The Chhattisgarh Panchayat Raj Avam Gram Swaraj Adhiniyam, 1993
Chhattisgarh · state statute
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मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993
(क्रम ांक 1 सन् 1994)
अध्याय 1
प्रारम्भिक
1. सांक्षिप्त न म, विस्त र और प्र रम्भ
2. पररभ ष एां
अध्याय 2
ग्राम सिा
3. ग्र म के सम् बन् ध म अधधसूचन
4. ग्र म की मतद त सूची
5. ग्र म के मतद त ओां क रजिस्रीकरण
5-क. ग्र म सभ क गठन और ननगमन
6. ग्र म सभ क सजम्मलन
6-क. ग्र म सभ क विशेष सजम्मलन
6-ख. ग्र म सभ क सधचि
6-ग. ग्र म सभ क विननश्चय
7. ग्र म सभ की शजततय ां और कृत्य तथ उसक ि वषिक सजम्मलन
7-क. ग्र म सभ की स्थ यी सममनत तथ तदथि सममनत
7-ख. स्थ यी सममनतयों क गठन और उनके कृत्य
7-ग. [***]
7-घ. सममनत की शजततय ां, कृत् य तथ कत्ति्य
7-ड. सदस्य क हट य ि न
7-च. ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत की शजततय ां तथ कत्ति्य
7-छ. स्थ यी सममनत क सधचि
7-छक. ग्र म सभ की दीघिक मलक विक स योिन क तैय र ककय ि न
7-छख. ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत के अध्यि और सदस्यों के बबरुद्ध
अनुश सननक क रिि ई
7-ि. ग्र म सभ के विननश् चय के विश्ि सममनत को अपील
7-झ. बिट
7-ञ. ग्र म कोष
7-ट. लेख तथ सांपरीि
2
7-ठ. सरक री कमिच ररयों पर ननयांत्रण
7-ड. ग्र म सभ के कृत् यो के सांबांध म र य य सरक र की शजतत
अध्याय 3
पंचायतों की स्थापिा
8. पांच यतों क गठन
9. पांच यत की अिधध
10. ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल पांच यत की स्थ पन
11. पांच यतों क ननगमन
12. ग्र म पांच यतों क ब डी म विभ िन
13. ग्र म पांच यत क गठन
14. मत देने तथ अभ्यथी होने के मलये अहित
15. एक स थ सदस्यत क प्रनतषेध
16. [***]
17. सरपांच और उप-सरपांच क ननि िचन
18. बहहग िमी सरपांच य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि द्ि र क यिभ र क सौंप ि न
19. ननि िचन की अधधसूचन
20. प्रथम सम्मेलन और पद िधध
21. सरपांच और उप-सरपांच के विरुद्ध अविश्ि स क प्रस्त ि
21-क. ग्र म पांच यत के पद धधक ररयों क ि पस बुल य ि न
22. िनपद पांच यत की सांरचन
23. खण्ड क ननि िचन िेत्रों म विभ िन
24. [***]
25. िनपद पांच यत के अध्यि और उप ध्यि क ननि िचन
26. सदस्यों अध्यि और उप ध्यि के न मों क प्रक शन
27. प्रथम सजम्मलन और पद िधध
28. अध्यि य उप ध्यि के विरुद्ध अविश्ि स क प्रस्त ि
29. जिल पांच यत क गठन
30. जिले क ननि िचन िेत्रों म विभ िन
31. [***]
32. अध्यि और उप ध्यि क ननि िचन
33. सदस्यों, अध्यि और उप ध्यि के न मों क प्रक शन
33-क. मलवपकीय गलनतयों य लोप क ठीक ककय ि न
34. प्रथम सजम्मलन और पद िधध
35. अध्यि और उप ध्यि के विरूद्ध अविश्ि स प्रस्त ि
36. पांच यत क पदध री होने के मलये ननरहित एां
37. पांच यत के पद धधक ररयों द्ि र त्य गपत्र
3
38. ररजततयों क भर ि न
39. पांच यत के पदध री क ननलम् बन
40. पांच यत के पदध ररयों क हट य ि न
41. एक से अधधक पद ध रण करने क िििन
अध्याय 4
निवााचि का संचालि
42. र य य ननि िचन आयोग की शजततय ां
42-क. अधधक ररयों और कमिच रीिृन्द को ननयुतत करने और उनके कत्ति्य और कृत्यों को समनुदेमशत
करने की शजतत
43. ननयम बन ने की शजतत
अध्याय 5
पंचायतों के कामकाज का संचालि तथा पंचायत के सम्भमलि की प्रक्रिया
44. सजम्मलन की प्रकक्र य
45. पांच यत द्ि र अांनतम रूप से ननपट ये गये विषयों पर पुनवििच र
अिीिस्थ अभिकरण
46. ग्र म पांच यत की स्थ यी सममनतय ां
47. िनपद पांच यत और जिल पांच यत की स्थ यी सममनतय ां
47-क. त्य गपत्र
47-ख. सदस्य य सभ पनत के ननि िचन की विधधम न्यत के सम्बन्ध म विि द
48. सरपांच, उपसरपांच, अध्यि और उप ध्यि की शजततय ां और कत्ति्य
अध्याय 6
पंचायतों के कृत्य
49. ग्र म पांच यत के कृत् य
49-क. ग्र म पांच यत के अन्य कृत् य
50. िनपद पांच यत के कृत्य
51. र य य सरक र के कनतपय कृत्यों क िनपद पांच यत य जिल पांच यत को सौंप ब न
52. जिल पांच यत के कृत् य
53. पांच यतों के कृत्यों के सम्बन्ध म र य य सरक र की शजतत
पंचायतों की शम्ततयां
54. स िििननक स्ि स््य, सुविध एां और सुरि की ब बत् ग्र म पांच यत की शजततयों
55. भिनों के पररननम िण पर ननयांत्रण
56. स िििननक म गों तथ खुले स्थलों पर रुक िट , ब ध दबत अधधक्रमण
4
56-क. ध र 55 तथ 56 के अधीन ग्र म पांच यत की शजततयों क प्रत्य योिन
57. म गो क न मकरण करने तथ भिनों पर क्रम ांक ड लने की शीजत त
58. ब ि रों य मेलों क विननयमन
59. सड़कों को घुम ि देने, मोड़ने, च लू न रखने य बांद करने की िनपद पांच यत की शजतत
60. िनपद पांच यत म ननहहत सड़कों और भूममयों पर अधधक्रमण
61. समझौत करने की शजतत
अध्याय 6 क
कॉलोिी निमााण
61-क. पररभ ष
61-ख. कॉलोनी ननम िण करने ि ले क रजिस्रीकरण
61-ग. क लोनन यों क विक स
61-घ अिैध कॉलोनी ननम िण के मलये दण् ड
61-ड. अिैध सननम िण के अपर ध क दुष्प प्रेरण करने के मलये दण् ड
61-च. अिैध ् यपितिन के य अिैध क लोनी ननम िण के ककसी िेत्र म के भू-खण् डों के अन्तरण क शून् य
होन
61-छ. अिैध कॉलोनी म अन्तग्रिस्त भूमम क समपहरण
अध्याय 7
पंचायत की निधि और उसकी सभपम्त्त
62. र य य सरक र कनतपय सम्पजत्त पांच यत म ननहहत कर सकेगी
63. पांच यत से विधधयों म समनुदेशन
64. पांच यत को सह यत अनुद न
65. स्थ िर सम्पजत्त क अांतरण
66. पांच यत ननधध
67. सांविद ननष्प प हदत करने क ढांग
68. सह यत अनुद न देने की शजतत
अध्याय 8
पंचायतों की स्थापिा, बजट तथा लेखे
69. सधच ि तथ मुख् य क यिप लक अधधक री की ननयुजतत
70. पांच यत के अन्य अधधक री और सेिक
71. श सकीय सेिकों की प्रनतननयुजतत
72. मुख् य क यिप लक अधधक री तथ सधच ि के कृत् य
73. बिट तथ ि वषिक लेखे
5
अध्याय 9
करािाि और दावों की वसूली
74. भूमम पर उपकर उद्ग्रहण करने की शजतत
75. खण्ड के भीतर सम्पजत्त के अन्तरण पर शुल्क
76. जिल पांच यत र ि ननधध
76-क. रकम क पांच यतों के बीच सांवितरण
77. अन्य कर
77-क. कर अधधरोवपत करने की शजतत
78. करों क विननयमन करने की र य य सरक र की शजतत
79. कर ध न के विरूद्ध अपील
80. ब ि र फीस आहद क ठेके पर हदय ि न
81. बक य की िसूली
82. अपिांचन के मलए श जस्त
83. करों म र हत देने के ब रे म र य य सरक र की शजतत
अध्याय 10
नियंत्रण
84. पांच यतों के क यि क ननरीिण
85. आदेशों आहद क ननष्प प दन, ननलांबबत करने की शजतत
86. कनतपय म मलों म पांच यतों को सांकमों क ननष्प प दन क ने के मलए आदेश देने की र य य सरक र
की शजतत
87. ्यनतक्रम, शजततयों के दुरुपयोग आहद के मलये पांच यतों को विघहटत करने की र य य सरक र की
शजतत
88. पांच यत के क यिकल पों की ि ांच
89. ह नन, दुरुपयोिन के मलये पांचों आहद क द नयत्ि
90. पांच यतों और अन्य स्थ नीय प्र धधक ररयों के बीच विि द
91. अपील और पुनरीिण
92. अमभलेख और िस्तुएां ि पस कर ने तथ धन िसूल करने की शजतत
93. शजततयों क प्रत्य योिन
94. ननयांत्रण की स ध रण शजतत
अध्याय 11
नियम और उपववधियां
95. ननयम बन ने की शजतत
96. उपविधधय ाँ
97. आदशि (मॉडल) उपविधधय ां
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अध्याय 12
शाम्तत
98. ननरहहित हो ि ने पर पांच, सदस्य, सरपांच, उप-सरपांच, अध्यि, उप ध्यि की हैमसयत म क यि करने
के मलये श जस्त
99. हहतबद्ध सदस्यों द्ि र मत हदये ि ने के मलये श जस्तयों
100. ककसी सदस्य, पदध री य सेिक द्ि र सांविद म हहत अजिित करने के मलये श जस्त
101. अधधक ररयों आहद क सदोष अिरोध
102. पांच यतों के सदस्य आहद को ब ध पहुांच ने क प्रनतषेध
103. सूचन को हट ने य ममट ने क प्रनतषेध
104. ि नक री न देने य मम्य ि नक री देने के मलये श जस्त
105. बोली लग ने क प्रनतषेध
106. ककसी भी पांच यत को नुकस न की प्रनतपूनति ककये ि ने की प्रकक्रय
अध्याय 13
प्रकीणा
107. सदभ िपूििक ककये गये क यो क पररत्र ण
108. सूचन के अभ ि म ि द क िििन
109. सदस्यों, अधधक ररयों आहद के विरुद्ध कनतपय ि दों म प्रनति द पांच यत य ग्र म सभ के खचि पर
ककय ि एग
110. कर आहद के सम्बन्ध म अन्य क यिि ही क िििन
111. पांच यत के सदस्य य सेिक लोक सेिक होंगे
112. ररजतत य गठन की प्रकक्रय आहद म त्रुहट होने के क रण पांच यत के क यि अविधधम न्य नहीां होगे
113. भूमम क अििन
114. केन्रीय सरक र य र य य सरक र अनुज्ञजप्त य अनुज्ञ अमभप्र प्त नहीां करेगी करेगी।
115. पांच यत की धन उध र लेने की शजतत
116. िसूल न की ि सकने ि ली धनर मशयों तथ अनुपयोगी स मग्री क बट टे ख ते म ड ल ि न
117. सदस्यों आहद को प ररश्रममक क प्रनतषेध
118. पांच यत य ग्र म सभ के अमभलेख आहद क ननरीिण ककय ि सकेग
119. दस्त िेि आहद त मील करने की पद्धनत
120. अधधननयम के प्रयोिनों के मलये प्रिेश आहद
121. ननि िचन म मलों म न्य य लयों द्ि र हस्तिेप क िििन
122. ननि िचन य धचक
123. ऐसे ्यजततयों को ननष्पक मसत करने की शजतत िो फीस क सांद य करने से इांक र कर
124. स्ि मी य अधधभोगी द्ि र ्यनतक्रम ककये ि ने पर पांच यत य ग्र म सभ सांकमो क ननष्पप दन कर
सकेगी और ्यय िसूल कर सकेगी
125. ग्र म पांच यत के मुख्य लय क बदल ि न , ग्र म सभ क विभ िन, सम मेलन तथ पररितिन
126. ग्र म क विस्थ पन (डडसइस्टैजललशम ट)
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127. खण्ड तथ जिल पांच यत की सीम ओां म पररितिन
128. सरक री भूममयों क प्रबांध
अध्याय 14
संपरीक्षा
129. पांच यतों की सांपरीि
अध्याय 14 - क
अिुसूधचत क्षेत्रों में पंचायतों के भलये ववभशष्ट उपबंि
129-क. पररभ ष एाँ
129-ख. ग्र म तथ ग्र म सभ क गठन
129-ग. ग्र म सभ की शजततय ां और कृत्य
129-घ. ग्र म पांच यत के कृत्य
129-ड. स्थ नों क आरिण
129-च. िनपद तथ जिल पांच यत की शजततय ाँ
अध्याय 15
निरसि
130. ननरसन तथ ्य िृजत्त
131. विद्यम न स्थ यी कमिच ररयों के सम्बन्ध म ्य िृजत्तय ां
132. कहठन इय ां दूर करने की शजतत
अनुसूची - 1
अनुसूची - 2
अनुसूची – 3
अनुसूची - 4
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मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993
(क्रम ांक 1 सन् 1994)
अध्याय 1
प्रारम्भि क
1. संक्षक्षप्त िाम, ववस्तार और प्रारभि -- (1) इस अधधननयम क सांक्षिप्त न म मध्यप्रदेश (पांच यत र ि एिां
ग्र म स्िर ि) अधधननयम, 1993 (क्रम ांक 1 सन् 1994) है।
(2) इसक विस्त र सम्पूणि मध्यप्रदेश पर है:
परन्तु इसक विस्त र उन अपि दों तथ उप न्तरणों के अध्यधीन रहते हुए िो कक अध्य य 14-क म
उपबजन्धत ककये गये हैं, अनुसूधचत िेत्रों पर होग ।
(3) यह तत्क ल प्रिृत्त3 होग ।
2. पररिाषाएं –– इस अधधननयम म , िब तक सांदभि से अन्यथ अपेक्षित न हो -
(एक) “खांड” से अमभप्रेत है ककसी जिले क ऐस िेत्र जिसे र य य सरक र ध र 10 की उपध र (2) के अधीन
खांड घोवषत करे;
(एक-क) ''ग्राम सिा का सभमनत'' से अमभ प्रेत है, ग्र म सभ के सदस्यों की स्थ यी स ममनत, तदथि सममनत य
कोई अन्य सममनत
(दो) ''सहकारी सोसायटी'' क िही अथि होग िो उसे मध्यप्रदेश सहक री सोस यटी अधधननयम, 1960 (क्रम ांक
17 सन् 1961) म हदय गय है;
(दो-क) ''ववकास आयुतत'' क िही अथि होग िो स्पेशल इक न ममक िोन्स एतट, 2005 (2005 क सां. 28)
की ध र 2 के खण्ड (छ) म उसके मलए समनुदेमशत है;)
(तीन) ''म्जला'' से अमभप्रेत है र य य सरक र द्ि र इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलए जिले के रूप म अधधसूधचत
कोई जिल , और इसके अन्तगित इस प्रक र अधधसूधचत एक य अधधक र िस्ि जिले आते हैं;)
(च र) ''निवााचि'' से अमभप्रेत है पांच यत के स्थ न य स्थ नो को भरने के मलए ननि िचन और उसके अन्तगित
है ग्र म पांच यत के सरपांच क ननि िचन;
(प ांच) ''निवााचि कायावाहहयां'' से अमभप्रेत है ननि िचन के मलए सूचन ि री होने से प्र रभ होने ि ली और ऐसे
ननि िचन क पररण म घोवषत ककये ि ने के स थ सम प्त होने ि ली क यिि हहय ां;)
(छ:) ''कारखािा'' क िही अथि होग िो उसे क रख न अधधननयम, 1948 (1948 क सां. 63) म हदय गय
है;
(स त) ''ग्राम पंचायत'' से अमभप्रेत है ध र 10 की उपध र (1) के अधीन स्थ वपत कोई ग्र म पांच यत;
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(आठ) ''ग्राम सिा'' से अमभप्रेत है ग्र म पांच यत िेत्र के भीतर सम विष्पट ककसी र िस्ि ग्र म य िन ग्र म से
सांबांधधत ननि िचक न म िमलयों म रजिस्रीतय ्यजततयों से ममलकर बनने ि ल कोई ननक य;)
(नौ) ''जिपद पंचायत'' से अमभप्रेत है ध र 10 की उपध र (2) के अधीन स्थ वपत िनपद पांच यत;
(दस) ''स्थािीय प्राधिकारी'' क िही अथि होग िो उसे मध्यप्रदेश स ध रण खांड अधधननयम, 1957 (क्रम ांक
3 सन् 1958) मे हदय गय है;
(ग् य रह) ''सदस्य'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत क कोई पांच, ककसी िनपद पांच यत क कोई
सदस्य य ककसी जिल पांच यत क कोई सदस्य;
(ब रह) ''घृणोत् प’दक पदाथा'' के अन्तगित है पशुओां के शि, गोबर, कचर , मलमूत्र हद य सड़े हुए पद थि य
ककसी भी प्रक र की गांदगी;
(तेरह) ''पदिारी'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी ग्र म पांच यत क कोई पांच, सरपांच य उपसरपांच, ककसी
िनपद पांच यत क कोई सदस्य, अध्यि य उप ध्यि य ककसी जिल पांच यत क कोई सदस्य, अध्यि
य उप ध्यि;
(चौदह) ''अन्य वपछड़ा वर्ा'' से अमभप्रेत है र य य सरक र द्ि र यथ अधधसूधचत वपछड़ िगि के ्यजततयों क
प्रिगि;
(पन् रह) ''स्वामी'' िब उसक प्रयोग ककसी भूमम य भिन के प्रनत ननदेश से ककय गय है, के अन्तगित िह
्यजतत है िो उस भूमम, य भिन क य उस भूमम य भिन के ककसी भ ग क भ ड़ च हे अपने
स्ियां के लेखे य ककसी ्यजतत य सोस यटी के अधधक य न्य सी के रूप म अथि प्र पक के रूप
म प्र प्त कल है;
(सोलह) ''पंच'' से अमभप्रेत है ग्र म पांच यत क कोई पांच;
(सत्रह) ''पंचायत'' से अमभप्रेत है यथ जस्थनत कोई ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत;
(अट्ठ रह) ''पंचायत क्षेत्र'' से अमभप्रेत है इस अधधननयम के अधीन स्थ वपत ककसी पांच यत क प्र देमशक िेत्र;
(उन् नीस) ''जिसंख् या’’' से अमभप्रेत है अांनतम पूिििती िनगणन मे अमभननजश्चत की गई िनसांख्य जिसके
सुसांगत आतके प्रक मशत ककये ि चुके हैं;
(बीस) ''अध्यक्ष'' और ''उपाध् यक्ष” से अमभप्रेत है यथ जस्थनत ककसी 3(ग्र म ननम िण सममनत य ग्र म विक स
सममनत य िनपद पांच यत) य जिल पांच यत क क्रमांश: अध्यि और उप ध्यि;
(इत कीस) इस अधधननयम के ककसी उपबांध म “ववहहत प्राधिकरी’’ से अमभप्रेत है ऐस अधधक री य प्र धधकरी
जिसे र य य सरक र, अधधसूचन द्ि र , द्ि र , उस उपबांध के अधीन विहहत प्र धधक री के कृत् यों क
ननििहन करने क ननदेश दे;
(ब ईस) ''सावाजनिक बाजार'' य ''सावाजनिक मेला'' से अमभप्रेत है ध र 58 के परन्तुक के अधीन अधधसूधचत
यथ जस्थनत कोई ब ि र य मेल ;
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(तेईस) ''सावाजनिक स्थाि'' से अमभप्रेत है कोई ऐस स्थ न, भिन य सांरचन िो नन िी सांपजत्त नहीां है और
िो िनत के उपयोग के मलये खुली है च हे ऐसे सांस्थ न, भिन य सरचन पांच यत मे ननहहत है अथि
नहीां है;
(चौबीस) ''सावाजनिक सड़क'' से अमभप्रेत है कोई ऐसी सड़क, पगडांडी, म गि, चौक, पटरी य र स्त िो
िनत -द्ि र , च हे स्थ यी रूप से य अस्थ यी रूप से उपयोग मे ल य ि त है;
(पच्चीस) ''सरपंच'' और ''उपसरपंच'' सेअमभप्रेत है ककसी ग्र म पांच यत क यथ जस्थनत क्रमश: सरपांच और
उपसरपांच;
(पच्चीस-क) ''अिुसूधचत क्षेत्र'' से अमभप्रेत है भ रत के सांविध न के अनुच्छेद 244 के खांड (1) म ननहदिष्पट
अनुसूधचत िेत्र;)
(पच्चीस-ख) ''स्पेशल इकािाभमक जोि'' क िही अथि होग िो स्पेशल इक न ममक िोन्स एतट 2005 (2005
क सां. 28) की ध र 2 के खण्ड (य-क) म उसके मलए समनुदेमशत है;
(छलबीस) ''स्थायी सभमनत'' से अमभप्रेत है इस अधधननयम के उपबांधों के अधीन गहठत यथ जस्थनत ककसी ग्र म
पांच यत, िनपद पांच यत य जिल पांच यत की स्थ यी सममनत;
(सत्त ईस) ''राज्य निवााचि आयोर्'' से अमभप्रेत है र य यप ल द्ि र सांविध न के अनुच्छेद 243-ट (1) के अधीन
गहठत र य य ननि िचन आयोग;
(अट ठ ईस) ''कर'' के अन्तगित है इस अधधननयम के अधीन उद्ग्रहणीय कोई कर उपकर रेट य फीस।
(उन्तीस) ''ग्राम'' से अमभप्रेत है कोई ऐस ग्र म जिसे र य यप ल द्ि र लोक अधधसूचन द्ि र इस अधधननयम
के प्रयोिनों के मलये ग्र म के रूप म विननहदिष्पट कक य गय है और उसके अन्तगित इस प्रक र विननहदिष्पट
कक य गये ग्र मों क समूह;
स्पष्पटीकरण - शलद ''ग्राम'' म सजम्ममलत है र िस्ि ग्र म तथ िन ग्र म।
(तीस) ''म्जला पंचायत'' से अमभप्रेत है ध र 10 की उपध र (3) के भधीन स्थ वपत जिल पांच यत।
अध् याय 2
ग्राम सिा
3. ग्राम के सभ बन् ि में अधिसूचिा –– र य यप ल लोक अधधसूचन द्ि र ककसी ग्र म य ग्र मों के समूह को
इस अधधननयम के प्रयोिन के मलए ग्र म के रूप म विननहदिष्प ट करेग ।
4. ग्राम की मतदाता सूची – ध र 3 अधीन विननहदिष्प ट प्रत् येक ग्र म के मलए एक मतद त सूची होगी िो इस
अधधननयम और उसके अधीन बन ए गय ननयमों के उपबांध के अनुस र तैय र की ि एगी।
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5. ग्राम के मतदाताओं का रम्जस् रीकरण –– (1) ऐस प्रत् येक ् यजतत ि उस ग्र म से सम् बजन्धत विध न सभ
ननि चक न म िली म रजिस् रीकृत ककये ि ने के मलए अहहित है य जिसक न म उसम प्रविष्प ट है और
िो उस ग्र म क म मूली तै र से ननि सी है, उस ग्र म की मतद त सूची म रजिस् रीकृत ककये ि ने क
हकद र होग :
परन् तु :––
क) कोई ् यजतत एक से अधधक ग्र म की मतद त सूची म रजिस् रीकृत ककये ि ने क हकद र नहीां होगो;
ख) कोई ् यजतत मतद त सूची म रजिस् रकृत ककये ि ने क हकद र नहीां होग यहद िह ककसी अन् य
स् थ नीय प्र धधकरी से सम् बजन्धत ननि िचन न म िली म रजिस् रीकृत है।
स् पष् टीकरण –– (1) अमभ् यजतत “म मूली तौर से ननि सी क अथि िही होग िे उसके मलये लोक प्रनतननधधत् ि
अधधननयम, 1950 (1950 क सां. 43) की ध र 20 म हदय गय है, ककन् तु इस उप न् तरण के
अध् यधीन रहते हुऐ कक उसम ककय गय “ननि िचन िेत्र’’ के प्रनतननदेश क इस प्रक र अथि लग य
ि एग कक िह ‘ग्र म’’ के प्रनत ननदेश है।
(2) कोई ् यजतत ककसी ग्र म की मतद त सूची म रजिस् रीकृत ककये ि ने के मलये ननरहहित होग , यहद
िह विध न सभ ननि िचन न म िली म रजिस् रीकृत ककये ि ने क मलए ननरहहित है।
5-क. ग्राम सिा का र् ि और निर्मि -- प्रत्येक ग्र म के मलए एक ग्र म सभ होगी । ग्र म सभ उसके मलए
विननहदिष्पट न म से एक ननगममत ननक य होगी उसक श श्ित उत्तर धधक र होग और उसकी एक स म न्य
मुर होगी और िह उतत न म से ि द चल एगी और उतत न म से उसके विरुद्ध ब द चल य ि एग और
इस अधधननयम और उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपबांधों के अध्यधीन रहते हुए उसे ककसी िांगम
य स्थ िर सांपजत्त अजिित करने, ध रण करने और ्ययन करने, सांविद करने और इस अधधननयम के
प्रयोिन के मलए आिश्यक अन्य समस्त ब त करने की शजतत होगी।)
6. ग्राम सिा का सम्भमलि – (1) ग्र म सभ क सजम्मलन कम से कम िनिरी, अप्रैल, िुल ई तथ अतटूबर
म होग तथ इसके अनतररतत ग्र म सभ , यहद अपेक्षित हो, अनतररतत सजम्मलन बुल सकेगी और जिले
क कलतटर, ऐसे सजम्मलनों के समुधचत इांति म के मलये एक श सकीय अधधक री य कमिच री को
न मननदेमशत करेग िो सजम्मलन की क यिसूची (एिण् ड ) क पररच लन तथ त रीख समय तथ स् थन
की सूचन समय पर त मील ककय ि न सुननजश्चत करेग और सजम्मलन की क यिि हहयों क सम्यक
सांच लन भी सुननजश्चत करेग )
(2) ग्र म सभ के प्रत्येक सजम्मलन के मलए, ग्र म सभ के सदस्यों की कुल सांख्य के एक दशम ांश से
अन् यून सदस्यों य ग्र म सभ के कम से कम प ांच सौ सदस्यों, इनम से िो भी कम हो, से गणपूनति
होग ।
(3) ग्र म सभ के सममल की अध्यित सरपांच द्ि र य सरपांच की अनुपजस्थनत म उपसरपांच द्ि र
की ि एगी। उस दश म िबकक सरपांच और उपसरपांच दोनो ही अनुपजस्थत हों िह ां ग्र म सभ के
सजम्मलन की अध्यित ग्र म सभ के ऐसे पांच द्ि र की ि एगी िो सजम्मलन मे उपजस्थत सदस्यों
द्ि र उस प्रयोिन के मलये ननि िधचत ककय ि ए।
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(4) यहद इस सम्बन्ध मे कोई विि द उद् भूत होत है कक तय कोई ्यजतत ग्र म सभ के सजम्मलन मे
उपजस्थत होने क हकद र है, तो ऐसे विि द क विननश्चय अध्यित करने ि ले ्यजतत द्ि र ग्र म
सभ िेत्र की मतद त सूची मे प्रविजष्पट को ध्य न म रखते हुए ककय ि एग और उसक विननश्चय
अजन्तम होग ।
(5) ग्र म सभ ओां के बीच उद्ण्ड कोई विि द य ग्र म पांच यत िेत्र के सम विष्पट एक से अधधक ग्र म सभ ओां
से सम्बद्ध कोई म मले और ध र 7 की उपध र (2) म अन्तवििष्पट समस्त म मले उस ग्र म पांच यत
की समस्त ग्र म सभ ओां के सांयुतत सजम्मलन के समि ल ए ि एांगे।
(6) उपध र (5) के अधीन सांयुतत सजम्मलन मे ककय गय विननश्चय प्रत्येक ग्र म सभ द्ि र ककय
गय विननश्चय समझ ि एग ।
6-क. ग्राम सिा का ववशेष सम्भमलि - यहद सरपांच य ग्र म सभ के दस प्रनतशत से अधधक सदस्य य पच स
सदस्य, िो भी कम हो, ग्र म सभ के विशेष सजम्मलन के मलए मलखखत मे अध्यपेि करते है तो सधचि
ऐसी अध्यपेि की प्र जप्त की त रीख से स त हदन के भीतर ऐस सजम्मलन बुल एग ।
6-ख. ग्राम सिा का सधचव - ग्र म पांच यत क सधचि ग्र म सभ क भी सधचि होग , सधचि ग्र म सभ के
ननयांत्रण धीन होग और ऐसे कति्यों क प लन करेग िो उसे ग्र म सभ द्ि र समनुदेमशत ककए ि ए।
6-र्. ग्राम सिा का ववनिश्चय - (1) ग्र म सभ के ककसी सजम्मलन के समि ल ए गए समस्त म मले यथ सांभि
एक मत से विननजश्चत ककए ि एगे जिसम असफल रहने पर उपजस्थत सदस्यों की स म न्य सहमनत
(िनरल कॉन् सेन् सश) विननश्चय से ककय ि एग ।
परन् तु िह ां ककसी ऐसे म मले पर मत विमभननत है िह ां ऐस म मल अग मी सजम्मलन के समि ल य ि एग ,
यहद लग त र दो स् थधगत सजम्मलनों म एकमत य स म न् य सहमनत (िनरल कॉन् सेन् सश) से विननश् यच
नही ककय ि त है तो ऐस म मल उपजस्थत सदस् यों के बहुतम द्ि र , गुप् त मतद न से विनन जश्चत ककय
ि एग । तम बर बर होने के दश म सजम्मलन की अध् यित करने ि ले ् यजतत क द्वितीय य ननण ियक
तम होग ।
(2) यहद इस सांबांध म कोई विि द उद्भूत होत है कक तय कोई ्यजतत मत देने क हकद र है तो ऐसे विि द
क विननश्चय अध्यित करने ि ले ्यजतत द्ि र ग्र म सभ िेत्र की मतद त सूची म प्रविजष्पट को ध्य न
म रखते हुए ककय ि एग और उसक विननश्चय अांनतम होग ।
7. ग्राम सिा की शम्ततयां और कृत्य तथा उसका वावषाक सम्भमलि - (1) उन ननयमो के अधीन िो र य य
सरक र इस ननममत्त बन ए और ऐसे स ध रण य विशेष आदेशों के, िो र य य सरक र द्ि र समय-समय
पर ि री ककये ि एां, अधीन रहते हुए ग्र म सभ की ननम्नमलखखत शजततय ाँ तथ कृत्य होंगे, अथ ित्:––
(क) ग्र म के आधथिक विक स तथ ऐसी स्कीमों की पहच न तथ उनकी प्र थमम कत के मलए मसद्ध ांतों को
अधधकधथत करन ;
(ख) स म जिक तथ आधथिक विक स के मलये ऐसी योिन एाँ जिनम समस्त ि वषिक योिन एां सजम्ममलत
हैं, क यिक्रमों तथ पररयोिन ओां को ग्र म पांच यत द्ि र ऐसी योिन ओां, क यिक्रमों तथ पररयोिन ओां
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क कक्रय न्ियन आरम्भ करने से पूिि अनुमोहदत करन ;
(ग) ग्र म पांच यत के ि वषिक बिट पर विच र करन और उस पर मसफ ररश करन ;
(घ) ग्र म पांच यत की सांपरीि ररपोटि तथ ि वषिक लेख ओां पर विच र करन ;
(ड.) ग्र म पांच यत द्ि र खण्ड (ख) म ननहदिष्पट योिन ओां, क यिक्रमों तथ पररयोिन ओां के मलये ननधधयों
के समुधचत उपयोग को अमभननजश्चत करन तथ प्रम खणत करन ;
(च) गरीबी अन्मूलन तथ अन्य क यिक्रमों के अधीन हहत धधक ररयों के रूप म ्यजततयों की पहच न करन
तथ चयन करन ;
(छ) हहत धधक ररयों को ननधधयों य आजस्तयों के समुधचत उपयोग तथ वितरण को सुननजश्चत करन ;
(ि) स मुद नयक कल्य ण क यिक्रमों के मलये लोगों को गनतशील करन ;
(झ) ग्र म म विक स स्कीमों की प्रसुविध ओां के कक्रय न्ियन, उन्ह बन ए रखने तथ उनके स म्य पूणि
वितरण के मलये ्यजततयों के सकक्रय योगद न को सुननजश्चत करन ;
(ञ) िनस ध रण के बीच स म न्य चेतन म अमभिृवद्ध करन ;
(ञ-एक) स म जिक सेतटरों म ऐसी सांस्थ ओां तथ ऐसे कृत्यक ररयों पर, िो ग्र म पांच यत को अांतररत
य ग्र म पांच यत के द्ि र ननयुतत ककये गये हैं उस पांच यत के म ध्यम से ननयांत्रण करन ;
(ञ-दो) ग्र म के िेत्र के भीतर के प्र कृनतक स्त्रोतों क जिनके अन्तगित भूमम, िल, िन आते हैं, सांविध न
के उपबांधों और तत्समय प्रिृत्त अन्य सुसांगत विधधयों के अनुस र प्रबन्ध करन ;
(ञ-तीन) ग्र म पांच यत को लघु िल शयों के विननयमन तथ उपयोग मे सल ह देन ;
(ञ-च र) स्थ नीय योिन पर तथ ऐसी योिन ओ के स्त्रोतों और ्ययो पर ननयत्रण रखन ;) और स्िच्छत ,
सफ ई और उसेन क ननि रण और उसक उपशमन;
(ट) स िििननक कुओां, तड़ गों और त ल बों क ननम िण, मरम्मत और अनुरिण तथ धरेलू उपभोग के
मलए िल प्रद य;
(ड.) नह ने तथ धोने और प लतू पशुओां को पीने के मलए िल प्रद य हेतु बल के स्त्रोतो क सजन्नम िण
और अनुरिण;
(ढ) ग्र मीण सड़को, पुमलयो, पुलो, ब धो तथ स िििननक उपयोधगत के अन्य सकमो तथ भिनों क
सजन्नम िण और अनुरिण;
(ण) स िििननक सड़को, सांड सो, न मलयो, त ल बो, क्ष्यो तथ अन्य स िििननक स्थ नो क सजन्नम िण,
अनुरिण और उनकी सफ ई;
(त) उपयोग म न ल ये ि ने ि ले कुओां, अस्िच्छ तड़ गों, ख ईयों तथ गड ढों को भरन और सीढ़ीद र
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कुओां (ब िडड़यों) को स्िच्छ कुओ मे पररिनतित करन ;
(थ) ग्र म म गो और अन्य स िििननक स्थ नो पर प्रक श की ्यिस्थ करन ,
(द) स िििननक म गो तथ स्थ नों और उन स्थलों म िो ननिी सम्पजत्त न हों य िो स िििननक उपयोग
के मलए खुले हों, च हे ऐझे स्थल पांच यत म ननहहत हो य र य य सरक र के हो, ब ध ओां तथ आगे
ननकले हुए भ ग को हट न ;
(ध) मनोरांिनों, खेल-तम शों, दुक नों, भोिनगृहों और पेय पद थो, ममठ इयो, फलों, दूध तथ इसी प्रक र
की अन्य िस्तुओां के विक्रेत ओां क विननयमन और उस पर ननयांत्रण;
(न) मक नों, सांड सों, छ लयों, न मलयों तथ तकश शौच लयी के सजन्नम िण क विननयमन;
(प) स िििननक भूमम क प्रबांध और ग्र म स्थल क प्रबांध, विस्त र और विक स;
(फ) (एक) शिों, पशु-शिों और अन्य घृणोत्प दक पद थो के ्ययन के मलए स्थ नों क विननयमन;
(दो) ल ि ररस शिों और पशु शिों क ्ययन;
(ब) कचर इकदठ करने के मलए स्थ नों क पृथकृ रिण;
(भ) म ांस के विक्रय तथ परीिण क विननयमन;
(म) ग्र म सभ की सम्पजत्त क अनुरिण;
(य) क िी ह ऊस की स्थ पन और प्रबांध और पशुओ से सांबांधधत अमभलेखों क रख ि न ;
(कक) सांसद द्ि र बन ई गई विधध द्ि र य उसके अधीन र ष्परीय महत्ि के धोवषत ककये गए प्र चीन
तथ ऐनतह मसक स्म रको को छोडकर अन्य ऐसे प्र चीन तथ ऐनतह मसक स्म रको क अनुरिण
और च र ग हों तथ अन्य भूममयों क बन य रख ि न िो ग्र म सभ म ननहहत य उसके
ननयत्रण धीन हैं;
(खख) िन्म, मृत्यु और विि हों के अमभलेखो क रख ि न ;
(गग) िनगणन क यि म और र य य सरक र य केन्रीय सरक र य विधधपूििक गहठत ककसी अन्य
स्थ नीय प्र धधकांरण द्ि र सच मलत सिेिणों म सह यत करन ;
(घघ) स ांसधगिक रोगों की रोकथ म मे सह यत करन ;
(डड.) इनोन्क्रेशन और टीक लग ने म सह यत करन तथ मनुष्पयों एिां पशुओां की सुरि के मलये ऐसे
अन्य ननि रक उप यो को िो सबांधधत सरक री विभ गों द्ि र विहहत ककये ि एां, प्रिनतित करने
म सह यत करन ;
(चच) ननिःशतत तथ ननर धश्रतों की सह यत करन ;
(छछ) युि कल्य ण, पररि र कल्य ण तथ खेलकूद क अमभिधिन तयन ;
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(िि) (क) िीिन तथ सम्पजत्त की सुरि के मलए;
(ख) आग की रोकथ म, आग बुझ ने और ऐसे आग लग ि ने पर सम्पजत्त की सुरि करने के
मलए रि सममनत की स्थ पन करन ;
(झझ) िृि रोपण तथ ग्र मिनों क सांरिण;
(ञञ) दहेि िैसी स म जिक बुर ईयों को दूर करन ;
(टट) (एक) गांभीर तथ आप ती म मलों म ननधिन ्यजततयों के मलये धचककत्सीय सह यत की ्यिस्थ
करने के प्रयोिन के मलए; य
(दो) ककसी ननधिन ्यजतत य उसके कुटुम्ब के ककसी सदस्य की अय येजष्पट करने के प्रयोिन के
मलए; य
(तीन) ककसी ननधिन ्यजतत के फ यदे हेतु ककसी अन्य ऐसे प्रयोिन के मलये िैस कक र य य
सरक र द्ि र समय-समय पर अधधसूधचत ककय ि ए, ऐसे ननबिन्धनों तथ शतो के अध्यधीन
रहते हुए, िो विहहत की ि एां, उध र मांिूर करन ;
(ठठ) (एक) र य य सरक र, कलेतटर य इस सांबांध म र य य सरक र द्ि र प्र धधकृत ककसी अन्य अधधक री
द्ि र अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों तथ अन्य वपछड़े िगो की दश सुध रने के मलए
उप यों के सांबांध म और विशेषत: अस्पृश्यत ननि रण के सांबांध म हदये गए, य ि री ककये गए ननदेशों
य आदेशों क क य िन्ियन;
परन्तु िह ां ऐसे कोई कृत् य ग्र म सभ को सौंपे गए हैं िह ां िह यथ जस्थनत र य य सरक र जिल पांच यत
य िनपद पांच यत के अधधक के रूप म क यि करेगी और उस प्रयोिन के मलए उसे आिश्यक ननधधय ां
और अन्य सह यत की ्यिस्थ यथ जस्थनत र य य सरक र जिल पांच यत य िनपद पांच यत द्ि र
की ि एगी;
(डड) बुननय दी सुविध ओां की योिन बन न और उसक प्रबांध करन ;
(ढढ) विमभन्न क यिक्रमों के अधीन हहत धधक ररयों क चयन करन ;
(णण) ग्र म सभ िेत्र के भीतर विक स स्कीमों और ननम िण क यि को कक्रय जन्ित करन ननष्पप हदत करन
और उनक पयििेिण कलन ,
(तत) हहतग्र हहत मूलक स्कीमों और क यिक्रमों क ननयांत्रण तयन और उन्ह मॉनीटर करन ;
(थथ) ्य पक रूप म िन स ध रण म स म न्य ि गरुकत को प्रोन्नत करन ;
(दद) स मुद नयक क यि के मलए स्िैजच्छक श्रम और सह यत की ्यिस्थ करन तथ स मुद नयक स्ि ममत्ि
की ध रण को प्रोन्नत बन ,
(धध) अपनी िेत्रीय अधधक ररत के भीतर जस्थत विननहदिष्पट बल िेत्र तक लघु िल ननक यों की योिन
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बन न , स्ि ममत्ि रखन और प्रबन्ध करन ;
(नन) मछली पकड़ने और अन्य ि खणजय यक प्रयोिनों के मलए ककसी विननहदिष्पट िेत्र तथ लघु िल ननक य
को पदटे पर देन ;
(पप) मसांच ई प्रयोिन के मलए नहदयो, िलध र , लघु िल ननक यो के उपयोग को विननयममत करन ;
(फफ) ग्र म सभ को अांतररत य उसके द्ि र ननयत ककये गए समस्त स म जिक िेत्रों म सांस्थ ओां और
कृत् यक ररयों पर ननयांत्रण रखन ।)
(2) ग्र म सभ क ि वषिक सजम्मलन, आग मी वित्तीय िषि के प्र रम्भ होने के कम से कम तीन म ह
पूिि ककय ि एग और ग्र म पांच यत ऐसे सजम्मलन के समि ननम्नमलखखत ब ते रखेगी: -
(क) लेख ओां क ि वषिक वििरण;
(ख) पूिििती वित्तीय बषि के प्रश सन की ररपोटि;
(ग) आग मी वित्तीय िषि के मलये प्रस्त वित विक स तथ अन्य क यि सम्बन्धी क यिक्रम;
(घ) अांनतम सांपरीि हटप्पण और उसके सम्बन्ध म हदये गये उत्तर, यहद कोई हों;
(ड.) ग्र म पांच यत क ि वषिक बिट तथ अगले वित्तीय िषि के मलये ि वषिक योिन ।
(2-क) ग्र म पांच यत ऐसे म मलो को ग्र म सभ के समि रखेगी जिन्ह कक िनपद पांच यत, जिल पांच यत,
कलतटर य इस ननममत्त प्र धधकृत कोई अधधक री ऐसे सजम्मलन के समि रखे ि ने की अपेि
करे।)
(3) ग्र म पांच यत इस ध र के अधीन अपने समय के म मलों के सम्बन्ध मे ग्र म सभ द्ि र दी गई
मसफ ररशों को, यहद कोई हो, क य िजन्ित करेगी।
7-क. ग्राम सिा की स्थायी सभमनत तथा तदथा सभमनत - (1) ग्र म पांच यत अपने कृत्यों तथ कत्ति्यों
क ननििहन करने के मलए ग्र म सभ की ननम्नमलखखत स्थ यी सममनतयों क गठन करेगी, अथ ित्:-
(1) ग्र म ननम िण सममनत; और
(2) ग्र म विक स सममनत।)
(2) उपध र (1) म उजल्लखखत स्थ यी सममनतयों के अनतररतत, ग्र म सभ , ककसी समयबद्ध क यि के
कक्रय न्ियन के मलए एक य अधधक ऐसी तदथि सममनतयो क गठन कर सकेगी िैसी कक िह
आिश्यक समझे। सममनत मे ऐसे सदस्य सम विष्पट होगे िो सममनत को सौंपे गए क यि म हहत
रखते हैं टेक होल्डर सममनत ग्र म सभ द्ि र क यि के सम पन ररपोटि प्रस्तुत करने तथ क यि
के मूल्य ांकन करने के पश्च त् अजस्तत्ि म नहीां रहेगी ।
(3) ऐसी सममनतयों िो ग्र म सभ की अधधक ररत के भीतर पहले से ही क यि कर रही हो, ग्र म सभ
के अनुमोदन से क यि करती रह गी।
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(4) सदस् यों की सांख् य , स् थ नों क आरिण, पद िधध, त् य गपत्र तथ हट ए ि ने के मलए प्रकक्रय , क यि
सांच लन, सदस् य होने के मलए प त्रत , सजम्मलन, ररजतत को भरे ि ने क ढांग तथ स् थ यी
सममनतयों और तदथि सममनतयों की प्रकक्रय ऐसी होगी िो कक विहहत की ि ए।
7-ख. स् थायी सभमनतयों का र् ि और उिके कृत् य –– (1) ग्र म ननम िण सममनत, ग्र म पांच यत के एक अमभकरण
(एिेन् सी) के रूप म क यि करेगी और प ांच ल ख रूपये तक के समस् त ननम िण क यि तथ ग्र म पांच यत,
ग्र म सभ द्ि र सौप गए अन् य क यों क ननष्प प दन करेगी।
(2) ग्र म पांच यत क सरपांच, ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत, क पदेन अध् यि होग ।
(***)
(4) ग्र म विक स सममनत क गठन तथ उसके कृत् य ऐसे होंगे िैसे कक विहहत ककए ि एां।
(5) ग्र म ननम णि सममनत के सदस् य, ग्र म विक स सममककत म ऐसी रीनत म सजम्ममलत ककए ि एांगे
िैसी कक विहहत ि ए।
(6) सममनत के गठन तथ ननि िचन से सांबांधधत समस्त विि द ध र 122 तथ उसके अधीन बन ए गए
ननयमों के उपबांधों द्ि र ननपट ये ि एांगे।
(7-ग. ***)
(7-घ. सभमनत की शम्ततयां कृत्य तथा कत्ताव्य - सममनत की शजततय ां, कृत्य तथ कत्ति्य ऐसे होंगे िो ग्र म
सभ द्ि र समय-समय पर उसे सौंपे ि एां। प्रत्येक सममनत, ग्र म सभ के प्रनत उत्तरद यी तथ िि बद र
होगी और उसके ननयांत्रण तथ पयििेिण के अधीन क यि करेगी।
(7-ड. सदस्य का हटाया जािा - ग्र म सभ को, अमभमलखखत ककए ि ने ब ले क रणों से ककसी भी समय सममनत
के ककसी भी सदस्य को हट ने की शजतत होगी।)
(7-च ग्राम निमााण सभमनत तथा ग्राम ववकास सभमनत की शम्ततयां तथा कत्ताव्य – ग्र म ननम िण सममनत तथ
ग्र म विक स सममनत सांयुतत रूप से ग्र म के सांपूणि विक स के मलए एक योिन तैय र करेगी तथ इसे
ग्र म सभ के अनुमोदन के मलए प्रस्तुत करेगी।)
(7-छ. स्थायी सभमनत का सधचव - ग्र म पांच यत क सधचि, ग्र म सममनत तथ ग्र म विक स सममनत, क भी
पदेन सधचि होग ।
(7-छक. ग्राम सिा की दीघाकाभलक ववकास योजिा का तैयार क्रकया जािा - (1) ग्र म सभ आग मी दस िषो
म प्र प्त होने ि ली अनुम ननत ननधध क मूल्य ांकन करेगी और विशेषज्ञों की सह यत से ग्र म विक स
के मलए दस िषीय दीघिक मलक योिन तैय र करेगी और उसे अनुमोहदत करेगी।
(2) उपध र (1) के अधीन योिन , ग्र म सभ की भूमम उपयोग योिन तथ बुननय दी सुख-सुविध ओां
की आिश्यकत ओां को ध्य न म रखते हुए, प्रनतिषि ग्र म सभ के ग्र म कोष को प्र प्त होने ि ले
वित्तीय सांस धनों पर आध ररत ि वषिक योिन के म ध् यम से दीघिक मलक योिन प्र थममकत
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के आध र पर तैय री की ि एगी।
7 -छख. ग्राम निमााण सभमनत तथा ग्राम ववकास सभमनत के अध् यक्ष और सदस्यों के ववरुद्ध अिुशासनिक कारावाई
- ग्र म ननम िण सममनत तथ ग्र म विक स सममनत क अध्यि और प्रत्येक सदस्य उनके विरुद्ध कोई
अनुश सननक क रिि ई की ि ने के मलए भ रतीय दण्ड सांहहत , 1860 (1860 क 45) की ध र 21 के
अथि के अांतगित लोकसेिक समझे ि एगे।)
(7-ज. ग्राम सिा के ववनिश्चय के ववरुद्ध सभमनत को अपील - ग्र म सभ के विननश्चय के विरुद्ध अपील, िनपद
पांच यत के अध्यि, उस िेत्र की िनपद पांच यत के सदस्य तथ उपखण्ड अधधक री (र िस्ि) से ममलकर
बनने ब ली सममनत की अपील सममनत को ऐसी रीनत मे होगी, िो कक विहहत की ि ए।)
(7-झ. बजट - प्रत्येक ग्र म सभ , प्रनतिषि ऐसे प्ररूप मे तथ ऐसी रीनत म तथ ऐसी त रीख तक िो विहहत
की ि ए, आग मी वित्तीय िषि के मलए अपनी प्र जप्तयों तथ ्यय क बिट प्र रूप तैय र करेगी।)
(7-ञ. ग्राम कोष - (1) प्रत्येक ग्र म सभ एक ननधध स्थ वपत करेगी िो ननम्नमलखखत च र भ गो से ममलकर
ग्र म कोष कहल एग : -
(एक) अन्न कोष; (दो) श्रम कोष; (तीन) िस्तु कोष; (च र) नगद कोष;
तथ उसमे ननम्नमलखखत िम होगी : -
(क) द न;
(ख) अन्य स्रोतों से आय;
(ग) जिल पांच यत र ि ननधध से य बत्रस्तरीय पांच यतों की ननधध से प्र प्त कोई र मश भू-र िस्ि के
आगम, भू-र िस्ि पर उपकर, गौण खननि पर प्र प्त रॉयल्टी, मछली पकड़ने के अधधक र के
पट्टे, चर ई फीस तथ श ल भिन उपकर से प्र प्त आय िो कक र य य सरक र द्ि र विहहत य
ननयत की ि ए;
(ध) अनुसूची 1-क तथ अनुसूची 2-क म यथ उजल्लखखत अधधरोवपत कर, शुल्क, पथकर और फीस
तथ ग्र म सभ की अन्य आय; और
(ड.) केन्रीय सरक र य र य य सरक र द्ि र प्र योजित विमभन्न स् कीमों के अधीन ग्र म पांच यत द्ि र
प्र प्त कोई र मश िो केन्रीय सरक र य र य य सरक र द्ि र विहहत म नदण्डो के अनुस र ग्र म
सभ को आिांहटत की ि नी हो।
(2) इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ए गए ननयमों के उपनधो के अध्यधीन रहते हुए, ग्र म सभ
म ननहहत समस्त सांपजत्त और ग्र म कोष इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलए य ग्र म के विक स
सांबांधी कक्रय कल पों से सांबांधधत अन्य प्रयोिनों के मलए य ऐसे अन्य ्ययों के मलए उपयोजित
ककय ि एग िो ग्र म सभ अनुमोहदत कर ;
परन्तु ककसी स्कीम के अधीन प्र प्त की गई ननधधयों क उपयोग यथ जस्थनत, केन्रीय सरक र
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य र य य सरक र द्ि र ि री ककए गए म गिदशिक मसद्ध ांतों के अनुस र ककय ि एग ।
(3) ग्र म कोष ऐसी रीनत म तथ ऐसे प्ररूप म रख ि एग और सांध ररत ककय ि एग िैस कक विहहत
ककय ि ए।
(4) ग्र म कोष क प्रितिन ग्र म विक स सममनत द्ि र ककय ि एग तथ ग्र म कोष म से समस् त रकम
ग्र म सभ के अनुमोदन से ग्र म विक स सममनत क अध् यि तथ ग्र म पांच यत के सधचि के सांयुत त
हस् त िर से आहररत की ि एांगी तथ आहरण क लेख ग्र म विक स सममनत के सधचि द्ि र
सांध ररत ककय ि एग । ग्र म कोष म हुई समस् त प्र जप्तय ां तथ उससे ककए गए समस् त आहरणों
के सांबांध म ि नक री ग्र म सभ के समि उसके आग मी सजम्मलन म रखी ि एगी।
7-ट. लेखा तथा संपरीक्षा—ग्र म सभ समुधचत रूप से लेख पुस् तक सांध ररत करि एगी तथ लेख ओां क
ि वषिक वििरण तैय करेगी। ग्र म सभ के लेख ओां की सांपरीि समय-समय पर ऐसी रीनत म
तथ ऐसे प्र जध्स क री द्ि र की ि एगी िो कक विहहत ककय ि ए तथ प्रस् तुत सांपरीि ररपोटि
ग्र म सभ के समि आग मी सजम्मलन म रखी ि एगी।
7- . सरकरी कमाचाररयों पर नियंत्रण – (1) ककसी ग्र म सभ को ककसी ऐसे सरक री कमिच री जिसक
ग्र मसभ िेत्र की सीम ओां के भीतर अधधक ररत िेत्र आत है, क िेतन रोकने, छुट्टी मांिूर करने,
क यि क ननरीिण तथ पयििेिण करने की शजतत होगी।
(2) ग्र म सभ को उपध र (1) म ननहदिष्पट सरक री कमिच री के अिच र तथ कत्ति्य की उपेि
के मलए श जस्तयों के अधधरोपण के सांबांध म मसफ ररश सिम प्र धधक री को करने की शजतत
होगी।)
7-ड. ग्राम सिा के कृत्यों के संबंि में राज्य सरकार की शम्तत - र य य सरक र, स ध रण य विशेष
आदेश द्ि र ग्र म सभ को सौंपी गये कृत्यों तथ कत्ति्यों म िृवद्ध कर सकेगी य उन्ह ि वपस
ले सकेगी िह ां र य य सरक र ग्र म सभ को सौपे गए ककन्हीां कृत्यों के ननष्पप दन को अपने ह थ
म ले लेती है।)
अध्याय 3
पंचायतों की स्थापिा
8. पंचायतों का र् ि - इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये -
(क) ग्र म के मलये ग्र म पांच यत;
(ख) खण्ड के मलये िनपद पांच यत; और
(ग) जिल के मलये जिल पांच यत;
क गठन ककय ि एग ।
9. पंचायत की अवधि - (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत अपने प्रथम सजम्मलन के मलये ननयत त रीख से प ांच
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िषि तक के मलये बनी रहेगी और इससे अधधक नहीां, िब तक कक इस अधधननयम के अधीन समय से
पहले विघहटत नहीां कर दी ि ए।
(2) ककसी पांच यत क गठन करने के मलये ननि िचन - -
(क) उपध र (1) म विननहदिष्पट उसकी अिधध की सम जप्त के पूिि,
(ख) उसके विघटन की त रीख से छह म स की क ल िधध की सम जप्त के पूिि,
पूर कर मलय ि एग :
परन्तु िह ां ऐसी शेष क ल िधध, जिसके मलये कोई विघहटत पांच यत बनी रहती, छह म स से कम है,
िह ां ऐसी क ल िधध के मलये उस पांच यत क गठन करने हेतु इस खण्ड के अधीन कोई ननि िचन
कर न आिश्यक नहीां होग ।
(3) ककसी पांच यत की अिधध की सम जप्त के पूिि उस पांच यत के विघटन पर गहठत की गई कोई पांच यत
उस क ल िधध के केिल उतने शेष भ ग के मलये बनी रहेगी, जिसके मलये विघहटत पांच यत, यहद
िह इस प्रक र वि घहटत नहीां की ि ती तो िह उपध र (1) के अधीन बनी रहती।
10. ग्राम पंचायत, जिपद पंचायत और म्जला पंचायत की स्थापिा - (1) प्रत्येक ऐसे ग्र म के मलये िो ध र
3 के अधीन इस अधधननयम के प्रयोिनों के मलये ग्र म के रूप म विननहदिष्पट ककय गय है एक ग्र म पांच यत
होगी।
(2) र य यप ल, अधधसूचन द्ि र , ककसी जिले को खण्डों म विभ जित कर सकेग । अधधसूचन म प्रत्येक
ऐसे खण्ड क न म, उसक मुख्य लय और सम विष्पट िेत्र विननहदिष्पट ककय ि एग । प्रत्येक खण्ड
के मलये एक िनपद पांच यत होगी िो उस खण्ड के न म से ि नी ि एगी।
(3) प्रत्येक जिले के मलये एक जिल पांच यत होगी :
परन् तु तत् समय प्रिृत् त सुसांगत विधध के अधीन गहठत प्रत् येक नगर प मलक ननगम, नगर
प मलक पररषद य नगर पांच यत अपनी अधधक ररत के भीतर के िेत्र के मलए एक पृथक प्रश सननक
इक ई बनेगी।
11. पंचायतों का निर्मि - प्रत्येक ग्र म पांच यत, िनपद पांच यत और जिल पांच यत उस न म से, िो
यथ जस्थनत, ग्र म के मलये ध र 3 के अधीन आदेश म य िनपद पांच यत और जिल पांच यत के मलये
ध र 10 के अधीन अधधसूचन म उनके मलये विननहदिष्पट ककय गय है, एक ननगममत ननक य होगी, उनक
श श्ित उत्तर धधक र होग और उनकी एक स म न्य मुर होगी और िे उतत न म से ब द चल एगी तथ
उतत न म से उसके विरुद्ध ब द चल ए ि एांगे और इस अधधननयम तथ उसके अधीन बन ये गये ननयमों
के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, उन्ह िांगम य स्थ िर सांपजत्त अजिित करने, ध रण करने य अन्तररत
करने, सांविद करने और इस अधधननयम के प्रयोिन के मलये आिश्यक अन्य समस्त ब त करने की शजतत
होगी।
12. ग्राम पंचायतों का वाडों में वविाजि - प्रत्येक ग्र म पांच यत िेत्र को दस से अन् यून ि डों म , िैस कलेतटर
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अिध ररत करे, विभ जित ककय ि एग तथ प्रत्येक ि डि एक सदस्यीय ि डि होग :
परन्तु िह ाँ ग्र म पांच यत िेत्र की िनसांख्य एक हि र से अधधक हो, िह ाँ उसे ऐसी रीनत
म ि डों म विभ जित ककय ि एग जिससे कक ि डों की कुल सांख्य बीस से अधधक न हो और प्रत्येक
ब डि की िनसांख्य यथ स ध्य एक िैसी ही होगी :
परन्तु यह और भी कक ग्र म पांच यत िेत्र की िनसांख्य क और ऐसी पांच यत म ि डों की
सांख्य के बीच क अनुप त, ऐसे समूणि खण्ड के मलये जिसके भीतर पांच यत िेत्र आत है, यथ स ध्य
एक िैस ही होग ।
13. ग्राम पंचायत का र् ि – (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत ननि िधचत पांचों तथ सरपांच से ममलकर बनेगी।)
(2) यहद कोई ग्र म य ि डि, यथ जस्थनत, ककसी सरपांच य पांच को ननि िधचत नहीां करत है तो उस स्थ न
को भरने के मलये यथ जस्थनत, ऐसे ग्र म य ि डि म नई ननि िचन की क यिि हहय ां छ: म स के भीतर
प्र रम्भ की ि एांगी :
परन्तु इस उपध र के अधीन सरपांच क ननि िचन लांबबत होने के क रण ननि िधचत पांच ध र 17 की उपध र
(2), (3) तथ (4) के उपबांधों के अध्यधीन रहते हुए ध र 20 के अधीन प्रथम सजम्मलन म अपने म
से एक सरपांच क ननि िचन कर गे िो इस उपध र के अधीन ननि िधचत सरपांच के पदभ र ग्रहण करने
तक इस अधधननयम के अधीन सरपांच के समस्त कृत्यों क ननििहन तलेग :
परन्तु यह और भी कक ग्र म पांच यत के गठन के मलये आगे की और क यिि हहय ां, इस उपध र के अनुस र
पांच क ननि िचन लजम्बत होने के क रण रोकी नहीां ि एांगी :
परन्तु यह और भी कक यहद कोई ग्र म य ि डि पुन: यथ जस्थनत ककसी सरपांच य ककसी पांच को ननि िधचत
नहीां करत है तो यथ जस्थनत ऐसे ग्र म म य ऐसे ि डि म पांच के ननि िचन की नई क यिि हहय ां तब तक
प्र रम्भ नहीां की ि एगी िब तक कक र य य ननि िचन आयोग क यह सम ध न न हो ि ए कक यथ जस्थनत
ऐसे ग्र म से य ऐसे ि डि से सरपांच य पांच क ननि िचन ककये ि ने की सांभ ्यत है और यहद आयोग
यह विननश्चय करत है कक सरपांच क नय ननि िचन नहीां ककय ि ए, तो प्रथम परन्तुक के अधीन
ननि िधचत सरपांच इस अधधननयम के अधीन सरपांच के समस्त कृत्यों क ननििहन करत रहेग ।)
(***)
(4) (एक) प्रत्येक ग्र म पांच यत म -–
(क) अनुसूधचत ि नतयों, और
(ख) अनुसूधच त िनि नतयों,
के मलये स्थ न आरक्षित रखे ि एगे और इस प्रक र आरक्षित स्थ नों की सांख्य क अनुप त उस ग्र म
पांच यत म प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नो की कुल सांख्य के स थ यथ स ध्य िही होग
िो उस ग्र म पांच यत िेत्र म अनुसूधचत ि नतयों की य अनुसूधचत िनि नतयों की िनसांख्य क उस
ग्र म पांच यत िेत्र की कुल िनसांख्य के स थ है, ऐसे स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र उस पांच यत म
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मभन्न-मभन्न ि डों के मलये विहहत रीनत से (***) आिांहटत ककये ि सक गे।
(दो) ककसी ग्र म पांच यत म िह ाँ अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों दोनो के मलये पच स
प्रनतशत य पच्चीस प्रनतशत से कम स्थ न आरक्षित ककये गये है िह ां स्क स्थ नो की सांख्य के 25%
के स्थ न अन्य वपछड़े िगो के मलये आरक्षित ककये ि एगे और ऐसे स्थ न उस ग्र म पांच यत के मभन् न
ि डों को विहहत रीनत म चक्र नुक्रम म कलेत टर द्ि र आिांहटत ककये ि एांगे।
(5) उपध र (4) के अधीन आरक्षित ककये गये स्थ नो की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न
यथ जस्थनत, अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों य अन्य वपछड़े िगो की महहल ओ के मलये
आरक्षित रखे ि य गे।
(6) प्रत्येक ग्र म पांच यत म प्रत्यि ननि िचन द्ि र भरे ि ने ि ले स्थ नों की कुल सांख्य के कम से कम
आधे स्थ न जिनके अन्तगित अनुसूधच त ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों और अन्य वपछड़े िगि की
महहल ओां के मलये आरक्षित स्थ नों की सांख्य भी है, महहल ओां के मलये आरक्षित रखे ि एांगे और ऐसे
स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र विहहत रीनत म ग्र म पांच यत म मभन्न- मभन्न ि डों के मलये लौट ननक ल
कर और चक्र नुक्रम से आिांहटत ककये ि सक गे।
(7) ऐसे ि डों को जिनमे अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयों य अन्य वपछड़े िगो की कोई
िनसांख्य नहीां है, उन्ह यथ जस्थनत, अनुसूधचत ि नतयों य अनुसूधचत िनि नतयों य अन्य वपछड़े
िगो के मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय ि एग ।
14. मत देिे तथा अभ्यथी होिे के भलये अहाता - (1) ऐस प्रत्येक ्यजतत, जिसक न म ककसी ग्र म के
मतद त ओां की सूची म सजम्ममलत है, उस पांच यत के जिसके िेत्र म िह ग्र म सम विष्पट है पदध री के
ननि िचन म मत देने के मलये अहहित होग ।
(2) ऐस प्रत्येक ्यजतत िब तक कक िह इस अधधननयम य तत्समय प्रिृत्त ककसी अन्य विधध के अधीन
ननरहहित न हो ककसी (***) पांच यत के पदध री के रूप म (ननि िधचत) ककये ि ने के मलये अहहत होग ।
यहद ककसी न मननदेशन-पत्र म चुन ि धचन् ह न भर गय हो तो इस आध र पर न मननदेशन-पत्र ननरस्त
नहीां ककय ि सकत । ऐसी जस्थनत म उधचत यह होग कक ननि िचन अधधक री अभ् य थी को स्िेच्छ से कोई
धचह आिांहटत कर दे।
15. एक साथ सदस्यता का प्रनतषेि - कोई ्यजतत ककसी पांच यत के पदध री के रूप म ननि िचन के मलये
यथ जस्थनत एक से अधधक ि डों य ननि िधचत िेत्रों से खड़ होने के मलये प त्र नहीां होग ।
16. सहयोजि के भलए सम्भमलि -- (***)
17. सरपंच और उप-सरपंच का निवााचि - (1) प्रत्येक ग्र म पांच यत म एक सरपांच तथ एक उप-सरपांच होग ।
कोई ्यजतत िो -–
(एक) पांच के रूप म ननि िधचत ककये ि ने के मलये अहहत है;
(दो) सांसद के ककसी भी सदन क सदस्य य र य य विध न सभ क सदस्य नहीां है; और
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(तीन) ककसी सहक री सोस इटी क सभ पनत य उप-सभ पनत नहीां है,
उपध र (2), (3) और (4) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, सरपांच के रूप म उन ्यजततयों द्ि र ,
जिनके न म ग्र म पांच यत िेत्र की मतद त सूची म सजम्ममलत हैं, ऐसी रीनत म ननि िधचत ककय
ि एग िो विहहत की ि ए।
(2) (एक) खण्ड के भीतर की ग्र म पांच यतों म अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों के मलये
ग्र म पांच यत के सरपांचों के उतनी सांख्य म स्थ न आरक्षित रखे ि एांगे जिनक अनुप त खण्ड के सरपांचों
की कुल सांख्य के स थ िही होग िो कक अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों की िनसांख्य
क खण्ड की कुल िनसांख्य के स थ है :
परन्तु उस खण्ड क भ ग बन ि ने ि ले अनुसूधचत िेत्रों से मभन्न ककसी ऐसे खण्ड म अनुसूधचत िनि नतयों
के मलये आरक्षित ककये ि ने ि ले ग्र म पांच यत के सरांपच की सांख्य की गणन करने के प्रयोिन के
मलये उस खण्ड के भीतर आने ि ले अन ुसूधचत िेत्रों की कुल िनसांख्य तथ उसम की अनुसूधचत
िनि नतयों की िनसांख्य अपिजिित कर दी ि एगी।
(दो) खण्ड म िह ां अनुसूधचत ि नतयों और अनुसूधचत िनि नतयों की सजम्ममलत िनसांख्य पच स प्रनतशत
से तय है, िह ां खण्ड के भीतर ग्र म पांच यतों म सरपांचों के कुल पदों के पच्चीस प्रनतशत स्थ न अन्य
वपछड़े िगो के मलये आरक्षित ककये ि एांगे।
(3) खण्ड के भीतर सरपांचों की कुल सांख्य के कम से कम आधे स्थ न महहल ओां के मलए आरक्षित रखे
ि एांगे।
(4) इस ध र के अधीन आरक्षित रखे गये स्थ न विहहत प्र धधक री द्ि र खण्ड के भीतर ग्र म पांच यती
मे बबहहत रीनत म चक्र नुक्रम से आिहटत ककये ि एगे :
परन्तु ऐसी ग्र म पांच यत को, जिसमे अनुसूधचत ि नतयों य अनुसूधचत िनि नतयो य अन्य वपछड़े िगि
की िनसांख्य नहीां है, यथ जस्थनत, अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधचत िनि नतयो य अन्य वपछड़े िगि के
मलये आरक्षित स्थ नों के आिांटन से अपिजिित कर हदय ि एग ।
(5) र य य ननि िचन आयोग, पांच यतों के प्रत्येक ननि िचन के पश्च त् ग्र म पांच यतों के उपसरपांच क ननि िचन
तुरन् त ऐसी रीनत म , िैसी कक विहहत की ि ए, करि एग ।
(6) यहद ग्र म पांच यत क सरपांच अनुसूधचत ि नतयों, अनुसूधच त िनि नतयों य अन्य वपछड़े िगो क
नहीां है, तो उप सरपांच ऐसी ि नतयों य ऐसी िनि नतयों य ऐसे िगो के पांचो म से ननि िधचत ककय
ि एग ।
(7) यहद सरपांच य उप-सरपांच सांसद के ककसी भी सदन क सदस्य य र य य बबध न सभ क सदस्य य
ककसी सहक री सोस इटी क सभ पनत य उप-सभ पनत हो ि त है, तो उसके सम्बन्ध मे यह समझ
ि एग कक उसने यथ जस्थनत सरपांच य उप-सरपांच के रूप म अपन पद उस त रीख से ररतत कर हदय
है जिसको कक िह ऐस सदस्य य सभ पनत य उप-सभ पनत हुआ है और यह समझ ि एग कक ऐसे
पद मे ध र 38 के प्रयोिन के मलये आकजस्मक ररजतत हो गई है।
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(8) इस ध र मे अन्तवििष्पट ककसी ब त के होते हुए भी, सरपांच को, इस अधधननयम के समस्त प्रयोिनो
के मलये ग्र म पांच यत क पांच समझ ि एग ।
18. बहहर्ाामी सरपंच (या ग्राम निमााण सभमनत का अध्यक्ष) द्वारा कायािार का सौंपा जािा -- (1) नये ननि िधचत
सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि के ब रे म यह समझ ि येग कक उसने ध र 20 म यथ
उपबांधधत प्रथम सजम्मलन की त रीख से पद क क यिभ र ग्रहण कर मलय है ।
(2) यहद बहहग िमी सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि) अपने कलिे म के कोई क गि पत्र य सांपजत्त
नये ननि िधचत सरांपच (य ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि) को नहीां सौंपत है य सौंपने से इक र करत
है, तो विहहत प्र धधक री मलखखत आदेश द्ि र बहहग िमी सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत के अध्यि]
को ननदेश दे सकेग कक िह एक ऐसे समस्त क गि पत्र और सम्पजत्त, िो ऐसे सरपांच (य ग्र म ननम िण
सममनत के अध्यि की हैमसयत से उसके कल िे म है, यथ जस्थनत, नये सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत
के अध्यि), उप-सरपांच य ग्र म पांच यत के सधचि को तत्क ल सौंप दे।
(3) यहद बहहग िमी सरपांच (य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि उपध र (2) के अधीन ननदेश क अनुप लन
नहीां करत है तो विहहत प्र धधक री उसके विरुद्ध ध र 92 के अनुस र क यिि ही करेग और ध र 98 के
अधीन अमभयोिन आरम्भ करने के मलये आिश्यक क यिि ही करेग ।
(4) ऐस सरपांच य ग्र म ननम िण सममनत क अध्यि, जिसके विरुद्ध उपध र (3) के अधीन क रिि ई की गई
है, और जिसको दोषी प य गय है, दोषी प ये ि ने की त रीख से छ: िषि की क ल िधध के मलये पांच यत
क सदस्य य पदध री होने के मलये ननरहहित होग :
परन्तु र य य सरक र द्ि र लेखबद्ध ककये ि ने ि ले क रणों से ऐसी ननरहित हट ई ि सकेगी य उसकी
क ल िधध म कमी की ि सकेगी।
19. निवााचि की अधिसूचिा - सरपांच, उप-सरपांच और पांचों के प्रत्येक ननि िचन को विहहत प्र धधक री द्ि र
ऐसी रीनत म , िैस कक विहहत ककय ि ए, प्रक मशत ककय ि एग ।
20. प्रथम सभमेलि और पदावधि -- (1) ग्र म पांच यत क प्रथम सम्मेलन ध र 19 के अधीन प्रक शन की
त रीख से 30 हदन के भीतर ककय ि एग । ऐस सम्मेलन विहहत प्र धधक री द्ि र बुल य ि एग और
सम्मेलन के सम्बन्ध म ध र 44 के उपबांध यथ शतय उतत सम्मेलन को ल गू होंगे।
(2) ग्र म पांच यत के पदध री प्रथम सम्मेलन की त रीख से प ाँच िषि के मलये पद ध रण करेगे इससे अधधक
नहीां:
परन्तु इस उपध र म अन्तवििष्पट ककसी ब त के होते हुए भी, ग्र म पांच यत क पदध री होने
ि ल प्रत्येक ्यजतत --
(एक) उस ग्र म पांच यत िेत्र क मतद त न रहने पर; थ ।
(दो) उसके र य य विध न सभ के सदस्य य सांसद के ककसी सदन के सदस्य होने पर, तत्क ल अपने
पद पर नहीां रह ि एग ।
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(3) यहद उपध र (2) मे िखणित क ल िधध क अिस न होने के पूिि, ग्र म पांच यत पुनगिहठत नहीां की ि ती
है तो िह क ल िधध क अिस न हो ि ने पर विघहट त हो ि एगी और ध र 87 के उपबांध उस पांच यत
के सम्बन्ध मExcerpt shown. Open the full act in Lexace.
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