्ममलत हैं, ऐसी रीनत म  ननि िधचत ककय  
ि एग  िो विहहत की ि ए। 
(2) (एक) खण्ड के भीतर की ग्र म पांच यतों म  अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों के मलये 
ग्र म पांच यत के सरपांचों के उतनी सांख्य  म  स्थ न आरक्षित रखे ि एांगे जिनक  अनुप त खण्ड के सरपांचों 
की कुल सांख्य  के स थ िही होग  िो कक अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों की िनसांख्य  
क  खण्ड की कुल िनसांख्य  के स थ है : 
परन्तु उस खण्ड क  भ ग बन ि ने ि ले अनुसूधचत िेत्रों से मभन्न ककसी ऐसे खण्ड म  अनुसूधचत िनि नतयों 
के मलये आरक्षित ककये ि ने ि ले ग्र म पांच यत के सरांपच की सांख्य  की गणन  करने के प्रयोिन के 
मलये उस खण्ड के भीतर आने ि ले अन ुसूधचत िेत्रों की कुल िनसांख्य  तथ  उसम  की अनुसूधचत 
िनि नतयों की िनसांख्य  अपिजिित कर दी ि एगी। 
(दो) खण्ड म  िह ां अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों की सजम्ममलत िनसांख्य  पच स प्रनतशत 
से तय है, िह ां खण्ड के भीतर ग्र म पांच यतों म  सरपांचों के कुल पदों के पच्चीस प्रनतशत स्थ न अन्य 
वपछड़े िगो के मलये आरक्षित ककये ि एांगे। 
(3) खण्ड के भीतर सरपांचों की कुल सांख्य  के कम से कम आधे स्थ न महहल ओां के मलए आरक्षित रखे 
ि एांगे। 
(4) इस ध र  के अधीन आरक्षित रखे गये स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र  खण्ड के भीतर ग्र म पांच यती 
मे बबहहत रीनत म  चक्र नुक्रम से आिहटत ककये ि एगे : 
परन्तु ऐसी ग्र म पांच यत को, जिसमे अनुसूधचत ि नतयों य  अनुसूधचत िनि नतयो य  अन्य वपछड़े िगि 
की िनसांख्य  नहीां है, यथ जस्थनत, अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयो य  अन्य वपछड़े िगि के 
मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय  ि एग । 
(5) र य य ननि िचन आयोग, पांच यतों के प्रत्येक ननि िचन के पश्च त् ग्र म पांच यतों के उपसरपांच क  ननि िचन 
तुरन् त ऐसी रीनत म , िैसी कक विहहत की ि ए, करि एग । 
(6) यहद ग्र म पांच यत क  सरपांच अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधच त िनि नतयों य  अन्य वपछड़े िगो क  
नहीां है, तो उप सरपांच ऐसी ि नतयों य  ऐसी िनि नतयों य  ऐसे िगो के पांचो म  से ननि िधचत ककय  
ि एग । 
(7) यहद सरपांच य  उप-सरपांच सांसद के ककसी भी सदन क  सदस्य य  र य य बबध न सभ  क  सदस्य य  
ककसी सहक री सोस इटी क  सभ पनत य  उप-सभ पनत हो ि त  है, तो उसके सम्बन्ध मे यह समझ  
ि एग  कक उसने यथ जस्थनत सरपांच य  उप-सरपांच के रूप म  अपन  पद उस त रीख से ररतत कर हदय  
है जिसको कक िह ऐस  सदस्य य  सभ पनत य  उप-सभ पनत हुआ है और यह समझ  ि एग  कक ऐसे 
पद मे ध र  38 के प्रयोिन के मलये आकजस्मक ररजतत हो गई है। 
 
24 
 
(8) इस ध र  मे अन्तवििष्‍पट ककसी ब त के होते हुए भी, सरपांच को, इस अधधननयम के समस्त प्रयोिनो 
के मलये ग्र म पांच यत क  पांच समझ  ि एग । 
18. बहहर्ाामी सरपंच (या ग्राम निमााण सभमनत का अध्यक्ष) द्वारा कायािार का सौंपा जािा -- (1) नये ननि िधचत 
सरपांच (य  ग्र म ननम िण सममनत क  अध्यि के ब रे म  यह समझ  ि येग  कक उसने ध र  20 म  यथ  
उपबांधधत प्रथम सजम्मलन की त रीख से पद क  क यिभ र ग्रहण कर मलय  है ।  
(2) यहद बहहग िमी सरपांच (य  ग्र म ननम िण सममनत क  अध्यि) अपने कलिे म  के कोई क गि पत्र य  सांपजत्त 
नये ननि िधचत सरांपच (य  ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि) को नहीां सौंपत  है य  सौंपने से इक र करत  
है, तो विहहत प्र धधक री मलखखत आदेश द्ि र  बहहग िमी सरपांच (य  ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि] 
को ननदेश दे सकेग  कक िह एक ऐसे समस्त क गि पत्र और सम्पजत्त, िो ऐसे सरपांच (य  ग्र म ननम िण 
सममनत के अध्यि की हैमसयत से उसके कल िे म  है, यथ जस्थनत, नये सरपांच (य  ग्र म ननम िण सममनत 
के अध्यि), उप-सरपांच य  ग्र म पांच यत के सधचि को तत्क ल सौंप दे। 
(3) यहद बहहग िमी सरपांच (य  ग्र म ननम िण सममनत क  अध्यि उपध र  (2) के अधीन ननदेश क  अनुप लन 
नहीां करत  है तो विहहत प्र धधक री उसके विरुद्ध ध र  92 के अनुस र क यिि ही करेग  और ध र  98 के 
अधीन अमभयोिन आरम्भ करने के मलये आिश्यक क यिि ही करेग । 
(4) ऐस  सरपांच य  ग्र म ननम िण सममनत क  अध्यि, जिसके विरुद्ध उपध र  (3) के अधीन क रिि ई की गई 
है, और जिसको दोषी प य  गय  है, दोषी प ये ि ने की त रीख से छ: िषि की क ल िधध के मलये पांच यत 
क  सदस्य य  पदध री होने के मलये ननरहहित होग  : 
परन्तु र य य सरक र द्ि र  लेखबद्ध ककये ि ने ि ले क रणों से ऐसी ननरहित  हट ई ि  सकेगी य  उसकी 
क ल िधध म  कमी की ि  सकेगी। 
19. निवााचि की अधिसूचिा - सरपांच, उप-सरपांच और पांचों के प्रत्येक ननि िचन को विहहत प्र धधक री द्ि र  
ऐसी रीनत म , िैस  कक विहहत ककय  ि ए, प्रक मशत ककय  ि एग ।   
20. प्रथम सभमेलि और पदावधि -- (1) ग्र म पांच यत क  प्रथम सम्मेलन ध र  19 के अधीन प्रक शन की 
त रीख से 30 हदन के भीतर ककय  ि एग । ऐस  सम्मेलन विहहत प्र धधक री द्ि र  बुल य  ि एग  और 
सम्मेलन के सम्बन्ध म  ध र  44 के उपबांध यथ शतय उतत सम्मेलन को ल गू होंगे। 
(2) ग्र म पांच यत के पदध री प्रथम सम्मेलन की त रीख से प ाँच िषि के मलये पद ध रण करेगे इससे अधधक 
नहीां: 
परन्तु इस उपध र  म  अन्तवििष्‍पट ककसी ब त के होते हुए भी, ग्र म पांच यत क  पदध री होने 
ि ल  प्रत्येक ्यजतत -- 
(एक) उस ग्र म पांच यत िेत्र क  मतद त  न रहने पर; थ । 
(दो) उसके र य य विध न सभ  के सदस्य य  सांसद के ककसी सदन के सदस्य होने पर, तत्क ल अपने 
पद पर नहीां रह ि एग । 
 
25 
 
(3) यहद उपध र  (2) मे िखणित क ल िधध क  अिस न होने के पूिि, ग्र म पांच यत पुनगिहठत नहीां की ि ती 
है तो िह क ल िधध क  अिस न हो ि ने पर विघहट त हो ि एगी और ध र  87 के उपबांध उस पांच यत 
के सम्बन्ध म

Excerpt shown. Open the full act in Lexace.

‹ Prev All Chhattisgarh acts Next ›